महाघूसकांड (About the Tragic Corruption Case in India - Essay in Hindi) [ Current Affairs ]

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प्रस्तावना -ऐसे तो हमारे भारत में अनेक प्रकार के भ्रष्टाचार व घूसघोरी होती रहती है। पर अब जो 2015 में राजस्थान का यह घूसकांड सामने आया है वह अब तक का सबसे बड़ा महाघूसकांड है। यह महाघूसकांड कोई साधारण नहीं बल्कि खदानों का घूसकांड हैं। इसमें नीचे से ऊपर तक सब अफसर लोग मिले हुए हैं। इस मामले में खान विभाग में 2.55 करोड़ के घूस के मामले में एसीबी ने आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया था।

आदेश: - खान विभाग में सालभर से हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा नहीं होता तो एक माह बाद फिर बड़े स्तर पर खानों की आवंटन की तैयारी थी। यह सब जल्दी आने वाली प्रदेश की नई खनन नीति के लागू होने के बाद होता। इसके के आदेश सिंघवी ने 2008 में जारी किया। टीएसपी में उपरोक्त रोक हटने का 5 फरवरी 2008 को शासन सचिव रहे अशोक सिंघवी ने आदेश जारी किया और विभाग के पूर्व के सभी आदेशों में लगाए प्रतिबंध प्रत्याहारित किए। इसके साथ ही आदेश के अगले 30 दिनों में प्रधान और अप्रधान खनिजों के पूर्वक्षण अनुज्ञापत्र और खनन पट्टा अनुदान देने के लिए आवेदन मांग लिए। केन्द्र अघ्यादेश जारी कर रहा था, तब राजस्थान में खान आवंटन हो रहा था।

तलाशी : - जब मुख्य आरोपियों के मकान की तलाशी हुई तब सिंघवी के मकान से 30 - 35 किलो चांदी, 25 तोला सोना, 2.5 लाख रुपए बरामद हुए। इसी प्रकार पंकज गहलोत के मकान से 19 तोला सोना, 4.75 किलो चांदी तथा तीन प्रॉपटी के कागजात मिले। ठीक इसी प्रकार अगला आरोपी पुष्करराज आमेटा के घर से 900 ग्राम सोना, 5 किलो चांदी, पांच प्रॉपटी दस्तावेज बरामद हुए।

हवाला : - खान विभाग के महाघूसकांड में गिरफ्तार प्रमुख शासन सचिव व आईएएएस अशोक सिंघवी को घूस में से एक करोड़ रुपए हवाला के माध्यम से मिलने वाले थे। यह बात एसीबी की गिरफ्त में आए हवाला कारोबारी धीरेन्द्र सिंह उर्फ चिंटू ने यह बात बताई।

  • खुद खान राज्य मंत्री राजकुमार रिणवा ही विभाग के प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी के सामने बेबस थे। रिणवा ने कहा कि सिंघवी उनकी सुनते ही नहीं थे। कई महत्तवपूर्ण फाइलें मुझ तक भेजी ही नहीं जाती थी।
  • एसीबी ने यदि खान विभाग में महाघूसकांड का खुलासा नहीं किया होता तो भीलवाड़ा जिले की तीन और बड़ी कंपनियां खान सचिव अशोक सिंघवी के निशाने पर थी।

गलत रिपोर्ट: - सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश है कि अरावली पर्वत श्रृंखला में खदानों का आवंटन नहीं किया जाए। लेकिन, इसकी अवहेलना कर सलूम्बर में गलत रिपोर्ट बनाई गई। खान विभाग में तब भी प्रमुख शासन सचिव सिंघवी थे। तत्कालीन खान निदेशक ने सिंघवी को रिपोर्ट भेजी थी कि मोरिला में आरके समूह के पक्ष में मार्बल खदानें आवंटित कराने के लिए खनन क्षेत्र को अरावली से बाहर बता कर गलत रिपोर्ट बनाई है। संबंधित कमेटी के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन, कमेटी के अधिकारियों का सिंघवी ने एक आँच तक आने नहीं दी। इन अधिकारियों में पंकज गहलोत भी शामिल था, जिसे एसीबी ने हाल में सिंघवी के साथ महाघूसकांड में दबोचा है।

जिम्मेदारी: - खान विभाग का संचालन प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी के चहेतों के हाथों में था। यही कारण है कि विभाग में सेवानिवृत बाबू को भी बड़ी जिम्मेदारी दे दी गई। विभागीय सेवा से मुक्त हो चुके बाबू को सिंघवी ने विभाग की कमान संभालने के साथ ही काम पर रख लिया था, लेकिन यह बाबू विभागीय अन्य कर्मचारियों में चर्चा में इसलिए थे कि इनके पास बड़े-बड़े खानों के आंवटन के मामले थे। नीतिगत निर्णयों से लेकर किसी खान के खिलाफ कार्रवाई करने या फिर कानूनी दांवपेच में उनसे ही पूछा जाता था।

राजस्थान पत्रिका: - खान विभाग में हो रहे घोटालो का ‘राजस्थान पत्रिका- में खुलासा होने पर लोकायुक्त सचिवालय ने खबरों का हवाला देते हुए खानों के आवंटन की जानकारी मांगी, लेकिन रसुखात के चलते विभागीय अधिकरियों ने लोकायुक्त सचिवालय को गलत जानकारी दे दी। अतिरिक्त निदेशक (खनन) पंकज गहलोत के प्रमुख शासन सचिव अशोक सिंघवी को लिखे पत्र से यह खुलासा हुआ है। पत्रिका ने 13, 14, 16, व 17 मार्च 2015 प्रकाशित खबरों का जिक्र कर लोकायुक्त सचिवालय ने खान विभाग से जानकारी मांगी थी। इसमें यह भी पूछा गया था कि दिसंबर 2014 से 12 जनवरी 2015 तक कितने एम. एल. , पी. एल. और आर. पी. जारी किए गए। खान विभाग के संयुक्त शासन सचिव की ओर से भेजे गए जबाव में बताया गया था कि 4 एम. एल. और 35 पी. एल. जारी हुए हैं, जबकि विभाग हकीकत में करीब 647 पीएल व एमएल जारी कर चुका था।

दिनेश एम. एन. : - खनिज विभाग के अधिकारी हो या फिर खान मालिक, सबसे दलाल संजय सेठी का संपर्क था। किसी भी मामले में बात करनी हो तो संजय सेठी से मिलते थे। दो माह पहले यह सूचना एसीबी आईजी दिनेश एम. एन तक पहुँची। तभी से दिनेश एम. एन ने सेठी पर निगरानी रखना शुरू कर दिया था और रिश्वत के बड़े खेल तक पहुँची। उदयपुर पहुंच इस टीम ने खान विभाग की कार्रवाई की जिसमें इनके नाम निम्न है-

  • एएसपी: शंकर दत्त शर्मा और योगेश दाधीच
  • डिप्टी एसपी: बलराम सिंह
  • निरीक्षक: वीरेन्द्र सिंह, रायसल सिंह, भारत सिंह
  • कांस्टेबल: भवानी सिंह, राजेश, रमेश शिवराज, उदयभान, रामजीलाल, बाबूलाल।

टीएसपी: -ख् ाान के इस कांड में फंसे सबसे बड़े अधिकारी अशोक सिंघवी का जनजाति उपयोजना क्षेत्र (टीएसपी) में खनन प्रतिबंध के नाम पर चले खेल से भी गहरा नाता रहा है। वर्ष 2008 में टीएसपी के नाम पर चली लूट में खान निदेशालय के अफसरों से लेकर ऊपर तक जमकर बड़ी कंपनियों को मार्बल खदानें लुटाई गई और आदिवासी उत्थान के नाम पर खनन नीतियों में फेरबदल कर पूरे प्रदेश को अंधेरे में रखा जाता रहा। वहाँ पर वर्ष 2000 से सुप्रीम कोर्ट से स्टे लगा है।

उपरोक्त अवधि में कंपनियों के कूद जाने के बाद सरकार ने 3 जुलाई 2009 को टीएसपी का पुराना प्रतिबंध फिर लागू कर दिया। इससे खनन के इच्छुक अन्य आवेदकों की फाइलें ही नहीं चल सकीं और जिन बड़ी कंपनियों को लाभ देने थे, उनकी फाइले तेजी से आगे बढ़ाकर आदिवासी इलाके का खनन क्षेत्र उनके हवाले कर दिया गया।

पूर्व में 3 जुलाई 2009 को टीएसपी में खनन की लगाई रोक को नई सरकार में खान विभाग में फिर कदम रखते हुए प्रमुख शासन सचिव अशोक सिंघवी ने 1 अप्रेल 2015 को हटाने के आदेश जारी कर दिए। लेकिन टीएसपी में खनन कराने की इस बार भी कोई ठोस नीति नहीं बना सके। इस रोक को हटाने के साथ ही 10 मार्च 2010 को आरएसएमएमएल के जारी किए गए आदेश भी हटा दिए गए।

नाम पता: -घ् ाूसकांड मामले में रिमांड पर चल रहे आरोपित जयपुर निवासी डॉ. अशोक पुत्र एएम सिंघावी सिरोही हाल गोवर्द्धनविलास, निवासी पंकज गहलोत न्यू अशोक विहार खाराकुआं, निवासी पुष्करराज आमेटा दिल्ली हाल पंचरत्न कॉम्पलेक्स, निवासर संजय सेठी व सावा चित्तौड़गढ़ निवासी मोहम्मद रशीद पुत्र अकबर से एसीबी आईजी दिनेश एमएन व उनकी टीम ने अंतिम पूछताछ की। ब्यूरो ने अब तक रिकॉडिंग का सारा निचोड़ निकालकर एक-एक बात की तफ्तीश की।

उल्लेखनीय है कि इन पाँचों आरोपितों को एसीबी ने सात दिन पूर्व सावा निवासी मोहम्मद शेर खां, भूपालपुरा निवासी श्यामसुन्दर सिंघवी व अलका माता रोड निवासी धीरेन्द्र सिंह उर्फ चिन्टू राजपूत के साथ 2.55 करोड़ की घूसकांड में पकड़ा था। तीनों आरोपित अभी न्यायिक अभिरक्षा में है। एसीबी अधिकारियों ने बताया कि सभी आरोपितो के विरुद्ध उदयपुर एसीबी न्यायालय में ही कार्रवाई की जाएगी और यहीं पर उनके विरुद्ध चार्जशीट पेश होगी।

हालत खराब: - खान विभाग के इस कांड प्रकरण में उदयपुर के केन्द्रीय कारागृह में न्यायिक अभिरक्षा में चले रहे खान उद्यमी शेर खान व चार्टर्ड अकाउंटेंट श्यामसुंदर सिंघवी की बुधवार को जेल में उच्च रक्तचाप के बाद तबीयत बिगड़ी गई।

वीआईपी: - जेल में टीबी और दूसरी बीमारियों के संक्रमण से घबराए जेल प्रशासन ने वीवीआईपी मेहमानों को स्पेशल ट्रीटमेंट दे रहा है। सिंघवी को वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग रूम में इसलिए रखा गया है, क्योंकि वहाँ सारी व्यवस्थाएँ अच्छी हैं। जो बड़े-बड़े अधिकारियों की गाड़ियाँ जेल के अंदर तक नहीं जाती हैं आज इन आरोपियों को बड़े शान से गाड़ियों में बिठाकर जेल के बिलकुल अंदर मेहमानों के जैसे ले जा रहे हैं। फिर भी कुछ अवसर इस बात को झुटला रहे हैं। आरोपी होने के बाद भी उनके साथ जेल में अधिकारी लोग अच्छे से पेश आ रहे है। यह बात बहुत गलत हैं।

भ्रष्टाचार: - तफ्तीश में सामने आया कि आरोपियों ने उनके भ्रष्टाचार को शिष्टाचार का नाम दे दिया था। घूस की बातें भी कोड वड्र्स में शिष्टाचार से होती थीं। माफियाओं की तरह की इन आरोपितों ने एक लाख रुपए को कोड वड्र्स में बोलते थे। माफिया एक लाख रुपए को एक पेटी बोलते हैं तो इन आरोपितों ने एक लाख रुपए को एक किलो नाम दे दिया था। राशि को गुलाब के फूल बोलते थे। ऐसे में शिष्टाचार में आरोपियों के घर एक किलो से लेकर सौ किलो गुलाब के फूल पहुँचाते जाते थे और तब आगे की डील होती थी।

सच: -ख् ाान आवंटन में ढाई करोड़ रुपए के घूसकांड के अंदर का सच अब बाहर आ रहा है। इसके सभी किरदार पैसा, रसूख, लालच, दलाली के आसपास ही केद्रिंत हैं। कोर्ड वर्ड हैं, रिश्वत शिष्टाचार कैसे लगे इसका भी पूरा इंतजाम है। घूसकांड के सबसे अहम सिरे पर प्रमुख सचिव खान अशोक सिंघवी गिरफ्तार हैं, जबकि दूसरे छोर पर दलाल, छोटे-बड़े अधिकारी और सरकारी सिस्टम है। भास्कर के पास घूसकांड की पूरी स्क्रिप्ट है इसमें सामने आया है कि सिंघवी से दलाल संजय सेठी और अतिनिदेशक पंकज गहलोत बेईमानी करते थे। सौदा 2.55 करोड़ में हुआ, लेकिन बताया सिर्फ सवा करोड़ का।

जाँच: - अजमेर में ट्रेप हुए एसपी, एएसपी मामले से इस केस के तुलनात्मक सवाल पर एसीबी अफसर ने कहा कि एविडेंस इतने स्ट्रॉन्ग होंगे कि केस मजबूत बनेगा। केस की चुनौतियों के बावजूद एसीबी अफसरों ने दावा किया है कि वे जाँच इस स्तर पर कर रहे है कि डेढ़ महीने में चार्जशीट भी पेश करने की स्थिति में होंगे। आईजी दिनेश एमएन के निर्देशन में 7 एएसपी, 6 डीएसपी, 8 इंस्पेक्टर और 22 पुलिसकर्मियों की टीम दिन-रात साक्ष्य जुटाने में लगी है।

मुख्य आरोपी: -ढ ाई करोड़ की घूसकांड के पाँचों मुख्य अभियुक्तों को भ्रष्टाचार निवारण मामलों के सेशन जज अजीत कुमार हिंगड़ ने पुलिस कस्टडी रिमांड से न्यायिक हिरासत में सेंट्रल जेल भेजने के आदेश दिए। इनमें मुख्य आरोपी है डॉ. अशोक सिंघवी, एडी पंकज गहलोत, एसई पी. आर. आमेटा, माइनिंग व्यवसायी संजय सेठी व कैरियर मोहम्मद रशीद खान है।

उपंसहार: - आज भ्रष्टाचार देश के हर कोने में हो रहा है इसके लिए स्वयं हम ही जिम्मेदार है। क्योंकि हम लो ही इसे बढ़ावा देते हैं। भ्रष्टाचार होने के कारण जो दोषी नहीं है वह भी इसकी चपेट में आ जाता है। आज पूरे राजस्थान में अभी जो नया घूसकांड आया है उसी की ही चर्चा हर जगह हो रही है। अगर इस कांड की पहले ही जांच अच्छी तरह होती तो यह घूसकांड महाघूसकांड नहीं बनता हैं। इस महाघूसकांड में आगे ओर कौन-कौन सी बात सामने आती है अर्थात कौन सही में दोषी है कौन निर्दोष है यह आगे सही रूप से जांच होने पर ही पता पड़ेगा। यह सब कार्य तो आने वाला समय ही बताएगा।

- Published on: October 8, 2015