जय ललिता केस(Jaya Lalita Case - In Hindi - 2014) [ Current Affairs ]

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प्रस्तावना: भ्रष्टाचार की वजह से जहाँ लोगों का नैतिक एवं चारित्रिक पतन हुआ हैं, वहीं दूसरी ओर देश को आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ी है। आज भ्रष्टाचार के फलस्वरूप अधिकारी एवं व्यापारी वर्ग के पास व मंत्रियों के पास काला धन अत्यधिक मात्रा में इकट्ठा हो गया है। इस काले धन के कारण अनैतिक व्यवहार, मद्यपान, वैश्यावृत्ति, तस्करी एवं अन्य अपराधों में वृद्धि हुई है। राजनीतिक स्थिरता एवं एकता खतरे में पड़ रही हैं। नियमहीनता एवं कानूनों की अवहेलना में वृद्धि हो रही है। भ्रष्टाचार के कारण आज देश की सुरक्षा के खतरे में है। आज बड़े-बड़े मंत्री लोग भ्रष्टाचार में है। अभी हाल में ही तमिलनाडू की मुख्य मंत्री को भ्रष्टाचार के केस में दिनांक 27.09.2014 को दोषी करार दिया गया।

आय से अधिक सम्पत्ति मामले में बड़ा फैसला

तमिलनाडु की मुख्य मंत्री जे. जय ललिता पर 18 साल पहले जो केस दर्ज हुआ था, उसका फैसला दिनांक 27.09.2014 को बैंगलुरू की विशेष अदालत में आय से अधिक सम्पत्ति मामले में जया को दोषी ठहराया है। उन्हें 4 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई। साथ ही 100 करोड़ रूपये का जुर्माना भी लगाया गया। यह किसी नेता पर जुर्माने की सबसे बड़ी रकम है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक 2 साल से अधिक की जेल होने पर जय ललिता की विधान सभा सदस्यता रद्द हो गई है। भ्रष्टाचार में दोषी होने के कारण सजा खत्म होने के 6 साल बाद तक वह चुनाव नहीं पड़ सकती है अर्थात् 66 वर्ष की हो चुकी जय ललिता अगले 10 साल तक चुनावी मैदान से बाहर रहेगी।

जय ललिता वर्ष 1991 में पहली बार मुख्य मंत्री बनी। तक 3 करोड़ की सम्पत्ति बताई गई। सी.एम. रहते 1 रूपये महिना वेतन लिया यानि पाँच साल में 60 रूपये। पद से हटने पर सम्पत्ति 67 करोड़ रूपये हो गई। जब घर पर छापे पड़े तो 10500 साड़ियाँ, 750 जोड़ी सैण्डल, 91 घड़ियाँ, 28 किलो सोना, 800 किलो चांदी मिली। कई मकान, हैदराबाद में फॉर्म हाउस और नीलगिरि में चाय बागान के दस्तावेज भी मिले। जय और उनके साथियों ने 34 कम्पनियाँ बना रखी थी। इनके नाम 100 बैंक खाते थे।

चैन्नई में प्रदर्शन

कार्यकर्ताओं ने बसों पर पथराव किया। कांचीपुरम में एक सरकारी बस से सवारियों को उतारकर उसमें आग लगा दी। द्रमुक प्रमुख करूणानिधि के घर के बाहर भी हिंसा हुई। घोटाला उजागर करने वाले भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी के भी पुतले जलाए गए। जया के समर्थन में लगातार चौथे दिन अनशन और प्रदर्शन जारी रहे। चैन्नई, तिरूचिनापल्ली, सालेम, कोयम्बटूर और कांचीपुरम में भी अन्नाद्रमुक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। जया के समर्थन में एकजुटता दिखाने के लिए कॉलीवुड यानि तमिल फिल्म इण्डस्ट्री ने एक दिन का मौन व्रत रखा।

खास दोस्त, जिसके कारण जय ललिता को हुई जेल

शशिकला - तमिलनाडू में तंजौर जिले के मन्नागुडी गाँव में पैदा हुई शशिकला को बचपन में स्कूल जाने के बजाय फिल्में देखना ज्यादा पसन्द था। इसलिए पढ़ाई तो शुरूआत में ही छूट गई और फिल्मों से नाता गहरा होता चला गया। शशिकला सुपर स्टार सी ऐशो आराम वाली जिन्दगी जीने का सपना देखने लगी। लेकिन माता-पिता ने तमिलनाडू सरकार में जनसम्पर्क अधिकारी की मामूली नौकरी करने वाले एक नटराजन के साथ उसकी शादी कर दी। नटराजन तब तत्कालीन मुख्य मंत्री एम.जी. रामचन्द्रन (एम.जी.आर.) की करीबी आई.ए.एस. और कु ड्डालोर की उपायुक्त वी.एस. चन्द्रलेखा के पी.आर.ओ. थे। 80 के दशक की शुरूआत हो चुकी थी। इसी दौरान एम.जी.आर. अपनी करीबी जय ललिता को अपने उत्तराधिकारी के रूप में तैयार कर रहे थे। जय ललिता की बढ़ती लोकप्रियता ने शशिकला को बेचैन कर दिया। वह जय ललिता के करीब आना चाहती थी, इसके लिए उसने अपने पति का इस्तेमाल किया, जिसने दोनों की मुलाकात करवा दी। धीरे-धीरे जय ललिता का शशिकला पर विश्वास बढ़ने लगा, जो दोस्ती गहरी होती चली गई। यहीं से शशिकला ने जय ललिता के चारों ओर जाल सा बुन दिया था। शशिकला जिससे चाहती थी जय ललिता उसी मिलती थी।

जय ललिता के घर को काबू में रखने के लिए उसने अपने गाँव मन्नारगुडी से 40 लोगों को लाकर यहाँ नौकर रख दिया। वर्ष 1987 में एम.जी.आर. के निधन के बाद वर्ष 1991 में तमिलनाडू में विधान सभा चुनाव हुए। फण्ड जमा करने से लेकर प्रचार तक काम शशिकला व उसका पति सम्भालते थे। फिर जयललिता की भारी जीत हुई। शशिकला और रिश्तेदारों के साथ जयललिता के 36 पोएस गार्डन घर में रहने आ गई। इसके बाद तो कोई भी शशिकला की अनुमति के बिना जयललिता से नहीं मिल सकता था। सरकार के अलावा पार्टी में भी उसकी पकड़ मजबूत हो गई। रिश्तेदारों को उसने पार्टी का क्षेत्रीय निदेशक बना दिया था।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना था कि शशिकला के प्रभाव के चलते ही जयललिता ने वी.एन. सुधाकरन को अपना दत्तक पुत्र बनाया। मुख्य मंत्री के तौर पर वर्ष 1991 से 1996 तक के जयललिता के पहले कार्यकाल में शशिकला संविधान से परे एक शक्ति के तौर पर काम करने लगी। उसने और उसके रिश्तेदारों ने तमिलनाडू में गलत तरीके से बेहिसाब सम्पत्ति खरीदी। राजनीति के गलियारे में लोग शशिकला को मन्नारगुडी का माफिया कहकर बुलाने लगे।

वर्ष 1995 में वी.एन. सुधाकरन की शादी पूरी दुनिया में चर्चित हुई। इस पर 100 करोड़ रूपये जो खर्च हुए थ। वर्ष 1996 में आम चुनाव में इसी वजह से जयललिता की पार्टी राज्य की सभी 36 सीटें हार गई। इससे घबराई जयललिता ने शशिकला से व उसके परिवार से दूरी बना ली। सुधाकरन को दत्तक पुत्र मानने से भी इन्कार कर दिया। इसी दौरान शशिकला को विदेशी मुद्रा से लेनदेन के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। जेल से बाहर आने उसने जयललिता से माफी मांगी। वर्ष 2001 में जयललिता के सत्ता में आने पर शशिकला ने खुद को लो प्रोफाइल रखा।

वर्ष 2011 में दोनों की दोस्ती में दरार पड़ने की शुरूआत हो चुकी थी। माना जाता है कि गुजरात के तत्कालीन मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी ने जयललिता को चेताया था कि शशिकला की पैसे की बढ़ती भूख की वजह से निवेशक तमिलनाडू छोड़कर जाना चाहते हैं। यह भी चर्चा थी कि पति नटराजन को मुख्य मंत्री बनाने के लिए शशिकला उन्हें धीमा जहर देकर मारने की कोशिश कर रही है। 17 दिसम्बर, 2011 को उन्होंने शशिकला और उसके परिवार को अपने घर और पार्टी से निकाल दिया। हालांकि यह अलगाव भी 100 दिन ही चलता। शशिकला दव्ारा माफी मांग लेने पर जयललिता ने उसे दोबारा दोस्त के तौर पर अपना लिया।

सुब्रमण्यम स्वामी - स्वामी जयललिता की रोचक और रहस्यमय दुश्मीन-दोस्ती। वर्ष 1992 में तेजाब हमले का शिकार हुई चन्द्रलेखा का समर्थन करने के बाद ही सुब्रमण्यन स्वामी और जयललिता में तलवारें खींच गई थी। जयललिता और वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रमण्यन स्वामी के राजनीतिक रिश्तों की खटास बहुत पुरानी है। दोनों समय-समय पर इसका प्रदर्शन भी करते रहे हैं। माना जा रहा है कि जयललिता के जेल जाने के साथ ही इसका अन्त हो गया है।

आर. नटराजन - नटराजन ही पहला व्यक्ति था, जिसने शशिकला की मुलाकात जयललिता से करवाई थी। जयललिता से रसुख का इस्तेमाल कर उसने करोड़ों रूपये की सम्पत्ति अर्जित की। उसके खिलाफ धोखाधड़ी और हत्या की धमकी देने जैसे मामले दर्ज हैं।

वी.एन. सुधाकरन - जयललिता के दत्तक पुत्र और जे.जे. टीवी के मालिक सुधाकरन पर मौसी शशिकला के साथ वर्ष 1991 से 1996 के बीच छ: कम्पनियों पर कब्जा करने के आरोप लगे थे। कोर्ट में यह भी कहा गया कि जयललिता की कई सम्पत्तियाँ इनके नाम पर थी।

जे. इलावरसी - शशिकला के साथ जयललिता के घर में रहने वाले में इलावरसी भी थी। आरोप लगे थे कि इनके पास करोड़ों रूपये की बेनामी सम्पत्ति थी। सुधाकरन व शशिकला की कई कम्पनियों ने इसकी भी हिस्सेदारी बताई जाती है।

नौकर की गवाही

‘मैं नोटों से भरे बैग रोज बैंक में जमा कराने जाता था’। जयललिता और शशिकला को जेल पहुँचाने में उसके एक नौकरी की गवाही ने अहम भूमिका निभाई थी। ये था जयललिता के चैन्नई स्थित आवास पर काम करने वाला जयरामन। उसने कोर्ट में गवाही दी थी कि शशिकला के कहने पर वह रोज पूर्व मुख्य मंत्री के घर से नोटों से भरे बैग बैंक ले जाता था, जहाँ जयललिता और शशिकला की फर्मों के अकाउण्ट थे। बैंक में पैसे जमा कराने वाला जयराम का दूसरा साथी राम विजयन कोर्ट में बिना गवाही दिए ही मर गया। इसी आधार पर वकीलों को यह साबित करने में बहुत मदद मिली कि जयललिता ने भ्रष्टाचार के जरिये पैसा कमाया।

टर्निंग पाईण्ट्स

वर्ष 1989, उन्होंने डी.एम.के. के दुरईमुरगन पर विधान सभा में उनकी साड़ी खींचने का आरोप लगाया।

वर्ष 1991, कांग्रेस से गठबन्धन किया। उनकी पार्टी तमिलनाडू में सत्ता में आई। वे राज्य की सबसे युवा मुख्य मंत्री बनी।

वर्ष 1996, भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों में गुस्से के कारण वे विधान सभा चुनाव हार गई। आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। छापेमारी में उनके घर से 10 हजार से अधिक महंगी साड़ियाँ, 750 जोड़ी सैण्डल, कीमती घड़ियाँ और 30 किलो सोना बरामद हुआ था। महीने भर जेल में रही।

वर्ष 2001, वे फिर राज्य की सत्ता में लौटी। लेकिन वर्ष 2004 में एक भी लोक सभा सीट जीतने में विफल रही। वर्ष 2006 में पार्टी फिर विधान सभा चुनाव हारी।

वर्ष 2014, पार्टी अध्यक्ष चुनी गई। फिर 18 साल पुराने भ्रष्टाचार के मामले में जो सुब्रमण्यम स्वामी ने वर्ष 1996 में आरोप लगाया था। उस पर वे पहले 27 दिन जेल में रहना पड़ा व अब 4 वर्ष की सजा सुनाई।

जानिए कैसे बदलेगी तमिल राजनीति

जयललिता की जगह वित्त मंत्री आर. पन्नीरसेल्तम नये सी.एम. बन सकते हैं। वर्ष 2001 में भी जब जयललिता को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी, तब पन्नीरसेल्वम को ही जिम्मेदारीसौंपी गई थीं पन्नीरसेल्वम जया के विश्वस्त हैं। वे जब भी जयललिता से मिलते हैं, उन्हें साष्टांग दण्डवत करते हैं।

पार्टी पर जयललिता की पकड़ घटेगी। पार्टी के सामने नेतृत्व संकट खड़ा हो सकता है। नया सी.एम. चुना जायेगा, जिसके सामने बड़ी चुनौती पार्टी पर पकड़ बनाने की होगी। केन्द्र में राज्य सभा में ए.आई.ए.डी.एम.के. सांसदों का रूझान एन.डी.ए. की ओर बढ़ सकता है। तमिलनाडू में भाजपा को जमीन बनाने में मिलने वाली चुनौती थोड़ी कम हो सकती है।

राज्य में वर्ष 2016 में विस चुनाव है। विधान सभा 234 सीट, द्रमुक 23, अन्ना द्रमुक 151, अन्य 60, लोक सभा 39 सीट, तमिलनाडू में 37 अन्ना द्रमुक। जयललिता का युग खत्म नहीं हुआ, सिर्फ सी.एम. का चेहरा बदलेगा, फैसले जयललिता के लागू होंगे। उन्हें एम.जी.आर. राजनीति में लाए थे। दरअसल, उन्होंने पार्टी में किसी नेता को हैसियत को उभरने ही नहीं दिया। प्रश्न है कि आगामी चुनावों में व्यक्ति केन्द्रित यह पार्टी किस चेहरे को पेश करेगी? क्या नेताविहीन पार्टी को लोगों का पहले जैसा समर्थन मिलेगा? ए.आई.ए.डी.एम.के. में शून्य और तमिलनाडू में नई सम्भावनाएँ पैदा हो गई हैं। ए.आई.ए.डी.एम.के. राज्य सभा सदस्य और वरिष्ठ वकील नवीनतकृष्णन ने याचिका दाखिल की, जिसमें स्वास्थ्य और सरकारी वकील नहीं होने के आधार पर जमानत मांगी। इस पर जस्टिस रत्नकला की वैकेशन बेंच दिनांक 01.10.2014 को सुनवाई के दौरान उन्हें 6 अक्टूबर तक जेल में रहना होगा अर्थात् अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी। इसी तरह आगे इसके निहितार्थ गम्भीर और परिणाम दूरगामी हैं। जमानत में देर भी हो सकती है।

उपसंहार

भ्रष्टाचारियों के लिए भारतीय दण्ड संहिता में दण्ड का प्रावधान है तथा समय-समय पर भ्रष्टाचार के निवारण के लिए समितियाँ भी गठित हुई हैं और इस समस्या के निवारण के लिए भ्रष्टाचार निरोधक कानून भी पारित किया जा चुका हैं। भ्रष्टाचार के अधीन केवल एक महिला मंत्री नहीं बल्कि अधिकारी से लेकर कई मंत्री भी हैं। लेकिन उन पर आरोप साबित नहीं हुआ हैं। यह समाज के लिए कलंक है। इसे मिटाना अत्यन्त आवश्यक है। समाज को यथाशीघ्र कठोर से कठोर कदम उठाकर इस कलंक को मिटाना होगा। तभी देश की तरक्की व विकास होगा।

- Published on: November 14, 2014