ब्रिटेन का अगस्ता वैस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाला (Augusta Westland Helicopter Case - in Hindi) [ Current Affairs ]

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प्रस्तावना: - रक्षा उपकरणों से संबधित सौदों का विवादों से चोली-दामन का साथ है। अधिकतर सौदों में दलाली कितनी ली गई और किसने ली सुर्खियों में आती है लेकिन इसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि ये आरोप केवल राजनीतिक होकर रह जाते हैं। सरकारें आती हैं और चली जाती हैं लेकिन साबित कुछ नहीं हो पाता हैं। सवाल इतना-सा रह जाता है कि दलाली लेने वालों ने कहीं देश की सुरक्षा का सौदा तो नहीं कर डाला? हाल ही में ब्रिटेन की कंपनी अगस्ता वैस्टलैंड हेलिकॉप्टर खरीद में दलाली लेने का मामला चर्चा में आया हैं लेकिन ऐसा लग रहा है कि इस मामले का भी केवल राजनीतिक प्रयोग ही हो रहा हैं। सरकार जांचकर बताए कि किस-किसने दलाली ली और दोषियों पर सख्त कार्रवाई भी करें। इससे आगे अब देश यह जानना चाहता है कि इन रक्षा सौदों में दलाली आखिर कैसे रूके?

अगस्ता: - अगस्ता हेलिकॉप्टर खरीद में हुई गड़बड़ियां और भ्रष्टाचार बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी मौजूदा सरकार को पूर्णतया निष्पक्ष रूप से जांच करनी चाहिए। पूर्व वायुसेना प्रमुख एस. कृष्णासामी के कार्यकाल के दौरान इस तरह के अगस्ता हेलिकॉप्टर खरीद की प्रक्रिया चल रही थी। 12 साल पहले जब उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था। उस समय वेरी इंर्पोरटेंट परसन (वीवीआईपी) (बहुत ही महत्वपर्ण व्यक्ति) हेलिकॉप्टर खरीद के लिए व्यापार लेन-देन की प्रक्रिया चल रही थी और ’सिंगल वेंडर’ (एकल संपत्ति बेचने) की स्थिति से बचने के लिए तकनीकी काम हो रहा था। वीवीआईपी हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए पहले तय हुई उड़ान की ऊंचाई सीमा को कम किया गया। इस बीच दिसंबर 2004 में कृष्णासामी सेवानिवृत हो गये थे। उसके बाद दोबारा ऐसे हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए प्रक्रिया शुरू हुई। अब गड़बड़ कहां हुई, इसके लिए फिलहाल अटकले ही लगाई जा रही हैं।

पीएम: - इसमें अहम बिंदू यह है कि वीवीआईपी के लिए ऐसे वाहनों की खरीद के लिए पीएमओ से सलाह मशविरा, या बातचीत की जाती है। क्यूआर (क्वॉलिटेटिव रिक्वायरमेंट) (मजबूती की निर्भरता) के लिए प्रधान मंत्री से पूछा जाता हैं। वायुसेना इस वाहन के तकनीकी प्रदर्शन और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी बिंदुओं को स्पष्ट करती है। मसलन कोई हेलिकॉप्टर कितना ऊंचा और कितनी दूर तक और कितने समय तक उड़ सकता है। ये सब पीएमओ से पूछा जाता है कि उनकी क्या जरूरते हैं, हेलिकॉप्टर का वजन क्या हो सकता है। किस तरह के हेलीपैड की जरूरत होगी, यह सब चर्चा एयरफोर्स (वायुसेना) और पीएमओ के बीच चर्चाएं चलती है।

अगस्ता हेलिकॉप्टर: - अगस्ता हेलिकॉप्टर खरीद में भी यही प्रक्रिया हुई, फिर उसे चुना गया। 2012 में तीन अगस्ता हेलिकॉप्टर भारत को मिल भी गए थे। पर कृष्णासामी के कार्यकाल में छोटे हेलिकॉप्टर खरीद पर विचार कर रहे थे। रूसी और ब्रिटिश हेलिकॉप्टर की सोच रहे थे। कृष्णासामी के समय में अगस्ता हेलिकॉप्टर के बारे में सोचा भी नहीं जा रहा था, क्योंकि यह बहुत बड़ा था। हमें भारत के अनुसार से छोटे हेलिकॉप्टर की दरकार थी। वीवीआईपी की जरूरतों के अनुसार से यह पर्याप्त था। हमने रूसी हेलिकॉप्टर का सुझाव दिया। उनका प्रदर्शन लंबी दूरी और ऊंचाई के लिए लिहाज से अच्छा रहा है।

विशेषज्ञता: - वैसे तो हमारी रक्षा खरीद के बारे में हरेक चीज पारदर्शी होती है। सब कुछ कागजात रखने की फाइल पर लिखा जाता है। पीएमओ, एयरफोर्स (वायुसेना), आर्मी अध्यक्ष या रक्षा मंत्रालय में हर जगह अपनी-अपनी फाइल में लिखा की जाता है। बिना इसके आगे कोई निर्णय लिया ही नहीं जाता है। बोफोर्स के समय कृष्णासामी सेवा में थे, उसकी खरीद प्रक्रिया सवालों के घेरे में थी। पर तब की तुलना में आज हमारी खरीद प्रक्रियाएं बहुत सुधर गई हैं। हर जगह काफी ’चैक एंड बैलेंस’ (जांच और संतुलन) हैं। तकनीकी विशेषज्ञता बढ़ गई है। फिर भी अगस्ता खरीद में हुई गड़बड़ शर्मनाक है। कृष्णा जी को याद है कि बड़ी बात यह नहीं लगती कि यह किसने की बल्कि यह गड़बड़ी अब भी कहां हो रही है, उसे बाहर लाने की जरूरत है। किसी दल या सरकार तक सीमित रखने की बजाय सिस्टम के अंदर खामी को फोकस करने की जरूरत हैं।

दलाली: - राजनीतिक तंत्र यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकता है कि दलालों को वैध कर देने से समस्या का समाधान निकल जाएगा। इससे बात से कृष्णा जी सहमत नहीं हैं। भारतीय परिप्रेक्ष्य मे हमारा तंत्र इतना परिपक्व नहीं हुआ है। सवाल है कि जब भी कोई गड़बड़ी हो तो उन व्यक्तियों को निशाने पर लिया जाए। वे फौरन सलाखों के पीछे हों। जांच में ही बरसों नहीं गुजरने चाहिए। हमारी कार्य को पुख्ता क्यों नहीं किया जा सकता है। खासतौर पर, रक्षा तंत्र का प्रदर्शन का काम तो पहले स्थान पर रहना चाहिए। रक्षा खरीद से जुड़ी फाइलों की नियमित जांच होनी चाहिए। सभा होती रहना चाहिए। अगर जब भी किसी फाइल में गड़बड़ नजर आए तो वहीं कार्रवाई हो, 10 - 10 साल का समय कार्रवाई में लग जाता है। अगर गड़बड़ है तो तथ्यों को सामने रखें और तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है। इतने बड़े-बड़े आरोप लगते हैं पर कार्रवाई और सजा किसको हुई? सरकार वादा करे कि अगस्ता में हुए भ्रष्टाचार की फाइलें सार्वजनिक की जाएंगी। जो भी तकनीकी निर्णय अगस्ता वैस्टलैंड के लिए बदले गए वे बाहर आ जाएंगे।

घोटाला: - निम्न घोटाले हैं-

  • पनडुब्बी घोटाला 1987- नेताओं और नौसेना अधिकारियों पर पनडुब्बी सौदे में 20 करोड़ रु. दलाली का आरोप पूर्व नौसेना प्रमुख एसएम नंदा पर लगे।
  • बोफोर्स घोटाला 1991- स्वीडन से 155 बोफोर्स तोपें खरीद का सौदा हुआ। 64 करोड़ रु. की दलाली के लेन-देन में पीएम राजीव गांधी पर आरोप लगे।
  • बराक मिसाइल 1996 - 97- 1150 करोड़ रु. में इसाइल से 11 मिसाइल खरीद पर आपत्ति उठी। समता पार्टी के आरके जैन की गिरप्तारी हुई।
  • ताबूत घोटाला 1899- कारगिल युद्ध में शहीदों के लिए 500 ताबूत की खरीद हुई। तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फार्नांडीस पर घोटाले के आरोप लगे। फिर क्लीन चिट (बेईमान से मुक्ति का सफाई पत्र) मिली।

सौदा: - निम्न सौदे हैं-

1999 - 2000- वायुसेना ने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फार्नांडीस के बार-बार सियाचीन दौरे को ध्यान में रखते हुए 18 हजार फीट तक उड़ने वाले वीवीआईपी हेलिकॉप्टर खरीद पर प्रस्ताव दिया।

2003- तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बृजेश मिश्रा ने उड़ान की ऊंचाई 18 हजार फीट से कम कर 15 हजार फीट की अनुशंसा की।

2006- संशोधित जरूरत के बाद दोबारा प्रस्ताव आया। सिकोर सकाई और अगस्ता वैस्टलेंड में थी प्रतिस्पर्धा। अगस्ता ने लगाई सस्ती बोली।

2008 - 09- अगस्ता से हेलिकाप्टर खरीद पर कीमत को लेकर वार्ता का दौर शुरू।

2010- अगस्ता कंपनी से वीवीआईपी हेलिकॉप्टर खरीद का सौदा हुआ मंजुर।

2012- बारह हेलिकॉप्टर में से पहली किश्त के रूप में तीन हेलिकॉप्टर भारत को मिले।

2014- भारत ने अगस्ता दव्ारा हेलिकॉप्टर आपूर्ति के लिए दलाली देने के खुलासे के बाद सौदा रद्द किया।

रक्षा उपकरण: - जब भी रक्षा उपकरणों से संबंधित सौदों में दलाली की बात आती है तो स्वाभाविक तौर से चिंता यह होती कि दलाली खाकर क्या देश की सुरक्षा के साथ समझौता कर लिया गया हैं? पूर्व में बोर्फास तोप सौदे को लेकर भी कहा जाने लगा था कि यह तोप तकनीकी रूप से भारतीय जरूरतों के मुताबिक सक्षम नहीं है। करगिल युद्ध में इन तोपों को इस्तेमाल के बाद सच्चाई का पता लगा कि इन तोपों के इस्तेमाल के कारण ही हम बेहतर स्थिति में थे।

सर्तकता: - रक्षा उपकरण संबंधी सौदों में काफी सतर्कता बरती जाती है। जनसमूह के लोग संबंधित लोगों से संपर्क करते हैं और भारतीय सेना की जरूरत के मुताबिक साम्रगी की खरीद होती है। एक-एक सौदे में वर्षों लग जाते हैं। अब तो इतनी अधिक सावधानी बरती जाने लगी है कि सौदे को लेकर जरा सी भी हेराफेरी की अफवाह पर ही सौदे रद्द कर दिए जाते हैं और कंपनी को काली सूची में डाल दिया जाता है। अगस्ता वैस्टलेंड हेलिकॉप्टर से संबंधित समझौते में ऐसा ही हुआ।। इसी तरह कई ओर भी जनसमूह हैं, जिन्हें भारत की ओर से काली सूची में डाल दिया गया है। मामूली सी बात पर रक्षा उपकरण तैयार करने वाली कंपनी (जनसमूह) को यदि काली सूची में डाल देने से हम हमारे दुश्मनों के मुकाबले तकनीकी तौर पर काफी पिछड़ने चले जाते हैं। कई बार रक्षा सौदों को लेकर केवल आरोप लगाए जाते हैं और बाद में पता लगता है कि इन आरोपों को साबित करना बेहद कठिन है। ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर काली सूची में डाल दी गई जनसमूहों से हो सकने वाले बेहतर समझौते नहीं हो पाते हैं। इस तरह कुल मिलाकर हानि देश की ही होती है। रक्षा उपकरण बेचने के लिए जनसमूहों के बीच गमासान प्रतिस्पर्धा होती है ऐसे में यदि किसी एक जनसमूह के साथ सौदा होता है तो अन्य प्रतिस्पर्धी जनसमूह यह दिखाने की कोशिश करने लगती है कि सौदे में कुछ न कुछ हेराफेरी जरूर की गई है। इस तरह की अफवाहों पर खबरें भी बनती हैं और बाद में कुछ साबित नहीं हो पाता है।

पनडुब्बी: - हमने जर्मनी से टाइप-209 पनडुब्बियों का सौदा किया था दो पनडुब्बियां सीधे ही भारत आनी थी। एवं यह टुकड़ों में भेजी जानी थी। ताकि उसकी तकनीक समझ में आ जाए और इस मामले के लिए प्रशिक्षण भी हो जाए। एक पनडुब्बी हमारे यही बनाई जानी थी। दो पनडुब्बियां भारत में आई और फिर इस सौदे गड़बड़ी की खबरें सामने आने लगीं जो सीधे इस सौदें में शामिल थीं, उनकी बदनामी हुई, सौदा रद्द हो गया। बाद में सौदे में कोई गड़बड़ी सामने भी नहीं आई। लेकिन, इस सारी परिस्थिति में हम पनडुब्बी बनाने की तकनीक के मामले में काफी पिछड़ गए। हमें यदि रक्षा सौदे करने हैं तो अन्य देशों की सरकारों के साथ सीधी बातचीत करनी होगी।

सेनि. एडमिरल सुरीश मेहता, रक्षा विशेषज्ञ

देश: - रक्षा सौदे और उससे घोटालों के जुड़ाव का हमारे देश में तो जैसे चोली दामन का साथ हो गया है। यह कोई आज की बात नहीं है प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय से ये घोटाले चल रहे हैं। कभी जीप खरीद घोटाला तो कभी बाफोर्स घोटाला और कभी ताबूतों की खरीद में घोटाला। यानी देखा जाए तो हर पांचवे साल में कोई न कोई घोटाला रक्षा सौदों में सामने आता ही रहा है। रक्षा सौदों में गड़बड़ियों के कारण जो सबसे बड़ा नुकसान हो रहा है, वह यह है कि हमारी सेना का मनोबल कमजोर होने लगा है। सेना को आधुनिक उपकरणों व हथियारों से लैस करने की जरूरत है लेकिन जब कोई सौदा करने की बात आती है तो जिम्मेदार लोग हिचकिचाते हैं। राजनेता और नौकरशाह दोनों को कोई भी कदम उठाने के पहले दस बार सोचना पड़ता है। लेकिन, चिंता की बात यह है कि सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति के अलावा कभी किसी मामले में ठोस परिणाम सामने आए ही नहीं है।

हमारे यहां यह माना जाता है कि करगिल का युद्ध हो या 1962 का भारत-चीन युद्ध, हमारी सेना में आधुनिक उपकरणों की कमी का सवाल उठता आया है। फिर भी देश की सेना अपना फर्ज निभाती रही है। रक्षा सौदों में गड़बड़ियों के ऐसे मामलों पर चर्चा केवल टीवी चैनलों की माप के लिए तो कारगर हो सकती है लेकिन किसी भी लोकातांत्रिक देश के लिए ऐसे मामले कलंकित करने वाले हैं। हेलिकॉप्टर खरीद के जिस सौदे ने इन दिनो बवाल मचाया हुआ है, उसे समझने के लिय यह भी देखना जरूरी होगा कि हमारे यहां रक्षा सौदों की धीमी चाल चल रही है। आज तक यह तय ही नहीं हो पा रहा कि इन सौदों में रिश्वत का आरोप सही है अथवा नहीं। सवाल स्वाभाविक है कि तमाम सावधानी के बावजूद रक्षा सौदों में घोटाते क्यों हाते हैं? सबसे बड़ी वजह यह है कि हमारा देश रक्षा तैयारियों के मामले बहुत ही सुस्त रहा है। आजादी के छह दशक बीतने के बावजूद देश रक्षा सामग्री उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है। केलकर से लेकर रामाराव और बाद में रवीन्द्र गुप्ता कमेटी ने रक्षा उपकरणों को लेकर जितनी भी सिफारिशें कीं, उन पर अमल ही नहीं हुआ। बड़ा कारण यह है कि हमारे देश का सरकारी क्षेत्र, वह चाहे रक्षा अनुसंधान का हो या उत्पादन का, अपनी छाप नहीं छोड़ पाया है। हम दुनिया में हथियारों के सबसे बड़े खरीददार बन गए हैं। इसके बावजूद हमारे देश में कभी यह तैयारी की ही नहीं गई कि स्थानीय स्तर पर भी रक्षा उपकरणों का उत्पादन संभव है। हम न केवल औने-पौने दामों पर हथियार खरीद रहे हैं वरन्‌ उन रोजगारों से भी हाथ धो रहे हैं अत: स्थानीय लोगों को रोजगार की संभावनाओं को भी समाप्त कर रहें हैं। जो हमारे देश में रक्षा उपकरणों का उत्पादन होने पर इस देश के लोगों को मिलता।

राज्यसभा: -अगस्ता घोटाला के मामले में राज्यसभा में पक्ष और विपक्ष के बीच करीब 5 घंटे तक नोकझोक हुई। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और पूर्व मंत्री एटनी आमने-सामने हुए। यूपीए सरकार का पक्ष रखते हुए एंटनी ने कहा कि सौदे की शर्तों में बदलाव पूर्ववती एनडीए सरकार के समय किया गया था। उसी समय वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की खरीद के लिए ऊंचाई के तय मापदंड कम करने (6, 000 से 4, 500 मीटर करने) का फैसला भी किया गया था। जवाब में पर्रिकर ने कहा यूपीए-1 कार्यकाल में शर्तों में बदलाव किया गया। इससे सौदे में 11 की जगह केवल 6 जनसमूह रद्द हो गई। बाद में अकेली अगस्ता ही बची। 3, 600 करोड़ के सौदे में 360 करोड़ की रिश्वत के इस मामले पर चर्चा का अधिसूचना भाजपा ने दिया था। पार्टी सदस्य भूपेंद्र यादव ने चर्चा शुरू की। उन्होंने आरोप लगाया कि हेलिकॉप्टर खरीद के सौदे की शर्तों में गलत तरीके से बदलाव किया। इससे टेडर वाली जनसमूह के बीच प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई।

  • एंटनी का वार- सौदे की शर्तों में बदलाव पूर्ववती एनडीए सरकार के समय किया गया था। हमने सबसे पहले 6 जनसमूह को कालीसूची किया। ये सभी बड़ी कंपनियां (जनसमूह) थीं, लेकिन हमें भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं था।
  • पर्रिकर का वार- मार्च 2005 के बाद जनसमूहों को फायदा पहुंचाने के लिए सौदे की शर्ते बदली गई। यूपीए 1 में हेलिकॉप्टर के केबिन की ऊंचाई की शर्तें बदली गई। पर्रिकर ने कहा कि अगस्ता समझौते में भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि देश जानना चाहता है कि इस भ्रष्टाचार में कौन-कौन शामिल था, किसने समर्थन किया और किसे फायदा हुआ, हम इसे जाने नहीं दे सकते हैं। भूपेंन्द्र के अनुसार परीक्षण जो यहां होना था, वह बाहर किया गया। दाम जो होने चाहिए थे, उससे 6 गुना अधिक तय किए गए। जिसकी अनुमति तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने दी थी। जो हेलिकॉप्टर खरीदे गए उनका प्रशिक्षण भी नहीं हुआ, प्रशिक्षण दूसरे से हुआ।

सीबीबाइ जांच: - 12 फरवरी 2013 को फिनमैक्केनिका के सीईओं की गिरप्तारी के साथ मामला सामने आया। अगले दिन रक्षामंत्री एके एंटनी ने जांच के आदेश दिए। 25 फरवरी को सीबीआई ने पूर्व वायुसेना प्रमुख त्यागी समेंत 11 के खिलाफ जांच शुरू की। बाद में ईडी भी इसमें शामिल हो गई। जनवरी 2014 में सरकार ने समझौता रद्द कर दीया।

अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर समझौते में इटली की अदालत के फेसले से बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें कहा गया कि भारत के पूर्व वायु सेना के मुख्य एसपी त्यागी दोषी हैं। मिलान अपील कोर्ट के फेसले के मुताबिक 2010 में भारत से हुई समझौते के लिए 65 से 100 करोड़ रुपए की रिश्वत दी गई थी। इसका कुछ हिस्सा भारतीय अधिकारियों को भी दिया था। मीडिया विवरण के मुताबिक जनसमूह ने कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी, तब के सुरक्षा सलाहकार एमके नारायण और प्रधानमंत्री मनमाहेन सिंह के बीच सौदे के लिए समझौता किया गया। न्यायालय ने समझौते के पीछे सिग्नोरा गांधी को ड्राइविंग फोर्स (चालान योग्यता सेना) बताया है। सीबीआई ने लगातार वायुसेना के पूर्व प्रमुख एसपी त्यागी से पूछताछ की। वकील गौतम खेतान से भी पूछताछ की गई। खेतान इटली में मिलान न्यायालय ऑफ अपील के फेसले के बाद पहली बार सीबीआई के समझ पेश हुए हैं। वह एयरोमैट्रिक्स कंपनी के परषिद के पूर्व सदस्य हैं। सीबीआई की प्राथमिकी में आरोपी के रूप में दर्ज यह जनसमूह रिश्वत की रकम को दूसरे तरीके से निकालने का काम करती थी। पूछताछ का मुख्य फोकस इतावली बिचौलियों कालरे जिरोसा और गुइदो हेशके से उनके संबंधें पर था। जांच एजेंसी ने आज कुछ सबूत त्यागी के सामने रखे तो उन्होंने फिनमैकेनिका जनसमूह के सीओओ जापा से 2005 में भारत में मुलाकात की बात कबूल की है। उन्होंने कुछ कंपनियों से आर्थिक हित जुड़े होने की बात भी स्वीकार की है। सीबीआई अब त्यागी के विदेश दौरों की खासकर उनके सेवानिवृत के बाद की यात्राओं की जानकारी जुटा रही है।

उधर, विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) ने इटली की इस जनसमूह के भारत में टाटा के साथज्वांइट वेंचर (जुड़े हुए खतरे) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ाने के प्रस्ताव पर अपना फैसला फिलहाल टाल दिया है। सूत्रों ने कहा कि बिचौलियों, इटली की उनकी यात्राओं और निविदा शर्तो में छूट को लेकर कई सवाल किए हैं अगस्ता हेलीकॉप्टर सौदे के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई ने पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी को समन जारी कर दिया। सीबीआई इस मामले में पूर्व वायुसेना उप प्रमुख जेएस गुजराल से भी पूछताछ करेगी। यह पहला मौका है, जब ईडी ने पूर्व वायुसेना प्रमुख को समन जारी किया है। यह समन प्रिर्वेशन आफॅ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत जारी किया गया है। 2007 में वायुसेना प्रमुख पद से सेवानिवृति होने के बाद त्यागी इटली के फ्लोंरेंस, मिलान और 2008 - 09 में वेनिस गए थे। जांच एजेंसी त्यागी के बैंक खातों और अन्य परिसंपतियों की भी जांच कर रही है। भारतीय हाईकोर्ट के समकक्ष मानी जाने वाली मिलान कोर्ट ऑफ अपील्स (न्याय और प्रार्थना) ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी है कि हेलीकॉप्टर निर्माता फिनमेकेनिका और अगस्ता वेस्टलैंड ने किस तरह से इस सौदे को करने के लिए बिचौलियों के जरिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वतें दी थीं? इस मामले में सीबीआई अब तक करीब 100 लोगों के समन जारी कर चुकी है।

मुलाकात: - सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, त्यागी ने 2004 से 2007 के बी अगस्ता वेस्टलैंड जनसमूह के बिचौलिए से सात बार मुलाकात की थी। अगस्ता की इटली आधारित कंपनी फिनमेकेनिका के प्रतिनिधि ने सौदे के लिए 2004 में त्यागी से पहली बार मुलाकात की थी। उस समय त्यागी वायु सेना के उप प्रमुख थे। 2005 में सरकार ने त्यागी को वायुसेना प्रमुख बनाने की घोषणा की। इसके बाद अगस्ता के दो बिचौलियों ने उनसे फिर मुलाकाम की। बेंगलुरु में आयोजित एयर शों (वायु कार्यक्रम) में उनकी फिर बिचौलिए से मुलाकात हुई। 2006 में त्यागी ने दिल्ली में अपने भतीजे के कार्यालय और घर में फिर बिचौलियों से मुलाकात की। त्यागी इसके बाद तीन बार बिचौलियों से मिले। करीब 3, 600 करोड़ रुपए में 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टर का सौदा किया था। इस रद्द हो चुके सौदे के लिए रिश्वत दिए जाने की बात इटली के मिलान न्यायालय में साबित हो चुकी है। सीबीआई ने इस जानकारी के आधार पर ही त्यागी, उनके रिश्तेदार और यूरोपीय बिचौलियों सहित 13 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

आरोप- त्यागी पर आरोप है कि उन्होंने हेलीकॉप्टर की उड़ान की ऊंचाई को 6000 मीटर से घटाकर 4500 मीटर कर दिया था, जिसकी वजह से अगस्ता वेसटलैंड बोली लगाने में शामिल की जा सकी थी। हालांकि वह फैसला एसपीजी और प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के साथ कथित तौर पर विचार विमर्श करके लिया गया था। जिसमें तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायण भी शामिल है। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि हेलीकॉप्टर की सर्विस सीलिंग (वह अधिकतम ऊंचाई, जिस पर कोई हेलीकॉप्टर सामान्य तौर पर काम कर सकता है।) कम करने से ब्रिटेन की कंपनी निविदा की दौड़ में शामिल हो सकी। इसके अभाव में इस कंपनी के हेलीकॉप्टर निविदा जमा कराने के योग्य नहीं होते।

इतावली: - अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में रिश्वत के मामले के बीच विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) ने इतावली जनसमूह के भारतीय संयुक्त उद्यम में एफडीआई बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव पर फैसला टाल दिया है। जनसमूह का भारत में टाटा संस के साथ रोटरक्राप्ट नामक संयुक्त उद्यम है। दोनों जनसमूहों ने यह जॉइंट वेंचर (जुड़े हुए खतरों से) एडब्ल्यू 119 के कई हेलीकॉप्टरों की असेंबली यूनिट (सभा इकाई) लगाने के लिए बनाया है। इसने संयुक्त उद्यम में एफडीआई 17.6 करोड़ रु से 19.64 करोड़ रु करने की मंजूरी मांगी थी। बढ़ी पूंजी पहले ही आ चुकी थी, जबकि 17.6 करोड़ रु की मंजूरी सितंबर 2011 में दी गई थी।

इतावली न्यायालय ने एसपी त्यागी को रिश्वत लेने का दोषी माना है। साथ ही अगस्ता वेस्टलैंड जनसमूह के प्रमुख ऊर्सी व हेलीकॉप्टर निर्माता कंपनी फिनमेक्कनिका को रिश्वत देने का दोषी माना है। ऊर्सी को चार साल की सजा दी है। गौरतब है कि इतावली जनसमूह भारतीय न्यायपालिका के हाईकोर्ट के समकक्ष है।

मिशेल: -अगस्ता सौदे में पूर्व वायुसेना प्रमुख एके ब्राउन का नाम भी जुड़ गया है। जांच एजेंसियां इस सौदे में उनकी भूमिका की जांच कर रही हैं। ब्राउन 31 जुलाई 2011 से 31 दिसंबर 2013 तक वायुसेना प्रमुख रहे थे। अगस्ता केस बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के वकील ने कहा कि उनके कार्यकर्ता भारत लौटने और जांच अधिकारियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। मिशेल ने कहा है कि भारत और इटली के प्रधानमंत्री ने सयुक्त राष्ट्र में अलग से लंबी मीटिंग की, ताकि गांधी परिवार को फंसाया जा सके। और केरल के मछुआरों पर फायरिंग करने वाले इटली के नाविकों को बचाया जा सके यह एक गंभीर विषय है। स्वाभाविक तौर पर भारत और इटली दोनां देशों की सरकारें अपने विपक्षी को निशोन पर रखना चाहिती हैं और उनकी जड़े कमजोर करना चाहती हैं, इसलिए वे इस दिशा में जांच क्यों करेगी। फिर मिशेल जैसे बिचौलिया या दलाल की बात कितनी सही यह तो उससे पूछताछ के बाद ही पता चलेगा। इस सौदे की सच्चाई को दबाने के लिए भारतीय मीडिया को साठ लाख यूरों दिए गए हैं। हर सौदे के रहसया को उजागर होने के पीछे सत्ता और विपक्ष के राजनीतिक दलों और सौदा पाने वाली व न पाने वाली जनसमूहों की प्रतिसपर्धा होती है। लेकिन आरोपो के इस धुंधले के बावजूद यह सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक संस्थाओं का फर्ज है कि जनता के सामने सच आए और दोषियों पर कार्रवाई हो।

अगस्ता हेलिकॉप्टर सौदे का बिचौलिया क्रिश्चियन मिशेल जब भी भारत आता तो नारायण बहादुर उसका ड्राइवर होता था। वह उसे लुटियंस दिल्ली और राजधानी के दक्षिणी भाग में रहने वाले भारतीय और दिदेशी लोगों के पास ले जाता था। दुनियर की कई फंड ट्रांसफर करने वाली सेवाओं से अब तक पैसे ले रहा था। नारायण से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ में ये खुलासे हुए हैं। जांच अधिकारियों के मुताबिक, नारायण से पूछताछ में मिशेल की मौजूदा गतिविधियों को समझने में मदद मिली। अब ईडी और सीबीआई मिशेल के खिलाफ इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाना चाहती हें। नारायण के साथ मिलकर मिशेल करीब चार साल से काम कर रहा था। हाल ही में उसके घर की तलाशी में ईडी को कई अहम दस्तावेज मिले। इनसे घोटाले में मिशेल की भूमिका पता चली। घोटाले में तीन बिचौलियों -कार्लो गैरोसा, गुइदों हाश्के और क्रिशिचयन मिशेल के नाम सामने आए हैं। इन्होंने ही अगस्ता को ठेका दिलवाया। मिशेल ने कहा कि नारायण को दुबई लाना चाहता है वह उसका प्यारा दोस्त है मिशेल का कहना है कि वह नारायण को जीवनभर साथ रखकर उसकी देखभाल करना चाहता है। (ईडी) ने पाया है कि नारायण अब तक मिशेल के संपर्क में था। मिशेल की तरफ से उसे विदेशी वायर सर्विस (तार सेवा) के जरिए भुगतान भी किया जा रहा है।

अगस्ता सौदे के दलाल क्रिश्चियन मिशेल का कहना है कि वह इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया ंगांधी से कभी नहीं मिले। उनकी न ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व रक्षा मंत्री एंटनी से मुलाकात हुई। अबुधाबी में एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में मिशेल ने यह दावा किया। मिशेल ने कहा कि उसने एक बार भारतीय वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी से दिल्ली के जिमखाना मंडल में हाथ मिलाया था। लेकिन इटली के कारोबारी गुइदो हाश्के औ एक अन्य बिचौलिए से उनके संबंधें का पता चला तो उनसे दूरी बना ली। मिशेल यह भी माना है कि राज्यसभा सदस्या स्वामी सौदे के बारे में झूठ नहीं बोल रहे हैं। मिशेल ने कहा कि स्वामी ने वही दस्तावेज से प्रमाणित किया, जो कैग की विवरण में था। लेकिन यह विवरण बहुत जल्दबाजी में तैयार की गई थी। (कैग) एविएशन एक्सपर्ट नहीं हैं। नौकरशाह हैं। उनसे उनकी विशेषज्ञता से बाहर जाकर दस्तावेज जुटाने के लिए कहा गया। इसलिए स्वामी उनके दस्तावेज से गुमराह हुए।

स्वामी: -राज्यसभा में चर्चा के दौरान भाजपा के सुबह्यण्यम स्वामी ने सौदे के बिचौलिया क्रिश्चियन मिशेल का पत्र पढ़ा। इसे पढ़ते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम भी ले लिया। कहा कि जिन लोगों के नाम सामने आए है, उनसे पूछताछ होनी चाहिए। इसके बाद कांग्रेस ने हंगामा कर दिया और उनके बयान प्रामाणिकता साबित करने को कहां तो स्वामी जी ने कहा कि कई कांग्रेसी नेताओं के मिशेल के पिता से संबंध हैं। 6 गुना अधिक दाम में समझौता किया गया। जिसकी अनुमति तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने दी थी। स्वामी जी ने कहा कि इस सौदे के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल ने पत्र लिखकर इटली के न्यायालय को बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष को इस सौदे से सबसे ज्यादा लाभ मिला है। कांग्रेस की ओर से आनंद शर्मा ने सवाल उठाया है कि चर्चा के दौरान स्वामी ने रक्षा मंत्रालय, सीबीआई और ईडी के गोपनीय दस्तावेजों का जिक्र किया था। ये दस्तावेज उन्हें कैसे हासिल हुए? इन दस्तावेज को स्वामी ने सत्यापित कराने से इनकार कर दिया था। हालांकि बाद में संसदीय कार्य राज्य मंत्री ने संबंधित दस्तावेज को सत्यापित कराने के बाद सदन के पटल पर रख दिया है। स्वामी जी ने इस मामले मे एक बड़ा सा खुलासा किया हैं। उन्होंने कहा है कि इस मामले में पैसे लेने वाले पहले पत्रकार से पूछताछ होने वाली है। उन्होंने यह खुलासा एक ट्‌वीटकिया, इतना ही नहीं, इस मामले में एक और पत्रकार पर ईडी की नजर है, जिसे राफेल से 5 करोड़ रुपये मिले।

जवाब- मोदी जी दो साल से सरकार में हैं। उन्हें जांच करने दीजिए, सच सामने आ जाएगा। हमारे पास छिपाने को कुछ नहीं है।

सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष

कांग्रेस नेताएं: -रिश्वत के मामले में एपी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। भाजपा इसे कांग्रेस के नेता अहमद पटेल बता रही है। कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा ’अगर नाम के इनीशियल्स पर ही जाने लगेंगे तो एपी से गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी पटेल क्यों नहीं? क्या हम ऐसे जांच करेगें। उधर अहमद ने कहा कि अगर आरोपों में जरा भी सच्चाई निकली तो मैं सार्वजनिक जीवन से इस्तीफा दे दूंगा। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु ने कहा कि जिनका इस सौदे से कोई लेना-देना नहीं था, उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। सोनिया गांधी के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं है। इटली के न्यायालय के आदेश में पारिवारिक शब्द त्यागी बंधुओं के लिए प्रयोग में लाया गया है। यह साफ नहीं है कि एपी का अर्थ अहमद पटेल है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस समझौते में युपीए सरकार का पूरा जोर इस बात पर था कि एक ही वेंडर (सपंत्ति बेचने वाले) का नाम रहे। इसके लिए नियमों को ताक पर रख कर काम हुआ। उन्होंने पूछा कि इसके लिए एक ही वेंडर का नाम क्यों तय हुआ? कांग्रेस कुतर्कों के आधार पर बात साबित करने में लगी है।

मेरे खिलाफ कुछ गलत पाया जाता है तो मुझे फांसी पर लटका दिया जाए। सारे आरोप बेबुनियाद हैं। यह दुर्भावनापूर्ण है।

अहमद पटेल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता

कांग्रेस: - अब अगस्ता समझौते पर भाजपा के निशाने पर अब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी आ गए हैं। भाजपा सांसद किरीट सोमैया ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अगस्ता समझौते और कॉमनवेल्थ गेम्स (खेल) घोटाले में लिंक बताया है। सोमैया ने इन दोनों घोटालों से राहुल गांधी के सलाहकार पूर्व निजी सचिव कनिष्क सिंह का नाम जोड़ने के बाद कांग्रेस इटेलियन मरीन केस को भी अगस्ता केस से जोड़ेगी। कांग्रेस ने अगस्ता मामले में मोदी पर आरोप लगाया कि वह इसमें कांग्रेस नेतृत्व को फंसाने की साजिश कर हैं। इसके लिए सीबीआई का इस्तेमाल किया जा रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने यहां दल की नियमित प्रेस निर्देश की बैठक में कहा कि सरकारी कार्यकर्ता निष्पक्ष होकर इसकी जांच नहीं कर सकतीं है। सुप्रीम न्यायालय की निगरानी में जांच होनी चाहिए।

पायलट: - प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2003 से 2008 के बीच भाजपा शासन में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राजस्थान सरकार पर अगस्ता से हेलिकॉप्टर खरीदने के मामले में कैग की ओर आपत्ति की गई थी जिसके अनुसार हेलिकॉप्टर खरीद मामले में प्रदेश के राजस्व को 1.14 करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया था। कैग की इस विवरण पर आज तक मोदी जी ने कोई कार्यवाई नहीं की। यूपीए के शासनकाल में 12 फरवरी 2013 को अगस्ता के साथ ठेके को खारिज कर दिया था। मामले की जांच सीबीआई को दे दी और जनसमूह को कालीसूची कर दी गया था। प्रदेश में बीजेपी की सरकार में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए अगस्ता जनसमूह का ही हेलीकॉप्टर खरीदा गया। इस दौरान सिविल एविएशन (विमान बनाने की कला का) विभाग भी राजे के ही पास था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट नेसमाचार-पत्र सम्मेलन में यह सवाल उठाया कि जब केंद्र में अगस्ता सौदे की जांच सीबीआई कर रही है तो प्रदेश में हेलिकॉप्टर की हुई खरीद की जांच सीबीआई से क्यों नहीं करवानी चाहिए? इसके साथ कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि अगस्ता के बाद 2008 में भी राजे सरकार ने ए 17 सीटर हेलिकॉप्टर खरीदने की तैयारी की थी। इसके बाद उन्होंने 2008 में हेलीकॉप्टर खरीद मामलें को कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताया है। अगस्ता सौदे के मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। शाह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से सौदे में रिश्वत लेने वालों के नाम बताने को कहा है। उधर सरकार ने जानकारी दी है इस समझौते में मध्यस्थ रहे क्रिश्चियन मिशेल के प्रत्यर्पण के ब्रिटिश सरकार से बातचीत हो रही है। विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने सवाल किया जब 2013 में युपीए सरकार ने अगस्ता को काली सूची कर दिया, तो उसे इस सूची से हटाया क्यों गया? मोदी सरकार ने इसे 2014 में इसे काली सूची मे किया था।

सरकार अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए यह कह रही है। अगर जनसमूह कालीसूची में थी तो ऐ निजी जनसमूह के साथ कैसे उसका समझौता हुआ। इस समझौता में पीएम भी मौजूद थे।

दिग्विजय सिंह, कांग्रेस नेता

भाजपा: - समझौते में घूस देने के मामले देश मेे वॉन्टेड क्रिश्चियन मिशेल ने नवंबर 2015 में प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा था। मीडिया विवरण के अनुसार पत्र में मिशेल ने लिखा था कि जिन दस्तावेजों के आधार पर उसको इस मामले में शामिल माना जा रहा है, वह भारत के हवाला कारोबारियों की पूरानी तरकीब है। वह अपने तिजोरी में एक काली किताब रख उनमें झूठे नाम लिख देते हैं। मिशेल ब्रिटेन में रहता है। इतावली जांचकर्ताओं का मानना है कि अगस्ता जनसमूह में मिशेल को सलाहकार के रूप में नियुक्त कर भारत में रिश्वत की रकम बंटवाने का काम करवाया।

भाजपा ने अगस्ता डील मामले में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के खिलाफ विशेषाधिकार हनन को नोटिस दिया गया हे। आजाद ने पीएम मोदी पर इटली के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर सोनिया गांधी को फंसाने का आरोप लगया था।

कैग: - कांग्रेस सदस्यों ने गुजरात राज्य पेट्रोलियम निगम से संबंधित कैग की विवरण को लेकर राज्यसभा में हंगाम किया। कांग्रेस इस मुद्दे में चर्चा करना चाहती थी पर सरकार का तर्क था कि यह राज्य का विषय है। संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कांग्रेस अगस्ता मामले से लोगों का ध्यान हटाना चाहती है।

जन लेखा समिति: - भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि वसुन्धरा की पूर्ववती सरकार ने 2008 में न तो कोई हेलीकॉप्टर खरीदा और नही हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए एक पैसे का भी भुगतान किया। अशोक परनामी ने कहा कि सचिन बताए कि कैग की विवरण में कहां लिखा हुआ कि अगस्ता हेलीकॉप्टर खरीद में भ्रष्टाचार हुआ है। जन लेखा समिति ने 15 मई, 2013 - 14 में जो विधानसभा में केंग की विवरण का जवाब प्रस्तुत किया उसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि प्रशिक्षित पायलट उपलब्ध न होने के कारण खरीदने के बाद अगस्ता कुछ समय के लिए इस्तेमाल नहीं हुआ। तब कोंग्रस का राज था। सीएम ने नवम्बर 2005 में हेलिकॉप्टर खरीदकर नियमों के तहत पायलट को दो माह के प्रशिक्षण पर इटली भेजा। इस कारण हवाई यात्राओं में 1.14 करोड़ का व्यय हुआ है, जबकि सरकार ने इसकी कीमत मात्र 12.40 करोड़ लगाई है। हेलिकॉप्टर दुर्घटना की जांच तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने की, उसे सार्वजनिक नहीं किया। जिसे अनियमितता नहीं माना जा सकता है। जन लेखा समिति ने यह विवरण उन्हीं की कांग्रेस के कई सदस्य शामिल थे। यदि वे इस विवरण से संतुष्ट नहीं होते तो इसे विधानसभा में प्रस्तुत नहीं होने देते। उन्होंने कहा कि उस समय देश और प्रदेश में कांग्रेस की सरकारे थी फिर उस समय सीबीआई से जांच क्यों नहीं करवाई? उस समय विधानसभा में जब जन लेखा समिति ने अपनी विवरण प्रस्तुत की उस समय कांग्रेस ने क्यों विरोध नहीं किया? भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार में हमेशा सत्ता और संगठन एक सिक्के के दो पहलू होते हैं। कांग्रेस की तरह अलग-अलग नहीं इसलिए हमारे यहां सरकार की ओर से जवाब संगठन देता है।

मोदी सरकार दो साल से रिश्वत देने और लेने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। मनोहर पर्रिकर बताएंगे कि 22 अगस्त 2014 को रक्षा मंत्रालय ने इस जनसमूह की काली सूची समाप्त कर रक्षा मसौदे में भाग लेने की इजाजत क्यों दी।

रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस प्रवक्ता

इटालियन न्यायालय में जिस तरह भ्रष्टाचार के आरोप साबित हुए हैं और जिस तरह कांग्रेसी नेताओं के नाम सामने आए हैं, इससे साफ है कि अगस्ता का यह आरोप कांग्रेस के गले की फांस बन गया है।

स्मृति ईरानी, मानव संसाधन मंत्री

गौतम खैतान: - अगस्ता सौदे से जुड़े मामले में कारोबारी गौतम खेतान ने सीबीआई की पूछताछ में रिश्वत लेने की बात कबुल कर ली है। उधर, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आयकर विभाग से इस मामले से संबंधित कुछ संदिग्ध अफसरों की संपत्ति का ब्योरा मांगा है। गौतम भी 3, 600 करोड़ रुपए के इस कथित घोटाले में आरोपी हैं। सीबीआई सूत्रों के अनुसार केंद्रीय जांच कार्यकर्ताओं के सामने गौतम ने माना कि उसे दो बिचौलियों कार्लो गेरोसा और गुइदो हाश्के से रकम ली थी। हालांकि, उसने दावा किया कि यह रिश्वत नहीं थी। यह रकम लेने के लिए एक शेल जनसमूह (सिर्फ लेनदेन के काम आने वाली गैरकारोबारी कंपनी) बनाई थी। हालांकि सीबीआई गौतम के जवाब से संतुष्ट नहीं हे। लिहाजा वह दोनों के बीच के असली लेन-दने का पता लगा रही है। गौतम को हवाला के माध्यम रिश्वत की रकम इधर-उधर करने के आरोप में 2014 में गिरप्तार किया गया था। दूसरी ओर, वायुसेना के पूर्व प्रमुख एसपी त्यागी को ईडी और सीबीआई ने पूछताछ की। सीबीआई उनसे पहले तीन दिन पूछताछ कर चुकी है। उन पर हेलीकॉप्टरों सौदे की शर्तें आसान करने का आरोप है। त्यागी के रिश्तेदारों में संदीप, संजीव और राजीव सेस सीबीआई को पूछताछ करेगी। ईडी को इस मामले से जुड़े बिचौलियों के दस्तावेजो के कोडनेम को समझने में भी कुछ कामयाबी मिली है। इसके आधार पर उसने रक्षा मंत्रालय इनकम टैक्स (आय कर) सरकारी, व्यापार आदि का जिम्मेदारी को विभाग और फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन यूनिट्‌स (एफआईयू) (निवेश जांच इकाईयों) को पत्र लिखा है। इसमें रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना के 10 अधिकारियों की संपत्ति की जानकारी मांगी है। उन्होंने विवादित सौदे में शामिल रहीं चार जनसमूहों से वित्तीय लाभ लेने की बात मानी थी।

उत्तर प्रदेश: - उत्तर प्रदेश सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अगस्ता हेलीकॉप्टर की मरम्मत के लिए एक साल में लगभग 5 करोड़ रुपए फूंक डाले। पत्रिका के पास मौजूद दस्तावेजों में साफ है कि 2010 में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कहने पर तकरीबन 40 करोड़ में खरीदे गए। एडब्यू-109 श्रेणी के इस हेलीकॉप्टर के दोनों इंजनों समेत अन्य हिस्से में खरीददारी के महज पांच वर्ष के भीतर भारी गड़बड़ियां आ गई। जिसके बाद इंजनों की मरम्मत के नाम पर अगस्ता, इटली और सिंगापूर की एक जनसमूह ने यूपी सरकार से मनमाने पैसे वसूले। हैरानी की बात यह रही कि बिना इंजन के मरम्मत की बाट जोट रहे अगस्ता की उड़ान के प्रशिक्षण के लिए पायलट दिनेश सिंह को प्रदेश सरकार ने अगस्ता ट्रेंनिंग इंस्टीटयूट में ग्राउंड और सिम्युलेटर प्रशिक्षण के लिए सरकारी खर्चे पर इटली भेज दिया। इन हेलीकॉप्टरों की मरम्मत पर भारी भरकम धनराशि खर्च करने के सवाल पर उड्डयन मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम न छपने की शर्त पर कहा कि हमें खुद भी नहीं पता कि इतनी धनराशि क्यूं खर्च की गई जबकि अगस्ता की उड़ान काफी खर्चीली और मुश्किल भरी साबित होती रही है।

अगस्ता वेस्टलैंड हैलीकॉप्टर खरीद में घोटाले का मामला इटली की अदालत में क्या उछला, नई-नई परतें खुलने लगी हैं। ऐसी ही परतेे जो जन कल्याण के नाम पर सत्ता में आने वाले नेताओं की ही पोल खोल रही हैं। ऐस ही एक मामला देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का भी सामने आया है। बात तब की थी जब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थी। उनके काल में 40 करोड़ की लागत से राज्य सरकार ने अगस्ता हेलीकॉप्टर खरीदा था। वो भी उस समय जब राज्य सरकार के पास पहले से ही पांच विमान और हेलीकॉप्टर मौजूद थे। उस समय अगस्ता वेस्टलैंड हैलीकॉप्टर का नाम सुर्खियों में था। सो उत्तर प्रदेश सरकार ने भी एक अगस्ता वेस्टलैंड हैलीकॉप्टर खरीद लिया। जरूरत नहीं थी, फिर भी। राजनेताओं से लेकर अधिकारी और जनता सब जानती है कि सरकारी विमान और हेलीकॉप्टर आखिर सरकारी काम की अपेक्षा निजी काम में इनका जमकर उप्रयोग किए जाता है। हर महीने लाखों रूपए का तेल चलता है तो चले वो तो सरकार वहन करती है। उसे नेताजी को नहीं चुकाने पड़ते हैं।

इटली फैसला: - भ्रष्टाचार कांग्रेस की कमजोर नस है और केन्द्र की मोदी सरकार इस मामले में खुशकिसमत है कि उसे कांग्रेस की इस नस को दबाने का मौका बार-बार मिलता रहा है। ताजा मौका इटली के मिलान की एक आदलत के फेसले से मिला है। भारत के उच्चालय के समतुल्य इस अदालत ने हालांकि अगस्ता वीवीआईपी हेलीकॉप्टर के सौदे में रिश्वतखोरी के आरोप में अपने देश के अधिकारियों को दंडित किया है। लेकिन उसकी जांच न सिर्फ 2005 - 7 में भारतीय वायुसेना के प्रमुख रहे एयर मार्शल एसपी त्यागी तक जा रही है बल्कि यूपीए सरकार की संरक्षक और गठबंधन की नेता सोनिया गांधी तक भी इसकी तपिश पहुंच रही है। हालांकि, यह सौदा 2010 में हुआ पर इसकी तैयारी पहले से हो रही थी। इटली की अदालत ने तो मान लिया है कि अति-विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए खरीद जाने वाले इस हेलिकॉप्टर के सौदे पर मुहर लगाने के लिए एअर मार्शल त्यागी और भारतीय अफसरों को 1.5 करोड़ डॉलर तक अवैध धन दिया गया। अदालत ने इन्ही आरोपों के तहत फिनमेकेनिया जनसमूह के प्रमुख गुइसिए ओरसी को दोषी भी पाया और सजा भी सुनाई है। किंतु इस अंतरराष्ट्रीय घोटाले की भारतीय हकीकत क्या है इस बारे में अभी सिर्फ आरोप और इटली की अदालत के फेसले में कहीं तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह तो कहीं सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव ऑस्कर फर्नांडीज का जिक्र है और उनके मध्य से रिश्वत देने को आरोप भी है, लेकिन इस बारे में जांच कर रही सीबीआई ने अभी तक ऐसा कुछ नहीं कहा है। कांग्रेस दल के पास अपनी सफाई में यह मजबूत दलील है कि आगस्ता सौदा यूपीए सरकार ने रद्द कर दिया था और इटली की सरकार को दिया गया सारा धन वापस ले लिया गया था। इसके बावजूद इटली की अदालत के फेसले के आधार पर भाजपा कांग्रेस के नेताओं को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ेगी और कांग्रेस को अपने बचाव के लिए उन तमाम सबूतों और दस्तावेजों को सार्वजनिक करना होगा जिसे उसने अपने कार्यकाल में दबा लिया था। जाहिर है अब यह काम मोदी सरकार करेगी और वह कांग्रेस के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। विडंबना देखिए कि संघ पर इटली के मुसोलिनी से प्रेरणा लेने का आरोप लगाने वाली कांग्रेस का इटली संबंध उसके लिए लगातार परेशानी का सबब बन रहा है। यूपीए ने 2013 में अगस्ता से 3, 600 करोड़ की डील रद्द की थी। 7 अप्रैल 2016 को न्यायालय ने फैसला सुना दिया।

पेज: - 225 पेज के फेसले में 17 पेज का चैप्टर ’करप्टिंग मार्शल शशि त्यागी’ के नाम से है। इसमें 4 या सात बार सिग्नोरा गांधी का जिक्र है इतावली में सिग्नोरा का मतलब मैडम होता है। फेसले की 193 नंबर पेज पर दो बार, 199 पर एक बार, 201 पर दो बार और 204 पर दो बार नाम दिया गया है। इसके बाद 2 बार मनमोहन सिंह का नाम है। एक बार ऑस्कर फर्नोंडीस और तत्कालीन एनएसए एमके नारायण का भी नाम आया है। हालांकि ये नाम किन संदर्भों में लिए गए हैं। अभी पता नहीं चला हैं।

इटली में रिश्वत देने वाले दोषी करार दिए गए हैं। तो रिश्वत लेने वाले चुप क्यों हैं? एंटनी साहब को जवाब देना चाहिए कि क्या उनकी पार्टी से कोई शामिल हैं?

रविशंकर प्रसाद, भाजपा

मोदी के करीबी कारोबारियों ने अगस्ता वेस्टलैंड के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह की ईमानदारी और बुद्धिमत पर कभी सवाल नहीं उठे।

आनंद शर्मा, कांग्रेस

यूपीए: -पार्टी ने पूछा कि मोदी पहले ये बताए कि कांग्रेस सरकार ने जिस अगस्ता को काली सूची में किया था। उससे सरकार रक्षा करार क्यों कर रही है? कांग्रेस की दलील है कि यूपीए सरकार के समय मामला सामने आया। सरकार ने इटली की जनसमूह से समझौता रद्द की। सीबीआई जांच के आदेश दिए। अगस्ता की बैंक गांरटी सीज (विश्वास बंद) की। इसलिए उसे पर भ्रष्टाचार का आरोप कैसे लग सकता है? मामले में 360 करोड़ की रिश्वत की बात आने के बाद यूपीए सरकार ने समझौता रद्द कर दीया गया।

साबित हो गया कि कांग्रेस ने कितने घोटाले किए हैं। विपक्षी पार्टी को इसका जवाब देना होगा। सभी लोगों के नाम उजागर करने होंगे।

अरुण जेठली, केंद्रीय वित्त मंत्री

हमने सौदा रद्द किया। कंपनी को कालीसूची किया। इटली में केस भी दर्ज कराया। मोदी सरकार ने जनसमूह को क्लीनचिट (बेईमानी से मुक्ति का साफ पत्र) दे दी। जांच होनी चाहिए।

एके एंटनी, पूर्व रक्षा मंत्री

राजनीतिक: - एक तरफ राजनीतिक दल के नेताओं को देखा जा सकता है। एक बार विधायक या सांसद बनने वाले तमाम नेता पीढ़ियों का जुगाड़ कर लेती हैं। दलितों के उत्थान की बात करने वाली मायावती हों या उन जैसे दूसरे नेता, अपने उत्थान की चिंता में ही डूबे रहते हैं। देश कहीं जाए, उन्हें अपने और अपने परिवार के अलावा कुछ नहीं सूझता है।

उपसंहार: - रक्षा उपकरणों के सौदों में हमने सदैव विदेशी जनसमूहों की ओर ही रुख किया है। कभी इस दिशा में सोचा ही नहीं गया कि हमारे देश में भी हथियार व रक्षा उपकरण तैयार करने की संभावना हो सकती है। हमारे देश के निजी क्षेत्र को क्यों नहीं इस दिशा में प्रोत्साहित किया जाता है। हम सबको बेइमान समझने लगते हैं। गड़बड़ी करने वाला तो सब जगह ही करेगा। उसके लिए नियम कायदे बनाने की जरूरत नहीं। विदेशी जनसमूह के भरोसे तो रक्षा मामले में आत्मनिर्भरता सपना ही होगा।

- Published on: June 10, 2016