आतंकवाद के खिलाफ अमेरीकी हमला भारत के हित में है

माननीय अध्यक्ष महोदय, निर्णायक गण, गृरुवृंद एवं मित्रों,

हम सब जानते हैं कि गत वर्ष 11 सितम्बर 2001 को जब न्यूयार्क स्थित World Trade Center की बुलंद इमारतों को आतंककारियों ने नष्ट कर दिया, हजारों-2 लोग मारे गए और अरबों की संपति नष्ट हो गई। संपति स्वाहा हो गई साथ-ही-साथ वाशिंगटन स्थित Pentagon रक्षा कार्यालय का एक भाग भी नष्ट हो गया तो विश्व में मानो एक भूचाल सा आ गया। होना भी था क्योंकि ussr के विभक्त होने के बाद यह विश्व की सर्वशक्तिशाली ताकत को यह एक खुली चनौती थी।

तब अमेरिका ने आतंकवाद को एक अंतरराष्ट्रीय जामा पहनाकर 28 सितम्बर 2001 को सुरक्षा परिषद में आदेश पारित कर UNO के 189 members (सदस्यों) के लिए आतंकवाद को नकारने व उसके नेटवर्क को समाप्त करने का एक आदेश जारी कर दिया।

Obama Bin Laden को अभियुक्त घोषित कर उसको शरण देने वाले अफगास्तािन के Taliban शासन को नष्ट करने हेतु 8 October को हवाई हमले प्रारंभ कर दिए। England व France जैसे शक्तिशाली देश भी सैनिक कार्यवाही में अमेरिका के सहयोगी बन गए। किसी की भी अमेरीका के खिलाफ अंगुली उठाने की हिम्मत नहीं हुई। और अंत में यह स्थिति बन गई कि Taliban के प्रमुख समर्थक Pakistan ने भी अपने हवाई अड्डे अमेरीका के लिए खोल दिए।

महोदय, अमेरिका की यह कार्यवाही कहाँ तक उचित व अनुचित है यह कहना तो पाय: मुश्किल ही है परन्तु निसंदेह यह भारत के लिए एक वरदान सिद्ध हुई है।

”इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी है

अल्लाह निकेबान यहाँ भी है वहाँ भी है

खूँखार दरिदों के फकत नाम अलग है

इसके खात्मे के तरीके भी गैर हैं।”

अमेरीकी प्रशासन ने आतंकवाद को एक अपराध माना और जहाँ-2 भी आतंकवादी ठिकाने है उनको नष्ट करके सारे विश्व को आतंकवाद से मुक्त करने की राष्ट्रपति बुश ने प्रतिज्ञा की।

’जाके पाँव न फटे बेवाई, सो क्या जाने पीर पराई’ सच्ची बात है। अब जब अमेरीका पर आ पड़ी तो उसे भारत की पीड़ा का अहसास हुआ। और राष्ट्रपति बुश ने भारत को यह आश्वासन दिया कि आतंककारयों के दमन में वह उसका पूरा साथ देगा। अमेरिका के आतंकवाद आक्रमण से भारत की विश्व के इस सबसे शक्तिशाली देश से प्रभावी निकटता स्थापित हुई। वहाँ के Secletary & state Mr colin Powell ने 17 October को नई दिल्ली में यह स्पष्ट किया कि USA & India are united against terrosion and that inculdes terrosion that has been diricted against India as well.

Afghanistan में Taliban का कचूम्बर निकल जाने के बाद Pakistan को Afghanistan से मिलने वाले आतंककारी अब लगभग समाप्त हो गए। और जिस प्रकार 1971 में पूर्वी Pak. के टूट कर Bangladesh बन जाने के बाद भारत को राहत मिली है और की शक्ति में कमी आई है उसी प्रकार Afghanistan से पाकिस्तानी समर्पित सरकार के खत्म हो जाने से भारत को काफी राहत मिलेगी।

अमेरिका का पाकिस्तान पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है जिसके फलस्वरुप पाकिस्तान ने लश्कर ए तोयबा अलकायदा जैसे आतंककारी गुटों पर बेन लगा दिया एवं कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।

अणु विस्फोट के पश्चात्‌ भारत पर लगे प्रतिबंध अमेरिका ने उठा लिए हैं और भारत को अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए Sohisticated Weapons

”किसी की ज़िंदगी हंसती है किसी की रोती है

किसी की ज़िंदगी कुछ पाती है किसी की ज़िंदगी कुछ खोती है

नादान है जो खुद को समझते है खुदा

हर एक की ज़िंदगी में कुछ ना कुछ कमी होती है।

या कलपूरजे खरीदने की छूट मिल गई। आर्थिक क्षेत्रों में भी जो सुधार व उदारीकरण प्रारंभ हुए है उसके फलस्वरुप भारत का अर्थतंत्र सुदृढ़ हुआ है और एक सशक्त आर्थिक देश के रुप में उभरेगा।

हम एक लंबे समय से आतंकवाद संबंधी हमारी समस्याओं की ओर अमेरिका का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं और उसके कानों पर जूँ नहीं रेंगी परन्तु इस आक्रमण के बाद तो हमें बिन माँगे ही मोती मिल गए हैं। अभी कुछ दिनों पूर्व ही इंग्लैण्ड के पी.एम. Tony Blair भी भारत आए व पाकिस्तान गए और Musharay को समझाया की भारत से ठीक संबंध करने के लिए आतंकवाद को तो समाप्त करना ही पड़ेगा। भारत ने जिन खूँखार 20 आतंकवादियों को सौंपने की बात पाकिस्तान से की है, अब समाचार मिल रहे हैं कि Blain की यात्रा के बाद पाकिस्तान कुछ को छोड़ने का मानस बना रहा है।

यदपि पाकिस्तान ने अपनी सेनाएँ सीमा पर तैनात की है परन्तु इसके जवाब में हमने भी पाकिस्तान को माकूल जवाब दिया है। अभी-2 Kathamandu में जिस नाटकीय अंदाज से पाकिस्तान के Gen Musharay ने अपना Rote किया है उससे पाकिस्तान के मानस का पता चलता है कि वह अमेरीकी दवाब से कितना तिलमिला गया है। निसंदेह उसके पास आतंकवाद को समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है और वह दिन दूर नहीं जब भारत को आतंकवाद से मुक्ति मिल जाएगी। तो अब आप ही बताइए कि किसी सीमा तक भारत के लिए यह एक वरदान सिद्ध हुआ है। इस घटना ने हमारे हौसलों को बुलंद किया है और कवि की इन पंक्तियों को चरितार्थ करने में सफल किया

”तुम हंसते हुए आग पर भी चल सकते हो

तुम चाँद से भी आगे निकल सकते हो

यदि ठीक तरह अपनी शक्ति का प्रयोग करो

तुम समय की धारा को बदल सकते हो।”