खाद्य प्रदार्थ पैकेज्ड फूड (Harms of using Packaged Food - Article in Hindi) [ Current Affairs ]

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प्रस्तावना:- पहले हमने खाद्य प्रदार्थ के रूप में मैगी की बात कही थी। इसके अलावा भी बहुत जी ऐसी खाने की चीजें है जो हमारे शरीर के लिए हानिकारक है। ऐसे समय, जब देश ही नहीं दुनिया भर में डिब्बाबंद खाद्य प्रदार्थ और पेय प्रदार्थ सहित तंबाकू और सिगरेट के उपयोग को हतोत्साहित कर रहा है आश्चर्य की बात तो यह है कि इनसे सरकार को हो रही आमदनी निर्माताओं को मिलने वाले मुनाफे के मुकाबले नहीं के बराबर है। लेकिन सरकार देश की हो या प्रदेशों की, खुश हैं। क्या यह नहीं होना चाहिए कि जब हम किसी चीज को खराब मानें तो उसकी बिक्री ही नहीं भारत में उसके उत्पादन और आयात को ही पूरी तरह से रोक देना चाहिए। उस पर इतना भारी कर लगा देना चाहिए इसे साधारण ग्राहक खरीद ही न पाएं इस काम में केंद्र व राज्यों की सरकारों से बड़ी भूमिका स्थानीय संस्थाओं की हो सकती है।

फूड:- बाजार में ऐसे कई उत्पाद हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। कोई उन्हें जंक फूड कहता है तो कोई उन्हें फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड अर्थात सामान्यत: इनको पैकेज्ड फूड डिब्बाबंद भी कह सकता है। मध्यप्रदेश की भाजपा विधायक ऊषा ठाकुर का कहना है कि इसके लिए जिम्मेदार आज की माताएं है। अगर माताएं बच्चों को परंपरागत खाना जैसे पराठा, हलुआ और सेंवई आदि बनाकर दें तो बच्चों को इतना हानिकारक खाद्य प्रदार्थों को खाने की आदत नहीं लगेगी।

जंक फूड पर दिल्ली उच्च न्यायालय में केस लड़ने और दिल्ली में जंक फूड पर प्रतिबंध लगवाने में सफलता हासिल करने वाले उदय फाउंडेशन के संस्थापक राहूल वर्मा का मानना है कि आज अधिकांश बच्चे एकल परिवारों में पल-बढ़ रहे हैं। कई बार मां और पिता दोनों ही नौकरी कर रह होते है। इसलिए उनके पास इतना समय नहीं होता है कि वे बच्चे को हर समय उपयुक्त खाना बनाकर दे सकें। ऐसे में उनके लिए यह आसान विकल्प होता है कि वे अपनी तत्काल जरूरत के लिए बिस्कुट और नूडल्स आदि पर निर्भर हो जाएं। राहूल के अनुसार जंक फूड के प्रचलन का दूसरा सबसे बड़ा कारण है टीवी के विज्ञापन का। हर दस मिनिट में दो विज्ञापन इन खाद्य प्रदार्थों के होते हैं, जिनसे बच्चों को ललचाया जाता है। साथ ही इन विज्ञापनों की वजह से इसमें कुछ ग्लैमर भी जुड़ गया है। जंक फूड के विज्ञापन बच्चों को मुख्य रूप से टारगेट करते हैं। इससे बच्चों में कई तरह की बीमारियां होती हैं। जैसे मोटापा, हाइपर टेंशन, किडनी की बीमारी आज के बच्चों में इसे खाने से आम हो गई हैं।

प्रदार्थ:- हानिकारक डिब्बाबंद खाद्य प्रदार्थ आपको हर रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड पर मिल जाएंगे लेकिन ताजा फल अथवा उस गांव शहर की अपनी कोई विशेष खान पान की वस्तु वहां नहीं होती हैं। कहा जाता है कि स्थानीय चीजें महंगी होती हैं, जबकि सच यह है कि बाहरी वस्तुएं महंगी भी होती हैं और हानिकारक भी होता है।

अब खुला पानी भी स्वास्थ्य के लिए खराब बताकर बोतलबंद पानी बेचा जा रहा है। बीते वर्ष की रिपोर्ट के मुताबिक देश का बोतलबंद पेयजल बाजार 60 अरब रूपयों के स्तर पर पहुंच गया था जो 2018 तक बढ़कर 160 अरब रूपए तक पहुंच जाने का अनुमान है। बाजार में बोतलबंद पानी के बाजार में बड़ी कंपनियां ही नहीं बल्कि छोटी स्थानीय कंपनियां भी कूद पड़ी हैं। इसी तरह कोल्ड ड्रिंक को कोई भी स्वास्थ्यकारी लाभ मनुष्य की सेहत पर नहीं होता है किसी भी कोल्ड ड्रिंक कंपनी ने भी अब तक किसी कोल्ड ड्रिंक से स्वास्थ्य पर होने वाले फायदो का दावा नहीं किया है। एक 300 एमएल की कोल्ड ड्रिंक बोतल में 40 ग्राम चीनी होती है। इसको पीने के बाद व्यक्ति की रोजाना की अतिरिक्त चीनी की आवश्यकता लगभग दो गुना तक पूरी हो जाती है। इसके बाद व्यक्ति जो भी चीनी लेता है, उससे नुकसान ही होता है। साथ ही इन पेय पदार्थों में कैफीन भी होता है। चीनी और कैफीन दोनों ही हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। कैफीन से शरीर की मसल्स और नर्व की कार्यप्रणाली में बाधा आती है।

पैकेज्ड फूड के मामले में ग्राहकों को अकसर यह परेशानी आती है कि पैकेट या डिब्बे में बंद खाद्य प्रदार्थ अमानक लगे तो वे किससे शिकायत करें? साधारणतया ऐसा समझा जाता है कि वस्तु के उपयोग की निर्धारित तिथि समाप्ति के बाद यदि उत्पाद बेचा गया है कि तो दुकानदार ही दोषी है। यदि ऐसा नहीं हो तो कंपनी को किस तरह से जिम्मेदार ठहराया जाएं? सबसे पहली बात तो यह है कि इन मामलों में भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण और माप तौल विभाग के नियम हैं। यदि वजन संबंधी शिकायत है तो माप तौल विभाग में और उतपाद की गुणवत्ता संबंधी शिकायत है तो एफएसएसएआई के नियमों के तहत शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा उपभोक्ता संबंधी कानून हैंं, जिनके आधार पर राहत, जुर्माने या पैसा वापसी के लिए दावा किया जा सकता है।

यह कहना तो कठिन है कि सभी पैकेज्ड खाद्य प्रदार्थ खराब हैं लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि बहुत सी वस्तुओं की पैकेजिंग इतनी अधिक खराब होती है कि वह हमारे लिए हानिकारक हो सकती है। देश में विदेशी संस्कृति हावी तो हो गई है लेकिन हम उससे तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं। अब संयुक्त परिवार रहे नहीं। परिवार में पति पत्नी दोनों ही कमाने के लिए कार्य करते हैं ऐसे में उनके समाने सरल विकल्प पैकेज्ड सामग्री या पैकेट में बंद खाद्य पदार्थों का ही रहता है। इसे वे तेजी के साथ अपनाते हैं। काम की व्यस्तता ऐसी होती है कि वे महंगी और ब्रांडेड को ही श्रेष्ठ समझकर इस्तेमाल करते हैं। यहां तक गुणवत्ता की जानकारी के बिना ही बच्चों को भी उपलब्ध कराते हैं। 30-40 प्रतिशत की दर से बढ़ रही हैं फास्ट फूड इंडस्ट्रीज।

ट्रांस फैट:- अमरीका के फूड एंड उग एडमिनेस्ट्रेशन विभाग ने तीन साल के अंदर सभी खाद्य प्रदार्थो से हाइड्रोजन ऑयल से बना ट्रांस फैट की मात्रा समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। सालों लंबे अध्ययन और शोध के बाद यह पाया गया है ट्रांस फैट से हदय की धमनियों में वसा का जमाव बढ़ता है तथा यह हदय रोग की बीमारियों का प्रमुख कारण है। भारत में अभी तक ट्रांस फैट पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

कैलोरी:- पैकेज्ड अथवा जंक फूड को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ’एचएफएसएस’ अर्थात ’हाई इन फैट, सॉल्ट एंड शुगर’ कहा है। माना जाता है कि व्यक्ति दिन में तीन बार खाना और दो बार अल्पाहार लेता है। संतुलित आहार में इसी अनुसार जरूरी पोषक तत्व होना चाहिए। जंक फूड खाने में फैट, सोडियम और चीनी की अधिक मात्रा से यह संतुलन टूटता है। सही मात्रा प्रति अल्पाहार में 0.5 ग्राम नमक, 3 ग्राम शक्कर, 7 ग्राम कुल वसा व 210 किलो कैलोरी ले सकते है। इसके अलावा प्रति भोजन में 1.25 ग्राम नमक 6.25 ग्राम शक्कर 17.5 ग्राम कुल वसा व 525 किलो कैलोरी ले सकते है।

पोषक तत्व

Amount of Ingredients higher than Normal food in Packaged Food

Amount of Ingredients higher than Normal food in Packaged Food

सामान अल्पाहार

भोजन

नमक 0.5 ग्राम

1.25 ग्राम

शक्कर 3 ग्राम

6.25 ग्राम

वसा 7 ग्राम

17.5 ग्राम

कैलोरी 210 किलो

525 किलो

मुख्य प्रदार्थ:- इस प्रकार है-

  • चीनी -यह बिना किसी लाभकारी प्रभाव के केवल केलोरी प्रदान करता है। सेवन को कोई सुरक्षित मापक नहीं। अत्यधिक उपयोग करने से नशे की लत सी हो जाती है कार्बोनेटेड शीतल पेय में अत्यधिक इस्तमाल होता है जिसका लीवर पर टॉक्सिक इफैक्ट उतना ही होता है जितना एल्काहोल का।
  • नमक -यह भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए होता है। आहार में अधिक मात्रा में नमक लेने से उच्च रक्त चाप और गैर संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
  • टीएफए- अर्थात ट्रांस फैटी एसिड वनस्पति घी में सर्वाधिक पाया जाता है। वनस्पति घी जल्दी खराब नहीं होता है इसलिए इसका उपयोग बेकरी उत्पादों में किया जाता हैं। शरीर में इसकी मात्रा बढ़ने से ब्लड लिपिड लेवल पर असर पड़ता है और गुड केलोस्ट्रॉल की मात्रा घट जाती हैं। इससे हृदय संबंधी रोगों का कारण बनता है।
  • एसएफए- अर्थात सेचुरेटिड फैटी एसिड का सर्वाधिक प्रयोग डिब्बाबंद व प्लास्टिक पॉलेथिन से कवर खाद्य प्रदार्थों में होता है। जिनमें चॉकलेट, कुकीज, केकर्स और स्नेक चिप्स शामिल हैं। ज्यादा उपयोग करने से दिल का दौरा, धमनियां रूकने और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता हैं।

शरीर:- हमारा शरीर और जीवन प्रकृति का अंग है। इसका पालन पोषण प्राकृतिक औषधियों (अन्न) और वनस्पतियों से ही होता है। मानव निर्मित सिंथेटिक वस्तुएं शरीर में पच नहीं सकती है। जब तक शरीर स्वस्थ्य रहता है, इन अनावश्यक चीजों को बाहर फेंकता रहता है। जैसे-जैसे शरीर उम्र के साथ कृश अर्थात खराब होता है तो वह इनको बाहर फेंकने में असमर्थ हो जाता है तब यह सब सामग्री शरीर में विभिन्न स्थानों पर एकत्रित होती जाती है तो कहीं गांठ बनती है तो कहीं कैंसर बनता है। आज जो फल, सब्जियां, अन्न अथवामानव निर्मित पेय प्रदार्थ चॉकलेट आदि हम खा रहे हैं, अधिकांश में रासायनिक खाद कीटनाशक, उनको बचाकर रखने वाले प्रिजवेंटर आवश्यक रूप से उपस्थित रहते हैं। इसके आगे मादक पदार्थ ध्रुमपान, मद्यपान, चरस, गांजा आदि शरीर की रोग निरोधक क्षमता को कम करते जाते हैं। हमारी एक त्रासदी यह भी है कि हम अपने शरीर के बारे में कुछ नहीं जानते। शायद डॉक्टर को भी यह पात नहीं होगा कि शरीर का आधा हिस्सा पुरूष और आधा स्त्री होता है। दाहिने शरीर के अंग बाएं शरीर के अंग से भारी होते है।

उपसंहार:- जंक फूड के लोकप्रिय होते जाने की वजह उनकी उपलब्धता है, उनका सेहतमंद होना नहीं। हमारी सरकारे यदि अच्छे मन से और सबके स्वास्थ्य की कामना करें तो इनमें से बहुत कुछ मुश्किलों को टाला जा सकता है। पर उसके लिए आदमी को पैसे से अधिक महत्वपूर्ण मानना पड़ेगा। पर आज परिस्तिथियां विपरीत है। आज केवल हर फायदे की पड़ी है। इसलिए इसके लिए जनता को पूरा जागरूक होकर नुकसान वाली चीजों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। इसमें सरकार एवं संस्थाओं को भी जनता का साथ देना चाहिए।

- Published on: August 6, 2015