सिलिकॉन वैली (PM Narendra Modi’s Visit to USA - Silicon Valley - Essay in Hindi) [ Current Affairs ]

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प्रस्तावना: - वैसे तो प्रधानमंत्री जी की विदेश यात्रा का दौरा अब भी जारी है थमा नहीं क्योंकि वे चाहते हर प्रकार से हमारे देश में कुछ ऐसा हो जिससे हमारा देश विकास की राह में बढ़ सके इसलिए वे इसके लिए हर संभव प्रयास विदेश जाकर कर रहे है। अब तक वे 16 माह में 27 देशों में घूमे और इससे देश को मिला भी बहुत कुछ। अभी हाल ही में वे अमरीका की दूसरी यात्रा सिलिकॉन वैली गए वहां पर अब सबसे बड़ी आईटी हब सिलकॉन वैली को अब भारत के दो शहर टक्कर दे रहे हैं। पहला सिलकॉन वैली ऑफ इंडिया नाम से मशहूर बेंगलूरू और दूसरा उसी से होड़ करता आधुनिक हैदराबाद। इस यात्रा के दौरान मोदी जितने विदेशी राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों से मिले, उतनों से शायद भारत का कोई भी प्रधानमंत्री नहीं मिला होगा। अमेरिका नेताओं के साथ आतंकदवाद पर लगाम व विश्व जलवायु सुधारने के संकल्प भी हुए।

नज़र: - एक नज़र सिलिकॉन वैली और हमारे दोनों आईटी शहरों पर-15 लाख आईटी प्रोफेशनल्स सिलिकॉन वैली में, बेंगलुरू में 13 लाख और हैदराबाद में 4 लाख से ज्यादा। देश में मिड लेवल आईटी मैनेजर को 28 लाख रुपए औसत वेतन मिल रहा हैे। बेंगलुरू 2020 तक 20 लाख आईटी प्रोफेशनल का हब बन जाएगा।

बेंगलुरू: - दुनिया के 44 फीसदी प्रोगामर पिछले वर्ष यहीं आए। टैक्सस इंस्ट्रमेंट्स पहली विदेशी टेक कंपनी थी जो भारत आई। इसने बेंगलूरू को चुना था। 1980 में दफ्तर खुला तो सामान बैलगाड़ियों पर आया था। आज बेंगलुरू फाइबर ऑप्टिक्स पर दौड़ रहा है। इसके आईटी हब में इंफोसिस से लेकर टेक महिंद्रा तक बसी हैं। 1906 में बिजली से रोशन होने वाला एशिया का पहला शहर बेंगलुरू आज भारत की सिलिकॉन वैली के रूप में रोशन है।

लिंक्डइन ने अपने 30 करोड़ से ज्यादा प्रोफेशनल्स की प्रोफाइल को स्टडी कर बताया है कि पिछले साल दुनियाभर से 44 प्रतिशत सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर बेंगलुरू आए। जबकि अमरीका की सिलिकॉन वैली पहुंचने वाले प्रोगामर्स की संख्या 31 प्रतिशत थी। एक समय था जब बेंगलुरू वर्ब बन गया था। अमेरिका में पूछा जाता था-हैव यू बीन बैग्लोर्ड? मतलब अमेरिका में उसकी नौकरी छूट गई और उसका काम आउटसोर्स होकर बेंगलुरू चला गया। यही कारण है कि बेंगलुरू दुनियाभर से जॉब्स खींचने वाला शहर माना जाता रहा है। अब यह शहर स्टार्टअप कैपिटल है। हर दिन एक स्आर्टअप शुरू हो रही है।

इंदिरा नगर या कोरमंगला इलाकों में पेड़ पर स्आर्टअप में जॉब के लिए वैकेंसी आपको नजर आ जाए तो कोई बड़ी बात नहीं। आईटी कंसल्टेंट हरीश बिजूर कहते हैं बेंगलुरू की स्टार्टअप सिटी 714 स्कवेयर किमी में आठ स्टार्टअप। 4000 से ज्यादा स्टार्टअप फंड का इंतजार भी कर रहे हैं। कुल 13 लाख लोगों को आईटी के जरिए यहां रोजगार मिला है। बिजूर के मुताबिक बेंगलुरू की टेक्निकल शुरुआत मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन से हुई थी। फिर वॉइस सर्विस बीपीओ शुरू हुए। और बाद में डेटा आउटसोर्सिंग करने लगे। लेकिन तब तक पेटेंट्स जैसा कोई प्राइड बेंगलुरू के पास नहीं था। फिर ई-कॉमर्स आया। आज हर बड़े ई-कॉमर्स की जड़े बेगलुरू में मिलेगी। और अब ऐप्लीकेशन्स के जरिए बेंगलुरू अपने सबसे बड़े टेक्नोलॉजी स्टेटस पर पहुंच गया है। आज दुनिया की कई सारी सॉफ्टवेयर प्रॉब्लम्स का सॉल्यूशन है यह शहर। जल्दी ही ये प्रोडक्ट प्रॉब्लम्स सॉल्यूशन का सेंटर भी होगा।

73 साल के अशोक सुता जिसने मांइड ट्री और विप्रो को खड़ा किया था। वे कहते है कि 6 - 7 साल पहले तक उनके पास हर साल एक-दो लोग स्टार्टअप आइडिया लाते थे। आज हर महिने दो लोग आकर कहते हैं कि उनकी कंपनी की मेंट़रिंग करूं। अब बेंगलुरू में आईटी के जरूरी इकोसिस्टम आखिर क्या इसका जवाब नैसकॉम के वाइस प्रेसिडंट इंडस्ट्री इनीशिएटिव के. एस विश्वनाथन देते हैं। उनके मुताबिक आंत्रपेन्योर, सरकार और एजुकेशन मिलकर आईटी का इकोसिस्टम तैयार करती हैं। और इसी बदोलत बेंगलुरू आईटी हब बना है।

हैदराबाद: - यह शहर अपनी नई पहचान स्टार्टअप के रूप में बनाने में लगा है। अक्टुम्बर से देश का सबसे बड़ा स्टार्टअप इंक्यूबेटर सेंटर टी-हब के सीओओ श्रीनिवास कोलीपारा कहते हैं कि यहां ऑप्टिकल फाइबर लांइस के जरिए विश्व की सबसे तेज एक हजार एमबीपीएस की इंटरनेट स्पीड मिलेगी। अभी यह स्पीड अमेरिका में गूगल फाइबर नेट के पास है। तेंलगाना बनने से पहले तीन-चार साल आंदोलन व अन्य कारणों से जरूर यहा आईटी सुस्त हो गई थी, लेकिन बीते एक वर्ष में विश्व की जिन चार प्रमुख कंपनियों ने निवेश के लिए भारत को चुना उसमें तीन दिग्गज गूगल, ऊबर, और अमेजन ने हैदराबाद में दस्तक दी। ऊबर को 17 दिन में, गूगल को 19 दिन में, अमेजन को 30 दिन में दी गई। पहले से मौजूद टीसीएस और इंफोसिस अपने कर्मचारियों की संख्या को दोगुना करने वाली हैं। 20 छोटी कंपनियां निवेश कर चुकी हैं। इस वर्ष आईटी कंपनियों ने 50 हजार नए रोजगार दिए हैं। करोबार में 17 फसदी की ग्रोथ दर्ज हुई है।

यह शहर 50 वर्ष की तरक्की को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहा है। 170 किमी के रिंग के दोनों ओर एक-एक किमी क्षेत्र को द इंफर्मेशन टेक्नालॉजी इनवेस्टमेंट रीजन (आईटीआईआर) घोषित किया गया है। और यहीं के पोचारम और आदिबरला में इंफोसिस और टीसीएस अपने आईटी पार्क बना रही है। करीब 23 हजार कर्मचारियों के साथ यहां मौजूद कंपनी इंफोसिस के सीनियर कहते है कि कारोबार करने के लए तीन चीजों की जरूरत होती है, टेलेंट की उपलब्धता, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, और सरकारी सहंयोग। हैदराबाद में यह बीते 15 सालों से मिल रहा है। इतने वर्षों में एक भी दिन के लिए आईटी सेंटर बंद नहीं हुए। तेंलगाना आंदोलन के समय भी पार्टियों ने आईटी से दूरी बनाए रखी। शहर के टेलेंट आईटी इंडस्ट्री को ईंधन देने में लगे हैं। 4.07 लाख आईटी प्रोफेशन्स में 65 फीसदी स्थानीय हैं।

आईटी इंडस्ट्री बॉडी हैदराबाद सॉप्टवेयर इंटरप्राइजेस एसोसिएशन के अध्यक्ष और अमेरिकन कंपनी प्रोग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व सेंटर हेड रमेश लोगानाथ बताते हैं कि हैदराबाद और आसपास 150 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, जहां से हर साल एक लाख से अधिक युवा इंजीनियर बन रहे हैं। तेलंगाना और आंध्र मिलकार यह संख्या 2.75 लाख है। 1300 से अधिक आईटी कंपनियों से समृद्ध इस शहर में सॉप्टवेयर प्रोडक्ट, सर्विस, बीपीओ और स्टार्टअप सभी शामिल हैं। माइक्रोसॉप्ट, ओरेकल, एसेंचर, आईबीएम, टेक महिंद्रा, विप्रो, सीए कॉग्नीजेंट्स सहित सभी प्रमुख कंपनियां यहां हैं। इंडस्ट ्री क्षेत्र में ही रिहायशी इंतजाम होने के कारण युवा चेन्नई, दिल्ली या पुणे जैसे शहरों की अपेक्षा हैदराबाद को वरीयता दे रहे हैं।

मोदी से वादे : - टॉप टेक सीईओ के मोदी से वादे निम्न किए है-

  • एपल लगाएगा प्लांट, गूगल 500 रेलवे स्टेशनों पर देगा फ्री वाई-फाई सुविधा, माइक्रोसाप्ट बनाएगा 5 लाख ई-गांव। मोदी संग 65 लाख करोड़ के सीईओ, मोदी के साथ सिसको (8.71 लाख करोड़ रु. ) के जॉन चैंबर्स, 23.25 लाख करोड़ की माइक्रोसॉप्ट के सत्या नडेला, 5.53 लाख करोड़ की क्वालकॉम के पॉल जैकब्स और 27.76 लाख करोड़ की गूगल के सुंदर पिचाई।
  • एपल-भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने और एपल पे को जन-धन योजना से जोड़ने पर राजी हुई।
  • गूगल-500 रेलवे स्टेशनों पर फ्री वाई-फाई देगा। 8 भारतीय भाषाओं में इंटरनेट व एंड्रायड फोन लांच करेगा।
  • माइक्रोसॉप्ट- भारत में जल्द ही क्लाउड डाटा सेंटर का एलान करेगा। 5 लाख गांवो को आईटी से जोड़ेगा।
  • क्वॉलकॉम- 1000 करोड़ रु. निवेश करेगी। ये पैसा स्टार्ट-अप कंपनियों को देगी। भारत में चिप डिजाइन करेगी।

निवेश: - इस दौरान इन शहरों से निवेश बढ़ा 87.91 मॉरिशस, 16.07 सिंगापुर, 20.87 जापान, 131.95 अमेरिका, 13.31 जर्मनी, 110.69 फ्रांस। इससे 28 निवेश बढ़ा। 2013 - 14 में 1, 47, 518 करोड़ रु. 2014 - 15 में 1, 89, 107 करोड़ रु

जकरबर्ग: - सीईओ मार्क जबकरबर्ग ने कहा कि एक समय ऐसा था जब फेसबुक खरीदने के लिए लोगों के फोन आते थे। मै भी परेशान चल रहा था। तब मैं स्टीव जॉब्स के पास गया। उन्होंने कहा-भारत जाओ, तो मंदिर जरूर जाना। मैं वहां गया और मुझे आगे का रास्ता मिला…. . । देखिए, आज मैं कहां आ गया।

मोदी: - दुनिया की एजेंसियां कह रही हैं कि भारत दुनिया की फास्टेस्ट ग्रोइंग इकोनॉमी है। हम आठ ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी हैं। मेरा ड्रीम 20 ट्रिलियन में कन्वर्ट करना है। यह काम मुझे करना है। 15 महीने में हमने खोया हुआ विश्वास लौटाया है। आईसीयू में पड़े पेशेंट को भी अपने डॉक्टर के आने पर ठीक होने का भरोसा होता है तो वह भी ठीक हो जाता है।

100 दिन में 18 करोड़ बैंक खाते ख्लुावाए। तो कास्ट मैन्यूफेक्चरिंग, स्किल्ड मैनपावर, बिजनेस मार्केट इन इंडिया…यह संभावनाएं मेंक इन इंडिया के लिए है। देश जवान हो। डेमोक्रेसी, मीडिया, ज्यूडीशियरी वाइब्रंट हो तो एक जैसा साेेचने वालों के लिए अवसर होते हैं। इसमें डी-रेगुलराइजेशन कर रहा हूं। होटल चलाना है तो लोग चलाएगें। यह सरकार का काम नहीं है।

काम: - अब तक की यात्रा में मोदी ने दो महत्त्वपूर्ण काम किए हैं। एक सुरक्षा परिषद में सुधार और दूसरा भारत के लिए इसमें स्थायी सदस्यता को केंद्र में रखकर उन्होंने इस यात्रा का राजनयिक स्तर ऊंचा उठा दिया।

सम्मान: - तीस साल बाद लोकसभा में पूर्ण बहुमत के साथ मोदी की जीत ने फिर वैश्विक अपेक्षाएं बढ़ा दी हैं। कोई राष्ट्र इसके नेताओं की लोकप्रियता या उनके वैश्विक सम्मान पर सवार नहीं हो सकता-वास्तविकता तो पूरी तरह इसके उलट है। कोई नेता उतना ही शक्तिशाली व सम्माननीय होता है, जितना वह राष्ट्र, जिसका वह नेतृत्व करता है। यही कारण है कि मोदी के स्वदेश लौटने के बाद बहुत मेहनत करने की जरूरत होगी।

कारण: - भारत को इन यात्राओं से कुछ ठोस उपलब्धि हासिल होगी या पिछली कई विदेश-यात्राओं की तरह यह भी सिर्फ एक जनसंपर्क अभियान बनकर रह जाएगी। इसके लिए निम्न कारण है-

  • पहली बात तो यह है कि ये कंपनियां पैसा कमाने के लिए आई है यह अगर भारत आएगी तो जांचेगी कि वे यहां से कितना माल सूत कर ले जा सकती हैं?
  • दूसरी बात यह है कि भारत में विदेशी पूंजी लगाने वाले कर्णधारों ने वहां मोदी को साफ कह दिया है कि भारत में विनिवेश की परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं हैं। अर्थात मोदी को यह कहना चाह रहे कि पहले वे अपने भारत को ठीक करें।
  • तीसरी बात संपर्क और संचार बेहतर होना उपयोगी है लेकिन वह तो साधन-मात्र है। क्या हर आदमी के हाथ में मोबाइल फोन आ जाने पर उसे रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और दवा भी मिल जाएगी?

‘स्किल इंडिया’ यह नारा बहुत अच्छा है, लेकिन डेढ़ साल होने को आया, हमारी सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों को काम-धंधों या हुनरों का प्रशिक्षण देने की कोई क्रांतिकारी व्यवस्था की क्या?

विकास: - ऐसा लगता है जैसे पूरा देश अमेरिकामय हो गया है और उसकी कृपा के बिना भारत का विकास संभव नहीं है। अमेरिका के बारे में कुछ भी कहने पर देश में बड़ा भी कहने पर देश में बड़ा तबका उसके पक्ष में खड़ा हो जाता हैं।

अमेरिका ने भारत को दबाने का पूरा प्रयास किया है। उसने दिखा दिया है कि अपने हितों के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है। हमने अब तक देशी पूंजी, घरेलू मांग तथा हमारे मेहनतकशों के श्रम के बूते विकास किया है। केवल अमेरिका के भरोसे नहीं ही हमारे देश का विकास नही है। आगे भी हमारी मेहनत के भरोसे ही देश का विकास होगा व विदेशी पूंजी का सीमित स्थान ही रहेगा।

उपसंहार: - मोदी जी की विदेश यात्रा का दौर अब भी जारी है यह सब जानते है लेकिन बात अब भी केवल देश के विकास ही हो रही है। मोदी जी इन यात्राओं से यही बताना चाह रहे है कि वे किस तरह देश के विकास के लिए हर प्रयास कर है। इन सब यात्राओं का परिणाम देश के विकास के लिए क्या होता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

- Published on: October 7, 2015