पेरिस हमला (Paris Attack - Causes and Comparison to Mumbai Attack - Essay in Hindi) [ Current Affairs ]

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प्रस्तावना: -जब भी कोई आतंकी घटना होती है तो मीडिया का रोल महत्तवपूर्ण हो जाता है। सभी कवरेज का एकमात्र फोकस था कि उस समय एक जुटता दिखाओ, आतंक को हराओ। सभी ने हमले को देश के खिलाफ युद्ध बताया है। कहा जा रहा है कि आईएस के खिलाफ फ्रांस जो कर रहा है, उसमें पूरा देश सरकार के साथ है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में ठीक वैसे ही हमला हुआ है जैसे पहले मुबंई में हुआ था। यह सबसे बड़ा आतंकी हमला था जो दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पेरिस में हुआ और उसके बाद वहां पर कर्फ्यू एवं आपातकाल लगाया गया है।

हमला: - पेरिस में यूरोप के ही आतंकवादियों ने बाहरी आतंकवादियों के साथ मिलकर पेरिस में हमला किया। हमले से एक दिन पहले ही इराकी खुफिया एजेंसी ने सावधान किया था। संयोग से उसी समय तर्की (टर्की) के अतांल्या में ही इस बार जी-20 का सम्मेलन हुआ था। दो आतंकवादी सीरिया से टर्की गए। लरोस के ग्रीक आईसलैंड पर शरणार्थी के तौर पर पंजीकृत कराया। फिर पेरिस के लिए बढ़े।

पेरिस: - आतंकी हमला होने के कारण दुनिया की फैशन व ग्लैमर की राजधानी पेरिस लहूलुहान थी। स्टेडियम में भगदड़ मचाने के लिए आतंकियों ने तीन धमाके किए। एके-47 और आत्मघाती बेल्ट का सहारा लेकर आईएस के 8 आतंकियों ने छह जगहों पर हमला बोला। 26/11 के मुबंई हमले की तर्ज पर लोगों को बंधक बनाकर कत्लेआम मचा दिया। आंतकियों ने गोलियां खत्म होने पर भाग रहे लोगों पर बारूदी जैकेट तक फेंक दी जिससे वे लोग जिंदा न बच पाए। 1944 के बाद पहली बार वहां कर्फ्यू लगा है। आपात बैठक के बाद राष्ट्रपति ओलांद ने हमले को देश के खिलाफ युद्ध बताया है। इस साल फ्रांस में यह छठा आतंकी हमला है।

राष्ट्रपति: - फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलांद ने कहा, कि ”जिन्होंने भी ये भयानक चीजें देखीं, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि हम एक ऐसा युद्ध छेड़ने जा रहे हैं, जिसमें किसी पर रहम नहीं किया जाएगा। उन्हें पता चलना चाहिए कि उनका सामना एक प्रतिबद्ध और एकजुट फ्रांस से है।” उन्होंने तीन माह के लिए आपातकाल बढ़ा दिया है।

कारण: - इस हमले के कारण निम्न है-

  • पहला कारण में फ्रांस सीरिया व इराक में आईएस के खिलाफ अमेरिकी फौज का साथ देता रहा है। फ्रांस ने विदेशों में जिहादियों से लड़ाई के लिए 10 हजार सैनिक भेज रखे हैं।
  • दूसरे कारण में यूरोपीय देशों में फ्रांस में सबसे ज्यादा मुस्लिम रहते हैं। आईएस को यहां स्लीपर सेल बनाने में आसानी हुई। अभी 700 स्लीपर सेल फ्रांस में मौजूद हैं।
  • तीसरे कारण में यूरोप से कई इस्लामी देशों की सीमाएं सटी हैं। इन देशों के बड़े हिस्से पर आतंकी काबिज हैं। यहां से हथियारों की सप्लाई आसानी से हो जाती है।
  • चौथे कारण में पिछले हफ्ते राष्ट्रपति ओलांद ने कहा था कि आईएस के खिलाफ वे इराक के गल्फ इलाकों में एयरक्राफ्ट कैरियर भेजेंगे।

मुबंई-पेरिस तुलना: - कहा जा रहा है कि पेरिस हमले की तुलना मुबंई से की जा रही हैं

  • मुबंई में समुद्र के रास्ते आए 10 आतंकियों ने हमला बोला। पुलिस 2 घंटे तक भ्रम में रही। बड़े अफसर इसे गैंगवार समझते रहे। प्रधानमंत्री के मुबंई आने पर एसपीजी भी वहीं थी। लेकिन उन्हें नहीं बताया गया। पेरिस में 8 आतंकियों ने हमला बोला। 90 मिनिट में पुलिस ने सभी महत्तपूर्ण स्थानों पर मोर्चा संभाला। शहर में दाखिल होने और निकलने के सभी रास्ते सील कर दिए। राष्ट्रपति को स्टेडियम से निकाल कर मंत्रालय पहुंचाया गया।
  • मुबंई हालात से निपटने के लिए मरीन कमांडो लगाए। लेकिन वे इसके लिए ट्रेंड नहीं थे। पुलिस केंद्र के आदेश का इंतजार करती रही। पेरिस मेें पुलिस ने बिना किसी सपोर्ट लिए घंटेभर के अंदर ही हमलों की सभी जगहों पर चार्ज ले लिया। आर्मी बॉर्डर पर अलर्ट हो गई।
  • मुबंइर् में पुलिस के जवानों ने पुराने हथियारों के दम पर ही आतंकियों का समाना किया। उनके पास बुलेटप्रूफ जैकेट भी स्तरीय नहीं थे। पेरिस में पुलिस कमांडो पूरी तरह तैयार थे। उनके हथियार या साजो-सामान आधुनिक के। बिना देरी के काउंटर अटैक कर दिया।

जवाब: - फ्रांस ने पेरिस हमले के जिम्मेदार आईएस आतंकियों पर जोरदार पलटवार किया। फ्रांस ने सीरिया के रक्का शहर स्थित आईएस ठिकानों पर हवाई हमले किए। साथ ही आतंकियों की धरपकड़ के लिए कई जगह छापे मारे। वहीं भारत ने आईएस के खिलाफ जंग में फ्रांस का साथ देने का ऐलान किया है। इधर आईएस ने अमरीका व पश्चिमी देशों में हमले की फिर धमकी दी है। फ्रांसीसी रक्षामंत्रालय ने बताया कि 10 लड़ाकू विमानों ने यूएई व जॉर्डन से उड़ान भरी और रक्का स्थित आईएस कमांड सेंटर, गोला बारूद डिपो व ट्रेनिंग कैंप पर 20 बम गिराए। फ्रांसीसी सेना ने आईएस के हथियारों के गोदामों को भी निशाना बनाया। मालूम हो, रक्का पर स्थित आईएस पर फ्रांसीसी सेना का कब्जा है।

किसी आतंकी हमले के बाद यह अब तक की सबसे तेज कार्रवाई है। चारों तरफ दबाव से डरकर पेरिस हमले के मास्टरमांइड अब्देलहमेद अबाउद ने आखिरकार खुदखुशी कर ली। हमलावारों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने पेरिस के पास सेंट डेनिस के एक अपार्टमेंट में धावा बोला। पुलिस को यहां अबाउद के छुपे होने की सूचना थी। सबसे पहले वहां डॉग स्ववॉड का सदस्य डीजल को अपार्टमेंट के अंदर भेजा गया जहां महिला फिदायीन ने खुद को उड़ाने से पहले डीजल पर एके -47 से फायरिंग कर दी जिससे विस्फोट के साथ ही डीजल के परखच्चे उड़ जाने से वह मारा गया। करीब घंटेभर की मुठभंड़ के बाद एक महिला ने खुद को बम से उड़ा लिया। पर गोलाबारी जारी रही जो आठ घंटे तक चली। इस बीच एक व्यक्ति ने खुद को गोली मार ली। भारत में फ्रांस के राजदूत फ्रांस्वा रिचियर ने बताया कि खुदखुशी करने वाले व्यक्तियों में पेरिस हमले का मास्टरमांइड अबाउद ही था और फिदायीन महिला उसकी पत्नी थी। पेरिस हमले में तकरीबन 132 लोग मारे गए थे।

मदद: - फ्रांस ने पहली बार यूरोपीय देशों से सैनिक मदद मांगी। विश्व युद्ध के बाद पहली दफा रूस से भी हाथ मिलाया। पुतिन ने अपनी सेना और वायुसेना को हर संभव मदद के निर्देश दिए। ब्रिटेन ने अपना नौसेना जहाज एचएमएस डिफेंडर को मिडिल-ईस्ट में भेजा। ताकि आईएस पर हमले तेज हो सके। आईएस के गढ़ रक्का पर में हमला कर 33 आतंकियों को मार गिराया।

गुनहगार: - फ्रांसीसी गुप्तचर सेवा ने एक बेल्जियाई नागरिक अब्देल-हामिद अबाउद को पेरिस हमले का मास्टरमांइड करार दिया है। इस कांड में उसकी भूमिका काफी बड़ी है। सात में से चार हमलावर, जो इस कांड में मारे गए है वे फ्रांस के ही हैं। पांचवा जाक संभवत: एक सीरियाई था, वह शरणार्थी के भेष में ग्रीस पहुंचा और कई हफ्तों बाद उसने पेरिस में इस बमबारी को अजांम दे दिया। इसमें एक महिला भी शामिल थी। पेरिस हमले का गुनहगार अबाउद को माना को जा रहा है लेकिन इस विचारधारा की जड़े मध्यपूर्व में पनपी थी। मध्यपूर्व में तेरहवीं शताब्दी के इस्लामी चितंक इब्न तमैय्याह ने कट्‌टरपंथ का जो ककहरा बांचा था, उसका परिणाम आज आईएस के रूप में दिख रहा है। दूसरी तरफ इब्न तमैय्याह को ही मास्टरमांइड बताया जा रहा है जिसने पेरिस में हमला किया। पिछले कुछ दशकों में उसने कई निर्दोषों को जिहाद की भेंट चढ़ाया है। यह आज के आतंक और नफरत की नई परिभाषा है। हर शांतिप्रिय मुसलमान के पास इन्हें नकारने के वाजिब कारण होते है। जैसे इब्न तमैय्याह को पैगम्बर की उपेक्षा के लिए और अलवहाब को तमैय्याह का साथ देने के लिए। आठ आतंकियों में से एक आतंकी फ्रांसीसी नागरिक है, जो पेरिस से महज 32 किमी दूर रहता था। दो के पास से मिस्र व सीरिया का पासपोर्ट मिला है। तीन आतंकियों का बेल्जियम से संबंध है।

आईएसआईएस: - जब अमरीका के राष्ट्रपति जार्ज बुश ने इराक पर हमला किया था तब कुछ यूरोपीय मुल्क अमरीका के साथ थे। जर्मनी, फ्रांस ने साथ नहीं दिया पर इराक में हमले के बाद लीबिया, सीरिया, ट्‌यूनीशिया, यमन जैसे मध्य पूर्व के इलाकों में पश्चिम के देशों की गलत नीतियों के कारण से ही आईएस पनपा है।

इसकी शुरूआत इराक, सीरिया और तुर्की में सक्रिय 2004 में गठित हुए संगठन इस्लामिक स्टेट ऑॅफ इराक एण्ड लेवेण्ट (आईएसआईएल) का 2009 में नाम बदलकर आईएसआईएस हुआ। इसके आतंकियों ने तेल के कुंओं के लिए विख्यात मोसूल शहर पर 10 जून 2014 को कब्जा करने के बाद इराक के एक बड़े हिस्से में कब्जा कर लिया। गत वर्ष 20 जून 2014 को संगठन के सरगना अबु बक्र अल बगदादी ने सीरिया के पूर्वी व इराक के पश्चिमी क्षेत्र को स्वतंत्र इस्लामिक राष्ट्र घोषित करके खुद को मुसलमानों का खलीफा घोषित कर दिया।

दुनियाभर में आतंक का पर्याय बना इस्लामिक स्टेट पेरिस हमलों के बाद अब दुनिया के सामने खुल कर आ गया है। रिपोर्ट के अनुसार इस आतंकी संगठन के पास दो अरब अमरीकी डालर यानी लगभग 12, 634 करोड़ रुपए से ज्यादा संपति बताई है। कमाई सबसे बड़ा साधन है इसकी कमाई तेल की कालाबाजारी हैं।

अनजान: - दुनियाभर में आतंकी संगठन आईएसआईएस ने आतंक मचा रखा है। चाहे वह पेरिस हो मिस्र हो माली, वह हर जगह मौजूद है। पूरे विश्व में उसके समर्थक विद्यमान है। दुनियाभर से इसको जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए कई राष्ट्र प्रयासरत है। विश्वभर के लोग इसके बारे में क्या जानते है इसके लिए एजेंसी प्यू रिसर्च ने मुस्लिम बहुत देशों में एक सर्वे किया है। जिसके परिणाम में लेबनान में शत प्रतिशत लोगों ने इस आईएसआईएस का विरोध किया है। इसके बाद इजरायल में 97 प्रतिशत विरोध में तो 1 प्रतिशत समर्थन में व 2 प्रतिशत अनिर्णय स्थिति में रहे है। जॉर्डन में 94 प्रतिशत विरोध में, 3 प्रतिशत समर्थन में तो 4 प्रतिशत अनिर्णय की स्थिति में रहे। सबसे चौकानें वाले परिणाम पाकिस्तान से आए जहां पर 62 प्रतिशत लोगों ने कोई स्पष्ट मत व्यक्त नहीं किया और अनिर्णय की स्थिति में रहे। 28 प्रतिशत पाकिस्तानी विरोध में रहे। जबकि 9 प्रतिशत आईआईएस के समर्थन में रहे। सर्वे के परिणाम के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के सवाल पूछे जाने लगे। अन्य कारण: - आईएसआईएस संगठन को बनने के लिए दो सबसे बड़े कारण है-

  • पहला इराक में सद्दाम हुसैन के खात्मे के लिए अमरीकी फौजी कार्रवाई हुई। इसके बाद से ही वहां इस्लामिक कट्टरपंथियों के पनपने की जमीन तैयार हुई। शिया सरकार बनाने के अमरीकी प्रयासों ने समूचे इराक में आपसी मतभेद करवा दिए। जिससे परिणाम यह हुआ कि शिया व सुन्नियों के अलग-अलग संगठन एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए। सद्दाम की मौत के बाद सुन्नी खुद को कमजोर महसूस करने लगे।
  • दूसरा बड़ा कारण सीरिया का गृहयुद्ध रहा। वर्ष 2011 में आईएसआईएस ने जब इस युद्ध में भागीदारी दिखाई तो यह संगठन और प्रभावी हो गया। एक तरह से कहा जाए जो पश्चिमी ताकते ही अपने-अपने स्वार्थो के कारण इस संगठन को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार रही हैं। अमरीका, टर्की, फ्रांस, सऊउी अरब, ब्रिटेन, सरीखे देशों ने विरोधी गुटों का साथ देकर इसे और खूंखार आतंकी संगठन बनाने का काम किया है। आतंकवाद को पनपने देने के सामाजिक कारणों पर भी गौर किया जाना जरूरी है। समुदायों के आधार पर बांटने से तो हम आतंक को कम करने के बजाए बढ़ाने का ही काम करेंगे। भारत के सामने इस्लाम प्रेरित आतंकवाद का खतरा तो है, लेकिन इसका उद्गम पाकिस्तान में है, जिसके पीछे लश्कर और पाक सेना व आईएसआईएस की नफरत है। भारत में 15 करोड़ की मुस्लि आबादी में केवल चार संदिग्ध पकड़े गए हैं, जो या तो आईएसआईएस में गए थे या इसके लिए प्रयासरत थे।

भारत: - को आईएसआईएस संगठन के बारे में अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है लेकिन हमारे लिए यह चुनौती तो है ही। वैस भी दुनिया के आतंक प्रभावित देशों में भारत का नाम भी आता है। फिर भी अनेकता में एकता वाली संस्कृति हमारे यहां पर मौजूद है। इसलिए यह देश के लिए बड़ा खतरा नहीं है फिर भी इसे हमें हल्कें में नहीं लेना चाहिए इसके लिए जरूरी है सत्ता में बैठे लोग भी धर्म का इस्तमाल करने से परहेज करें। देश की छवि अच्छी होने से हम आतंकियों से मुकाबला करते आए है और आगे भी करते रहेंगे। अच्छी छवि ही हमारे देश की पहचान है।

अवधारणा: - तमैय्याह की अवधारणा उसके समय में नकार दी गई। उसे पांखडी करार दे दिया गया। जेल तक में डाल दिया गया। परंतु तमैय्याह की अवधारणा अवलंबियों को लगातार आकर्षित करती रही। इसका सबसे प्रसिद्ध अनुयायी गुट था। इब्न अब्द अलवहाब, जो कि 18 वीं सदी में बनाया गया। जो वहाबी के नाम से जाना जाता है। चार सदी बाद 14 वीं सदी में नकार दिया गया।

जिहाद: - सीरियाई फ्रांस को निशाना बना सकते हैं, क्योंकि उसने उनके देश में बमबारी की थी। ’द इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया’ (आईएसआईएस) ने गर्व के साथ दावा किया है कि उन्होंने पेरिस में जिहाद छेड़ा है। आईएस ही एकमात्र हमलावर है। यहां क्या और कौन महत्वपूर्ण नहीं बल्कि जरूरी यह है कि ऐसा हमला करने का गुट बनाया किसने? 14 वीं सदी का इस्लामिक विद्वान जिसने जिहाद की विचारधारा को पुनस्थापित किया वह है इब्न तमैय्याह थे। पैगम्बर मुहम्मद के जमाने में जिहाद का मतलब मुस्लिमों का वह आंदोलन था, जिससे पूरी दुनिया में इस्लाम का प्रचार और उसकी शक्ति को मानने के लिए संघर्ष छेड़ा जाए। 1744 में इस्लामिक इतिहास में एक नया मोड़ यह आया कि जब अल वहाब मुहम्मद एक प्रसिद्ध लड़ाके इब्न सऊद के साथ मिल गया तो एक ताकतवर अनीजा प्रजाति पैदा हुई। उन्होंने एक दूसरे को पहचान दी। सऊद को धर्मनिरपेक्ष नेता (इमिर) माना गया तथा अल-वहाब को धार्मिक प्रमुख (इमाम) माना गया। सऊउी अरब के शासक सऊद के वंशज है। दुनियाभर के जिहादी इस ओर आकर्षित हो रहे है। इन्हें पैसा व समर्थन दोनों मिल रहा है। पर यह जिहाद हथाियारों के बिना ही है।

हकीकत: - तो यह है कि आतंककारियों को किसी एक समुदाय से जाड़ना भी नहीं चाहिए क्योंकि उनका कोई धर्म इमान नहीं होता है न ही वह हिंदू हो सकता है, न मुसलमान हो सकता है, न सिख हो सकता है, और न वह ईसाई हो कसता हैं। अर्थात हर तरफ से आतंंकियों का कोई धर्म नहीं होता है। बेवजह किसी की हत्याएं करना या आतंक फेलाना किसी भी धर्म में नहीं लिखा होता हैं।

उपसंहार: - जब तक दुनिया का ध्यान जिहाद के नाम पर आतंक फेलाने के लिए किसी न किसी गुट पर लगा रहेगा। इसके सही कारण का पता नहीं लगाया जा सकेगा। तब तक एक गुट कमजोर होगा तो दूसरा ताकतवर जैसे अलकायदा कमजोर पड़ा तो आईएस ताकतवर। पर अगर यह आतंक हो ही ना तो कितना अच्छा होगा। क्या हर जगह किसी भी वजह से आतंक फेलाना जरूरी है? नही, ं क्योंकि दुनिया को कोई भी व्यक्ति यही चाहेगा कि उसके वतन में अमन, चैन, व शांति हो जिससे सब लोग खुश होकर एकसाथ रह सके। पर आतंक ऐसा शब्द है जो सबके मन में डर के रूप में समाया हुआ है इसी डर को हमें खत्म करना होगा। क्योंकि हम एक मे से ही किसी एक आतंक का जन्म होता है जो तबाही का कारण बनता है।

- Published on: December 17, 2015