विशिष्ट पहचान संख्या : आधार (Unique Identification Number Aadhar Card - In Hindi - 2014) [ Current Affairs ]

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प्रस्तावना: सूचना एवं संचार क्रान्ति के इस युग में यदि लोगों को अपनी पहचान को लेकर अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़े तो इससे निश्चित तौर पर न केवल देश की तरक्की में बाधा पहुँचेगी बल्कि शान्ति एवं सुव्यवस्था कायम करना भी कठिन होगा। व्यक्ति की पहचान से संबंधित मामला उसके रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा होता है। जैसे बैंक में खाता खुलवाना हो, पासपोर्ट या ड्राईविंग लाईसेन्स बनवाना हो, उपयुक्त पहचान पत्र के अभाव में इन कार्यों को पूरा करना सम्भव नहीं होता। पहचान पत्र की इन्हीं उपयोगिताओं एवं विभिन्न प्रक्रियाओं की जटिलताओं के कारण इससे संबंधित जालसाजी देश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। कुछ लोग दूसरे व्यक्तियों के जाली पहचान पत्र बनाकर विभिन्न प्रकार की सुविधाओं का लाभ उठा लेते हैं। इससे वास्तविक व्यक्ति को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं सब समस्याओं को ध्यान में रखकर लोगों के लिए एक ऐसा पहचान पत्र निर्मित करने की आवश्यकता थी, जिससे उपरोक्त समस्याओं का पूर्णत: समाधान हो सके। इन समस्याओं के समाधान एवं भारत के लोगों को एक विशिष्ट पहचान देने के क्रम में एक सार्थ्का प्रयास है ‘विशिष्ट पहचान संख्या - आधार’। यह भारत के लोगों को न केवल पहचान संबंधी परेशानियों से छुटकारा दिलायेगा, बल्कि इससे भ्रष्टाचार के नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।

आधार कार्ड विकल्प या वैकल्पिक के रूप में

यूनिक आईडेन्टिफिकेशन ऑथोरिटी (यू.आई.डी.ए.) दव्ारा भारत के सभी निवासियों को जारी की जाने वाली 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या को ‘आधार’ नाम दिया गया है। इस संख्या को केन्द्रीय डाटाबेस में संरक्षित कर इसे व्यक्ति की मूल जनसांख्यिकीय एवं बायोमैट्रिक सूचनाओं, जैसे उसकी फोटो, फिंगर प्रिन्ट एवं आयरस (आँखों की पुतली) की छाप से सम्बद्ध किया जायेगा। व्यक्ति को दी जाने वाली संख्या यादृच्छ तरीके से तय की जाएगी, किसी जाति, क्षेत्र, धर्म इत्यादि के वर्गीकरण के आधार पर इसे जारी नहीं किया जाएगा। ‘आधार’ व्यक्ति की विशिष्ट पहचान व्यक्त करने वाली एक संख्या है, न कि किसी प्रकार का अन्य कार्ड। यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए जारी किया जाएगा। इसके लिए ऊपरी आयु की कोई सीमा नहीं है, किन्तु न्यूनतम आयु 15 वर्ष निर्धारित की गई है। इसे प्राप्त करना वैकल्पिक है, न कि आवश्यक अर्थात् यह व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह अपने लिए ‘आधार’ बनवाए या नहीं। यह प्रत्येक व्यक्ति को जारी किया जा सकता है, भले ही उसके पास पहले से कोई अन्य पहचान पत्र हो या नहीं। चुनाव में मतदान से लेकर बैंक के क्रियाकलापों एवं अन्य कई विभिन्न कार्यों में इसका उपयोग हो सकेगा।

आधार कार्ड की आवश्यकता

योजना आयोग ने सर्वप्रथम नागरिकों को विशिष्ट पहचान पत्र जारी करने की आवश्यकता महसूस की थी। आयोग का कहना था कि इससे कल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुँचाने में अधिक मदद मिलेगी तथा सरकार को भी विभिन्न योजनाओं के निरीक्षण में इससे मदद मिलेगी। इसके बाद वर्ष 2006 में इस पर कार्य तक प्रारम्भ हुआ, जब संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने 3 मार्च, 2006 को गरीबी रेखा से नीचे (बी.पी.एल.) के परिवाराेें के लिए विशिष्ट पहचान (यूनिक आईडेन्टिफिकेशन) प्रोजेक्ट को मंजुरी प्रदान की गई। इसके बाद इससे संबंधित मुद्दों पर वर्ष 2008 तक योजना आयोग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग एवं भारत सरकार के अधिकारिक मंत्रियों के बीच बैठकें होती रही है। 4 नवम्बर, 2008 को भारत सरकार के अधिकारिक मंत्रियों के समूह की चौथी बैठक में यूनिक आईडेन्टिफिकेशन ऑथोरिटी ऑफ इण्डिया (यू.आई.डी.ए.आई.) नामक संस्था के गठन का निर्माण लिया गया एवं 28 जनवरी, 2009 को योजना आयोग के अन्तर्गत इसका गठन किया गया। यू.आई.डी.ए.आई. पर गठित प्रधान मंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह ने 2 जुलाई, 2009 को श्री नन्दन नीलेकजी को यू.आई.डी.ए.आई. का अध्यक्ष नियुक्त कर उन्हें अगले पाँच वर्षों के लिए केबिनेट मंत्री का दर्जा प्रदान किया, जिन्होंने 23 जुलाई, 2009 को इस पद पर कार्य करना प्रारम्भ किया। आज हर कार्य के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता पड़ती है। आधार कार्ड से प्रत्येक व्यक्ति की पहचान होती है व हर कार्य को पूरा करने पर आसानी होती है। नौकरी पाने में आसानी होती है। आज वर्तमान में आधार कार्ड का महत्व इतना बढ़ गया है कि हर क्षेत्र विभाग में इसकी आवश्यकता पड़ती है।

आधार कार्ड का निशान

प्रधान मंत्री की अध्यक्षता व केबिनेट कमेटी यू.आई.डी.ए.आई. से संबंधित योजनाओं, नीतियों, कार्यक्रमों इत्यादि मामलों पर नजर रखती है ताकि ऑथोरिटी अपने लक्ष्यों को निर्धारित समय में पूरा कर सके। ऑथोरिटी की योजना 2015-16 तक 60 करोड़ विशिष्ट पहचान संख्या जारी करने का है। यह संख्या विभिन्न रजिस्ट्रार एजेन्सियों दव्ारा जारी की जायेगी। बैंक ऑफ इण्डिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, सेन्ट्रल बैंक, यूनाईटेड बैंक ऑफ इण्डिया, कॉर्पोरेशन बैंक, इण्डियान बैंक, पंजाब एण्ड सिन्ध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इण्डिया, यूनियन बैंक, कैनेररा बैंक जैसे वित्तीय संस्थानों को रजिस्ट्रार एजेन्सियों के रूप में विशेष पहचान संख्या जारी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आधार के लिए सूर्य के मध्य अँगुली का निशान वाला लोगों जारी किया गयाहै। सूर्य को तेज के प्रतीक के रूप में एवं अँगुली के निशान को व्यक्ति की विशिष्ट पहचान के रूप में शामिल किया गया है।

आधार कार्ड का नाम जारी करना

पहले ‘आधार’ को विशिष्ट पहचान संख्या - यूनिट आईडेन्टिफिकेशन नम्बर (यू.आई.डी.) कहा जाता था, बाद में इसे बदलकर ‘आधार’ नाम दिया गया। यू.आई.डी.ए. के अध्यक्ष नन्दन नीलेकणी के अनुसार कई कारणों से इसके नाम को बदलने की आवश्यकता पड़ी। पहले इस प्रोजेक्ट को लोग न तो सही तरह से समझ पा रहे थे और न ही इसका नाम सही तरीके से ले पा रहे थे। कोई इसे आई.यू.डी. कहता था, तो कोई डी.यू.आई.। आम आदमी के लिए विशेष पहचान संख्या नाम भी काफी लम्बी था। इसलिए एक ऐसे नाम की आवश्यकता थी, जिसे बोलने में आम आदमी को भी दिक्कत न हो और उसमें राष्ट्रीय अपील भी हो तथा देश का आम आदमी भी यह जान सकें कि प्रोजेक्ट वास्वत में क्या है एवं वह इससे किस तरह से जुड़ा है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर इसका नाम ‘आधार’ रखा गयाहै। ‘आधार’ यानि जो व्यक्ति के जीवन की बुनियाद है। इस ‘आधार’ से वह जीवन से जुड़े कई कार्य कर सकता है।

आधार कार्ड बनवाना

यू.आई.डी.ए. दव्ारा तय पहचान प्रक्रिया को पूरा करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, जो भारत का निवासी हो, ‘आधार’ प्रापत कर सकता है। ‘आधार’ प्राप्त करने की प्रक्रिया संबंधी विज्ञापन स्थानीय मीडिया दव्ारा जारी किया जाएगा, जिसके बाद निवासियों को नजदीक के पंजीयन कैम्प में ‘आधार’ के लिए पंजीकरण करवाना होगा। व्यक्ति को अपने साथ पहचान संबंधी कुछ दस्तावेज भी ले जाना होगा, जिसकी जानकारी मीडिया दव्ारा, समाचार पत्रों दव्ारा विज्ञापन दिया जायेगा। ‘आधार’ के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया के दौरान, व्यक्ति को अपनी दस अंगुलियों एवं आईरिस (आँख की पुतली) की बायोमैट्रिक स्केनिंग करवानी होगी, इसके बाद उसकी फोटो लेकर उसे एक पंजीयन संख्या दी जायेगी। इस तरह पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद व्यक्ति को 20-30 दिनों के भीतर एक-एक आधार संख्या जारी कर दी जायेगी।

महाराष्ट्र के नन्दुरबार जिले के तेम्भली गाँव की महिला निवासी रंजना सोनावने ‘आधार’ प्राप्त करने वाली भारत की प्रथम व्यक्ति बनी। उसे 29 सितम्बर, 2010 को आधार संख्या 7824 7431 7884 प्रदान की गई।

आधार कार्ड उपयोगीता

सर्वव्थापकता एवं संरचना दव्ारा व्यक्ति की पहचान ‘आधार’ आधारित पहचान की दो मुख्य खूबियाँ है। सर्वव्थापकता से तात्पर्य यह है कि इसके आधार पर देश की सभी प्रकार की सेवाओं में इसका उपयोग किया जा सकता है। इससे लोगों को बैंक खाता खोलने, पासपोर्ट बनवाने एवं ड्राईविंग लाईसेन्स बनवाने के लिए बार-बार अपनी पहचान साबित करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। ‘आधार’ सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों तथा निवासियों के बीच विश्वास को बढ़ाने में सहायक साबित होगा। इसे प्राप्त करने के बाद सार्वजनिक या निजी क्षेत्र पहचान पत्र नहीं होने के नाम पर किसी निवासी को कोई सुविधा प्रदान करने से इन्कार नहीं कर पायेंगे। इससे गरीबों एवं वंचितों को अत्यधिक लाभ मिलेगा, क्योंकि इसके बाद बैंक या सरकार दव्ारा दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ वे आसानी से उठा पायेंगे। यू.आई.डी.ए.आई. के केन्द्रीकृत प्रौद्योगिक संरचना दव्ारा कभी भी, कहीं भी एवं किसी भी तरह से ‘आधार’ प्राप्त व्यक्ति की प्रामाणिकता के संबंध में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

उपसंहार

आधार से सबसे बड़ा लाभ यह मिलेगा कि यह भ्रष्टाचार का समूल नाश करने में अत्यधिक मददगार साबित होगा। पहले किसी व्यक्ति का जाली पहचान पत्र बनवाकर कोई अन्य व्यक्ति विभिन्न प्रकार की सुविधाएँ एवं लाभ प्राप्त करने में अवैध रूप से कामयाब हो जाता था। अब इस प्रकार की जालसाजी पूर्णत: समाप्त हो जायेगी। इस तरह कहा जा सकता है कि ‘आधार’ भारतीय जीवन का ऐसा आधार होगा, जो देश की प्रगति, सुख-शान्ति की वृद्धि एवं भ्रष्टाचार की समाप्ति में अहम् भूमिका निभायेगा। आधार कार्ड प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है। यही उसकी पहचान का सबसे बड़ा ‘आधार’ है।

- Published on: November 17, 2014