नरेन्द्र मोदी रिपोर्ट 2014 से 2015 (Achievements of Narendra Modi Government in One Year-in Hindi) [ Current Affairs ]

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प्रस्तावना:- यह रिपोर्ट 2014 से 2015 की है जिसमें नरेन्द्र मोदी जी के कार्य को बताया गया है कि इन एक वर्ष में उन्होंने देश के विकास के लिए क्या-क्या किया है। ’अच्छे दिन आने वाले है’ के नारे को लेकर केंद्र की सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ आई नरेन्द्र मोदी की सरकार 26 मई 2015 को एक साल पूरा करने जा रही है। इस एक साल में अच्छे दिन आए या नहींं, इस पर अलग अलग राय हो सकती है। सत्ता में आने से पहले मोदी और भारतीय जनता पार्टी ने जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे। जैसे मंहगाई घटाने, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने, विदेशों में जमा काला धन लाने, दूसरे देशों से संबंध सुधारने, आंतरिक सुरक्षा में सुधार आदि। वादे बेशक पांच साल के लिए किए हों लेकिन पिछले 365 दिनों में अलग-अलग मोर्चो पर सरकार कितना काम कर पाई। उसी की रिपोर्ट यहां पर है।

मोदी जी का कहना है कि ’जनता जो दायित्व देगी, उसे पूरा करने में कमी नहीं रखूंगा। अपने लिए कुछ नहीं करुंगा और बद-इरादे से कोई काम नहीं करूंगा।

चुनाव नतीजों के बाद 20 मई 2014 को क्या थी देश की आर्थिक स्थिति और वर्तमान में आया कितना बदलाव।

Inflation in India - Past and Now

Changes in the rate of commodities in India in Last one Year

तब

तब

अब

महंगाई

4.87

8.28

पेट्रोल

72.14/ली.

74.9/ली.

डीजल

57.55/ली.

59.42/ली.

सोना

27,261/10 ग्राम

28,168/10 ग्राम

चांदी

39,265/किग्रा

41,007/किग्रा

सेंसेक्स

27645.53

24376.88

डॉलर

63.76 रु./डॉलर

58.58 रु./डॉलर

1 महंगाई:-

  • कहा क्या- यूपीए राज में आम आदमी पर मंहगाई के वार को लेकर कांग्रेस की जमकर आलोचना की। अपने भाषणों, सम्बधनों में मोदी ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से आहत आम आदमी देने को राहत देने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कीमत कम करने की गुजारिश भी की। लोकसभा में मंहगाई को चुनावी मुद्दा भी बनाया। लेकिन हुआ क्या।
  • हुआ क्या -सत्ता संभालते ही अंतराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में लगातार कमी आती गई। लोगों को थोड़ी राहत मिली। मुद्रास्फीति काफी कम हुई। पर खाद्य मुद्रास्फीति से लोग परेशान है। मंहगाई रोकने के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष का काम अभी लंबित है। इसी बीच पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ गए है। इसी कारण अच्छे दिनों की उम्मीद फिर धरी रह गई है।
  • अर्थशास्त्री अभिजीत सेन के अनुसार ’ इसमें कोई दोराय नहीं है कि मोदी सरकार के पहले साल में मुद्रास्फीति की दर काफी कम हो गई है। इसकी बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम कम होना रहा है। आगे मुद्रास्फीति कितनी कम होगी यह भी आंशिक तौर पर कच्चे तेल के दामों पर निर्भर करेगा। साथ ही खेती पर भी काफी कुछ निर्भर करता है। पर तेल समेत अन्य कमोडिटी के भी दाम तेजी से नीचे आने के कारण ही मुद्रास्फीति में कमी देखी गई है। पर यह सिलसिला जारी रहेगा, इसमें शंकाएं हैं।

2 भ्रष्टाचार:-

  • कहा क्या- मेरे लिए न कोई आगे, न कोई पीछे। किसके लिए भ्रष्टाचार करुंगा?…. ’कांग्रेस का भ्रष्टाचार खत्म करने कोई इरादा ही नहीं है।’ कुछ इस तरह की बातें मोदी जी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले की थीं। भ्रष्टाचार मुक्त सिस्टम तैयार करने, सरकारी कार्यों की प्रक्रियाओं के सरलीकरण और ई-गवर्नेस पर जोर दिया था।
  • हुआ क्या -पिछले कुछ वर्षों की तुलना में देखें तो कारेबारी और राजनीतिक स्तर पर भ्रष्टाचार में कमी आई है। साल भर में कोई घोटाला भी सामने नहीं आया है। उन्होंने ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कही थी पर अभी यह सुधार उच्च स्तर पर ही दिखाई देता है। निम्न स्तर पर सिस्टम में व्याप्त घुसखोरी से जनता अभी भी त्रस्त है।
  • पूर्व सूचना आयुक्त एम.एन अंसारी के अनुसार यूपीए सरकार के आखिरी वर्षों मे भ्रष्टाचार के जितने मामले सामने आए थे, उनमें इस सरकार के पहले साल में जाहिर तौर पर कमी आई है। लेकिन इसमें कोई संतोष वाली बात नहीं है। आरटीआई के माध्यम से भी कई घोटाले सामने आए है लेकिन अब इसका भी सही रूप से जवाब नहीं आता है। इसी कारण से अभी पूर्ण रूप से भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ है।

3 निवेश:-

  • कहा क्या- विदेशी और देश के निवेशको के लिए नीतियों का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा मल्टी ब्रांड खुदरा निवेश में विदेशी निवेश का विरोध करेंगे। नौकरी और पूंजी निर्माण के क्षेत्र में ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी जाएगी। लघु उद्योगोंं और उसके कर्मचारियों के लिए विदेशी निवेश संवर्धन की कार्यप्रणाली प्रभावी और निवेशकों की सहायक होगी। सभी राज्यों की चिंता को निवारण करते हुए उन्हें जीएसटी अपनाने के लिए तैयार किया जाएगा। शोध और विकास के लिए किए जाने वाले निवेश पर कर प्रोत्साहन मिलेगा।
  • हुआ क्या -जीएसटी बिल लोकसभा से तो पारित हो गया है, पर अभी राज्यसभा में पारित हाने में बाधाएं हैं। वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान एफडीआई 11 महीनों में 39 फीसदी बढ़कर 28.81 अरब डॉलर हो गया। बीमा में एफडीआई सीमा बढ़ाकर 49 फीसदी की गई। मल्टी ब्रांड खुदरा निवेश में यूपीए सरकार का विरोध करती रही भाजपा ने 51 फीसदी एफडीआई को ही मान लिया। जीडीपी विकास दर 2014 की चौथी तिमाही में सुधरकर 7.5 फीसदी हो गई। विदेशी निवेशक पहले की तुलना में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे है।
  • मौद्रिक नीति के मोर्चे पर बेहतर पहल ’मौद्रिक नीति ढांचा समझौता’ के रूप में रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन और वित्त सचिव राजीव महर्षि के बीच हुई है, जिससे 1934 में स्थापना के बाद पहली बार रिजर्व बैंक को स्पष्ट लक्ष्य मिला है। विख्यात अर्थशास्त्री अरविंद विरमानी के अनुसार वर्ष 2013 में अर्थव्यवस्था पर छाए परेशानी के बादल और निवेशकों में छाई निराशा दूर करने में वर्तमान सरकार बेहद कामयाब रही है। शेयर बाजार में भी 12 महीनों के दौरान सुधार दर्ज किया गया है। यदि नकारात्मक पक्ष देखें तो शेयर बाजार ने हालांकि अब तक जितनी तेजी अपेक्षित थी, वैसी प्रतिक्रिया नहीं दी है। कॉर्पोरेश निवेश के आंकड़े और पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन के मामले में भी बहुत तेजी नहीं दिखाई दी है। इसके बावजूद बाजार में निराशा का माहौल ऐसा हो ऐसा भी नहीं कहा जा सकता है।

3 रोजगार:-

  • कहा क्या- देश की 35 साल से कम 65 फीसदी युवा शक्ति का बार बार बखान किया। कांग्रेस राज में बेरोजगारी बढ़ने की बात की। घर में रोजगार सृजन, घरेलू उद्योगों को बढ़वा, हर हाथ को काम और युवाओं के कौशल विकास की बात प्रमुखता से उठाते रहे। साथ ही महिलाओं को रोजगार देकर उनके सशक्तीकरण की पैरवी करते रहे।
  • हुआ क्या -मेक इन इंडिया जैसे अभियानों से देश में उद्योगों कां बढ़वा देने का माहौल बनाया गया। राज्यों में युवाओं के कौशल विकास की दिशा में शरुआत। उद्योग और निवेश को लेकर मोदी खुद सक्रिय दिख रही है। फिलहाल ज्यादा नतीजे सामने नहीं आए है, मगर प्रयास सकारात्मक दिशा में है। हालांकि युवाओं को कोई खास रोजगार अब तक नहीं मिले हैं।
  • कॉर्पोरेट सलाहकार टी. मोहनदास पाई के अनुसार रोजगार के बारे में पिछले एक साल में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। पर अभी आर्थिक क्षेत्र में सरकार दव्ारा जो प्रयास किए जा रहे हैं, उनसे उम्मीद है कि आगामी साल में रोजगारों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। आने वाले समय में भी काफी नौकरियां आने की सम्भावनाएं हैं। इसमें मेक इंडिया कार्यक्रम शुरू हुआ है। हालांकि परिणाम अभी सामने नहीं आया है।

4 शिक्षा:-

  • कहा क्या- शिक्षा ऐसी होनी चाहिए कि युवाओं की रोजगार उपादेयता बढ़े। घोषणा पत्र में कहा गया था कि शिक्षा राष्ट्र की समृद्धि और गरीबी से लड़ने का सबसे सशक्त साधन है। शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए कि आगामी पीढ़ी अपनी संस्कृति, अतीत और विरासत के प्रति महसूस करें।
  • हुआ क्या- शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की अलग सोच और बदलाव का रोडमैप अब तक साफ नहीं हो पाया है।
  • मानव संसाधन मंत्रालय ने 43 बिंदुओं को जन विमर्श के लिए पेश किया है। पहला प्रश्न तो यही उठता है कि ये 43 बिंदु ही क्यों? शिक्षा का मंच तो खुली सोच का मंच होना चाहिए। सोच केवल संस्थाओं को बदलने और उनमें पदाधिकारियों को बदलने तक ही सीमित है। सरकार इनकी स्वायत्तता के प्रति संवेदनशील नहीं है।

5 महिलाएं:-

  • कहा क्या - भाजपा के घोषणापत्र में कहा गया था कि महिलाओं के लिए विधायिका में 33 प्रतिशत आरक्षण विधेयक को पारित कराया जाएगा। युवाओं के लिए राष्ट्रीय परामर्श परिषद की स्थापना की जाएगी।
  • हुआ क्या - अभी तक दोनों ही मोर्चों पर कोई खास प्रगति देखने को नहीं मिली।

6 सुरक्षा:-

  • कहा क्या- नक्सलवाद शब्द का प्रयोग गलत है इसको माओवाद कहा जाना चाहिए। माओवाद और आतंकवाद भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरा हैं। इन समस्याओं के प्रति जीरो टॉलरेंस अपनाना होगा। इन समस्याओं का जो भी कारण हो, पर इनसे निपटने में हमारी तैयारी में किसी भी प्रकार की कमी नहीं दिखनी चाहिए।
  • हुआ क्या -यद्यपि बड़ी आतंकी वारदात को रोकने में सरकार को सफलता मिली है पर माओवाद की समस्या से अब तक जस की तस ही है। पुलिस सुधार और आधुनिकरण की सिर्फ बातें ही हो रही हैं। अपराध की दर में गिरावट के भी कोई संकेत अब तक नहीं है। महिलाओं के प्रति अपराध तो बढ़े ही हैं। अनर्गल बयानों से अल्पसंख्यकों में भी सुरक्षा के प्रति चिंता है।
  • पूर्व डीजीपी, उ. प्रदेश के प्रकाश सिंह के अनुसार कहा है कि मोदी ने स्मार्ट पुलिस की बात की है एसएमएआरटी का आशय बताया सेंसेटिव, मॉडर्न एंड मोबाइल, अलर्ट एंड एकाउंटेबल ,रिलायेबल एंड रिस्पॉन्सिबल, टेक्नोसेवी तथा ट्रेन्ड। यद्यपि पुलिस संवेदनशील और जवाबदेह तब तक नहीं हो सकती जब तक कि उसे राजनीतिक नियंत्रण से मुक्त नहीं किया गया। नक्सलवादी से निपटने की दिशा में नई नीति पर काम हो रहा है, पर अभी यह भविष्य में है। मोदी जी को सबसे बड़ा ध्यान हर आतंकवाद को खत्म करने पर ही लगाना होगा। लेकिन मेक इन इंडिया इनके चलते फलीभ्तू नहीं हो पाएगा।

7 कालाधन:-

  • कहा क्या -चुनाव के समय रैलियों में कहा था, ’अगर दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है तो मैं देश का काला धन वापस लाने का वादा करता हूं। और इसे जनकल्याण योजनाओं के लिए खर्च किया जाएगा।’ राजनाथ सिंह ने कहा था कि विदेशों में जमा कालाधन 100 दिन में वापस लाया जाएगा।
  • हुआ क्या -अपने ही वादे में घिर गई सरकार। कालेधन को लेकर एसआईटी गठित की, 100 दिन होते ही सरकार से सीधे पूछा कहां है कालाधन। कालाधन धारकाेें के नाम बताने में आनाकानी करने से भी हुई किरकिरी। रही सही कसर भाजपाध्याक्ष ने यह कहकर पूरी कर दी कि सौ दिन वाली बात तो जुमला थी।
  • जेएनयू, नई दिल्ली प्रो. अरुण कुमार के अनुसार काला धन वापस लाने पर जो कदम उठाए जा सकते थे, वो नहीं उठाए गए। एसआईटी गठित की गई पर उसने कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की। 627 नाम सामने आए। कहा गया कि अभी तो एक फीसदी के नाम आए है। बाकी 99 फीसदी के बारे में कोई बात सामने नहीं आई। कई निजी अंतरराष्टीय बैंक जो काला धन रखने का काम करते रहे हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई। काला धन पर जो विधेयक आया है कि उसमें आरोपी को पकड़ने और सजा देने की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है।

8 कानून:-

  • कहा क्या- माेेदी के चुनाव अभियान का प्रमुख नारा था-न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन। साथ ही अनुप्रयोगी हो चुके कानूनों और संबंधित प्रक्रियाओं और प्रशासनिक ढांचे को खत्म करने की जरूरत भी बताई गई। कहा गया कि प्रतिदिन एक कानून खत्म किया जाए तो एक अच्छी उपलब्धि होगी। सरकार ने 100 कानून खत्म करने का मिशन भी अपने हाथ में लिया।
  • किया क्या- सरकारी आवेदन, फार्म तथा दस्तावेजों के लिए राजपत्रित अधिकारी दव्ारा सत्यापन को खत्म किया गया। मई 2015 में लोकसभा से 36 अनुपयोगी हो चुकी कानूनों को खत्म करने वाला विधेयक पारित भी हुआ, पर राज्यसभा में किए गए कुछ तकनीकी संशोधनों की वजह से इसको पुन: लोकसभा से पारित किया जाना होगा।
  • मोदी जी ने जो बात कानून के संबंध में कही है कि हर रोज एक कानून खत्म करना चाहते हैं वैसा तो कुछ नहीं हुआ। उल्टे सरकार काले धन के मुद्दे पर कानूनी बदलाव कर रही है, इससे कानून की जटिलताएं ओर बढ़ गई है। तीन राज्यों में श्रम कानूनों में भी सुधार हुआ है, इनमें राजस्थान, मध्यप्रदेश व हरियाणा है। बाकी राज्यों में भी यह होना चाहिए।

9 गंगा:-

  • कहा क्या -पार्टी प्राथमिकता के आधार पर गंगा की स्वच्छता, शुचिता और अविरल प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए वचनबद्ध है। मोदी ने कहा कि मुझे यहां गंगा ने बुलाया है। वे गंगा की सेवा के अवसर को चुन रहे हैं।
  • हुआ क्या- मोदी जी ने गंगा सफाई का जिम्मा उमा भारती को सौंपा और ’नमामि गंगे’ अभियान की शुरूआत की। बजट में इसके 2000 करोड़ की घोषणा भी गई। केंद्र सरकार की ओर से गंगा की सफाई के लिए तीन चरण की योजना तैयार की गई है। कुल 18 वर्षों की इस योजना पर 51 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं।
  • मोदी ने जो गंगा की सफाई को लेकर जो कदम उठाए है, वे विश्वास करने योग्य नहीं लग रहे हैं। अभी गंगा के बारे केवल बातें ही हुई हैं लेकिन समग्र योजना किसी ने नहीं बनाई है। क्योंकि जिस तरह से उन्होंने गुजरात के पर्यावरण को बर्बाद किया है, वेसे ही वे गंगा के आसपास के वातावरण को बर्बाद करेंगे। एक साल में कोई पैसा खर्च नहीं हुआ है। पिछले पैसे सरकार को चुकाने है और उसके पास पैसा ही नहीं है। फिलहाल केवल जुबानी बातें हो रही हैं कि पांच साल में यह कर देंगे लेकिन बचे चार साल ही है।

10 केंद्र व राज्य:-

  • कहा क्या -अ

    - Published on: July 23, 2015