स्टार्टअप नीति (Startup Policy - New Initiate for India - Essay in Hindi) [ Current Affairs ]

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प्रस्तावना: - मेक इन इंडिया कार्यक्रम के बाद उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए स्टार्टअप इंडिया को नई पीढ़ी के सपनों को साकार देने वाला कार्यक्रम माना जा रहा है। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा भी यही है कि स्टार्टअप के माध्यम से दक्ष युवक रोजगार की तलाश में भटकने के बजाए रोजगार देने वाले बनें। इसलिए अब स्टार्टअप इंडिया के क्रियान्वयन पर सबकी नजरें हैं।

स्टार्टअप इंडिया: - बीते साल स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम से देश की युवा पीढ़ी को सचमुच अपने बेहतर भविष्य को लेकर सुनहरी उम्मीद जगी है। उम्मीद यह कि जा रही है कि इससे आगामी दौर में उद्यमिता, नवाचार व इससे जुड़े कारोबार में इस पीढ़ी को नए अवसर मिल पाएंगे। गत वर्ष 2015 में पन्द्रह अगस्त पर मोदी ने लाल किले से ’स्टार्टअप इंडिया’- ’स्टार्टअप इंडिया’ का नारा दिया था। दरअसल देश के करोड़ों बेरोजगारों के लिए रोजगार के अवसरों की तलाश करने की बड़ी चुनौती केन्द्र व राज्य सरकारों के सामने हैं। अब जो नीति घोषित की गई है उससे एक साथ यह उम्मीद तो करना व्यर्थ होगा कि आने वाले सालों में हजारों स्टार्टअप खड़े हो जाएगें। सवाल यह उठता है कि क्या स्टार्टअप हमारे देश में रोजगार के अवसर पैदा करने में सचमुच बड़ी भूमिका निभा पांएगा।

समस्या: - स्टार्टअप के माध्यम से कामयाबी की जमीन तलाशने वालों की निश्चित ही कमी नहीं होगी। लेकिन सरकारों को उन मुद्दों की तरफ ध्यान देना ही होगा जिनकी वजह से उद्यमी संकट से घिरे रहते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि सिंगल विंडो सिस्टम की बातें हर जगह होती है लेकिन हकीकत में उद्यमियों को पग-पग पर समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं। छोटे स्तर पर जो काम शुरू करते हैं उनका सारा ध्यान अपने बिजनेस पर होता है। उनके पास न तो पर्याप्त कर्मचारी होते और न ही ऐसा कोई अनुभव । सरकारी स्तर पर कभी यह फार्म भरों कभी वो फार्म भरों । अगर वे लोग यह सब कार्य करते रहे तो फिर बिजनेस पर ध्यान कैसे दे पाएंगे। यह अच्छी बात है कि सरकारी नियम प्रक्रिया का सरलीकरण करने जा रही है। इसमें नए स्टार्टअप को तीन साल के लिए आयकर छूट व इंस्पेक्टर राज से मुक्ति की बात खास हैं। हम जानते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा स्टार्टअप अमरीका की सिलिकॉन वैली में कार्यरत हैं। इसका कारण भी साफ है। वहां वे सभी सुविधाएं मौजूद हैं जो किसी भी स्टार्टअप को सफल बनाने के लिए जरूरी हैं।

मदद: - देश में स्टार्टअप के लिए माहौल तैयार करने के लिए यूं तो सरकारों से ज्यादा उम्मीद नहीं की जाती। यह माना जाता है कि केवल ऐसे स्टार्टअप के लिए सरकारों के लिए जगह उपलब्ध कराना ही काफी होगा। लेकिन सरकारी मदद के बिना सफलता की उम्मीद करना बेमानी होगा। अमरीका के कई प्रमुख स्टार्टअप सरकारी संस्थाओं के सहयोग से ही आगे बढ़ पाए हैं। स्टार्टअप को लेकर सबसे बड़ी बात यह हैं कि हमारे देश में वेंचर कैपिटल का कोई उद्योग नहीं है। भारत में स्टार्टअप के लिए जितने भी वेंचर फंड उपलब्ध हैं वे सभी अमरीकी हैं। सरकार ऐसा कोई फंड बनाती है तो निश्चित रूप से स्टार्टअप के लिए अहम मदद होगी। अभी तो काम शुरू करने से पहले ही आर्थिक संकट मुंह बांए खड़ा दिखता है। बैंक भी संदेह की नजर से देखते हैं कि सफलता मिल पाएगी अथवा नहीं। स्टार्टअप के लिए बनाए जाने वाला क्रेडिट गारंटी फंड इस दिशा में मददगार साबित होगा यह उम्मीद की जानी चाहिए।

मियाद: - एक बड़ा काम आर्थिक मदद की मियाद बांध कर किया गया हैं। साफ कहा गया है कि कोई स्टार्टअप तीन या पांच साल तक आगे नहीं बढ़ा तो उसे सरकारी सुविधाएं बंद कर दी जाएगी। आम तौर पर कोई भी उपक्रम सहायता लेते हुए आगे इसलिए नहीं बढ़ता क्योंकि उसे पता है कि छोटा रहने तक ही उसको सरकार की मदद मिलती रहेगी। ऐसे में आगे भला क्यों बढ़ने लगे। अब सहायता बंद होने का डर निश्चित ही उपक्रमों को आगे बढ़ने में मदद करेगा। सरकारी स्तर पर कितनी ही आर्थिक मदद और दूसरी सुविधाएं मिल जाए पर हमें यह समझना होगा कि स्टार्टअप के लिए जिस तरह की तकनीकी जानकारी होनी चाहिए उसका अभी और प्रसार किया जाना चाहिए निचले स्तर पर छोटे उद्यमियों की सतत मदद के लिए निकाय बनाने होगे। उन्हें दिशानिर्देश देने वाले फंड का समुचित उपयोग कराने वाले लोग चाहिए। हमारे पढ़ाई के नियम को इस तरह से मजबूत करने की जरूरत होगी जिससे शुरू से ही स्टार्टअप के प्रति रूझान बन सके।

खास बातें: - ये बाते निम्न हैं-

  • सन्‌ 2020 तक देश में 11500 तकनीकों से जुड़े स्टार्टअप होने का अनुमान है। पिछले एक साल के दौरान 70 प्रतिशत निवेश कुल स्टार्टअप फंडिग का अकेले बेंगलूरू में आया हैं।
  • पहले 03 साल स्टार्टअप संस्थापकों को उनकी आय पर कोई आयकर भुगतान नहीं करना है।
  • नए बैंकरप्सी विधेयक के तहत 90 दिनों के भीतर स्टार्टअप बंद करने में अड़चन नहीं होगी।
  • 10 हजार करो का डेडिकेटेड फंड स्टार्ट अप्स की फंडिग के लिए बनाया जाएगा।
  • क्रेडिट गारंटी योजना अगले चार साल में पेश की जाएगी। 500 करोड़ का फंड सालाना होगा।
  • शुरू के 03 साल तक स्टार्टअप में लेबर, पर्यावरण नियमों की पालना आदि की जांच नहीं होगी।
  • अटल इनोवेशन मिशन में 31 इनोवेशन सेंटर, 07 नए रिसर्च पार्क, 05 बायो कलस्टर बनेंगे।

कर सुधार- कर सुधार लागू हों। आसान पंजीकरण और स्टार्टअप से निकलने में भी अड़चन न हो। यदि स्टार्टअप की सुरक्षा के लिए निवेश किया गया है तो इस स्थिति में केपिटल गेन कर खत्म होना चाहिए या उसे कम करना चाहिए।

इंटरनेट बढ़े- इंटरनेट की पहुंच बढ़ने से छोटे शहरों और गांवो तक तकनीकी की पहुंच बढ़ेगी। इसलिए सस्ते इंटरनेट के साथ ये भी जरूरी होगा कि स्टार्टअप अपने उत्पाद इन छोटी जगहों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाएं। छोटे स्तर पर शुरू हुई कई कंपनियां आज बड़ा काम कर रही है। यह बात सही है कि ऑनलाइन बाजार बढ़ता जा रहा है। लेकिन इसे गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए हमें ब्रॉडबैंड संपर्क को बढ़ाना होगा। साथ ही सर्फिंग का सस्ता होना भी जरूरी है। जब तक इंटरनेट सस्ता और सर्वसुलभ नहीं होगा तब तक स्टार्टअप कंपनियों की पहुंच हर हाथ तक हो पाएगी इसकी उम्मीद करना व्यर्थ है। उम्मीद है मोदी सरकार की नई नीतियों को ठीक से लागू किया गया तो पांच साल बाद स्टार्टअप का भारत में परिदृश्य अलग ही नजर आएगा।

दूरियां घटे- आज भी भारत और इंडिया में फर्क बना हुआ हैं। इस खाई को पाटना होगा। जिस तरह से स्आर्टअप्स के विस्तार की उम्मीद की जा रही है उसे देखते हुए इन्हें भारतीय भाषाओं को अपने बिजनेस का हिस्सा बनाना होगा।

आईटी: - पूरे विश्व का परिदृश्य देखा जाए तो स्टार्टअप के मामले में आज अमरीका में सबसे ज्यादा निवेश हैं। उसके बाद यूरोपीय देश हैं तथा भारत का नंबर पांचवा हैं। इजरायल छोटा देश होते हुए भी स्टार्टअप के लिए निवेश के मामले में हम से काफी आगे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह हैं कि इजरायल ने खुद को तकनीकी क्षेत्र में खूब आगे कर रखा है। स्टार्टअप के लिए अब तक भारत में निवेश काफी कम हो रहा था। शुरूआत के तीन साल में कर से छूट देने के साथ ही इंस्पेक्टर राज से मुक्ति का ऐलान कर मोदी सरकार ने बढ़ा काम किया है। जब भी कोई निवेश की सोचता है जोखिम की बात सबसे आगे रहती है। नई नीतियों के ऐलान के बाद हमारे यहां विदेशी निवेश तेजी से बढ़ने वाला है। क्योंकि निवेशकों को प्रोत्साहन के लिए जिस तरह की नीतियां घोषित की गई हैं, उनमें जो रियायते दी गई है वह तो अमरीका में भी नहीं है। सरकार ने जो फंड बनाने की बात कही है। उससे एक तरह से विदेशी कंपनियों को भी गारंटी मिलेगी। यानी हमारी प्रतिभाओं पर दूसरें देश की कंपनियों को भी पैसा लगाने का मौका और भरोसा दोनों मिलेगा। नए व्यापार के लिए उद्यमी सिर्फ इस बात पर ध्यान देना है कि उसे मार्केट कैसे मिलें? हमारे यहां आईटी सेक्टर काफी बड़ा है। भारत के युवाओं के पास योजना की कमी नहीं है। इनको वित्तीय ग्रोथ मिलगी तो उम्मीद करनी चाहिए कि प्रतिभा पलायन भी रुकेगा। सिर्फ आईटी के क्षेत्र में ही अर्थात आईटी के माध्यम से ही स्टार्टअप के आगे बढ़ने की गुंजाइश है। कृषि के क्षेत्र अर्थात कृषि के माध्यम से भी क्यों नहीं? आईटी से जुड़े स्टार्टअप में पूंजी निवेश काफी कम होता है। यहां तो केवल आइडिया चाहिए।

विस्तार: - सरकार की घोषित नई नीति से स्टार्टअप का माहौल सकारात्मक बनाने में मदद मिलेगी। सकारात्मक माहौल बनाना जरूरी होता हैं ताकि युवा सोच सके कि नौकरी के अलावा व्यापार और इनोवेशन में भी उनके लिए कुछ बनने का विकल्प है। सरकार की पहल अच्छी है लेकिन यह धरातल पर कितनी लागू हो पाती है, यह देखना होगा। भारत में नीतियों और सपनों की कमी कभी नहीं रही है। महत्वपूर्ण यह है कि नीतियां लागू कैसे और कितनी हो पाती हैं। सरकार ने यह नहीं बताया कि यह नीति कैसे लागू होगी? सरकार ने कहा कि इस चार साल में दस हजार करोड़ की निवेश करेंगे पर कहीं यह नहीं बताया इससे बाकी को कैसे फायदा होगा। अच्छी बात है कि सरकार का ध्यान स्टार्टअप की तरफ गया है लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि स्टार्टअप में सरकार का दखल नहीं हो। अभी स्टार्टअप्स के लिए ज्यादातर पैसा विदेशों से आ रहा है। अभी तक के स्टार्टअप्स शहरों तक ही सीमित हैं। इन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में ले जाना होगा। देश की बहुत बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। इस क्षेत्र की तरफ किसी स्टार्टअप का ध्यान नहीं गया हैं।

ग्रामीण क्षेत्र: - में स्टार्टअप शुरू करने वालों को सरकार अतिरिक्त रियायत दे सकती है। साथ ही ग्रमीण क्षेत्र की शिक्षा में सुधार करना जरूरी है क्योंकि शहरों के मुकाबले इसकी गुणवत्ता स्तर बहुत कम है। सरकार इस अंतर को जब तक दूर नहीं कर पाएगी तब तक इसका फायदा ग्रमीण क्षेत्र को नहीं मिल पाएगा। सरकार विद्यालयों में इनोवेशन को बढ़ावा देगी यह सुनने में तो अच्छा है लेकिन इसमें कितने ग्रमीण क्षेत्र के विद्यार्थी आ पाएंगे। स्टार्टअप बचपन से हो इसके लिए सरकारी विद्यालयों और विश्व विद्यालियों की स्थिति में सुधार जरूरी है। स्टार्टअप शुरू तो एक उद्यमी/प्रमोटर कर सकता है। स्टार्टअप को चलाने के लिए खूबी की जरूरत होती है। यह खूबी विश्वविद्यालयों से मिलता हैं देश के 98 फीसदी छात्र सामान्य विश्वद्यािलयों में पढ़ते हैं। इन विश्वविद्यालयों की स्थिति अच्छी नहीं हैं। सरकार को इनकी स्थिति में सुधार के लिए बड़ी राशि खर्च करनी होगी।

मॉडल: - एक जमाना था जब भारत में तकनीक के रूप में सिर्फ रेडियों और बाद में टेलीविजन हुआ करता था। सरकार और नागरिकों के लिए बुनियादी सेवा-रोटी, कपड़ा और मकान ही संघर्ष था। पर उस समय किसने सोचा था कि ये तीनों सेवाएं 21 वीं सदी में तकनीक द्वारा मुहैया कराई जाने लगेंगी। आज हाल यह है कि तकनीक आधारित स्टार्टअप की बाढ़ सी आ गई है। अब देखने वाली बात यह है कि यह परिदृश्य अचानक कैसे बदल गया? एक दशक पहले जहां तमाम उपभोक्ता नकद लेनदेन करते थे। वहीं एक दशक बाद अब कुल भारतीय आबादी के 12 फीसदी लोग ऑनलाइन लेनदेन करने लगे हैं। हालांकि यह विदेश की तुलना में बहुत ज्यादा नहीं है। चीन में वर्ष 2006 - 2011 के बीच ही ऑनलाइन लेनदेन में 20 फीसदी की वृद्धि हुई हैं। वहां 55 फसदी आबादी ऑनलाइन लेदनेन करते रही है। अमरीका, इंग्लैड जैसे विकसित देशों में तो यह आंकड़ा 80 फीसदी तक पहुंच गया है। अमरीका में स्टार्टअप अमरीका अभियान वहां के उद्यमियों के लिए एक नेटवर्क बनाता है, जिसमें वे प्रशिक्षकों के साथ जुड़े होते हैं। भारत में भी एक आसान व्यापार मॉडल बनाने की दरकार लोग कर रहे है।

चुनौती: - इसलिए भारत के लिए अब यह एक बड़ी चुनौती बन गया हैं। इन आकड़ों को बताने के पीछे एक वजह यह भी है कि भारतीय बाजार की प्रकृति अलग किस्म की है। इसलिए यहां ऑनलाइन स्टार्टअप बहुत मुनाफा नहीं बना पाए। भारतीय स्टार्टअप के लिए फंडिग कोई परेशानी नहीं है। 2014 के मुकाबले पिछले साल ज्यादा फंडिग हुई। करीब 7 अरब डॉलर भारतीय स्टार्टअप को निवेश हुआ है।

उपसंहार: - भारत सरकार ने एक सही दिशा में स्टार्टअप अभियान की शुरुआत की है। भारत में औसतन स्टार्टअप संस्थापक 30 से भी कम आयु वर्ग वाले हैं। इस लिहाज से सरकार ने सही कदम उठाया है। यह अभियान तभी सफल होगा जब युवाओं के लिए प्रशासनिक बाधाएं न हो। इसके लिए सरकार को ओर अधिक अच्छे प्रयास करने चाहिए ताकि स्टार्टअप अभियान पूर्ण रूप से सफल हो सके।

- Published on: February 15, 2016