सनसनीखेज अपराध (Essay in Hindi - Indrani Mukherjee - Culprits and the Case) [ Current Affairs ]

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प्रस्तावना: - वेसे तो आए दिन हमारे देश में कोई न कोई अपराध होते है रहते है लेकिन कुछ अपराध ऐसे होते है जो बहुत ही अधिक खतरनाक होते हैं। उनमें से ही एक है शीना-बोरा-ईद्राणी मुखर्जी का केस है। जिसकी बहुत ही दर्द नाक कहानी हैं। शीना की बढ़े ही खतरनाक ढंग से हत्या हुई है। जिसका सच सबके सामने आना बहुत जरूरी हैं। यह हत्या भी केवल संपति के लिए हुई है।

इंद्राणी: - यह कहानी ऐसी महिला कि जिसने अपनी सौतेली बेटी की बढ़ी निमिर्मता से हत्या कर दी। इसके दो पति है व एक साथ लिव इन रहती थी। पहले पति का नाम संजीव खन्ना है। जिसकी विधि नामक एक बच्ची हैं। लिव इन वाले का नाम सिद्धार्थ दास है जिससे उसकी शीना व मिखाइल दो बच्चे है। तीसरे व अंतिम पति का नाम पीटर मुखर्जी है। जिसका बेटा राहूल है।

फोन: - इंद्राणी मुखर्जी पिछले एक साल से शीना के फोन का इस्तेमाल कर रही थी। इंद्राणी ने ही शीना के नाम से फर्जी पत्र भी लिखे। साथ ही ईद्राणी ने शीना का फर्जी इस्तीफा भी उसकी कंपनी में भेजा था। इंद्राणी ने शीना के दस्तखत के लिए उसे स्टाफर पर दवाब भी बनाया व उसे डराया, धमकाया भी था।

कलकोत्ता: - इंद्राणी मुखर्जी उर्फ परी के पहले प्रेमी सिद्धार्थ दास कोलकाता के दमदम इलाके में सामने आए। उन्होंने स्वीकार किया है कि शीना उनकी ही बेटी थी और मिखाइल उनकी दूसरी संतान है। हालाकि उन्होंने शादी के बात से इनकार करते हुए कहा कि उनकी इंद्राणी से मुलाकात 1986 में शिलांग में दोस्तों के माध्यम से हुई। उसके बाद में वे लिव इन में तीन साल तक रहे। उन्होंने शीना के हत्यारों को फांसी की सजा देने की मांग की और कहा कि वे डीएनए जाच कराने को तैयार हैं। उन्होंने इंद्राणी को महत्वाकांक्षी महिला बताया और कहा कि कम पैसे कमाने के कारण ही वह उन्हें छोड़ कर चली गई।

सिद्धार्थ ने बताया कि एक साथ रहने के एक साल बाद 1987 में शीना, फिर मिखाइल का जन्म हुआ। वर्ष 1986 से 89 तक एक साथ रहने के बाद इंद्राणी इसलिए छोड़ कर चली गई, क्योंकि मैं अमीर नहीं हूं। उसके जाने के बाद पिछले 25 साल से उनका इंद्राणी से कोई संपर्क नहीं है। बीच में वे अपने बच्चों से मिलने के लिए 1 - 2 बार असम के सुन्दरपुर स्थित इंद्राणी के पिता उपेन्द्र बोरा के घर गए, लेकिन इंद्राणी के मां-बाप नहीं चाहते थे कि मैं उसे संपर्क रखूं। इसलिए उन्होंने वहां जाना बंद कर दिया, लेकिन शीना उन्हें पिता मानती थी और वह अपने पिता से फोन पर संपर्क भी करती थी पर मिखाइल ने कभी इंद्राणी से या फिर शीना से कभी संपर्क नहीं किया। सिद्धार्थ दास वर्तमान में अपनी पत्नी बबली दास और बेटे मिखाइल के साथ कोलकाता के दमदम इलाके में रह रहे हैं।

पीटर का बयान: - पुलिस ने जब इंद्राणी के लास्ट पति से पूछताछ की तो पीटर ने बताया कि इंद्राणी ने मुझसे कहा कि शीना मेरी शाली है जबकि वह सौतेली बेटी थी। लेकिन इस बारे में इंद्राणी मुझे बार-बार विश्वास दिलाती रही कि मुझ पर विश्वास करो। शादी के समय इंद्राणी ने पहले की शादियों और बच्चों के बारे में बताया कि उसने एक शादी और एक बेटी विधि के बारे में बताया था। विधि को मेने अपना भी लिया था। इंद्राणी ने जब मुझे यह बताया कि शीना अमेरिका चली गई तो मेने कारण इसलिए नहीं पूछा कि शीना से ज्यादा ताल्लुक मेरा नहीं था। वो अलग रहती थी व मेरे बेटे राहुल के कारण अनबन बढ़ गई थी। जब मेरे बेटे राहूल के पास शीना का पासपोर्ट मिला तो मैंने इंद्राणी से पूछा था मगर उसने कहा कि शीना के पास मल्टीपल पासपोर्ट है। वह अपने पूर्व पति संजीव के संपर्क में है इसका मुझे पता नहीं।

राज: -श् ाीना हत्याकांड में पहली बार शीना के हवाले से कई राज सामने आ रहे हैं। वह 2003 से डायरी लिखती थी। इसमें मां इंद्राणी के प्रति प्यार और नफरत है तो पिता सिद्धार्थ से उम्मीदें और उलाहना भी। डायरी के पन्नों से पता चला है कि वह कई बातों से चिंतित थी। शीना एक जगह लिखती है कि ‘मुझे नहीं पता कि मां मुझे याद करती है या नहीं। लेकिन वह मेरी मां हैं और मैं उन्हें चाहती हूं।’ डायरी में आईएनएक्स मीडिया लॉन्चिंग और मोस्ट पावरफुल वुमन में इंद्राणी के शामिल होने की खबरों का जिक्र भी है। एक ओर जगह लिखा है कि -हैप्पी बर्थडे टू मी। लेकिन मैं खुश नहीं हूं। ऐसा लगता है कि मेरी जिंदगी में कुछ भी नहीं है। मेरा भविष्य अंधकारमय है। मुझे अब मां से नफरत है। वह मां नहीं है, डायन है। ‘डायरी में पिता सिद्धार्थ से संपर्क में रहने के भी सबूत हैं। आगे शीना लिखती है कि पापा मैं आपसे बहुत नाराज हूं। आपने मुझे खत क्यों नहीं लिखा। मैं भी बहुत दिनों बाद लिख रही हूं। लेकिन आपको समझना चाहिए कि मैं 10 वीं में हूं। जिसके कारण मैं पढ़ाई में बहुत व्यस्त रहती हूं।

लावारिस लाशें: - शीना बोरा हत्याकांड तीन साल बाद अब खुला है। 2012 में लावारिस लाश मिलने के बाद महाराष्ट की रायगढ़ पुलिस फर्ज ठीक से निभाती तो शायद हत्यारे सजा पा चुके होते। रायगढ़ पुलिस ने जो ढीला रवैया तब अपनाया था, वैसा ही राज्य की पुलिस रोजाना औसतन तीन लाशों को लावारिस मानकर अंतिम संस्कार कराती है। इनके अपनों को खोजने की भागदौड़ भी तीन-चार दिन ही चलती है। कहने को तो एफएसएल जांच कराई जाती हैं, ऐसे में मामला मर्डर का ही क्यों न हो, वह भी लावारिस लाश के साथ दफन हो जाता है। प्रदेश में पिछले साल 1204 तथा 2012 में 1750 लावारिस लाशें मिली थीं।

लावारिस शव मिलने पर सबसे पहले जिला एसपी को सूचना दी जाती है। रिपोर्ट तैयार कर शिनाख्तगी का प्रयास होता है। प्रदेश के थानों और आसपास के राज्यों के कंट्रोल रूम में मृतक के हुलिये की जानकारी दी जाती है। 3 से 4 दिन तक मृतक के परिजनों का इंतजार किया जाता है। इसके बाद मृतक का पुलिस अंतिम संस्कार करा देती है। इसके बाद मृतक के कपड़े मालखाने में जमा करा दिए जाते हैं। सालों पड़े रहने के बाद खुद ही नष्ट हो जाते हैं। जांच भी बंद हो जाती है। कहने को तो पुलिस मृतक के दांत, बाल या शरीर के कुछ हिस्सों का डीएनए टेस्ट करवाने के लिए अपने पास सैंपल्स रखती है पर वे टेस्ट नहीं करवा पाती है।

टी. वी: -श् ाीना-ईद्राणी प्रकरण में टीवी की दो ‘ब्रेक्रिंग न्यूज’ सुर्खियों में अलग ही नजर आती हैं। केवल हरियाणा व पश्चिमी उत्तरप्रदेश के जाट ‘सम्मान’ के लिए अपनी बेटियों की हत्या करते हैं। और ईद्राणी ने ऐसा किया तो शायद इसलिए की वे आकर्षक, लालची, सत्ता की भूखी, छोटेे शहर की ऐसी लड़की है, जिसकी महत्वाकांक्षाएं बहुत ज्यादा हैं। वित्तीय हेराफेरी की सतत अफवाहों के बावजूद किसी ने सोचा नहीं था कि वह कहानी कौटम्बिक व्यभिचार, अपहरण, ब्लैकमेल और हत्या के आरोपों वाली तेज रफ्तार क्राइम थ्रिलर में बदल जाएगी। इसे लेकर मीडिया कवरेज इतना तेज था कि सात से दस दिन तक कोई ओर खबर इसके आगे ठहर ही नहीं सकी। यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार प्रीतीश नंदी जी का।

प्रीतीश नंदी का इंद्राणी के चौथे पति पीटर मुखर्जी के बारे कहना है कि वे बिलकुल ही अलग व्यक्ति हैं। मिलनसार और खुशमिजाज है वे इतने दयालु है कि कड़ाके की सर्दी वाली रात को वे किसी को गर्म कपड़े देने या दिलवाने में चुकते नहीं हैं।

हमें यह समझना होगा कि जब किसी कमजोर क्षण में व्यक्ति अपराध करता है तो हर ऐसा व्यक्ति समान होता है डरा हुआ, लालची, कमजोर, मूर्ख, घटिया, जातिहीन और दोषी। अपराध की गंभीरता कम करने वाले कोई तथ्य नहीं होते है।

मर्डर: - शीना मर्डर मिस्ट्री में अब एक नया मोड़ आ गया है। मुख्य आरोपी इंद्राणी मुखर्जी ने पुलिस के सामने दावा किया है कि शीना बोरा की मौत हुई ही नहीं है। वह जिंदा है वह मुझसे नफ़रत करती हे, इसलिए सामने नहीं आ रही है। इंद्राणी का कहना है कि 24 अप्रेल, 2012 को दोनों कॉफी पीने के लिए बांद्रा गए थे। बाद में उसने शीना का घर पर ड्रॉप कर दिया। अगले दिन शीना अमेरिका चली गई। मुंबई के पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया खुद घंटो ईद्राणी से पूछताछ कर रहे हैं, लेकिन वे सवालों के जवाब ठीक से नहीं दे रहे है। हालाकि संजीव खन्ना ने कबूल कर लिया है कि उसने हत्या में साथ दिया था। संजीव के इस बयान से लगता है कि इंद्राणी झूठ बोल रही है।

पुलिस: - सूत्रों के मुताबिक, हत्या के दूसरे दिन यानी 25 अप्रेल 2012 की सुबह उठने के बाद इंद्राणी और संजीव खन्ना जो इंद्राणी का पहला पति है ने पहले बैग से शीना का शव निकाला। उसे कार की पिछली सीट पर दोनों के बीच में रख लिया। इंद्राणी ने ऐसा पुलिस नाकाबंदी से पकड़े जाने से बचने के लिए किया था, क्योंकि नाकाबंदी में पुलिस अक्सर कार की डिक्की खोलकर देखती है और उसमें रखे सामान की जांच करती है।

खोपड़ी: - यह खोलगी हत्या का राज शीना मर्डर केस में बरामद खोपड़ी राज खोल सकती है। पुलिस रायगढ़ जिले जंगलों में मिली खोपड़ी का 2 डी एनिमेशन करवा सकती है। चंडीगढ़ और मुंबई की लैब में इस तरह की तकनीक मौजूद है। मई 2012 में पेन पुलिस ने शिनाख्त के लिए दांत, बालों और हड्डियों के नमूने मुंबई के जेजे हॉस्पिटल भेजे थे। अब इन्ही सबूतों की मदद से शीना की शिनाख्तगी की कोशिश की जाएगी।

उपंसहार: - इंद्राणी मुखर्जी रहस्य अभी तक उजागर नहीं हुआ है इसलिए इस मामलें को अब मीडिया न्याय करने और सजा देने वाले की भूमिका निभाना चाहता है। क्योंकि किसी भी कैस में पुलिस कोई ठोस कदम उठा नहीं पाती है और कई बार सत्य जानकर भी उजागर नहीं करती है क्योंकि उसे अपने राजनीतिक आकाओें की इच्छा का भी ध्यान रखना पड़ता है। इसलिए यह कदम अब मीडिया या फिर जनता को ही उठाना पड़ेगा। अगर अब इन अपराधियो प्रति हम आवाज़ नहीं उठाएगे तो ऐसे खतरनाक अपराध ओर अधिक बढ़ते जाएगें। जो हमारे देश के लिए सही नहीं होगा।

- Published on: October 6, 2015