दक्षिण चीन सागर (South China Sea - Essay in Hindi) [ Current Affairs ]

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प्रस्तावना: - दक्षिण चीन सागर को लेकर फिर विवाद खड़ा हो गया है। इस पर न सिर्फ चीन बल्कि ताइवान, मलेशिया, वियतनाम, ब्रूनेई और फिलीपींस जैसे देश भी अपना हक जताते रहे हैं। चीन ने अब दक्षिण चीन सागर में स्थित वूडी दव्ीप में चीनी सेना की राडार प्रणाली और जमीन से आकाश में मार करने वाली आठ मिसाइलें तैनात कर दी है। वूडी दव्ीप पर ताइवान और वियतमान ने भी अपना दावा कर रखा है। लेकिन चीन का मानना है कि कोई भी बाहरी देश दक्षिण चीन सागर के जलक्षेत्र में बिना उसकी इजाजत के कदम नहीं रख सकता हैं। उधर अमरीका का मानना है कि इस जलमार्ग से कोई भी देश आवाजाही कर सकता हैं।

महत्व: - दक्षिण चीन सागर के समूचे क्षेत्र के उत्तर की ओर तो चीन का दबदबा है लेकिन दक्षिण की ओर बहुत से दव्ीपों को लेकर भी वह अपना कब्जा जताता रहा है। इस पर फिलीपींस, ताइवान, वियतनाम आदि देशों को ऐतराज भी होता रहा है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार किसी भी दव्ीप से 12 समुद्री मील तक की दूरी तक के क्षेत्र पर उस देश का अधिकार माना जाता है, जिसका उस दव्ीप पर अधिकार होता है। इसके बाद 250 समुद्री मील की दूर तक विशेष आर्थिक क्षेत्र भी बनाया जा सकता है। इस सामुद्रिक सीमा में प्रवेश से पूर्व किसी भी देश के जहाज को पूर्व अनुमति लेनी पड़ती हैं। चीन की कोशिश रहती है कि इस कानून का सहारा लेकर वह आसपास के टापुओं पर अपना अधिकार बताए और अपनी सीमा बढ़ा ले। इसके लिए ऐसे टापू जिन्हें दव्ीप नहीं माना जाता, उन पर कृत्रिम निर्माण करके, चीन अपना अधिकार जताने की कोशिश में लगा है। चूंकि दुनियाभर में भार ढुलाई के लिहाज से बात करें तो 95 फीसदी व्यापार समुद्री मार्ग से ही होता है। इसमें से करीब 50 फीसदी व्यापार दक्षिण चीन सागर के माध्यम से ही होता है। ऐसे में चीन की सोच यही है कि यदि बहुत बड़ी समुद्री सीमा पर उसका कब्जा होगा तो उसे व्यापार में आसानी होगी और अन्य देश उसकी अनुमति से ही व्यापार के लिए इस जलमार्ग का इस्तेमाल कर पाएंगे। इसके अलावा दक्षिण चीन सागर में प्रचूर मात्रा में तेल और गैस के भंडार हैं। दक्षिण चीन सागर में तेल और गैस के विभिन्न भंडार दबे हुए हैं। अमरीका के मुताबिक यहां 213 अरब बैरल तेल मौजूद है। साथ ही 900 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस का भंडार है। इस समुद्री रास्ते से हर साल 7 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार होता हैं। चीन इन पर भी अपना अधिकर जमाना चाहता हैं। इसलिए वह टापुओं पर निर्माण के लिए वैज्ञानिक शोध का कारण भी बताता है। इसके लिए वह शांति और सुरक्षा की बात भी करता है।

चीन: - दक्षिण चीन सागर में जिन चीनी मिसाइलों की तैनातगी की बात सामने आ रही है उससे चीन ने एक तीर से दो नहीं बल्कि तीन-बार शिकार किए हैं। पहले तो उसने दक्षिण चीन सागर में अपने प्रभुत्व की चुनौती विश्व समुदाय के सामने पेश कर दी हैं। भारत के लिए भी एक तरह से यह चेतावनी है कि वियतनाम के साथ तेल शोधन के उसके प्रयास चीन को मंजूर नहीं हैं। जापान के लिए तो यह बड़ी चुनौती है ही। चीन ने पहले दक्षिण चीन सागर से जापान की उड़ाने बंद कर दी थी। मिसाइल का प्रयोग किस रूप में होगा यह तो तत्काल नहीं कहा सकता लेकिन इतना तय है कि चीन के पास यह बहानेबाजी करने का मौका होगा कि अमूक देश के जहाज को पहचाना नहीं इसलिए मिसाइल दाग दी। गौर करें तो चीन का विवाद वियतनाम और फिलिपींस के साथ ज्यादा है। जापान भले ही अमरीका से मदद की उम्मीद करे लेकिन उसको यह तो स्वीकार करना ही पड़ेगा कि अमरीका ऐसे मामलों में अपने हितों की चिंता छोड़कर उसकी मदद करने वाला नहीं। चीन, दक्षिण चीन सागर में 12 समुद्री मील इलाके पर हक जताता है। चीन के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश (ताइवान, फिलीपींस वियतनाम और मलेशिया) भी इसे इलाके पर अपना दावा जताते हैं। चिंताजनक बात यह है कि चीन किसी अंतरराष्ट्रीय कानून को मानता ही नहीं। चीन और इससे पहले उत्तरी कोरिया का मिसाइल विवाद। मोटे तौर पर शक्ति प्रदर्शन का यह रहा है ताकि दुनिया के दूसरे देश प्रतिक्रया दें। भारत यदि चीन की इस कार्रवाई पर चुप रहता है तो उसे चीन के सामने बौना ही माना जाएगा। भारत को तो यही करना चाहिए कि इसके बावजूद वह चीनी धौंस के आगे झुकने वाला नहीं है और वियतनाम से तेल शोध के समझौते पर अडिग रहेगा।

सैटेलाइट तस्वीर: - 14 फरवरी को सैटेलाइट तस्वीरों में दक्षिण चीन सागर में पारासेल दव्ीप समूहों में सबसे बड़े दव्ीप वूडी अथवा योंगझिंग दव्ीप पर आठ मिसाइल लॉन्चर्स की दो बैटरियां और एक रडार सिस्टम कैद हुआ है। ताइवान, जो इस दव्ीप पर दावा करता रहा है, ने भी इसे पुष्ट किया है। लेकिन हर बार की तरह चीनी विदेश मंत्री ने इसे पश्चिमी मीडिया की उपज बताया हैं। चीन यहां जमीन पर प्रभुता हासिल करने के लिए कई गतिविधियां करता रहा है, जिसे वह जायज भी ठहरता आया हैं।

जवाब: -अमरीका ने पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमान बेचने पर मुहर लगाई तो हम ने अमरीकी राजदूत को बुलाकर ऐतराज जताया। तो फिर चीन के राजदूत को भी बुलाकर कहें कि वह गलत कर रहा है हम एक साथ कितने देशों से बिगाड़ लेंगे। विवाद को जग जाहिर करने से बेहतर है कि हम अपनी तरह से तैयारी करें। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि चीन पिछले सालों में हमारा बड़ा व्यापारिक साझेदार बना है। सामरिक दृष्टि से भी हमें पाकिस्तान से इतना खतरा नहीं जितना चीन से हो सकता है। चीन को जवाब उसके साथ व्यापारिक रिश्तों में कमी लाकर ही दिया जा सकता है। इसके लिए सैनिक तैयारियों की मजबूती भी जरूरी है। जिन-जिन क्षेत्रों में हमारे चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते बने हुए हैं वहां भी आत्मनिर्भरता का दौर शुरू करना होगा। चीन को आर्थिक दृष्टि से कमजोर करके ही हम उसे सामरिक मोर्चे पर भी जवाब देने में सक्षम होंगे।

वूडी द्धीप की स्थिति: - दक्षिण चीन सागर में छोटे-छोटे टापूओं के समूह से ही वूडी द्धीप बना हैं, जिसमें इस द्धीप की स्थित निम्न हैं-

  • वूडी द्धीप में करीब एक हजार लोग रहते हैं। इनमें ज्यादातर सैनिक, निर्माण कार्य करने वाले मजदूर और मछुआरे शामिल हैं।
  • 1956 में चीन ने इस द्धीप पर स्थायी जगह बना ली थी।
  • 2012 में समूचे दक्षिण चीन सागर पर नजर रखने और प्रशासन के लिए यहां एक स्थानीय सरकारी दफ्तर बनाया। यहां एक अस्पताल, पुस्तकालय, हवाई अडडा, विद्यालय और मोबाइल फोन कवरेज बना ली।
  • इस द्धीप पर चीन, ताइवान और विएतनाम द्वारा दावा किया जाता रहा हैं।
  • दक्षिण चीन सागर के वूडी दव्ीप पर एचक्यू 9 मिसाइलों की आठ बैटरियों वाले दो बेडे तैनात किए हैं। इस दव्ीप के आसपास के क्षेत्र के सभी देश इसे अपनी संप्रभुता के लिए खतरा मान रहे हैं।

विवाद: - दक्षिण चीन सागर में सीमा विवाद सदियों पुराना है पर बीते कुछ बरसों में यह ज्यादा तूल पकड़ने लगा है। यहां स्थित टापूओं और जल क्षेत्र पर ताइवान, चीन, वियतनाम, फिलिपींस, मलेशिया और ब्रूनेई दावा जताते रहे हैं। इन प्रतिदव्ंदव्ी देशों के बीच विवाद समुद्री क्षेत्र पर अधिकार और संप्रभुता को लेकर है। इसमें पारासेल और स्पैटली आइलैंड शामिल हैं। स्पैटली आइलैंड 750 चटटानों, टापुओं, प्रवालदव्ीप का समूह है जबकि पैरासेल ऐसे 130 टापुओं का समूह है। पारासेल और स्प्रैटली दव्ीप पर कई देशों ने अपना पूरा अधिकार बताया है तथा कई देशों ने आशिंक रूप से इसे अपने नियंत्रण क्षेत्र का हिस्सा बताया है।

कानून: - अंतरराष्ट्रीय समुद्र कानून देशों को उनकी समुद्री सीमा से 12 समुद्री मील तक के क्षेत्र में अधिकार देता है। उसके बाहर का जल क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा माना जाता है। कोई भी देश इस सीमा के बाहर किसी क्षेत्र पर दावा नहीं कर सकता हैं। संयुक्त राष्ट्र के कानून के अनुसार दव्ीप वही कहलाएंगे जो प्राकृतिक रूप से मौजूद हों और समुद्र में आने वाले ज्वार के समय भी ऊपर ही दिखाई दें। वहां मानव के रहने की क्षमता होनी चाहिए। ऐसे टापू जो कृत्रिम रूप से निर्मित किए जाएंगे, उन्हें दव्ीप के तौर पर नहीं माना जाएगा। उन पर किसी का भी अधिकार नहीं होगा। दक्षिण चीन सागर में छोटे-छोटे टापुओं के समूह हैं जिनमें से अधिकतर दव्ीप की श्रेणी में नहीं आते हैं। लेकिन चीन पर इनका कृत्रिम निर्माण करके, इन पर अपना कब्जा बताता रहा हैं। उधर अमेरिका दक्षिण चीन सागर को स्वतंत्र जलमार्ग के तौर पर देखता है और जब-तब इस क्षेत्र में चीन के अधिकार को चुनौती भी देता है पिछले छह महीनों के दौरान अमरीका ने इस क्षेत्र से अपने विमान इस क्षेत्र से गुजारे और चीन ने इस पर आपत्ति के साथ चेतावनी भी दी थी। बराक ओबामा ने आसियान देशों के शिखर सम्मेलन में कहा कि दक्षिण चीन सागर में तनाव कम करने के लिए ठोस कदम की जरूरत है। चेताया कि अमरीका उन सभी क्षेत्रों में उड़ान भरेगा, नौकाएं चलाएगा और ंसचालन करेगा जहां भी अंतरराष्ट्रीय कानून अनुमति देता हैं।

व्यापार: - अमरीका इस मामले में चीन की खुली आलोचना करता है। उसका कहना है कि कई देशों के पास ऐसे मानचित्र हैं, जिनसे पता चलता है कि पिछले कई सौ बरसों से भारत, अरब और मलय के व्यापारी दक्षिण चीन सागर में समुद्री जहाजों को ले जाते थे।

वियतनाम: - दक्षिण चीन सागर में जो छोटे-छोटे टापुओं के समूह हैं, उसी में है वूडी दव्ीप। इस क्षेत्र में चीन को सबसे अधिक खतरा वियमनाम से है। दावे कुछ भी हों लेकिन दुनिया मानती कि 1979 के युद्ध में चीन वियतनाम से हार गया था। वियतनाम ने हाल ही में रूस से आठ पनछुब्बीयां का सौदा किया हैं। पांचवी पनडुब्बी तो 2 फरवरी को ही वियतनाम पहुंची है। इसी तरह ओरिक्स मिसाइल के लिए के-300 पोर्टेबल बैटरी की खरीद भी वियतनाम ने की है। वह सुखोई-30 भी खरीदने जा रहा है। इस परिस्थति में समझा जा सकता है कि चीन ने एचक्यू-9 मिसाइल बैटरियों की तैनातगी की हैं। चूंकि ये बैलेस्टिक मिसाइल शुरू करने वाली बैटरियां नहीं हैं। इसलिए हो सकता है कि वह यह भी देखना चाहता हो कि यदि इस तरह की बैटरियों की तैनातगी से फिलहाल किसी को आपत्ति नहीं होगी तो फिर कभी बैलेस्टिक मिसाइल शुरू करने में परेशानी नहीं आएगी। यही चिंता अमरीका और आसियान क्षेत्र के देशों को सता रही हैं। फिलहाल, इनकी तैनाती सांकेतिक है और यह महज दावा जताने जैसा ही हैं। यह युद्ध की चेतावनी नहीं है यद्यपि यूएस डिफेंस अधिकारियों ने इन मिसाइलों को एचक्यू-9 मिसाइल बताया हैं। जो बैटरियां जमीन से ऊपर हवा में मार करने के लिए हैं। लेकिन इनकी मारक क्षमता 200 किलोमीटर से अधिक दूरी की नहीं है। इससे जापान, फिलीपींस, ब्रुनेई या अन्य पड़ोसी देशों को कोई खतरा नहीं हैं। लेकिन, सान काकू दव्ीप के नजदीक होने से जापान इसे अपने लिए खतरा मानता है। यह बात जरूर है कि चीन ने युद्ध सामग्री वाहक एयरक्राफ्ट 2010 में शुरू किया था। जो दक्षिण चीन सागर में घूमता जरूर रहता है। इस आधार पर खतरे से इनकार भी नहीं किया जा सकता है। इस घटना से बाकी देशों में, जो इस क्षेत्र पर दावा जताते आए हैं, जबरदस्त नाराजगी है। उन्होंने चीन द्वारा बढ़ते सैन्यकरण पर चिंता जताई है।

उपसंहार: - भारत दक्षिण चीन सागर में मुक्त आवाजाही पक्षधर है। इस क्षेत्र पर चीन का एकाधिकार होने से भारत को भविष्य में परेशानी उठानी पड़ सकती है। यह क्षेत्र को कब्जाने के बाद चीन हिंद महासागर में भारतीय सीमा की ओर बढ़ सकता हैं। इसलिए भारत को परेशान होने से पहले ही भारत को चीन से सतर्क हो जाना चाहिए।

- Published on: March 16, 2016