आंध्रप्रदेश में एक भ्रष्टाचार का खुलासा (Exposed Corruption in Andhra Pradesh Essay in Hindi) [ Current Affairs ]

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प्रस्तावना: -आंध्रप्रदेश के डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (परिवहन अधिकारी) की 800 करोड़ की बेनामी संपत्ति बनाने की खबर छपी। देश में पहली बार किसी एक अफसर के नाम इतने बड़े भ्रष्टाचार की रकम बताई गई। लेकिन 24 घंटों के अंदर और दो आंकड़े सामने आए। सवा दो करोड़ से लेकर 800 करोड़ तक के दावे हुए।

सुर्खियां-

28 अप्रैल 2016 को एंटी करप्शन ब्यूरो (विशेषत: भ्रष्टाचार विभाग) ने काकीनाडा, आंध्रप्रदेश स्थित अदिमूलन मोहन के घर छापा मारा। यह खबर देश की सबसे प्रतिष्ठित समाचार कार्यस्थान पीटीआई के हवाले से भी जारी की गई। 800 करोड़ का आंकड़ा देखते ही यह खबर दैनिक भास्कर सहित देश के ज्यादातर अखबारों में छपी और समाचार चैनलों की सुर्खियां बनी। ऐसे में सवाल यह है कि जो संपत्ति एसीबी ने 2.3 करोड़ के आसपास आंकी, वह संपत्ति 100 और 800 के आंकड़े तक कैसे पहुंची?

माध्यम: - निम्न हैं-

  • दक्षिण का एक बड़ा अखबार- 800 करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने का काम डेक्कन क्रॉनिकल के एक संवाददाता ने किया। यह खबर उनके नाम के साथ 29 अप्रैल को छापी गई थी। उनका कहना है कि 800 करोड़ मेरा गणित है और कुछ अवसरों का 80 - 120 करोड़ का गणित है। सभी दावे अभी तक अनौपचारिक स्तर पर ही हैं। मेरा गणित इस पर आधािरित है कि जो आदमी इतने साल से रोज लाखों कमा रहा है और जिसकी स्थायी संपत्ति का अभी तक ब्यौरा नहीं किया गया, उसकी संपत्ति इतनी होनी ही चाहिए।
  • देश की प्रतिष्ठित समाचार कार्यस्थान-पीटीआई ने आंकड़ों कि बिना जांच किए ही यह खबर जारी कर दी। पीटीआई के स्थानीय पत्रकार (स्ट्रिंगर) बी. सत्यनारायणा का कहना है कि ’डेक्कन क्रॉनिकल ने 800 करोड़ लिखा तो मैंने भी लिख दिया। मेरे पास इसकी विस्तृत जानकारी नहीं हैं। वैसे जिस दिन मामले का खुलासा हुआ था उसी दिन अधिकारियों ने मुझसे 50 करोड़ की बात कही थी। मैने क्रॉनिकल संवादाता के आंकड़ों को उचित समझा। इसलिए वे आंकड़े अपने विवरण में इस्तेमाल किए’।
  • एंटी करप्शन ब्यूरो के अफसर- एंटी करप्शन ब्यूरो की डीसीपी ए रमादेवी का कहना है कि उन्होंने 2 करोड़ 30 लाख का आंकड़ा अब तक उनके हाथ लगी नगद और बाकी दस्तावेजों की मूल कीमत पर आधारित तय किया। कई बैंकों के ताले अभी खोलने बाकी हैं। और कई संपत्तियों की वास्तविक कीमत भी अभी तक हमें नहीं मालूम’। एसीबी के अन्य अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा 800 क्या यह आंकड़ा 1000 करोड़ भी पार कर सकता है। फिलहाल हमारे पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं। इसलिए सिर्फ वही आंकड़े बताए हैं जो अभी जब्त गहने इत्यादि पर आधारित है। लेकिन हमारे पास उनकी और भी अचल संपत्ति होने के सबूत हैं। लेकिन अभी उनका मूल्यांकन होना बाकी हैं’।

अफसर: -

एक अफसर जो पढ़ाई में प्रथम था और अपने साथियों में सम्मानित। उसकी मेधा का सम्मान इस कद था कि पड़ोसी उसको आदर्श के रूप में देखते थे। पर आंध्रप्रदेश के डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अदिमुलम मोहन का नाम अब दक्षिण भारत के भ्रष्ट लोगों में शामिल हो गया हैं।

शुरुआत: -

4000 के वेतन से हुई थी। आंध्रप्रदेश में चितुर के रहने वाले मोहन ने एम. टेक करने के बाद 1988 में सिंचाई विभाग में असस्टेिंट एक्जीक्यूटिव (सहायक कार्यकता) इंजीनियर के पद पर ज्वाइन (जुड़) किया। मोहन के पिता भी सिंचाई विभाग में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद से सेवानिवृत हुए थे। लेकिन एक साल बाद मोहन का आरटीओ में ग्रेड-वन अफसर के पद पर चयन हो गया। उस समय मोहन का मूल वेतन 4 हजार रू. मासिक था। उनके साथ प्रशिक्षण करने वाली 1990 बैच की आंध्रप्रदेश की ज्वाइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (जुड़ी परिवहन अधिकारी) रामश्री बताती हैं कि मोहन बहुत ही तेज दिमाग वाले थे। लेकिन काकीनाडा के स्थानीय लोग और ट्रांसपोर्ट विभाग से वास्ता रखने वालों के अनुभव रामश्री के अनुभवों से काफी अलग हैं। मोहन के इलाके के विधायक वी. वेंकटेश्वर राव के अनुसार, ’मोहन पैसा चूसता था। वाहन चालक और ट्रक मालिक उसके व्यवहार से बहुत अधिक परेशान हो चुके थे।

गौरतलब है की मोहन के कॅरिअर (जीवनवृति) के शुरूआती दौर में कोई दाग नहीं लगा। 1998 में वे पदोन्नति पाकर डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बने। तब से उनके भ्रष्टाचार का दौर शुरू हुआ। अनंतपुर जिले से 18 महीने पहले वो डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बनकर ककीनाडा आए थें। काकीनाडा के ट्रक ट्रांसपोर्टर वेंकटेश बताते हैं कि ’मोहन हर शाम काम खत्म करके घर जाते समय उसके सूटकेस में 8 लाख रु. घूस के रखे होते थे’।

तय: -

काकीनाडा में दो बंदरगाह हैं। जो समंदर के रास्ते आयात-निर्यात का बड़ा केंन्द्र है। रोजाना तकरीबन 1 हजार ट्रक बंदरगाह तक सामान की ढुलाई करते हैं। मोहन ने उन सामानों की कीमत तय कर दिये थे। हर बार के 1000 रु. देनें होते थेे। हाई-वे चैक (मुख्य सड़क मार्ग) पर खुलेआम वसूली के अलावा मोहन ने फ्लाइंग स्कवाड (उड़ान की टुकड़ी) तैनात किए। माल ढुलाई की छोटी-बड़ी किसी भी गाड़ी को बिना पैसा दिए जाने नहीं दिया जाता था। भारी ऑटो से 100रु. मिनी ट्रक से 300 रुपये और बड़े ट्रक से 500 रु. । काकीनाडा में छोटे-बड़े करीब 45 इंजीनियरिंग और डेंटल कॉलेज (दंत चिकित्साल्य) हैं। बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रखकर फिटनेस सर्टिफिकेट (अच्छे स्वास्थ्य का प्रमाण पत्र) जारी करने का खुली कीमत 10 हजार रु. बताया जाता था। काकीनाडा में ट्रांसफर-पोस्टिंग (स्थानांतरण पद) के जरिए भी मोहन ने काफी काली कमाई की। लेकिन उसमें अकेले मोहन का हिस्सा नहीं था। ऊपर तक पैसे पहुंचते थे। जिसमें मोहन का हिस्सा रोजाना के 8 लाख रु. होते थे।

परिवार: -

ए मोहन का वेतन इस समय 95000 रु. है और भत्ते को मिलाकर प्रतिमाह करीब 1 लाख 20 रु. वेतन उन्हें मिलता है। उनकी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी की शादी बैंगलोर में हो चुकी है। सूत्र बताते हें कि अपने काले धन को सफेद करने के लिए मोहन अपनी बड़ी बेटी के नाम पर 8 जनसमूहों को कागजों पर चलाता है। एसीबी ने जब उन जनसमूहों के ठिकानों की पड़ताल की तो सभी के पते गलत पाए गए हैं। मोहन की छोटी बेटी हैदराबाद में रहती हैं।

रिश्वत: -

नाम न छापने की शर्त पर एसीबी के एक अन्य अफसर ने बताया कि मोहन ने पहले उन्हें रिश्वत देने की कोशिश की थीं। लेकिन उन्होंने उसे सख्त शब्दो में बाजू में खड़ा रहने को कहा गया। उसके बाद जब हम उनके दस्तावेजों की छानबीन कर रहे थें, तब उन्होंने सारी कमाई को अपनी बेटी के नाम पर खोली गई जनसमूह की जायज कमाई बताया। मोहन ने सिर्फ जुबली हिल, काकीनाडा और चितुर स्थित मकानों को अपना होने का दावा किया।

मीडिया (संचार माध्यम): -

ए मोहन की संपत्ति को 800 करोड़ का बताकर मीडिया ने उसे हीरों बना दिया हैं। अगर सारी संपत्ति आंकी जाए तो भी यह 75 - 100 करोड़ से ज्यादा हो नहीं सकती। यह एक ऐसा अफसर है जिसने कभी जुबली हिल पर मकान बनाने की ठानी थी और उस सपने को साकार करने के लिए उसने टूथपेस्ट तक अपने पैसों से नहीं खरीदा। घर का सारा सामान, अनाज, यहां तक उसके धोबी के बलि तक उसने कभी नहीं भरे। वह तेलंगना के बहुत ही काबिल और ताकतवर आईएस अफसर का जीजा है। जिस बात का मोहन ने हमेशा फायदा उठाया। इससे पहले अपने साले के प्रभाव की वजह से ही वह दो बार ऐसे मामलों में बचाया गया था। उसकी बेटी उससे जेल में मिलने तक नहीं गई और अब तक उसे वकील करने की अनुमति नहीं मिली है।

सेखरन एस. डी, वरिष्ठ पत्रकार, हैदराबाद

मूल्यांकन: -चूंकि मूल्यांकन अभी बाकी है, इसलिए कोई आंकड़ा नहीं हैं अंतिम।

  • कोमपल्ली इलाके में 8 प्लांट इसकी कुल लंबाई चौड़ाई 2100 गज है यहां औसतन जमीन की कीमत 11 हजार रू. प्रतिवर्ग गज है। 2100 गज की कीमत 2 करोड़ 31 लाख रु. हुई।
  • हैदराबाद के आई टी जनसमूहों के पंसदीदा पॉश इलाके माधापुर में 4 प्लांट इसकी कुल लंबाई चौड़ाई 2100 गज है। औसतन जमीन की कीमत 65 हजार रु. प्रति वर्ग गज है। 2100 गज की कीमत 13 करोड़ 65 लाख रु. हुई।
  • हैदाबाद के श्रीलिंगमपल्ली इलाके में 500 गज का एक पलॉट के जमीन की औसतन कीमत 9 हजार रु. प्रति वर्ग गज हैं। 500 गज की कीमत 45 लाख रु. हुई।
  • हैदराबाद के सबसे पॉश जुबली जिल्स इलाके में 4 मंजिला मकान हैं। जिसकी कीमत 12 से 15 करोड़ रुपये हैं।
  • पंजागुटटा इलाके में एक फ्लैट हैं जिसकी कीमत तकरीबन 1 करोड़ रु. हैं।
  • हैदराबाद प्राकशम और नेल्लुर जिले में 543.4 एकड़ कृषि भूमि है जिसकी कीमत करीब 27 करोड़ 20 लाख रु. हैं।
  • तिरूपति में 720 वर्ग गज जमीन है जिसकी कीमत 77 लाख रु. हैं।
  • 4 लाख रु. बैंक में फिक्स डिपोजिट (निश्चत जमा) हैं।
  • 3 लाख रु. बैंक में बचत खाते में जमा हैं।
  • 83 हजार रु. घर से नकदी बरामद हैं।
  • 2 किलों सोने के जेवरात कीमतन 60 लाख रु. हैं।
  • 5 किलों चांदी के बर्तन कीमतन 2 लाख 9 हजार रु. हैं।
  • घर में सामान की कीमतन 7 लाख रु. हैं।
  • मारुति आर्टिंगा कीमत 6 लाख रु. हैं।
  • बेल्लारी में बेनामी संपत्ति हैं।

उपसंहार: -

इस तरह देश में कई भ्रष्टाचार होते है लेकिन अभी तक का देश सबसे बड़ा भ्रष्टाचार साबित हुआ हैं इसी तरह से आगे अगर ओर भी बड़े भ्रष्टाचार होते रहेंगे तो देश के भविष्य का क्या होगा। इसलिए सरकार, मीडिया, संस्थाएं एवं अन्य माध्यम से भ्रष्टाचार पर कठोर प्रबंध लगाने होगें। जिससे आगे कोई भ्रष्टाचार न कर सके।

- Published on: July 6, 2016