Mark Zuckerberg Donated in his Kids Name - Essay in Hindi [ Current Affairs ]

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प्रस्तावना: -धन की तीन गतियां होती हैं। भोग, दान और नाश। धन की दूसरी गति में फेसबुक के सीईओ मार्क वैश्विक दानदाताओं की फेहरिस्त में जुड़ गए हैं। उन्होंने 99 फीसदी संपत्ति के दान का ऐलान किया है। अपनी ही एक कंपनी बनाकर उसमें फंड ट्रांसफर करेंगे। अमरीकी कर ढांचे का फायदा उठा, अपना परोपकारी चेहरा भी दिखाया। दान का आधुनिक जकरबर्ग ’शास्त्र’। धनाढय वर्ग क्या लोकतांत्रिक सरकारों के जनकल्याणकारी एजेंडे को अपने अनुरूप ढाल सकता हैं? महात्मा गांधी ट्रस्टीशिप का सिद्धांत प्रतिपादित कर चुके हैं। भारतीय धनकुबेर जकरबर्ग नहीं तो महात्मा गांधी के मार्ग का अनुसरण कर सकते हैं, सामाजिक प्रतिबद्धताओं की पूर्ति के लिए। जकरबर्ग के संदर्भ में क्या हो कैसे हो दान। यह सब लोगों को जानना चाहिए।

फेसबुक: - के सह संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जकरबर्ग ने उनके और उनकी पत्नी डॉ. प्रिंसिला चान की फेसबुक से कमाई गई अपनी संपत्ति का 99 फीसदी अपने चैरिटेबल ट्रस्ट में दान देने की घोषणा की है। क्योंकि अमरीका में बहुत से अमीर लोग ऐसे कर रहे हैं। नई बात इसमें बस इतनी सी है कि जकरबर्ग युगल इतनी बड़ी संपत्ति दान करने वालों में सबसे युवा हैं।

भारत: - दानवीरों का देश है। यहां दान देने की लंबी पंरपरा रही है। दानवीर कर्ण ने युद्ध में हारने की आशंका को जानते-बूझते कवच और कुंडल दान में दे दिए थे? देवासुर संग्राम में ऋषि दधीचि ने हड्‌िडयों का दान कर दिया था। लेकिन अब वैसी परिस्थितियां नहीं है। यही वजह है कि जब मार्क जबकरबर्ग जैसे लोग अपनी संपत्ति दान करने की घोषणा करते हैं तो यहां लोगों को आश्चर्य होता है। उन्हें आश्चर्य होता है कि यदि फेसबुक के जरिए 99 फीसदी शेयरों की कमाई दान कर दी गई तो दानदाता का भविष्य क्या होगा? क्या जकरबर्ग दंपति ने अपनी नवजात बेटी के भविष्य के बारे में जरा भी नहीं सोचा? उसके भविष्य के बारे में तो सोचना ही चाहिए। जब ऐसे विचार सामने आते हैं तो संदेह भी उत्पन्न होता है कि कहीं जकरबर्ग ने झूठ ही तो नहीं कह दिया?

उद्देश्य: - मार्क जकरबर्ग का दान करने का उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है। वे अपनी संपत्ति को आम जनता की भलाई के लिए दान कर देना चाहते हैं। यह जरूर हैं कि उन्होंने अपनी संपत्ति जिसका अनुमान करीब 45 अरब डॉलर यानी 2.97 लाख करोड़ है, किस तरह से दी जाएगी, इसे स्पष्ट नहीं किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि यह संपति वे कितने वर्षों में दान करेंगे? केवल इस बात से उनकी नीयत पर संदेह करना उचित नहीं है। उन्होंने एक साल में 3000 हजार करोड़ रुपए भी दान करने शुरू किए तो भी इस संपत्ति को खर्च होने में काफी समय लगने वाला है।

दान: - इतनी बड़ी राशि दान करना आसान नहीं है इसके बड़े दिल का होना बहुत जरूरी है। मार्क कुछ ऐसे ही व्यक्त्वि के धनी है। उन्होंने अपनी बेटी के जन्म की खुशी मनाते हुए यह घोषणा की है। उनकी सोच यही है कि जनता से उन्होंने धन कमाया है तो अब उनका कर्तव्य बनता है कि वे जनता के लिए कुछ करें। यह हर व्यक्ति का उद्देश्य होना ही चाहिए कि उसने यदि जनता से कुछ लिया है तो वह समय पर उसे सूद सहित वापस भी करे। मार्क भी वैसा ही कर रहे हैं और इसीलिए उनकी चौतरफा प्रशंसा भी हो रही है। ऐसा नहीं है कि भारत में लोग बिल्कुल भी लोकहित में दान के बारे में नहीं सोचते। भारत में अजीम प्रेम जी का सम्मान उनके धन कमाने की कला से ज्यादा उनके पैसा दान करने के कारण है। उन्होंने 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक धन दान किया है। उनके अलावा और भी बहुत से सम्मानीय लोग हैं, जो परहित में दान करते हैं। लेकिन इससे कहीं अधिक ऐसे लोग हैं जो केवल कर बचाने की कोशिश में लगे रहते हैं। कर बचाने के लिए दान करते हैं। हकीकत तो यह है कि जिसे दान करना होता है और जिसके पास दान करने लायक संपत्ति होती है वह करों की परवाह ही नहीं करता। उनकी धन-दौलत कर राहत ही मोहताज नहीं होती। जब जनता से पैसा कमाया जाता है, देश के प्राकृतिक साधनों को दोहन करके धन कमाया जाता है तो उसे वापस करने का दायित्व भी बनता है? वापस करने का जरिया दान भी हो सकता है।

अनुमान: - एक अनुमान के मुताबिक जकरबर्ग के 99 फीसदी शेयर की कीमत करीब 297 हजार करोड़ रुपए है। फेसबुक की वर्तमान कीमत लगभग 306 अरब डॉलर है। अपनी नवजात बेटी मैक्सिमा के जन्म पर मार्क व प्रिंसिला ने मानव उत्थान में अपने हिस्से का योगदान के वचन के साथ यह घोषणा की। इस निवेश से होने वाले मुनाफे को इसी में लगा ऊंचे लक्ष्यों को हासिल करने का प्रयास रहेगा।

खर्च: - जकरबर्ग अपनी संपत्ति को निम्न क्षेत्रों में दान करेंगे-

  • यह धन एक लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी, ’चान जुकरबर्ग फाउंडशन’ में जाएगा। इस फाउंडेेशन के बारे मे फेसबुक बताता है कि यह गैर सरकारी संगठनों में फंडिंग कर नीतिगत बहसों के जरिए अपना लक्ष्य पाने का प्रयास कर रही है। इसका प्रमुख लक्ष्य जरूरतमंद क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने की हैं।
  • एसईसी फाइलिंग के मुताबिक जकरबर्ग ने अपनी आय को जीवनभर दान करने का संकल्प लिया है। फेसबुक के सीईओ ने निकट भविष्य के लिए कंपनी मेजर हिस्सेदारी बनाए रखने की योजना भी बनाई रखी हैे।
  • द वर्ज के मुताबिक मौजूदा घोषणा के तहत तीन साल तक तीन हिस्सों में दान मिलेगा। यह जकरबर्ग के शेयरों को बेचकर जुटाया जाएगा। लेकिन एक साल में अधिकतम 6600 करोड़ रुपए का ही दान दिया जाएगा।

प्राथमिकताएं: - जकरबर्ग ने इस पहल की घोषणा नवजात बेटी को लिखे पत्र में की। इसमें दों प्राथमिक लक्ष्य तय किए गए हैं।

  • पहला लक्ष्य है, मानव जीवन को ऊंचा उठाना। इसके लिए दवाएं, आर्थिक अवसर और सुचना की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इबोला उन्मूलन के लिए दिया था दान 2014 में इस दंपत्ति ने इबोला संकट और एचआईवी व पोलियों जैसी बीमारियों से निपटने के लिए 165 करोड़ रुपए दान देने की घोषणा की थी। हाल में जकरबर्ग ने बेहतर शिक्षा के लिए नेवार्क पब्लिक स्कूल सिस्टम को 660 करोड़ रुपए दान दिए थे।
  • दूसरे लक्ष्य में इस परियोजना में गरीबी खत्म करने में जोर रहेगा। गरीबी दूर करने और कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों को सशक्त बनाने पर जोर दिया जाएगा। पत्र में आगे लिखा है, हमारे समाज को न केवल न्याय और दान के लिए बल्कि मानव प्रगति के विकास के लिए भी यह करना चाहिए।

दानदाता: - दुनिया के 4 बड़े दानदाता जिन्होंने किया संपत्ति का बड़ा हिस्सा दान दिया है-

  • बिल गेट्‌स- नेटवर्थ: 84.2 बिलियन डॉलर, अब तक दान: 27 बिलियन डॉलर, कार्यक्षेत्र शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि विकास, विश्व स्तरीय पुस्तकालय निर्माण, आपातकालीन सहायता, शहरी गरीब क्षेत्र।
  • वारेन बफेट- नेटवर्थ: 61 बिलियन डॉलर, अब तक दान: 21.5 बिलियन, डॉलर, कार्यक्षेत्र: मुख्य हिस्सा बिल गेट्‌स के फाउंडेशन को दान किया। बाकी हिस्सा अन्य संस्थाओं को दान किया हुआ है।
  • अजीम प्रेम जी- नेटवर्थ: 15.9 बिलियन डॉलर, अब तक दान: 8 बिलियन डॉलर, कार्यक्षेत्र: भारतीय विद्यालयों और परीक्षा तंत्र में सुधार लिए कार्यरत, कंप्यूटर शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण आदि।
  • जॉर्ज सोरोस- नेटवर्थ: 24.4 बिलियन डॉलर, अक तक दान: 8 बिलियन डॉलर, कार्यक्षेत्र: सामुदायिक विकास, अंतरराष्ट्रीय समस्याएं-सेवाएं, स्वास्थ्य, शिक्षा, अश्वेत अफ्रीकी छात्रों को छात्रवृति।

पहलू: - फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने अपने 99 फीसदी शेयरों को दान करने के मायने सिक्के के दो पहलू के समान हैं। एक पहलू है कि जकरबर्ग का कहना है कि वे अगली पीढ़ी को एक बेहतर कल प्रदान कर सकें। सैद्धांतिक रूप से ये बातें किसी को भी लुभावनी साबित हो सकती हैं। आखिर कौन नहीं होगा कि दुनिया में व्याप्त गरीबी, अशिक्षा, भूख और अन्य सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए कोई धन्ना सेठ अपनी तिजोरी खोल दे। खुले दिल से दान करे। लोगों में ये एक धारणा बन जाती है कि अच्छा कदम उठाया है। सभी इसका समर्थन करेंगे। लेकिन हमें सिक्के के उस पहलू को भी देखना होगा जो कि पार्श्व में छिपा हुआ है। लेकिन सिक्के के साथ जुड़ा हुआ है। इस पर भी गौर करना होगा।

नतीजे: - जकरबर्ग ने फेसबुक के जरिये दुनिया में अपनी पहचान बनाई। साख स्थापित की। साथ ही अपनी तिजोरी भी भरी। जकरबर्ग की निजी जिंदगी भी काफी रोमाचंक है। उन्होंने वियतनामी-चीनी मूल की अपनी महिला मित्र से विवाह किया जो कि अमरीका में आकर बसी। जकरबर्ग इससे पहले भी अमरीका के कुछ स्कूलों के लिए करोड़ों डॉलर का दान दे चुके हैं। लेकिन किन्हीं कारणों से जकरबर्ग को स्कूलों में बदलाव के वांछित परिणाम नहीं मिल सके। ऐसे में उनके द्वारा अब अपनी बेटी के जन्म के बाद दान की इस घोषणा को लेकर दुनिया भर में बहस चल रही है। जकरबर्ग ने किसी नॉन प्रॉफिट ग्रुप अथवा चैरिटेबल फाउंडेशन को दान नहीं दिया है।

टैक्स: - जकरबर्ग ने अपनी ही लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी (एलएलसी) को यह दान देने का ऐलान किया है वैसे जकरबर्ग का ये कदम अभी पूरी तरह से साफ नहीं हुआ है कि वे इस दान के माध्यम से टैक्स में छूट पाना चाहते हैं अथवा उनमें वाकई में परोपकार का महती भाव उत्पन्न हो गाया है। जकरबर्ग ने अपनी शुरूआती घोषणा में भी दान का खाका पूरी तरहं साफ नहीं किया हेै। यदि ये मानवीय हितों को तृष्ट करने के लिए है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए।

समस्या: - जकरबर्ग अन्य मानवीय समस्याओं के हल के लिए भी अपना योगदान दे सकते हैं। इनमें से एक अहम विषय है साइबर अपराध। ये अब वैश्विक चुनौती बन गया हेै। दुनिया भर में फेसबुक इंटरनेट का पर्याय बन चुका हें निश्चय ही जकरबर्ग के फेसबुक की पहुंच दुनिया के करोड़ों इंटरनेट यूजर्स तक है। जकरबर्ग यदि दुनिया के विभिन्न देशों की सरकारों को साइबर अपराधों की रोकथाम में अपने योगदान को और बढ़ाएं तो दुनिया का और भला हो सकता है। यहां ये बातें उनके द्वारा किए जाने वाले हालिया ऐलान से अलग है।वे मॉनीटरिंग की ऐसी व्यवस्था कर सकते हैं कि साइबर अपराधों पर लगाम लग सके। आतंकवाद के दौर में जकरबर्ग के द्वारा इस दिशा में उठाया जाने वाला ये छोटा कदम भी बड़ा साबित हो सकता हे। पिछेले दिनों जकरबर्ग का इंटरनेट डॉट ओआरजी भी काफी विशेषज्ञों के नजरिये से संदेह के दायरे में रहा है। इसे भी काफी लुभावने नारे के साथ दुनिया के सामने परोसा गया। लेकिन नेट न्यूट्रैलिटी के लक्ष्य में जकरबर्ग का इंटरनेट डॉट ओआरजी बाधक ही साबित होता दिखाई दे रहा हे। जकरबर्ग को अपना रुख स्पष्ट करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। लेकिन संदेह अब भी कायम हैे।

उपंसहार: - दानदाता चाहें तो बेशक मानवीय जीवन को और अधिक बेहतर बनाने के लिए अपना योगदान जारी रखें। यह पूरे समाज व राष्ट्र के लिए एक मिसाल होगी इससे पूरे राष्ट्र को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी जिससे सही रूप से समाज का विकास हो पाएगा।

- Published on: January 22, 2016