ओलंपिक खेल 2016 (Olympic Games 2016) [ Current Affairs - International Relations ]

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प्रस्तावना:- इस खेल के विकास व शुरूआत के बारे में हम कुछ बाते विस्तार पूर्वक पहले ही दिनांक 9.5.2016 के वर्ड हेरिटेज डे (विश्व प्रैतृक संबंधी खेल दिवस पर) नामक निबंध में बता चुके हैं। पहले ओलंपिक (खेलों से संबंधित, हर चार साल बाद आयोजिक अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता। खेलों को आरंभ करने में कई प्रकार की समस्याएं आई उसके बाद रियों में ओलंपिक खेलों की शानदार शुरूआत हुई।

ब्राजील:-

  • ब्राजील में कुछ ही दिनों के बाद होने वाले ओलंपिक खेलों का लेकर पूरी दुनिया में अनिश्चिता हैं। एक तरफ तो वहां राजनीतिक अस्थिरता हैं, तो दूसरी तरफ तैयारियां अब भी अधूरी हैं। ज्यादातर आयोजन स्थलों में निर्माण कार्य अभी तक जारी हैं। इसके अलावा रियो प्रशासन की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं, जबकि जीका वायरस नामक बीमारी बड़ी चिंता का कारण है। किस आयोजन का कौन जिम्मेदार हैं, यह बताने वाला कोई नहीं हैं।
  • अक्टुम्बर 2009 में जब 31वें ओलंपिक खेलों की मेजबानी मिली थी, जब पूरे देश में उत्साह की लहर थी, ब्राजील सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए थे, यह तक कहा गया था कि सारी तैयारियां समय से पहले पूरी कर ली जाएंगी। पिछले तीन सालों में ओलंपिक की तैयारियों के दौरान ही वहां बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया और उसकी आंधी में डिलमा रुसौफ को राष्ट्रपति पद गंवाना पड़ा। यहां बताना यह है कि तीन असफल प्रयास करने के बाद ब्राजील को 2016 के ओलंपिक की मेजबानी मिली थीं। यह उपलब्धि हासिल करने वाला दक्षिण अमेरिका का यह पहला देश था।

रियो:-

  • रियो में होने वाले ओलंपिक खेल किसी प्राकृतिक आपदा से कम नहीं हैं। लेकिन रियो डी जेनेरियों राज्यों में लोक आपदा घोषित कर दी गई है। राज्य के राज्यपाल ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वित्तीय संकट के कारण उनके लिए ओलंपिक खेलों के दावे पूरे करना मुश्किल साबित हो रहा है। यह सकंट जितना दिखाई देता है, उससे कही ज्यादा गंभीर है। वे कहते है कि रियो में सार्वनजिनक सुरक्षा, लोक स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, पर्यावरण, सरंक्षण सब धाराशायी हो चुके हैं। जो प्रशासन या अधिकारी इस कार्यक्रम से जुड़े हैं, वे लोगों से जुड़ी सुविधाएं जुटाने के लिए बाध्य हैं और यह राज्य भी केंद्र सरकार से आपात वित्तीय सहायता लेकर सेवाएं देने के लिए तत्पर है। यहां जो उपाय किए जा रहे हैं, वे अचानक आई प्राकृतिक आपदा से निपटने जैसे हैं, लेकिन ये ओलंपिक खेल मानव निर्मित ऐसी तबाही है, जिसे रोका जा सकता था। वहां पर ओलिंपक दौरा किया गया वहां कर्मचारी ऐसे काम कर रहे थे जैसे ओलंपिक 2017 में होने वाले हैं।

तैयारियां-

  • कोई नहीं जानता कि कोनसे निर्माण स्थल पर क्या बनाया जा रहा है और न हीं वहां लोग काम करते दिखते हैं। आप देखकर अंदाजा भी नहीं लगा सकते है कि टेन्ट (तिरपाल) वॉलीबॉल की जॉगिंग (लगातार हल्की दौड़) पैनल (पट्टी या पट्टा) के लिए लग रहे हैं या फुटबॉल के लिए। 96 हजार 500 करोड़ रुपए के बजट में चार ओलंपिक जोन में 30 प्रतियोगिता वैन्यू (जिस स्थान पर लोक एकत्र होते हैं, विशेषत: किसी खेल प्रतियोगिता, संगीत-समारोह आदि के लिए) बनाए जाने थे। वहां वर ऐसा कोई वैन्यू नजर नहीं आया। एथलीटों (बलवान व पुष्ट खिलाड़ी) की सुरक्षा बहुत बड़ी चिंता होगी, उन्हें यहां डर भी हैं क्योंकि यहां के ड्रग तस्कर आसपास के 20 क्षेत्रों तक सक्रिय है। इस वर्ष रियो राज्य में ही अब तक 43 पुलिसकर्मी मारे जा चुके हैं और 238 नागरिक पुलिस दव्ारा मारे जा चुके हैं। यहां रहने वाले हर नागरक को डर है कि ओलंपिक खेलों के दौरान पुलिस हिंसा बढ़ सकती है। सरकार ने ओलंपिक के लिए 85 हजार सैनिक एवं पुलिसकर्मियों को तैनात करने की व्यवस्था की है, यह संख्या लंदन 2012 ओलंपिक से दोगुनी है। ओलंपिक एरेना के आसपास लगातार गोलीबारी हो रही है। इस वर्ष 76 लोगों को गोलियां लगीं। 21 की जान चली गई। अनुमान है कि ओलंपिक में करीब 5 लाख लोग आएंगे, ऐसे में वे कैस वैन्यू तक पहुंच पाएंगे क्योंकि सड़कों पर पर्यटक सूचनाएं और लोक परिवहन की हालत पहले ही खराब है।

दिवालिया:-

  • राज्य के कार्यवाहक सरकारी फ्रांसिस्को डॉर्नेल्स ने दो सप्ताह पहले एक मैग्जीन (पत्रिका) को दिए साक्षात्कार में कहा था- यहां सब कुछ कैसे बिगड़ गया इसका बड़ा कारण पैसा है। रियो राज्य दिवालिया हो चुका है। वर्तमान राज्यपाल गंभीर रूप से बीमार होने के कारण छुट्‌टी पर हैं। पिछले क्रिसमस पर उन्होंने ’स्वास्थ्य व्यवस्था का आपातकाल’ घोषित कर दिया था। परिणामस्वरूप अस्पतालों ने दलो को बंद कर दिया, क्योंकि उपकरणों, दवाइयों, अन्य आपूर्ति और वेतन के लिए पैसा नहीं था। रियो राज्य ने 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपए केंद्र सरकार से, 67 हजार करोड़ रुपए सार्वजनिक बैंको और अंतरराष्ट्रीय बैंको से ले रखे हैं। इस वर्ष ही बजट में 37 हजार करोड़ रुपए ही कम पड़ रहे हैं। ओलंपिक खेलों की सुरक्षा के लिए 5,700 करोड़ रुपए का नया कर्ज मंजूर हुआ है। इस आपदा का असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जिसमें देश का आर्थिक संकट भी शामिल है। इसका मूल कारण सरकार के वेतन में अपार बढ़ोत्तरी और ओलंपिक के लिए अंधाधुंध खर्च हो सकता है। हालांकि राजधानी के मेयर एडुदों पाइस दावा करते हैं कि ओलंपिक की तैयारियां प्रभावित नहीं होगी।

शानदार:-

  • ’आपादा’ का मूल कारण वित्तीय ही नहीं, राजनीतिक भी है। यह देश बड़े राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। राजनीति संकट ने देश की व्यवस्था को पंगु बना दिया है। इससे भी अर्थव्यवस्था थम गई है। महत्वपूर्ण सुधार योजनाओ और इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी संरचना) परियोजना में फेसले लेने में देरी हुई है। इस अस्थिरता ने निवेश को प्रभावित किया है। नए खेल मंत्री लियरेनार्डो पेसिनी कहते हैं- ओलंपिक खेल आयोजन शानदार होगा। वे दावा करते हैं कि जीका वायरस से लोगों को बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। फिर भी जैसन डे जैसे विश्व के नंबर वन गोल्फर ने ओलंपिक में नहीं आने का फैसला किया है। पिछले महीने ही दुनियाभर के 150 बड़े चिकित्सकों, जैविक विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने खुला पत्र जारी करके कहा कि ओलंपिक आयोजन अन्य देश मेें स्थानातंरण किया जाए या रद्द किया जाए।

मशाल यात्रा:-

  • आखिर कार सब समस्याओं के बावजूद रियो में शानदार पूर्वक ओलंपिक खेलों की मशाल यात्रा की शुरूआत हो गई हैं। रियो डी जिनेरियों में 5 से 21 अगस्त तक होने वाले ओलंपिक मशाल को यूनान के शहर ओलंपिया में प्रज्जवलित की गई। मशाल के प्रज्जवलित होने के साथ ही रियो ओलंपिक की गिनती भी शुरू हो गई हैं। इस मशाल को 27 अप्रेल को रियों आयोजकों को सौंपा जाएगा। इसके बाद यह लुसाने स्थित ओलंपिक संग्रहालय और फिर जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय ले जाई जाएगी। यह मशाल तीन मई को राजधानी ब्राजिलिया पहुंचेगी और फिर यहां से 2016 ओलंपिक की मशाल यात्रा शुरू होगी। इस दौरान मशाल ब्राजील के 26 राज्यों के 300 शहरों का सफर तय करेगी और 12 हजार हाथों से होकर गुजरेगी। लेकिन इस बार आयोजकों ने परंपरा से परे मिशाल को मुख्य स्टेडियम (खेल का खुला मैदान) की जगह शहर के एक खास हिस्से में प्रज्जवलित करने का फैसला किया है। आयोजकों ने पुष्टि की कि इस सफर का समापन माराकाना स्टेडियम में पांच अगस्त को होने वाले उद्घाटन समारोह के बाद मशाल को अगले दिन एक उपनगरीय इलाके मेें ले जाया जाएगा और वहीं यह पूरा समय प्रज्जवलित रहेगी।

दिग्गज खिलाड़ी:-

  • दक्षिण अमरीकी देश ब्राजील में ओलंपिक मशाल का 95 दिनों का संफर शुरू हो गया है। मशाल स्विट्‌जरलैंड से यहां पहुंची है। पहली बार मशाल थामने वाले 10 लोगों में ब्राजील के बेहतरीन एथलीट शामिल रहे। ओलंपिक की यह मशाल 95 दिनों के दौरान ब्राजील के 300 शहरों से होकर गुजरेगी। बीजिंग 2008 और लंदन 2012 में वॉलीबॉल की दो बार की ओलंपिक सर्वश्रेष्ठ विजेता फाबियाना क्लॉडिनों को ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ ने मशाल सौंपी। फाबियाना ने मिनिसिट्रीज एस्पलानेड से अपने सफर की शुरूआत की। महिलाओं की वॉलीबॉल दल के सम्मान में रोसेफ ने दिग्गज खिलाड़ी को पहली मशाल के रूप में चुना। दूसरे मशाल वाहक गणितज्ञ आर्तुरो अविला कार्डिएरो दे मेलो रहे, जो ’फील्ड्‌स मेडल’ (क्षेत्र पदक) जीतने वाले पहले लातिन अमरीकी है। ब्राजील के लिए महिलाओं की मुक्केबाजी स्पर्द्धा में पदक जीतने वाली अदरियाना अराउजो भी मशाल वाहकों में शामिल रहीं।

आरंभ:-

  • रियो डि जनेरियो दुनिया का सबसे बड़ा खेलों का मेला ’ओलंपिक’ ब्राजील के शहर रियो डि जेनेरियो में संगीत की धुनों, बोसा नोवा, सांबा डांस और देश के खूबसूरत जंगलों के संरक्षण के संदेश के साथ शुरू हो गया हैं। मेजबान देश ब्राजील के ऐतिहासिक माराकाना स्टेडियम (खेल मैदान) में भारतीय समयनुसार 6 अगस्त शनिवार सुबह साढ़े चार बजे 31वें ओलंपिक खेलों का आरंभ हुआ। बीजिंग ओलंपिक 2008 और लंदन ओलंपिक 2012 की भव्यता से इतर रियो ओलंपिक ने अपनी सादगी भरे संगीतमय और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ दुनियाभर के लोगों का दिल जीत लिया। मेजबान देश की संस्कृति का अहम हिस्सा रियों के बीचों बीच पर बसी झुग्गी बस्ती ’फेवेला’ और उसमें रहने वाले लोगों की झलक भी दुनिया को देखने को मिली। 2016 रियो ओलंपिक आईओसी प्रमुख थॉमस बाक की अध्यक्षता में पहला ग्रीष्मकालीन ओलंपिक है।

प्रज्जवनल:-

  • माराकाना स्टेडियम में ओलंपिक मशाल पहुंचने के बाद ज्योति प्रज्जवनल ब्राजील के मैराथन धावक वैनछेरली कोरडिएरो डि लीमा ने किया। एथेंस ओलंपिक 2004 के कांस्य पदक विजेता ब्राजील के लंबी दूरी के धावक माराकाना स्टेडियम में पहुंचे जहां अन्य एथलीटों ने उन्हें मशाल सौंपी और फिर उन्होंने स्टेडियम में रखे बड़े से ’काल्ड्रान’ (हांडी) में ओलंपिक मशाल से ज्योति प्रज्जवलित की। इस ज्योति प्रज्जवनल के लिए काल्ड्रान को भी इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इससे कम से कम धुआं निकले और पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। लीमा से पहले पेले को ज्योति प्रज्जवलित करनी थी लेकिन स्वस्थ नहीं होने के कारण वह उद्घटन समारोह में हिस्सा नहीं ले पाए।

प्रस्तुति:-

  • 300 पेशेवर डांसर और पांच हजार अन्य कलाकारों ने ब्राजील के मशहुर निर्देशक फर्नांडो मिरलैस के निर्देशन में प्रस्तुति दी। 03 अरब लोगों ने लगभग टीवी पर ओलंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह को देखा। 206 देशों के एथलीट हिस्सा ले रहे हैं। 11 हजार एथलीट इस ओलंपिक में शिरकत कर रहे हैं। 2.1 करोड़ डॉलर (लगभग 140 करोड़ रुपये) समारोह पर खर्च हुआ। 28 विभिन्न खेलों के 306 स्पर्धाओ में पदक के लिए भिड़ेंगे एथलीट। ब्राजील की कला-संस्कृति का प्रदर्शन 06 हजार कलाकार करेंगे। 2012 के लंदन ओलंपिक की तुलना में 90 प्रतिशत कम खर्च होगा। कुल 2,488 पदकों के लिए होगा मुकाबला। जिसमें 812 स्वर्ण, 812 रजत व 864 कांस्य पदक है।

रियो ओलंपिक:-

  • इस खेल में 50 हजार रुपए करोड़ खर्च किए। 01 बार द. अमरीका में। 42 खेलों में भाग लेंगे खिलाड़ी। 10,500 एथलीट ले रहे हैं भाग 13 वर्षीय नेपाल की गौरिका सबसे युवा (तैराकी)। 61 वर्षीय मैरी हेना (घुड़सवारी) हैं सबसे उम्रदराज एथलीट। 18,668 किमी की दूरी तय कर पहुंचे गुआमी खिलाड़ी। 3.80 लाख विदेशी दर्शक।

स्पार्धाएं:-निम्न हैं-

  • तीरंदाजी, जिम्नास्टिक, एथलेटिक्स, बैडमिंटन (रैकेट और शटलकॉक से खेला जाने वाला खेल), बास्केटबॉल (5-5 खिलाड़ियों की दो दलों का खेल जिसमें ज़मीन से 10 फीट ऊँचे खुले जाल में गेंद डालनी होती हैं), बीच वालीबॉल, बॉक्सिंग (मुक्केबाजी), केनोय स्प्रिंट (थोड़ी दूर अतिवेग से दौड़ना), साइक्लिंग (साइकिल की सवारी करना), माउंटेन (पर्वत या पहाड़) बाइक (मोटरसाइकिल), साइक्लिंग सड़क, साइक्लिंग ट्रैक (पाथ), डाइविंग (गाड़ी चलाने वाला), घुड़सवारी, तलवारबाजी, फुटबॉल, गोल्फ हैडबॉल, हॉकी, जूडो मैराथन स्विमिंग (तैरना), मॉडर्न (आकर्षक) पेंटाथलन, रिद्मिक जि., रोइंग, रग्बी सेवंस, सेलिंग शूटिंग, तैरना, स्नेच (समकालीन) तैरना, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, टेनिस, ट्राएथलॉन, वॉलीबॉल, वाटरपोली, वेटलिफ्टंग (वजन उठाना), कुश्ती।

भारत दल:-

  • कलाकारों की प्रस्तुतियों के बाद विभिन्न राष्ट्रों के एथलीटों की परेड (जुलूस या प्रदर्शन) शुरू हुई जिसमें यूनान का दल सबसे पहले आया जबकि भारतीय दल राष्ट्रों की परेड में 95वें नंबर पर खेल मैदान में पहुंचा। भारतीय दल की अगुआई देश के एकमात्र ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज अभिवन ब्रिंदा के हाथों में रही जो तिंरगा थामें 118 सदस्यीय भारतीय दल के साथ स्टेडियम में आए। भारतीय दल में महिला खिलाड़ियों ने पीले व नीले रंग की साड़ी और ब्लेजर पहना था जबकि पुरुष एथलीट नीले रंग के सूट में दिखाई दिए तथा स्टेडियम में बैठे सभी लोगों का हाथ हिलाकर उन्होंने अभिवादन किया।

भारतीय खिलाड़ी :-

  • भारत के कुल खिलाड़ी 118 हैं, सबसे युवा खिलाड़ी मैथ्यू जिस्ना (17 वर्ष) उम्रदराज खिलाड़ी लिएंडर पेस (47 साल) 56 प्रतिशत 25 साल से कम और 45 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। पहली बार 70 प्रतिशत खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। ज्यादा खिलाड़ी पंजाब, हरियाणा व केरल के हैं।
  • भारतीय महिला हॉकी दल की सबसे भरोसेमंद फॉरवर्ड (पीछे) का नाम है रानी रामपाल। फर्श से अर्श पर पहुंचने के बाद इस खिलाड़ी के पांव अभी भी जमीन पर ही हैं। शाहबाद हॉकी अकादमी से करियर (जीवनवृत्ति) की शुरूआत करने के बाद वह एक शानदार फॉरवर्ड खिलाड़ी के रूप में तबदील हुई है। इन्होंने आखिरी बार 1980 में मास्को ओलंपिक में हिस्सा लिया था। उसके बाद से इतने लंबे समय के बाद अब यह मौका आया है और रियो में रानी अपना सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन करेंगी।
  • ओलंपिक में पदक जीतना हर दल का सपना होता है। लेकिन हमें सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए। हमने पहली बार ओलंपिक के लिए क्वालीफाई (योग्य) कर इतिहास रचा हैं। हमारा पहला लक्ष्य शीर्ष-6 में पहुंचना है। हम अच्छा खेलने के लिए पूरी कोशिश करेंगे।

                                                                                                                                         रानी रामपाल

  • यह वो पल है जिसका हम सभी को बेसब्री से इंतजार था। इस देश ने पिछले सात वर्षो में वह हासिल किया है जो कई पीढ़ियों को संघर्ष के बाद हासिल होता हैं ब्राजीली इस पर गर्व कर सकते हैं।

                                                                                                             थॉमस बाक, आईओसी अध्यक्ष

दिल्ली:-

  • भारत के 118 खिलाड़ी ब्राजील के रियो डी जेनेरो में पांच से 21 अगस्त तक होने वाले 31वें ओलंपिक में 14 खेलों में अपनी चुनौती रखेंगे।
  • केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष एन. रामचंद्रन और महासिचव राजीव मेहता, रियो के लिये भारतीय दल प्रमुख राकेश गुप्ता और भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक इंजेटी श्रीनिवास की उपस्थिति में अपने निवास पर संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। दिल्ली में मुख्य जगहों पर बड़ी पर्दे पर लगाकर दिखाया जाएगा। केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने कहा है कि हम चाहते हैं कि दिल्लीवासी रियो ओलंपिक का पूरा मजा लें। हम ओलंपिक के दौरान कुछ विशेष इंतजाम कर रहे हैं।
  • हॉकी (बर्फ़ पर खेला जाने वाला हॉकी का खेल) इंडिया (भारत) (एचआई) के दो तकनीकी अधिकारी रियो ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। रियो ओलंपिक में भारत की पुरूष और महिला दलों के अलावा दो भारतीय तकनीकी अधिकारी ओलंपिक की हॉकी प्रतियोगिता में मौजूद रहेंगे। अंजली शर्मा रियों में जज होगी जबकि जावेद शेख अंपायर की भूमिका में होंगे।
  • दिल्ली के खेल मंत्री ने यह भी कहा कि रियो ओलंपिक में हिस्सा लेने जा रही महिला पहलवानों के लिए महिला फिजियोथेरेपिस्ट (व्यायाम पद्धति) उपलब्ध कराएगा। मंत्रलाय ने संचार में इससे जुड़ी खबरो पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय रियो ओलंपिक समिति ने खिलाड़ियों के साथ जाने वाले सहायक सदस्यों की संख्या सीमित कर रखी है।

पेरिस:-

  • ब्राजील के इस्लामिक कठ्ठरपंथी रियो डी ओलंपिक जेनेरो में आयोजित होने वाले ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले फ्रांसीसी एथलीट दल पर हमला करने की योजना बना रहे हैं, फ्रांस की खुफिया जांच एजेंसी (कार्यकता) की रिपार्ट (विवरण) में इसका दावा किया गया हैं कि। फ्रांस के सैन्य खुफिया निदेशालय (डीआरएम) के जनरल क्रिस्टोफे गोमार्ट ने संसदीय आयोग की फ्रांस में गत वर्ष हुये आतंकवादी हमलों के मामले पर सुनवाई में जानकारी मई में दी थी। इस बयान को हाल में सार्वजनिक किया गया। गोमार्ट ने सांसदों को बताया कि उन्हें खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली है कि रियों में फ्रांसीसी खिलाड़ियों पर ब्राजील के इस्लामिक कठ्ठरपंथी हमले की योजना बना रहे हैं।

यहां कुछ प्रमुख देशो के रियो में पदक जीतने वाले विजेता खिलाड़ियों का उल्लेख किया जा रहा हैं-

भारतीय खिलाड़ी साक्षी मलिक और पीवी सिंधु:- रियो ओलंपिक की महिला बैडमिंटन में रजत पदक जीतकर पीवी सिंधु ने भारत के लिए पहली महिला के ओलंपिक खेलने के 92 साल बाद ऐसा करने वाली पहली महिला होने का श्रेय हासिल कर लिया। भारतीय खेल प्रेमियों को जहां एक तरफ उनके रजत पदक जीतने की खुशी है, वहीं स्वर्ण पदक के इतना करीब आकर सिंधु के चूक जाने का दर्द भी खेल दिखाने वाली सिंधू के समाप्ति में देखा गया हैं। जिसके प्रमुख कारण निम्न हैं-

  • जिसमें अनुभव का अंतर।
  • दांहे-बाहे हैंड (हाथ) खेल का अंतर।
  • आक्रामक खेल नहीं दिखा पाना।
  • भारत का भाग्य भी विपक्ष में था।
  • स्टेमिना (ताकत) का अंतर।

इन कारणों की वजह से सिंधु के हाथों से स्वर्णपदक निकल गया।

  • महिला-पुरुष अनुपात:- बेटियां की आखिरकार रियो ओलंपिक मेें पदक का सुखा समाप्त करने में सफल रही। पहलवान साक्षी मलिक के कांस्य पदक जीतने के 18 घंटे बाद बैडमिंटन खिलाड़ी पी.वी सिंधू ने स्वर्ण पदक की ओर कदम बढ़ा लिए। सिंधू ओलंपिक खेलों के इतिहास में बैडमिंटन स्पर्धा के समाप्ति में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी है। दोनों पदक जीतने वाली बेटियां वहीं से हैं, जहां महिला-पुरुष अनुपात सबसे कम है। हरियाणा देश के उन 265 जिलों में शामिल है जिन्हें लिंग समस्या घोषित किया है।
  • एवं सिंधु चांदी जीतने वाली हैदराबाद से हैं। आंध्रप्रदेश में सबसे खराब लिंगानुपात यहीं है। साक्षी के शहर रोहतक में लिंगानुपात 867 है। हरियाणा के 17 जिलें में लिंग समस्या हैं। यहा लिंगानुपात 900 से कम है। जबकि लिंगानुपात 940 से 98 के बीच होना चाहिए। सिंधु के प्रदेश में हैदराबाद में लिंगानुपात तो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। लेकिन आंध्र के अन्य जिलों से कम है। यहां लिंगानुपात 945 है। जबकि आंध्र का औसत लिंगानुपात 992 है।

साक्षी मलिक-

  • जिला रोहतक हरियाणा की रहने वाली भारतीय महिला पहलवान साक्षी मलिक ने रियो ओलंपिक में देर रात 2.53 बजे इतिहास रच दिया। साक्षी पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं, जिन्होंने कुश्ती के मुकाबले में कांस्य पदक जीता। इसके साथ ही भारत का भी ओलंपिक में खाता खुला। उन्होंने किर्गिस्तान की असुलू तिनीबेकोवा को 8-5 से हराया। साक्षी का बचपन मोखरा गांव में ही बीता है।
  • 12-3 से ओरखोन को शिकस्त मिली, इससे पहले साक्षी मलिक ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए मंगोलिया की ओरखोन बरवोर्ज को 12-3 से शिकस्त दी। साक्षी को क्वार्टर (चतुर्थ भाग) फाइनल (अंतिम) में हार का सामना करना पड़ा था लेकिन उनकी विपक्षी रूसी पहलवान के समाप्ति में पहुंचने के कारण साक्षी को रेपचेज राउंड (गोला) में उतरने का मौका मिला। भारतीय पहलवान ने ओरखोन के खिलाफ रेपचेज राउंड का यह मुकाबला 12-3 से जीत लिया। पहले राउंड में स्कोर 2-2 से जीत लिया। पहले राउंड में स्कोर 2-2 से बराबर था लेकिन दूसरे राउंड में साक्षी ने 10 अंक बटोर कर मुकाबला निपटा दिया।
  • साक्षी मलिक (58 क्रिगा) और विनेश फोगाट (48 क्रिगा) को क्वार्टर फाइनल (चौथाई भाग अंतिम) में हार का सामना करना पड़ा था। साक्षी को 58 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में रूस की वैलिरिया कोब्लोवा झोलोबोवा ने 9-2 से पराजित किया जबकि विनेश को चोटिल होने के कारण 48 किग्रा वर्ग में चीन की यानन सुन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबला छोड़ देना पड़ा। साक्षी को हराने वाली रूस की वैलिरिया ने सेमीफाइनल (उपांत) में किर्गिजस्तान की एसुलू तिनीबेकोवा को 4-1 से पराजित किया।
  • अपन पहला राउंड (गोला) 11-0 से जीतने वाली विनेश के लिए यह बड़े दुर्भाग्य की बात रही कि उन्हें चोटिल होने के कारण चीन की यानन सुं के खिलाफ अपना मुकाबला छोड़ देना पड़ा। उस समय विनेश 0-5 से पीछे थीं। विनेश को अपने पहले मुकाबले में ही कुछ चोट लग गयी थी और क्वार्टर फाइनल (चौथाई भाग अंतिम) में उनके घुटने की चोट ने उन्हें मुकाबले से बाहर कर दिया। इस के साथ ही विनेश के अभियान का ओलंपिक में दुर्भाग्यपूर्ण अंत हो गया।
  • इस महिला पहलवान ने इतिहास रचा है। एक के बाद एक लगातार 8 घंटे में 5 मुकाबले खेलकर थकान से चूर दिखाई दे रही साक्षी मलिक ने अंको में 0-5 से पिछड़ने के बाद अंतिम 40 सेंकड में हार तय मानकर रह गई फिर उन्होंने खेल में जोश दिखाया, जिसकी बदौलत वो करिश्माई वापसी की, जिससे उसने एशियाई विजेता किगिंस्तान की एसुलू तिनिबेकोवा को 8-5 से हराकर कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। साक्षी को रूसी पहलवान वैलिरिया से क्वार्टर फाइनल (चौथाई भाग अंतिम) में 2-9 से हार मिलने पर निराशा का सामना करना पड़ा था, लेकिन वैलिरिया के समाप्ति में पहुच जाने पर उन्हें कांस्य पदक के लिए रेपचेज राउंड में उतरने का मौका मिला। इसमें साक्षी काने मंगालिया की पूर्वादरोज ऑरखाने को 3-1 से हराते हुए कांस्य के मुकाबले में तिनिबेकोवा से भिड़ने का टिकट हासिल किया। समाप्ति में पहले ही मिनट से साक्षी के ऊपर क्वालिफिकेशन (योग्यता), एलिमिनेशन (हराकर बाहर कर देना), क्वार्टर (चौथाई भाग) और रेपचेज राउंड (गोला) सहित कुल चार मुकाबलों में अपनी ताकत खर्च करने की थकान साफ दिखाई दे रही थी। इसका परिणाम पहले गोले में साक्षी के बिना मुकाबला किए विपक्षी पहलवान को 5 अंक जुटा लेने की मोहलत देने तक सभी दिखाई दिया।

पी.वी. सिंधु:-

  • सिंधु की चीनी खिलाड़ी के खिलाफ करियर के कुल सात मुकाबलों में यह तीसरी जीत है, जबकि वांग ने भारतीय खिलाड़ी को चार बार हराया है। सिंधु की चीनी खिलाड़ी के खिलाफ यह लगातार दूसरी जीत भी है। उन्होंने आखिरी बार गत वर्ष डेनमार्क ओपन (खुले) में वांग को 21-18, 21-19 से हराया था।
  • टारगेट (लक्ष्य)-सेमीफाइनल में अब सिंधु के सामने विश्व की छठे नंबर की खिलाड़ी जापान की नोजोमी ओकूहारा की चुनौती होगी। आकूहारा ने अंतिम आठ में हमवतन अकाने यामागुची को एक घंटे आठ मिनिट तक चले रोमांचक मैच में 11-21, 21-17, 21-10 से हराया।

सिंधु की उपलब्धियां:-

  • 2013 और 2014 में दोबर वर्ल्ड (विश्व) बेडमिंटन चैपियनशिप (सर्वश्रष्ठ विजेता) में कांस्य जीत चुकी हैं ब्रांज पदक। 2014 एशियन खेल में जीता ब्रांज पदक। राष्ट्रमंडल खेले के सेमीफाइनल उपांत में पहुंची।
  • 2014 कॉमनवेल्थ (राष्ट्रमंडल) में जीता ब्रांज पदक।
  • 2011 कॉमनवेल्थ यूथ (युवा) खेलों में जीता डबल्स में गोल्ड (दोबारा में स्वर्ण)।
  • 2015 में डेनमार्क ओपन (खुले) में समाप्ति खेला पदमश्री अवार्ड (पुरस्कार) से नवाजा गया।
  • सर्वाधिक अब तक विश्व में 09 रैंक रह चुकी है।

यह जीत जीवन के सर्वश्रेष्ठ पलों में से एक है। मेरा मकसद अब स्वर्ण जीतना है।

पीवी सिंधु, बैडमिंटन खिलाड़ी

सिंधु का सम्मान:-

  • रियो ओलंपिक में बैडमिंटन खिलाड़ी सिंधु ने जब से ओलंपिक में रजत पदक जीता है तब से तेलगांना और आंध्र सरकार में उन्हें सम्मानित करने को लेकर होड़ मची हुई हे। दोनों सरकारों के बीच प्रतिस्पर्धा की वजह से हुई धनवर्षा और अन्य सुविधाओं की घोषणा से सिंधु करोड़पति बन गई है। अभी तक सिंधु पर 13.11 करोड़ रुपए की बारिश हो चुकी है तो आने वाले दिनो में दोनों राज्य सरकारों दव्ारा सिंधु के सम्मान में अलग-अलग कार्यक्रमों को लेकर रुपरेखाएं भी तैयार की जा रही हैं। तेलंगना सरकार ने सिंधु को अभी तक पांच करोड़ रुपए, एक हजार गज जमीन, सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। वहीं आंध्र प्रदेश की चंद्र बाबू नायडू की सरकार ने भी सिंधु को तीन करोड़ रुपए, सरकारी जमीन, अधिकारी स्तर की नौकरी देने की घोषणा की है। इनके अलावा 50 लाख भारत हरियाणा से, मध्यप्रदेश और खेल मंत्रालय बैडमिंटन एसों ने दिए। 02 करोड़ दिल्ली सरकार ने दिए। 75 लाख, भारत पेट्रोलियम ने दिए, 30 लाख भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन (सभा, परिषद) ने दिए, 5 लाख पूरे भारत फुटबॉल फेडरेशन (कई राज्यों का संघ या राज्य संघ) ने दिए। 01.01 सलमान खान ने दिए हैं। बीएमडब्लू कार, आंध्र क्रिकेट कैप्टन वी. चामुंडेश्वरनाथ ने दी।
  • सीआरपीएफ-देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल सीआरपीएफ ने पीवी सिंधु को ब्रांड (व्यापारिक चिन्ह) एंबेसडर (प्रतिनिधि) नियुक्त करने और उन्हें कमांडेट (प्रयोग/नियंत्रण के लिए योग्यता) का मानद पर देने का फैसला किया हैं। सीआरपीएफ में कमांडेट का पद पुलिस अधीक्षक के बराबर होता हैं। इस रैंक का अधिकारी 1000 सैनिकों की बटालियन का प्रमुख होता हैं।

पूर्व के ओलंपिक में पदक जीतने वाली भारतीय महिलाएं:- निम्न हैं-

  • कर्णम मल्लेश्वरी- 2000 सिडनी ओलंपिक में भारत के लिए पहला पदक मिला।
  • मेरी कॉम- ओलंपिक में भारत की एमसी मैरीकॉम को कांस्य पदक पर ही रोकने वाली ब्रिटेन की महिला मुक्केबाजी निकोला एडम्स ने रियो ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक जीता है। लंदन ओलंपिक की स्वर्ण विजेता एडम्स ने फ्लाईवेट (तेज गति) वर्ग के फाइनल (अंतिम) में फ्रांस की सराह ओराहमौन को हराया। 33 वर्षीय एडम्स इस जीत के साथ 1924 के बाद ब्रिटेन की तरफ से लगातार दो स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली मुक्केबाज बन गई है।
  • साइना नेहवाल-2012 ओलंपिक में बैडमिंटन में कांस्य पदक जीता।

1996 में चार महिलाएं शामिल हुई थीं, अबकी बार 44 हुई। वहीं पुरुष 54 से बढ़कर 66 हुए हैं।

महिला एथलीटों की संख्या में बढ़ोतरी:-

  • 1896 के पहले ओलंपिक खेल में एक भी महिला खेल के लिए क्वालीफाई (प्रतिबंध पूरा नहीं कर पाई) नहीं कर पाई थीं। 1900 में पेरिस खेल में पहली बार महिलाओं को पांच खेलों में शामिल किया गया। इनमें टेनिस, सेलिंग, क्रॉकेट, ऐ स्टेरियन और गोल्फ शामिल था। 1922 में फ्रांस ने पहली बार महिला ओलंपिक की शुरूआत कर चौंकाया। इसमें 20 हजार महिलाओं ने 11खेलों में हिस्सा लिया। 1928 में ओलंपिक में 10 खेल महिलाओं के लिए शुरू हुए। 1952 हेलसिंकी खेल में रूस दव्ारा प्रशिक्षित महिलाओं ने कई खेलें में अच्छा प्रदर्शन किया। 1972 में अमरीकी सरकार ने एक बिल पास किया। 4 दशक में महिला एथलीटों की संख्या 30 हजार से बढ़कर 1.90 लाख हुई।

चीन के खिलाड़ी:- के विजेता निम्न हैं-

  • काओ युआन ने पुरुषों की व्यक्तिगत तीन मीटर स्प्रिंगबोर्ड स्पर्धा में बिना किसी चुनौती के स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है जो रियो ओलंपिक की गोताखारी स्पर्धा में चीन का पांचवां स्वर्ण पदक हैं। 21 साल के काओं अपने समूह के प्रारंभिक और सेमीफाइनल राउंड (उपांत गोल) में शीर्ष पर रहे। काओ का ये ओलंपिक में पहला व्यक्तिगत और ओवरऑल (कुल मिलाकर) दूसरा स्वर्ण है। उन्होंने लंदन ओलंपिक में लयबद्ध गोताखोरी में स्वर्ण जीता था।
  • चीन महिला खिलाड़ी विजेता- चीन की महिला वॉलीबाल दल ने सर्बिया को पीछे छोड़ते हुए 12 साल बाद फिर से ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीत लिया है, जो उसका इस खेल में तीसरा ओलंपिक स्वर्ण पदक है। सर्बिया पहली बार वॉलीबाल में उतरा था और चीन को प्रारंभिक गोले में हराया था। लेकिन चीन ने 19-25, 25-17, 25-22, 25-23 से समाप्ति में जीत दर्ज की। चीन ने वर्ष 1984 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक में अपना पहला स्वर्ण जीता था।
  • चीन के अन्य विजेता- चीन के डाइविंग खिलाड़ी चेन आइसेन ने इस इवेंट (स्पर्धा) का स्वर्ण जीता। वे 559.90 अंक के साथ पहले पर रहे। चीन के ही बो क्यू ने सिल्वर (चाँदी) और मैक्सिकों के इवान गासिया ने ब्रॉन्ज जीता। चीन के खिलाड़ियों ने इस स्पर्धा के आठ में से सात स्वर्ण जीते। हालांकि 10 मीटर स्पर्धा का स्वर्ण चीन 2004 के बाद जीत है।

ब्रिटिश के विजेता खिलाड़ी:-

  • आइवरी कोस्ट के चिक सालाह सिसे ने रियों ओलंपिक के ताइक्वांडों मैच के 80 किग्रा वर्ग में आखिरी सेंकेडो में बेहद शानदार प्रदर्शन करते हुये ब्रिटेन के लुटाली मोहम्मद को हराकर अपने देश को ओलंपिक इतिहास का पहला स्वर्ण पदक दिला दिया। स्पर्धा के 80 किग्रा वर्ग में ब्रिटिश मूक्केबाज मोहम्मद के खिलाफ चार अंक की बढ़त लेने के बाद सिसे ने एक बार फिर से चार अंक की बढ़त लेकर बेहद रोमांचक मुकाबले में अपनी जीत तय कर दी। जीत से आइवरी कोस्ट ने ओलंपिक इतिहास में पहली बार स्वर्ण पदक और रियों में दूसरा पदक जीत लिया है। इससे पहले महिला ताइक्वांडों में रूथ गबाणी ने 67 किग्रा वर्ग में कांस्या जीता था।

अफ्रीका:-

  • देश नाइजर के लिए इसोफू अल्फागा अब्दुल रज्जाक ने पुरुषें की 80 किग्रा ताइक्वांडों स्पर्धा का रजत पदक जीता है, जो उनके देश का ओलंपिक में 1972 में मुक्केबाजी के कांस्य पदक के बाद मात्र दूसरा पदक है और रियो ओलंपिक में यह किसी अफ्रीकी खिलाड़ी का कुल पांचवां पदक है। इसोफू ने उज्बेकिस्तान के विश्व विजेता दिमित्री शौकिन को सेमीफाइनल (उपांत) में हराया था।

अमेरिका:- प्रमुख विजेता निम्न हैं-

  • अमेरिका की महिला बॉस्केटबॉल दल ने रियो ओलंपिक के समाप्ति मुकाबले में स्पेन को 101-72 से हराकर लगातार छठी बार स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। ओलंपिक इतिहास के बॉस्केटबॉल स्पर्धा में इससे पहले अमेरिका की पुरुष दल ने 1939 से 1968 के दौरान लगातार सात बार स्वर्ण जीता था। वे वही समय था, जब भारतीय पुरुष हॉकी दल ने 1928 से 1956 के दौरान लगातार छह स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे।
  • धावक विजेता- अमेरिका के तेज धावकों में से एक मैथ्यू सेंट्रोविट्‌ज ने रियों ओलंपिक के 1500 मीटर दौड़ के फाइनल (अंतिम) स्पर्धा में 108 साल बाद स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। 26 वर्षीय सेंट्रोविज ने तीन मिनट 50.00 सेकंड में रेस पूरी कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। वर्ष 1908 के बाद से वह अमेरिका के पहले एथलीट हैं, जिन्होंने 1500 मी. में स्वर्ण जीता है।
  • रिले दल विजेता- अमेरिका के चार गुणा 400 मीटर पुरुष रिले दल ने स्वर्ण जीता। यह उसका इस स्पर्धा का 17वां स्वर्ण है। पिछले साल दल को चाँदी मिला था अरमान हॉल, टोनी मैक्कुआ, गिल राबट्‌र्स और मैरिट ने दो मिनट 57.30 सेकंड के साथ स्वर्ण जीता।
  • अमेरिकी महिला दल ने चार गुणा 400 मीटर रिले में स्वर्ण जीता। इसी के साथ अमेरिकी खिलाड़ी एलिसन फलिक्स ने भी कैरियर का छठा स्वर्ण अपने नाम किया। वे यह कारनामा करने वाली पहली एथलीट हैं। अमेरिकी महिलाओं ने तीन मिनट 19.6 सेकंड में रेस पूरी की।
  • अमेरिकी तैराक कैटी लेडेकी और जिम्नास्ट बाइल्स सिमोन ने 4-4 स्वर्ण के साथ कुल पांच पदक जीते। हंगरी की तैराकी खिलाड़ी कंतिका होत्रजू ने तीन स्वर्ण और एक चाँदी जीता। अमेरिकी तैराक सिमोन मैनअुल, मेडेलाइन डिराडो, जमैका की धावक एलिन थॉमसन के अलावा 9 ओर खिलाड़ियों ने दो-दो स्वर्ण जीते।

स्वीमिंग (तैराक), जिम्नास्टक और एथलेटिक्स की बात करें तो इसमें अमेरिकी महिलाओं का दबदबा हैं। तैराक के 16 स्वर्ण में से 8 स्वर्ण अमेरिकी खिलाड़ियों ने जीते। वहीं जिम्नास्टिक के 6 से 7 स्वर्ण और एथलेटिक्स के 20 स्वर्ण में से 5 स्वर्ण यही की महिला खिलाड़ियों ने जीते।

जमैका:-

  • अमेरिका के गति स्पर्धाओं में दबदबे को भेदते हुए जमैका के उमर मैकलियोड ने 110 मीटर बाधा दौड़ जीतने के साथ पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक दिला दिया। उमर ने 13.05 सेंकेंड का समय लेकर किताब अपने नाम किया। इस स्पर्धा में हमेशा से अमेरिका का दबदबा माना जाता रहा है। लेकिन इस बार अमेरिकी एथलीट पोडियम (मंच) पर जगह नहीं पा सके।
  • जमैका के उसैन बोल्ट ने रियों में 4 गुणा 100 मी रेस का स्वर्ण भी जीत लिया। असाफा पावेल, याहेहान ब्लेक, निकेल और उनकी चौकड़ी 37.37 सेकंड का समय लेकर पहले नंबर पर रही। जीत के बाद बोल्ट ने कहा -ये मेरा आखिरी ओलंपिक है। उम्मीद है दुनिया अब मुझे मोहम्मद अली और पेले जैसा समझेगी। बोल्ट ने 4 ओलंपिक में हिस्सा लिया। एथेंस-2004 को छोड़ दें तो वे समाप्ति में ट्रैक पर 114.21 सेकंड दौड़े। इतने में 9 स्वर्ण जीत लिए। बोल्ट ने 3 स्वर्ण रिले रेस में जीते हैं। उनका समय 9 सेकंड के करीब रहा। रियो में उन्हें बेटन मिला तो जमैका दूसरे नंबर पर था। पर बोल्ट ने रेस जीता दी। बोल्ट ने ट्रैक पर 325 सेकंड ही बिताए। इस हिसाब से देखें तो क्वालिफाइंग (प्रशिक्षित/योग्यता प्राप्त) राउंड (गोला) को मिलाकर बोल्ट ने ट्रैक (दौड़ के लिए चूने से बनी रेखाओे वाला मैदान) पर बिताए हर 36 सेकंड में एक स्वर्ण पदक जीता।
  • जमैका अगर देश होते तो, बीजिंग में 3 स्वर्ण के साथ 27वें नंबर पर, लंदन में 3 स्वर्ण के साथ 26वें नंबर पर और रियो में 3 स्वर्ण के साथ 25वें नंबर पर होते।

लंदन:-

  • ओलंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट (चाँदी पदक) दक्षिण अफ्रीका की कास्टर सेमेन्या ने महिलाओं की 800 मीटर रेस का स्वर्ण जीता। 25 वर्षीय सेमेनया ने अपना सर्वश्रेष्ठ एक मिनट 55.28 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण जीता। बुरुंडी की फ्रांसिन नियोनसाबा ने एक मिनट 56.49 सेकंड के साथ चाँदी जीता।

ब्राजील के विजेता खिलाड़ी:-

  • माराकाना मैदान में खेले गए पुरुष फुटबाल स्पर्धा के हाईवोल्टेज फाइनल में ब्राजील ने विश्व विजेता जर्मनी को पेनल्टी (सजा) शुटआउट (बाहर) में 5-4 से हराकर पहली बार ओलंपिक का स्वर्ण पदक जीत लिया। ब्राजील के कप्तान नेमार की आंखों से खुशी के आंसू छलक गए। वर्ष 2014 विश्वकप सेमीफाइनल (उपांत) में जर्मनी ने ब्राजील को 7-1 से हराया था।

ब्रिटेन:-

  • ब्रिटेन की जिमनास्ट एमी टिंकलर महिला फ्लोर (फर्श) में कास्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। 16 वर्षीय एमी 1984 के बाद की सबसे कम उम्र की एथलीट है। एमी ने 14.933 स्कोर के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। पहले नंबर पर अमेरिका की सिमोना बाइल्स पहले नंबर पर रहीं।
  • विश्व विजेता- रियो की धरती पर बन रहे दोबारा-तीबारा के प्रमाणों की कतार में ब्रिटेन के मोहम्मद फराह भी शामिल हो गए है। फराह ने 5 हजार मीटर दौड़ में 13 मिनट 03.30 सेकंड समय से स्वर्ण पदक जीतते हुए 40 साल पुराने लंबी दूरी की दौड़ में ’स्वर्णिम दोबारा’ के ओलंपिक इतिहास को दोहरा दिया। फराह रियो में ही 10 हजार मीटर दौड़ जीत चुके हैं।
  • केन्या में जन्में अमेरिकी धावक पॉल चेलिमो ने 13 मिनट 3.90 सेकेंड से रजत और इथोपिया के हागोस गेब्रीवेट ने 13 मिनट 4.35 सेकंड का समय लेकर कांस्य पदक जीता। रेस के आखिरी चरण में फराह ने काफी तेजी दिखाते हुए जीत दर्ज की। इससे पहले 1972 और 1976 ओलंपिक में दोनों रेसों के स्वर्ण फिनलैंड के लासे विरेन ने जीते थे। 33 वर्षीय फराह विश्व विजेता में भी पांच और 10 हजार मीटर में स्वर्ण जीत चुके हैं। फराह अब 10 शीर्ष सर्वकालिक एथलीटों में शामिल हो गए हैं।

केन्या:-विजेता खिलाड़ी निम्न हैं-

  • फैथ किपयेगोन -केन्या की फैथ किपयेगोन ने रियों ओलंपिक में विश्व प्रमाणित इथोपिया की गेन्जेबे दिबाबा को पीछे छोड़ते हुए महिलाओं की 1500 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। रेस का दूसरा आधा काफी रोमांचक रहा जिसमें किपयेगोन ने दिबाबा को दूसरे स्थान पर पीछे छोड़ते हुए जीत अपने नाम की। केन्याई धाविका ने इस सत्र का सबसे तेज समय निकाला था और उन्होंने रियो में चार मिनिट 8.92 सेकेंड का समय लेकर सबसे पहले समाप्ति रेखा को छुआ। विश्व सर्वश्रेष्ठ विजेता दिबाबा को इस वर्ष अपनी चोटों का खामियाजा भुगतना पड़ा और रजत से संतोष करना पड़ा।
  • कोन्सेसलूस- किपरुटो पे पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में ओलंपिक प्रमाण बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता। किपरुटो ने 8:03.28 का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया।
  • विवियन चेरुइयोट- केन्या की विवियन चेरुइयोट ने 5000 मी. का स्वर्ण ओलंपिक प्रमाण बनाकर जीता। वे इस स्पर्धा का स्वर्ण जीतने वाली केन्या की पहली एथलीट बन गई हैं। विवियन ने 14.26.17 मिनट का समय निकाला।

जर्मनी:-

  • की जुड़वा बहनों को हाथ पकड़कर एक साथ समाप्ति रेखा पार करना भारी पड़ गया। उनके देश के एथलेटिक्स संघ के निर्देशक थॉमस कुर्शिलगेन ने कहा कि दोनों ने ओलंपिक को फन (मजाक) रेस समझ लिया। दोनों ने देश के बारे में नहीं सोचा। दोनों ने 2 घंटे 45 मिनट का समय लिया। दोनों ने मैराथन (लगभग 42 किलोमीटर की लंबी दौड़) विनर (विजेता) से 21 मिनट का समय ज्यादा लिया। यह उसके निजी अच्छे से 15 मिनट ज्यादा है। ओलंपिक में केवल पदक ही जरूरी नहीं बल्कि अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना भी जरूरी होता है। लेकिन इन दोनों वे वह भी नहीं किया। हालांकि समाज संचार माध्यम पर कई लोगों ने उसकी तारीफ की। लेकिन जर्मनी के कई प्रशसंकों ने इनकी बहुत आलोचना भी की है।
  • जर्मनी की एना और लिसा हाइनर ने रियों ओलंपिक की मैराथन में हिस्सा लिया। समाप्ति रेखा दोनों ने हाथ पकड़कर पूरी की। एना 81वें और लिसा 82वें नंबर पर रहीं।
  • जर्मनी को स्वर्ण- जर्मनी की महिला वॉलीबॉल दल ने करिश्माई प्रदर्शन करते हूए ब्राजील को शिकस्त देकर रियो में स्वर्ण पदक जीता। जर्मनी की दल ने तेज हवाओं तथा अपनी ऊंचाई का फायदा उठाते हुये अपनी दल को इस स्पर्धा में पहला स्वर्ण पदक दिला दिया। जर्मनी की लुरा लुइविग और किरा वाल्केनहोर्स्ट ने ब्राजील की अगाता और बारबारा को दो सेटों में 21-18, 21-14 से पराजित कर मुकाबला अपने नाम कर लिया।

जापान:-

  • की 21 वर्षीय महिला पहलवान रिसाकों कवाई ने कुश्ती में 63 क्रिगा भार वर्ग में यूरोपियन विजेता बेलारूस की मारिया मामाशुक को 3-0 से हराकर स्वर्ण जीतने के बाद अपने कोच को दो बार उठाकर पटक दिया और अपनी ही शैली में इसका जश्न मनाया।

द. कोरिया:-

  • की इन्बी पार्क ने महिलाओं की गोल्फ स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीत लिया। विश्व नंबर वन न्यूजीलैंड की लीडिया को ने चाँदी और चीन की शनशन फेंग ने ब्रॉन्ज जीता। भारत की अदिति 41वें नंबर पर रही।
  • तीरंदाजी की बात करें तो यहां दक्षिण कोरिया का दबदबा है। महिला वर्ग के दोनों स्वर्ण यहीं के खिलाड़ियों ने जीते और एक ब्रॉन्ज पर भी कब्जा किया। पुरुष वर्ग के भी दोनों स्वर्ण भी कोरिया को मिले।
  • रियो डि जेनेरो में केवल दो पदक के साथ भारत का अभियान खत्म हुआ, अमेरिका 120 पदक के साथ उच्च पर रहा।

Table showing the Best price US success

The Best price US success

अमेरिका की सफलता कीमत सबसे बेहतर

देश

खिलाड़ी

प्दक

सफलता

अमेरिका

554

120

22 प्रतिशत

ब्रिटेन

374

67

18 प्रतिशत

चीन

405

70

17 प्रतिशत

रूस

286

56

20 प्रतिशत

जर्मनी

441

42

9.29 प्रतिशत

भारत

119

2

1.68 प्रतिशत

सफलता दर पदक प्रति खिलाड़ी ( प्रतिशत में)

Table showing the top ten country

The top ten country

क्रम सं.

देश

स्वर्ण

श्रजत

कांस्य

कुल

1

अमेरिका

45

37

38

120

2

ब्रिटेन

27

23

17

67

3

चीन

26

18

26

70

4

रूस

19

18

19

56

5

जर्मनी

17

10

15

42

6

जपान

12

8

21

41

7

फ्रांस

10

18

14

42

8

कोरिया

9

3

9

21

9

इटली

8

12

8

28

10

ऑस्ट्रलिया

8

11

10

29

67 वें स्थान पर हैं भारत एक रजत और एक कांस्य पदक के साथ। सिंधु वे बैडमिंटन में रजत और साक्षी ने कुश्ती में कांस्य जीता।

टेली (हिसाब, लेखा) :- ओलंपिक में पुरुष और महिलाओं के लिए पदक तो बराबर ही होते हैं। लेकिन पदक टेली में वही देश बेहतर स्थिति में हैं, जिनकी महिलाएं दूसरों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।

Table showing the top ten country

The top ten country

Table showing Tele medals in the high 5 country

Tele medals in the high 5 country

Table showing Tele medals in the high 5 country

Tele medals in the high 5 country

Table showing the top 10 Medal

Table showing the top 10 Medal

पदक टेबल उच्च 10

क्र. सं.

देश

स्वर्ण

श्रजत

कांस्य

कुल

1

अमेरिका

39

36

33

108

2

ब्रिटेन

26

22

15

63

3

च्नी

23

18

26

67

4

जर्मनी

16

9

14

39

5

रूस

13

16

19

48

6

जपान

12

8

21

41

7

फ्रांस

9

16

14

39

8

द. कोरिया

9

3

8

20

9

ऑस्ट्रेलिया

8

11

10

29

10

इटली

8

11

7

26

11

भारत

0

1

1

2

ब्रिटिश:- ब्रिटेन ने ओलंपिक पदको के लिए पांच सूची रणनीति बनाई।

  • नेशनल (राष्ट्रीय) लॉटरी (भाग्य का खेल) फंडिंग (खर्च)।
  • नो कॉम्प्रोमाइज (कोई समझौता नहीं) यानी हर हाल में जीत।
  • उच्च प्रदर्शन व्यवस्था।
  • नए स्टार खिलाड़ियों की खोज।
  • दल स्पिरिट

इनकी बदौलत ब्रिटेन ने रियों ओलंपिक में चीन को पछाड़ ब्रिटेन 36वें नंबर से दूसरा पायदान पाया।

Table showing Tele medals in the high 5 country

Tele medals in the high 5 country

पदक टेली में उच्च 5 देश

देश

कुल पदक

महिलाएं जीती

प्रतिशत

टमेरिका

105

54

51 प्रतिशत

ब्रिटेन

60

19

32 प्रतिशत

चीन

65

35

54 प्रतिशत

जर्मनी

35

15

43 प्रतिशत

रूस

48

24

50 प्रतिशत

देश:-वे देश निम्न हैं जिन11 देश को केवल महिलाओं ने दिलाए स्वर्ण पदक-

  • प्यूतोरिर्को की मोनिका।
  • कोसोवा की जुडोका माजलिंडा।
  • बहामास की एथलीट शॉन मिलर (400 मी. रेस)।
  • ताइवान की वेटलिफ्टर चिंग सू।
  • बहरीन की एथलीट रुथ जबेत (3000 मीटर स्अीपल चेज)।
  • रोमानिया की फेसिंग दल।
  • इथोपिया की एथलेटिक्स खिलाड़ीअल्माज अयाना ( 10 हजार मीटर रेस)।
  • इंडानेशिया की बैडमिंटन खिलाड़ी नात्सिर (मिक्स्ड डबल्स)।
  • स्लोवानिया की जुडो खिलाड़ी टीना।
  • स्वीडन की तैराक साराह जोस्ट्रोम।
  • डेनमार्क तैराक पेर्निल ब्लूम इसमें शामिल हैं।

लुक्स (रूप-रंग):-खेलों का महाकुंभ 17 दिन के रोमांच के बाद खत्म हो गया। इसने कई भव्य और शानदार क्षण का गवाह बनने का मौका दिया। खिलाड़ियों ने खेल के साथ लुक्स से भी सबका ध्यान खींचा। कुछ दर्शकों को लुभाने में कामयाब रहे तो कुछ नकारात्मक चर्चाओं में रहे।

ओलंपिक की अच्छी-बुरी बातें:- रियों ओलंपिक कई बातों का गवाह बना।

  • इसमें उसैन बोल्ट और माइकल फेल्प्स जैसे खिलाड़ियों ने अपने श्रेष्ठ प्रदर्शन से अन्य खेलों के एथलीटों (बलिष्ठ/पुष्टकाय व्यक्ति) को भी प्रभावित किया। चीन के खेल प्रेमियों को निराशा मिली क्योंकि इस बार चीनी एथलीटों ने उनकी उम्मीदों से कम प्रदर्शन किया। इसमें एक फोटो हमेशा याद किया जाएगा, जिसने ओलंपिक की सच्ची भावना दुनिया के सामने प्रदर्शित की। न्यूजीलैंड की निक्की हेम्बलिन और अमेरिका की एबी डीअगोस्टिनों पांच हजार मीटर हीट (जोश या प्रारंभिक दौड़ जिसमें जीतने वाले अंतिम दौड़ में भाग लेते हैं) अवधि में दौड़ रही थीं। एबी जब ट्रैक (दौड़ के लिए चुने से बनी रेखाओं वाला मैदान) पर गिर गई, तब निक्की ने रुककर न केवल उन्हें संभाला, बल्कि दौड़ने के लिए तैयार किया। समाप्ति रेखा आने के बाद एबी ने गले मिलकर निक्की को धन्यवाद किया। रियो ओलंपिक में ऐसे पल बहुत कम देखने को मिलते हैं दुनियाभर में निक्की की इस खेल भावना को लेकर बहुत से लेख प्रकाशित हुए हैं। सोशल मीडिया (समाज संचार) पर उनकी प्रशंसा हुई।
  • ऐसा नहीं है कि बुरी बातें पूरी तरह ढंक गई। रायान लाक्टे एवं अमेरिका के अन्य तैराकों ने रियों की घटनाओं का गलत उल्लेख किया और पुलिस जांच प्रभावित करने की कोशिश की। इसके पहले इन खेलों में रूस का डोपिंग स्कैंडल, जीका वायरस, रियो की खाड़ी में सीवेज का पानी छोड़े जाने और पानी का पुल का हरा होने जैसी बातें चर्चा में रही। विभिन्न कारणों से मतभेद भी खेल के मैदान में देखने को मिले। कई बॉक्सिंग (मुक्केबाजी) जजों और रैफरियों का निलंबन किया गया। मिस्त्र के जुडो खिलाड़ी ने इजरायली खिलाड़ी के साथ हाथ मिलाने से इनकार कर दिया।
  • स्थानीय कारणों में मेजबान देश का राजनीतिक संघर्ष और उसकी कमजोर आर्थिक स्थिति भी सामने आई या लाई गई। इन खेलों को अति सख्त प्रतिस्पर्धाओं, ज्यादा व्यवसायीकरण, सामाजिक रूप से असंवेदनशीलता, भ्रष्टाचार और मानवीय करुणाओं की कमी के कारण उस तरह याद किया जाएगा, जिसे ओलंपिक आदर्श बिल्कुल नहीं कह सकते। ऐसी स्थिति में कोई सवाल ही नहीं उठता कि दो महिला धावक जो इन खेलों से पहले कभी मिली नहीं थीं, एक-दूसरे से बिल्कुल अनजान थीं, उन्होंने करुणा और मानवता का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण पेश किया। उनके लिए न कोई नियम थे, न ही वे इस अन्य कोई खेलों में अपवाद हैं। ओलंपिक खेलों में कई बातों का मिश्रण होता है।
  • एथलीटों के बीच प्रतिस्पर्धा में निश्चित रूप से उनके देश का गौरव दिखाई देता है। बड़े और भव्य मंच, भारी खर्च, मानवीय मुद्दों से जुड़ी कहानियां और वैन्यू (जिस स्थान पर लोग एकत्र होते हैं विशेषत: किसी खेल प्रतियोगिता आदि) में कम संख्या में वैश्विक दर्शक। रियो में 207 देशों के 11 हजार से अधिक एथलीट पहुंचे थे। उनमें शरणार्थी एथलीट भी थे, जो ओलंपिक के ध्वज तले प्रतियोगिताओं में हिस्सा लें सके। कई खेल प्रसिद्ध हुए थे, तो कुछ के बारे में लोग बहुत कम जानते थे। गोला फेंक स्पर्धा की तरह किसी में बहुत ध्यान लगाने की जरूरत थी, तो किसी में बहुत अधिक ताकत की। जैसे लंबी दूरी की दौड़ और वेट लिफ्टिंग में अत्यधिक शारीरिक क्षमता और मजबूती की जरूरत होती है।
  • इन बातों के चलते ब्राजील जैसे मेजबान देश के सामने बहुत बड़ी और असाधारण चुनौती थी, जिसे उसने साहस के साथ पार किया हैं। रियों में ऐसे भी पल आए, जो प्रेरणा देते हैं और दिल को छू जाते हैं और रियो ने इसमें विशेष स्थान बना लिया है। ब्राजील जैसे विकासशील देश ने कमजोर आर्थिक एव राजनीतिक वातावरण में ओलंपिक मेजबानी की जिम्मेदारी बखुबी निभाई और उसके लिए पुरजोर प्रशंसा की जानी चाहिए। निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि मेजबानी के तौर पर रियो एवं खेल से जुड़े प्रशासन या व्यवस्थाओं की आलोचना के लिए कोई जगह नहीं हैं। खेलों में स्पर्धा की बात करें तो रूसी सरकार की धोखेबाजी इस बार उजागर हो गई। खुशी की बात है कि यह कोई अपवाद नहीं है, लेकिन आदर्श भी नहीं है। उम्मीद की जा सकती है कि इस तरह की घिनौनी गड़बड़ियों में जल्द सुधार कर लिया जाएगा।
  • सबसे महत्वपूर्ण यह कि ओलंपिक में सबसे बेहतरीन कई बातें थीं युवाओं की प्रतिस्पर्धा वाला जैसा कोई शानदार व उत्साह से पूर्ण त्यौहार, जीत और हार की दिलों पर छाप छोड़ने वाली तस्वीरें, अलौकिक उपलब्धियों पर उमड़ती मानवीय भावनाओं की लहरें। ऊर्जा से भरपूर वातावरण, जीतने और देश को गौरव दिलाने की इच्छाएं। यह सब भी रियों में दिखाई दिया। फर्राटा धावक उसैन बोल्ट और कनाडा के आंद्रे डि ग्रेस के बीच हंसी का आदान-प्रदान, पेसिफिक आईलैंड किरिबाती के वेटलिफ्टर डेविड का ग्लोबल वॉर्मिंग (पर्यावरण) पर संदेश देने वाला नृत्य, ये सब हमेशा याद रहने वाले पल हैं। सबसे बड़ी सच्ची खेल भावना के लिए निक्की हेम्बलिन और एबी डीअगोस्टिनों का स्वागत करें। ब्राजील और उन सभी एथलीटों का भी स्वागत करें, जो इस ओलंपिक के साक्षी बने। एक बार फिर कहना ठीक रहेगा कि दुनिया के असली संकट को राहत की जरूरत है।
  • रियो ओलंपिक में व्यवस्थाओं की कोई खामियां नहीं थी और उसे गिनाना भी नहीं चाहिए। पूरे ब्राजील और खासतौर से रियो ने विपरीत परिस्थितियों में जिस तरह ओलंपिक सफल बनाया और मेजबानी की जिम्मेदारियों का निर्वाह किया, उसे सराहना चाहिए। यह ओलंपिक खिलाड़ियों के अभूतपूर्व प्रदर्शन के अलावा डोपिंग स्कैंडल और मानवीय करुणाओं से भरी कई बातों के लिए याद किया जाएगा। जो देखना शेष था, वह अमेरिका और न्यूजीलैंड की दो महिला धावकों ने पूरा कर दिया।

तकनीक:-ब्राजील के रियो शहर में 5 से 21 अगस्त तक खेलों के महाकुंभ की धूम रही। इस दौरान कई खिलाड़ियों की ’प्रमाण’ तोड़ मेहनत देखने को मिली। खिलाड़ियों की सफलता में उनके कोचिंग स्टाफ (सदस्य) के अलावा तकनीक का सहयोग मिला। ओलंपिक की तैयारियों में खिलाड़ियों की मदद करती हैं विभिन्न तकनीके, ये तकनीक निम्न हैं-

  • वर्ट वी.ई आर.टी उपकरण -अमेरिका की महिला वॉलीबॉल दल रियो की तैयारी के लिए छ: घंटे का प्रैक्टिस (अभ्यास करना) सेशन करती थी। इसके दौरान खिलाड़ियों को आधुनिक तरीके से प्रशिक्षण देने के लिए उनको छोटी सी वियरेबल डिवाइस वर्ट (वी.ई आर.टी) उपकरण दिया गया था। वर्ट जंप मॉनीटर (छलांग निरक्षण) खिलाड़ियों की कमर में पहनाया जाता था। इसकी सहायता से छलांग की ऊंचाई और टच काउंट (छूते ही गिनती) करके एप दव्ारा वास्तविक समय आकंड़ा आधुनिक फोन में दिखाता है। वर्ट दव्ारा की गई मॉनिटरिंग के माध्यम खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन को और स्मार्ट (आकर्षक) बनाने में मदद मिलती है।
  • ट्रैकमेन उपकरण -आमतौर पर इस उपकरण का प्रयोग गोल्फ में किया जाता था, लेकिन अब इसका प्रयोग शॉटपुट थ्रो। (गोला फेंक) और हैमर थ्रो के मैदान में भी देखने को मिलने लगा है। खिलाड़ी, कोच (खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने वाला व्यक्ति) और ट्रेनर (प्रशिक्षक) इसकी मदद से थ्रो की सटीक जानकारी जुटाते हैं। ट्रैकमेन उपकरण खिलाड़ियों के थ्रो को स्कैन (निरीक्षण/परीक्षण का कार्य) करती है। उसके बाद इसमें लगा डॉप्लर (मादक द्रव्य) रडार (एक उपकरण जिसके दव्ारा कोहरे या अंधकर में भी उसके क्षेत्र से दूर से आने वाली ठोस वस्तुओं की सूचना रेडियो तरंगो दव्ारा मिल जाती है) फील्ड (खेल के लिए खिलाड़ियों का चुनाव करना) को ट्रैक करता है जहाँ आपने शॉटपुट और हैमर थ्रो किया था। स्कैनिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ट्रेनर को थ्रो की वेलेसिटी, रिलीज एंगल (शुरूआत/प्रदर्शित का तरीका) ,रिलीज हाइट (प्रदर्शित ऊँचाई) और लैंडिंग पॉइंट (नीचे निश्चत जगह) की सटीक जानकारी उपलब्ध कराता है। इसमें इनबिल्ट कैमरा व वाई-फाई का फीचर भी दिया गया है। जिसकी मदद से खिलाड़ियों के तैयारी को जांचते हुए उसमें सुधार करने में सहायता मिलती है।
  • वूप डब्ल्यू एच ओ ओ पी -सभी तरह के स्पोट्‌र्समैन (खेल पुरुष) को ध्यान में रखते हुए वूप (डब्ल्यू एच ओ ओ पी) एप व उपकरण तैयार की गई है। स्मार्टवाच (आधुनिक खड़ी) की तरह दिखने वाली यह उपकरण कलाई में पहनी जाता है। बिना फिटनेस (स्वस्थ्य शरीर) के कोई भी खिलाड़ी बेस्ट परफॉर्मेस (अच्छा प्रदर्शन) नहीं दे पाता है। ऐसे में यह उपकरण खिलाड़ियों के शरीर की मॉनीटरिंग करके वास्तविक समय आंकड़ा मोबाइल व टेबलेट में दिखाती है। यह खिलाड़ियों को उनकी नींद, व्यवहार, प्रदर्शन की जानकारी भी देता है। अगर कोई खिलाड़ी ओवर ट्रेनिंग (बहुत अधिक प्रशिक्षण) करता है तो इसकी जानकारी एप के दव्ारा मिलती है। इससे एथलीट्‌स के चोटिल या अनफिट होने की आशंका कम हो जाती है। इसका एक खास फीचर (विशेषता) रिकवरी (वापसी) मैनजमेंट (व्यवस्था) भी है जो ट्रेनर (प्रशिक्षक) को खिलाड़ी की रिकवरिंग प्रोसेस (वापसी क्रिया)कितनी व कैसे है? यह बताता है।
  • बीएमडब्ल्यू उपकरण-अपने खास वाहनों के लिए जानी-मानी जनसमूह बीएमडब्ल्यू ने अमेरिकी तैराकों को अच्छा प्रशिक्षण देने के लिए स्वीमिंग (तैराकी) ट्रैकिंग (लंबी यात्रा करना) व्यवस्था विकास किया है पिछले छ: वर्षो से अमेरिकी ओलंपिक समिति में ऑफिसियल (कार्यालय) मोबिलिटी साझेदार के तौर पर काम कर रहे बीएमडब्ल्यू समूह ने इस उपकर को कस्टरमाइज्ड तरीके से तैयार किया हैं। इसमें एथलीट के शरीर (कंधे, घुटने, एड़ी और पांव के पंजे आदि) पर एलईडी इंप्लीमेंट (अमल में लाना) की जाती है, जिससे पानी के अंदर होने वाली तमाम गतिविधियों की जानकारी थ्रीडी व्यवस्था से जुड़े मॉनीटर में दिखती हे। इस निर्माण में अंडरवाटर (पानी के अंदर) कैमरा व अन्य साधन भी प्रयोग होते हैं जिससे कोचिंग (व्यक्तिगत रूप से परीक्षा के लिए तैयार करने वाला शिक्षक/प्रशिक्षण देना) को बेहतर बनाया जाता है।
  • ऑप्टिम आई एस-5 उपकरण-एथलीट्‌स की प्रशिक्षण के लिए एक खास उपकरण ऑप्टिम आई एस-5 भी है। इसका प्रयोग समूह वाले खेलों में ज्यादा होता है जैसे फुटबाल, रग्बी, आइस (बर्फ) हॉकी, हैंडबाल (हाथ वाली गेंद) और बास्केटबाल में ट्रेनर व कोच (प्रशिक्षक व प्रशिक्षत) खिलाड़ियों को ट्रैक करने के लिए इस उपकरण की मदद लेते हैं। उच्च गति ट्रैकिंग सॉप्टवेयर (कार्यक्रम जो कम्प्युटर में काम आता है) को सहारा करने वाली यह उपकरण मैदान में खेल रही दल के सभी खिलाड़ियों की जानकारी ट्रेनर की व्यवस्था में उपलब्ध कराती है। जैसे खिलाड़ी कितना तेज भाग रहे हैं, उनके बीच आपस में कितना अंतर है और खिलाड़ियों का धड़कने क्या हैं? सभी फैक्टर (घटक या कारक) पर ट्रेनर और कोच विश्लेषण कर दल को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षण में आवश्यक सुधार करते हैं।
  • आई बॉक्सिंग (आंख मुक्केबाजी) उपकरण-कनाडा और इंग्लैंड में बॉक्सिंग (मुक्केबाजी) खिलाड़ियों को एक विशेष सॉफ्टवेयर (आई बॉक्सिंग) के दव्ारा प्रशिक्षण में मदद की जाती है।
  • वर्चुअल अम्यूजमेंट उपकरण-अमेरिकी साइकलिंग दल को वीआर (वर्चुअल अम्यूजमेंट) तकनीक के दव्ारा प्रशिक्षण भी दी गई है।

फोटोग्राफर छायाचित्र लेना/छायाचित्रकारी):- रियो अब तक का मोस्ट विजुअल ( अधिकतम दृष्टि-संबंधी) ओलंपिक है। वजह है इसके अलग-अलग जगह से आने वाले फोटाेेग्राफ की। जो पहले के ओलंपिक में नहीं आ सके थे। यह संभव हो सका है रियो पहुंचे 1500 फोटोग्राफर की मदद से। ये नई-नई तकनीकी से एक स्पर्धा के हजारों फोटो दुनिया के सामने ला रहे हैं। इन फोटोग्राफर के पसंद स्पर्धा हैं एथलेटिक्स और स्वीमिंग (तैराक)। एक खोज के अनुसार, 100 मी. रेस (दौड़) लगभग 600 से ज्यादा फोटोग्राफर ने कवर (आवरण) की। यानी जितने फोटोग्राफर ओलंपिक कवर करने गए हैं, उनका 40 फीसदी। हर दिन फोटो लगभग 83 हजार फोटो जारी किए जाते थे।

भारत का ओलंपिक खेल में खर्च:-

  • रियो ओलंपिक जैसे-जैसे करीब आए, अधिकतर देशों ने तैयारी के लिए बजट बढ़ा दिए। भारत में उल्टा हुआ। सरकार ने पिछले दो साल में खेलसंघों को 180 करोड़ रुपए दिए। जबकि प्रशिक्षण व विदेशी कोच को वेतन मिलाकर यह राशि कुछ ज्यादा रही। जैसे 2013-14 में 301 करोड़ की खर्च दिया। एक साल बाद 150 करोड़ और 2015-16 में तो 114 करोड़ ही दिए।
  • ओलंपिक का नाम सुनते ही हमारी आंखों के सामने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक तैरने लगते है। रियो से भी कुछ ऐसी ही आस हमें थी लेकिन आज भी तमाम खिलाड़ी विपरीत हालात में पसीना बहा रहे हैं। संसदीय समिति के विवरण में भारत में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन खेलों पर मात्र 3 पैसे खर्च होते हैं। जबकि अमरीका में 20 रुपए होता हैं। खिलाड़ियों में असुरक्षित भविष्य के कारण देश में खेल संस्कृति नहीं पनप पाई है।
  • भारत कभी भी ’ओलंपिक पावर हाउस’ (ताकत घर) नहीं रहा है। ओलंपिक के लिए चयन भी अपने आप में कड़ी मेहनत और विश्वस्तरीय प्रतिभा का नतीजा है। ओलंपिक में पदक तालिका में पैंदे पर रहने का कारण केवल सरकारों की विफलता नहीं है। यदि सरकारें सहयोग नहीं करे तो टेनिस स्टार (सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी) को छोड़कर शायद ही कोई खिलाड़ी अपने बूते ओलंपिक में भाग ले सके। हमें ये स्वीकारना होगा कि खिलाड़ियों को दोष देने भर से कुछ नहीं होने वाला है खिलाड़ियों को पदक जीतने लायक सुविधाएं देनी होगी। सरकार को स्पष्ट खेल नीति बनानी होगी। साथ ही ये समझना होगा कि क्रिकेट से आगे भी खेलों की दुनिया हैं।
  • इंडिविजुअल (एक व्यक्ति/वस्तु के लिए विशिष्ट/व्यक्तिगत) स्वर्ण दिलाने वाले अभिनव ब्रिंदा ने रियो से लौटने के बाद बताया कि ब्रिटेन एक पदक के लिए 45 करोड़ खर्च कर रहा है। पदके जीतने के लिए हमें भी ऐसा ही करना चाहिए। उनकी यह बात चर्चा में रही हैं। इंडियास्पेंड (भारत खर्च) और टेलीग्राफ (तार भेजने का उपकरण/तार भेजना) की विवरण के अनुसार ब्रिटेन में तीन साल में ओलंपिक की तैयारी पर खर्च किए 9000 करोड़ रुपए किए। जबकि भारत सरकार ने खेलसंघो को ओलंपिक की तैयारी व इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी संरचना) दोनों को मिलाकर 3200 करोड़ का खर्च ही दिया। इस खर्च का सीधा फायदा खिलाड़ियों को कम ही मिला।

खेल मंत्रालय ने जिन 4 खेलों को ’हाई प्रायरिटी’ (उच्च अधिक महत्वपूर्ण या प्राथमिकता) दी उन्ही का खर्च कम कर दिया

Table showing 4 high cost of games for 2014-15

4 high cost of games for 2014-15

2014-15 के लिए 4 हाई प्रारिटी वाले खेलों का खर्च

खेल

खर्च (लाख रु.)

बॉक्सिंग

99.36

वेट लिफ्टिंग

83.47

टेनिस

48.52

एथलटिक्स

83.55

इसी दौरान अन्य खेलों पर खर्च

खेल

खर्च

जुडो

114.66

स्ववॉश

101.56

फुटबॉल

131.63

याचिंग

116.91

वॉलीबॉल

125.92

आंकड़े- मिनिस्ट्रीि ऑफ खेल और यूथ अफेयर्स इंडिया (मंत्रालय के युवा विचारणीय विषय/कार्य-कलाप भारत) और यूके खेल के अनुसार

हमने एथलेटिक्स में तीन साल में 11.78 करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि ब्रिटेन ने 58.74 करोड़ यानी भारत से पांच गुना ज्यादा खर्च किया, तभी तो उसने अपने 48 पद के लक्ष्य से भी आगे बढ़कर 66 पदक जीत लिए। नतीजा ब्रिटेन ने रियों में अपने 108 साल के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और हम आठ साल पीछे चले गए।

हमारे देश को ओलंपिक में पदकों की उम्मीद तभी करनी चाहिए जब यहां खेलों के लिए सही निवेश किया जाए और व्यवस्था सहायक हो।

अभिवन बिंद्रा, बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता

राजीव गांधी खेल रत्न :-

राजीव गांधी खेल रत्न का परिचय- राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार खेलों के क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा सम्मान है। इसके लिए किसी खिलाड़ी के पिछले चार वर्षो के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन का आकलन किया जाता हैं। युवा और खेल मामलों के मंत्रालय दव्ारा गठित 12 विशेषज्ञों की एक समिति यह आकलन करके नामों की सिफारिश करती हैं। इस पुरस्कार के तहत पदक, प्रमाण पत्र और 7.5 लाख रुपए नकद प्रदान किए जाते हैं। 1991-92 में शंतरज गैंडमास्टर (बड़े आचार्य) विश्वनाथ आनंद पहले खेल रत्न बने थे। 1994-95 में भारोत्तोलक कर्णम मल्लेशवरी यह पुरस्कार पाने वाली महिला बनी, जबकि 2001 में निशानेबाज अभिवन बिंद्रा को सबस कम उम्र 18 वर्ष की आयु में खेलरत्न होने का सम्मान मिला था।

  • खेल रत्न पुरस्कार-यह सम्मान प्रणव मुखर्जी ने राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हॉल (स्थान) में खेल रत्न व अन्य परस्कार प्रदान किए हैं। 25 साल में पहली बार चार खिलाड़ियों को खेलरत्न मिलने की घोषणा हुई हैं जिसमें- पीवी सिंधु (बैडमिंटन में ), साक्षी मलिक (पहलवान में), दीपा कर्माकर (जिम्नास्ट में), जीतू राय (शुटर में) हैं। पहली बार एक साल में तीन महिलाएं खेल रत्न बनी। सिंधु को यह सम्मान 21 साल की उम्र में मिला। उनसे कम उम्र में केवल 3 खिलाड़ी ही यह सम्मान हासिल कर सके हैं। सिर्फ ओलंपिक वर्ष में एक से अधिक खिलाड़ी को यह सम्मान दिया जा सकता हैं इससे पहले 2009 में तीन खिलाड़ी सुशील कुमार (पहलवान में कांस्य पदक), विजेेंदर (मुक्केबाजी), आर एमसी मेरीकाम (मुक्केबाजी) खेल रत्न बने।
  • अर्जुन पुरस्कार-29 अगस्त को खेल रत्न पुरस्कार चार खिलाड़ियों के अलावा 14 खिलाड़ियों को अर्जुन अवार्ड दिए गयें जो निम्न हैं- ललिता बाबर (एथलेटिक्स), शिवा थापा (मुक्केबाजी), अजिंक्य रहाणे (क्रिकेट), रानी (हॉकी), वीआर रघुनाथ (हॉकी), गुरप्रीत सिंह (शूटिंग), अपूर्वी चंदीला (शूटिंग), सौम्यजीत घोष (टेबल टेनिस), विनेश फोगेट (कुश्ती), अमित कुमार (कुश्ती), रजत चौहान (तीरंदाजी), सौरभ कोठारी (बिलियड्‌र्स एवं स्नूकर), सुब्रत पॉल (फुटबॉल), संदीप सिंह मान (पैराएथलेटिक्स) और वीरेन्द्र सिंह (कुश्ती बधिर)
  • द्रोणाचार्य पुरस्कार- 6 कोच (प्रशिक्षण कर्ता) को द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया गया हैं। जो निम्न हैं-दीपा के कोच बिसेश्वर और विराट कोहली के कोच राजकुमार समेत 6 को द्रोणाचार्य पुरस्कार मिला। ये हैं राजकुमार शर्मा (क्रिकेट), बिसेश्वर नंदी (जिम्नास्टिक), नागापुरी रमेश (एथलेटिक्स), सागरमल (मुक्केबाजी) प्रदीप कुमार (तैराकी लाइफटाइम यानी जिंदगी भर), महाबीर सिंह (कुश्ती लाइफटाइम)

राष्ट्रीय खेल एवं अन्य प्रोत्साहन पुरस्कार-

  • खेलों के विकास के लिए सुब्रतों मुखर्जी स्पोट्‌र्स एजुकेशन सोसायटी (खेल शिक्षा सामाज)।
  • उभरती प्रतिभाओं के लिए हॉकी सिटीजन ग्रुप (नागरिक समुह)।
  • दादर पारसी जोरासिट्रयन क्रिकेट क्लब (सभा)।
  • कॉरपोरेट (समूह) जिम्मेदारी के जरिए खेलों में प्रोत्साहन के लिए इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर (भारतीय बुनियादी संरचना) फाइंनेस (निवेश) कॉरपोरेट (एक बड़े समूह में संयुक्त) लिमिटेड (सीमित)।
  • खिलाड़ियों को नौकरी में भारतीय रिजर्व बैंक।
  • मौलाना अबूल कलाम अाजाद ट्रॉफी-2015-16 पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला।
  • इनके अलावा तेनजिंग नोर्गे साहस पुरस्कार भी प्रदान किए गये।

भारतीय खिलाड़ियों में पदकों की आस रही वे निम्न हैं-

  • सायना नेहवाल (बैडमिंटन) -लंदन-2012 ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता सायना रियो में अपने नाम के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई। सायना बैंडमिंटन मुकाबलों में समूह मंच में ही बाहर हो गई। चोट के कारण मेच हारा।
  • अभिवन बिंद्रा (निशानेबाज)- ब्रिंदा ने वर्ष 2008 के बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण जीता था। अर्जुन अवार्ड, राजीव गांधी खेल रत्न प्राप्त बिंद्रा ने रियों में अंतिम में जगह भी बनाई। लेकिन यूकेन के शूटर से कांस्य पदक मुकाबला गंवा बैठे।
  • दीपिका कुमारी (तीरंदाजी)-विश्व की नंबर एक खिलाड़ी रह चुकी हैं। दल स्पधाओं में कमजोर कड़ी साबित हुई। वर्ष 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में दो स्वर्ण पदक जीत चुकी। रियों में प्री-क्वार्टरफाइनल (पूर्व में चौथाई भाग के अंतिम) मुकाबलों में बाहर।
  • गगन नारंग (निशानेबाजी)- लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता। मेलबर्न, नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता। रियों में निशानेबाजी की तीन स्पर्द्धाओं में खेले पर किसी भी स्पर्द्धा के अंतिम में जगह नहीं बना सके।
  • सानिया मिर्जा (टेनिस)- सानिया-बोपन्ना जोड़ी बेमिसाल थी। अेनिस युगल में सानिया दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी हैं। बोपन्ना विश्व उच्च 10 डबल्स (दोहरा) खिलाड़ी पर ये जोड़ी मिश्रित युगल सेमीफाइनल (उपांत) में हार कांस्य गंवा बैठी।
  • जीतू राय (निशानेबाजी)- रियो पूर्व अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में बेहतरीन प्रदर्शन कर पदक की उम्मीद जताई थी। 10 मीटर एयर राइफल (हवा लंबी नली की बंदूक) में 8वें और 50 मीटर पिस्टल (बंदूक) में 12वें स्थान पर रहे अंतिम मुकाबलों में जगह नहीं बना सके।

विवरण, साहिल भल्ला

बड़ा सम्मान:- भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष एन, रामचन्द्रन को ओलंपिक खेलों में उनके योगदान के लिए ’ओलंपिक आर्डर’ (पुरस्कार) से सम्मानित किया गया है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थामस बाक ने आईओए अध्यक्ष रामचन्द्रन को इस अर्वाड से सम्मानत किया है। ओलंपिक आर्डर इन खेलों से जुड़ा सबसे बड़ा सम्मान है, जो खेलों में अधिकारी के योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। मई 1975 के बाद ये यह पुरस्कार दिया जा रहा है।

भारतीय खेल क्षमता:- यह दुखद है कि हाल में संपन्न रियो ओलंपिक में भारत के कमजोर प्रदर्शन पर इतने लोग दुखी हो रहे हैं। जब हमारी वैश्विक अपेक्षाएं चरम पर हैं तब ओलंपिक में कमजोर प्रदर्शन होना सही है। ओलंपिक में बेहतर ऊंचाई व वजन वाले खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करते हैं। यह कोई नियम नहीं है लेकिन प्रशिक्षित जरूर हों यानी श्रेष्ठतम प्रतिभाएं भेजनी चाहिए। दूसरी बात हमें यह मानना होगा कि हमारे शारीरिक गुण सीमित संख्या के ओलंपिक खेलों के अनुरूप नहीं हैं। हम वैज्ञानिक तरीके से उन खेलों का पता लगाएं, जो हमारी शारीरिक क्षमताओं के अनुरूप हैं और उनमें श्रेष्ठतम होने का प्रयत्न करना चाहिए।

रियो ओलंपिक की सुर्खियां:- निम्न हैं-

  • जीका का डर नहीं- जीका को लेकर शीर्ष गोल्फरों के साथ-साथ टेनिस प्लेयरों (खिलाड़ियों) ने नाम वापस ले लिया। लेकिन जीका का कोई खतरा नहीं दिखा।
  • लक्ष्य से पीछे रहा ब्राजील- ब्राजील ने पदक टेली (हिसाब) में शीर्ष दस देशों में रहने का लक्ष्य रखा था। लेकिन दल छह पदक ही हासिल कर सकी।
  • लेडीज फर्स्ट (पहले महिलाएं)- अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी जो दल ओलंपिक में भेजा उसमें महिला एथलीटों की संख्या पुरुषों से ज्यादा रही।
  • सुविधाओं की कमी- खेल गांव में सुविधाओं की कमी की खबरें कई बार आई। ऑस्ट्रेलियाई दल ने तो यहां रहने से मना कर दिया था। भारतीय हॉकी दल को भी परेशानी हुई।
  • विवाद भी रहे हावी- यूरोपियन ओलंपिक मुखिया पैट्रिक हिकी टिकट स्कैम में जबकि बॉक्सर (मुक्केबाज) हसन साडा व जोनस जूनियस यौन उत्पीड़न के आरोप में पकड़े गए।

रियो को याद किया जाएगा, कारण निम्न है:-

  • नया सितारा-रियो ओलंपिक से पहले शायद ही कोई मानिका पुइग को जानता रहा होगा। लेकिन अब पुइग टेनिस का नया सितारा बन चुकी है। पुइग ने महिला एकल का स्वर्ण पदक जीता है। उनका स्वर्ण पदक उनके देश का पहला ओलंपिक स्वर्ण भी है।
  • पहला स्वर्ण-मेजबान ब्राजील का पहला स्वर्ण हमेशा याद किया जाएगा। जूडो को राफेल सिल्वा ने अपने देश को पहला स्वर्ण जिताया।
  • बड़ा नाम बड़ा काम- माइकल फ्लेप्स और उसेन बोल्ट जैसे बड़े एथलीटों ने अपने नाम के अनुसार रियो ओलंपिक में प्रदर्शन किया। दोनों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ओलंपिक से संन्यास लिया।
  • प्रमाणित- रियो ओलंपिक प्रमाणों के टूटने के लिए भी याद किया जाएगा। पूरे खले के दौरान कुल 65 ओलंपिक और 19 विश्व प्रमाण टूटे।
  • जापानी-पहलवान काओरी इको दुनिया क पहली महिला एथलीट बनीं जिसने किसी भी खेल में लगातार चार ओलंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता।

इन चार देशों से पीछे भारत:-125 करोड़ की आबादी से 119 सुनिंदा एथलीटों को ओलंपिक में भेजने के बाद हम भले ही खाते में 2 पदक के साथ 67वां स्थान पाकर भी इतरा रहे हो, लेकिन पदक तालिका में अपने से ऊपर के 66 के नाम देखे जाए तो कई नामों से अपनी तुलना करने पर शर्म महसूस हो सकती हैं। ये वे चार देश है जिनसे पीछे भारत हैं, बहामास, प्यूर्टो रिको, इथियोपिया, स्लोवेनिया।

समापन:-05 अगस्त से प्रज्जवलित ओलंपिक मशाल को कृत्रिम बारिश करके बुझाया गया जो इस बात का प्रतीक है कि 31वें ओलंपिक खेलों का समापन हो गया है। आखिरी व्यक्तिगत स्वर्ण पाने का सम्मान केन्या के मैराथन विजेता एलियुड किपचोगे को मिला। जिनके गले मे अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष थामस बाक ने स्वर्ण पहनाया।

रियो डि में आसमान से बरसती बूंदों, ब्राजील का तेज संगीत एवं नृत्य, दुनिया भर से आए एथलीटों के मन में उमड़ती ढेरों भावनाओं और चेहरों पर अथाह संतोष और खुशी के अहसास के बीच 31वें रियो ओलंपिक खेलों ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। इस दुनिया के सबसे बड़े खेल महाकुंभ का माराकाना मैदान में भव्य समापन समारोह आयोजिक किया गया। जिसमें एक ओर दक्षिण अमेरिका में आयोजित हुए इन खेलों के सफल आयोजन की खुशी थी तो दूसरी ओर दुनिया भर को एक मंच पर 17 दिनों तक लाने वाले इन ओलंपिक खेलों के समाप्त होने की भावनाओं से भरा अहसास था। हजारो दर्शकों की संख्या में तेज हवाओं और बारिश के बीच रंगारंग कार्यक्रम पेश किया गया। इस समापन समारोह पर साक्षी मलिक को ध्वजवाहक बनने का गौरव हासिल किया। आईओसी सदस्य चुनी गई रूस की पूर्व एथलीट इसिनबेयेवा भी समापन के दौरान मौजूद रहीं।

ये ओलंपिक खेल आने वाली पीढ़ियों के लिये एक बेहतरीन धरोहर हैं। इतिहास निश्चित ही रियो डि जनेरियों खेलों को याद करेगा।

थॉमस बाक, आईओसी अध्यक्ष

विषय:- तोते की थीम पर समापन कार्यक्रम तैयार किया गया था और मैदान के बीच भी एक रंग बिरंगे विशालकाय तोते की प्रति वाले मंच को उतारा गया जिसके बीच में कलाकरों ने नृत्य किया था।

अगला ओलंपिक टोक्यों में:- 2020 खेलों के सफल आयोजन की शुभकामनाओं के साथ ओलंपिक झंडा टोक्यों को सौंपा गया। जापान के प्रधानमंत्री शिंजों अबे मैआन में मशहुर वीडियों खेल के किरदार मारियों की तरह पोशाक पहनकर पहुंचे। इसके बाद बाक ने ओलंपिक खेलों के समापन की घोषणा की। टोक्यों 02 बार ओलंपिक आयोजित करने वाला पहला एशियाई शहर बनेगा। 24 जुलाई से शुरू होकर ये ओलंपिक 09 अगस्त 2020 को होंगे समाप्त। इस खेल में एक खरब 51 अरब 77 करोड़ 2 लाख रुपये का बजट जापान इस आयोजन पर खर्च करेगा। खेल मैदान की क्षमता 50 हजार की आएगी।

उपसंहार:- भारत को अच्छी स्थित में आने के लिए अभी भारत को पूर्ण रूप से तैयारी करनी होगी अर्थात जो कमी भारत की रियो ओलंपिक में देखने को मिली है वह कमी टोक्यों में न दोहरायी जाए। इसके लिए टोक्यो में 2020 में होने वाले ओलंपिक में भारत की स्थित क्या होती है। यह आगे पता पड़ेगा।

- Published on: September 7, 2016