Basic Saving Bank Deposit Account, Non-Banking Finance Companies

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’बुनियादी बचत बैंक जमा खाता’ (Basic Saving Bank Deposit Account)

  • वर्तमान के उन सभी ’नो फ्रील’ खातों को बीएसबीडीए के रूप में माना जाएगा जो आरबीआई दव्ारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसरण में खोले गए हैं या आरबीआई दव्ारा जारी दिशानिर्देशों के अनुपालन में बीएसबीडीए में परिवर्तित कर दिया गया है तथा जो उक्त के अंतर्गत नए खोले गए हैं। केवल बीएसबीडीए ग्राहकों के लिए मूल्यवर्द्धित सेवाओं के लिए उचित मूल्यन संरचना के अंतर्गत जिन खातों को अतिरिक्त सुविधाएं प्राप्त हैं, उन्हें बीएसबीडीए के रूप में नही माना जाना चाहिए।

  • ’नो फ्रील’ खातों पर बैंकों को अब अपने सभी ग्राहकों को ’बुनियादी बचत बैंक जमा खाता’ प्रदान करने के लिए न्यूनतम आम सुविधाएँं प्रदान की जाएगी। बैंकों से अपेक्षित है कि वे अपने वर्तमान के ’नो फ्रिल खातों को ’बुनियादी बचत बैंक जमा खाता’ में परिवर्तित कर दें।

  • कोई भी व्यक्ति एक बैंक में केवल एक ही ’बुनियादी बचत बैंक जमा खाता’ रखने के लिए पात्र है।

  • बीएसबीडीए खोलने के लिए किसी प्रारंभिक जमाराशि की कोई आवश्यकता नहीं है।

  • ’बुनियादी बचत बैंक जमा खाता’ उस बैंक में अन्य बचत खाता खोलने के लिए पात्र नहीं है। यदि ग्राहक का उस बैंक में अन्य बचत खाता मौजूद हो तो वह खाता ’बुनियादी बचत बैंक जमा खाता’ खोलने के 30 दिनों के भीतर बंद कर देना होगा।

  • व्यक्ति जिस बैंक में उसका ’बुनियादी बचत बैंक जमा खाता’ वहां पर मीयादी/सावधि जमा, आवर्ती जमा आदि खाते रख सकता है।

  • ’बुनियादी बचत बैंक जमा खाता’ को शाखाओं के माध्यम से सभी ग्राहकों को उपलब्ध सामान्य बैंकिंग सेवा के रूप में माना जाना चाहिए।

  • बैंको को सूचित किया गया है कि वे व्यक्तियों के संबंध में बीएसबीडीए खोलने के लिए आयु और आय मानदंड जैसे प्रतिबंध न लगाएं।

  • ’बुनियादी बचत बैंक जमा खाता’ लागू करने का उद्देश्य निश्चित रूप से रिज़र्व बैंक के वित्तीय समावेशन उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के प्रयासों का भाग है। ’नो फ्रील’ के रूप में खोले गए सभी खातों का नाम बदलकर, दिए गए अनुदेशों के अनुसार बीएसबीडीए कर दिया जाना चाहिए, जारी करने के समय से खोले जाने वाले सभी नए खातों की सूचना बैंकों दव्ारा आरपीसीडी, केन्द्रीय कार्यालय को प्रस्तुत की जाने वाली वित्तीय समावेशन प्लान की प्रगति संबधी मासिक रिपोर्ट के अंतर्गत दी जानी चाहिए।

  • ’बुनियादी बचत बैंक जमा खाते’ पीएमएल अधिनियम और नियमावली के उपबंध की शर्त पर होंगे और उन पर बैंक खाते खोलने के लिए अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी)/धन शोधन निवारण (एएमएल) के संबंध में समय-समय पर जारी रिज़र्व बैंक के अनुदेश लागू किया जाएगा। बीएसबीडीए सरलीकृत केवाईसी मानदंडों के साथ भी खोले जा सकेंगे। तथापि, यदि सरलीकृत केवाईसी के आधार पर बीएसबीडीए खोला जाता है तो इन खातों को अतिरिक्त रूप से ’बीएसबीडीए-छोटा खाता’ माना जाएगा।

  • बीएसबीडीए ग्राहक उसी बैंक में कोई अन्य बचत बैंक खाता नहीं रख सकता है। यदि ’बुनियादी बचत बैंक जमा खाता’ सरलीकृत केवाइसी मानदंडों के आधार पर खोला जाता है, तो इस खाते को अतिरिक्त रूप से एक ’छोटा खाता’ के रूप में माना जाएगा और इस पर ऐसे खातों के लिए निर्धारित शर्ते लागू होगी जो ’छोटा खाता खोलना’ पर हैं।

  • दिनांक 16 दिसंबर 2010 की भारत सरकार अधिसूचना में अधिसूचित प्रकार से बीएसबीडीए-छोटा खाता निम्नलिखित शर्तों पर होंगे

दिनांक 16 दिसंबर 2010 की भारत सरकार अधिसूचना में अधिसूचित प्रकार से बीएसबीडीए छोटा खाता निम्नलिखित शर्तों पर होंगे:-

  • ऐसे खातों में कुल क्रेडिट एक वर्ष में एक लाख रुपए से अधिक न हो।

  • खातों में अधिकतम शेष किसी भी समय पचास हजार रुपए से अधिक नहीं होना चाहिए।

  • किसी महीने में नकद आहरणों और अंतरणों के रूप में कुल नामे (डेबिट) दस हजार रुपए से अधिक नहीं होना चाहिए।

  • सामान्य केवाइसी औपचारिकताएंँ पूरी किए बिना विदेशी प्रेषण (रेमिटेंस) छोटे खातों में जमा (क्रेडिट) नहीं किया जा सकेगा।

  • छोटे खाते प्रारंभ में 12 महीनों की अवधि के लिए वैध होते हैं जिन्हें यदि व्यक्ति आधिकारिक रूप से वैध प्रलेख के लिए आवेदन करने का प्रमाण प्रस्तुत करें तो और 12 महीनों के लिए बढ़ाया जा सकता है।

  • छोटे खाते बैंकों की केवल सीबीएस सहबद्ध शाखाओं में ही अथवा ऐसी शाखाआंे में खोले जा सकते हैं जहाँ शर्तों को पूरा किए जाने की व्यक्ति दव्ारा (मैन्युअली) निगरानी करना संभव है।

  • बुनियादी बचत बैंक जमा खाते में नि:शुल्क उपलब्ध सेवाएं हैं- नकदी जमा करना तथा नकद आहरण इलेक्ट्रानिक भुगतान माध्यमों के जरिए अथवा बैंक शाखाओं तथा एटीएम में चेक जमा करने/चेको की वसूली के स्वरूप में ’प्राप्ति’ धन का जमा (क्रेडिट)।

  • बैंकों से अपेक्षित है कि वे मूल्यवर्द्धित सेवाओं के लिए एक उचित मूल्यन सरंचना स्थापित करें अथवा न्यूनतम शेष रखने की आवश्यकता निर्धारित करें जिसे सुस्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए और साथ ही साथ खाता खोलते समय ग्राहक को बतायी जाए। ऐसी अतिरिक्त सेवाएँं देना सभी बुनियादी बचत बैंक जमा खाता ग्राहकों के लिए गैर-विवेकपूर्ण, नि:पक्षपातपूर्ण एवं पारदर्शी होना चाहिए। तथापि, अतिरिक्त सुविधाओं युक्त ऐसे खातों को बीएसबीडीए के रूप में नहीं माना जाएगा।

  • बैंको को बिना किसी प्रभार के एटीएम डेबिट कार्ड उपलब्ध कराने चाहिए और ऐसे कार्डो पर कोई वार्षिक शुल्क की उगाही नहीं की जानी चाहिए।

  • बीएसबीडीए धारकों को निहित अनुदेशों के अनुसार मुफ्त में पासबुक सुविधा प्रदान की जानी चाहिए।

गैर बैंकिंग वित्त कंपनियाँं (एन बी एफ सी) (Non-banking finance companies)

  • गैर बैंकिंग वित्त कंपनियांँ भारतीय वित्तीय प्रणाली की महत्वपूर्ण श्रेणी के रूप में तेजी से उभर रही हैं। यह संस्थाओं का विजातीय समूह है (वाणिज्यिक सहकारी बैंको को छोड़कर) जो विभिन्न तरीकों से वित्तीय मध्यस्थता का कार्य करता है जैसे जमा स्वीकार करना ऋण और अग्रिम देना, पट्टा किराया खरीद आदि। वे जनता से प्रत्यक्ष अथवा प्रत्यक्ष रूप में निधियां जुटाती हैं और अंतिम व्यय कर्ता को उधार देती हैं। वे विभिन्न थोक और खुदरा व्यापारियों को लघु उद्योगों और स्वरोजगार व्यक्तियों को अग्रिम ऋण देती हैं। इस प्रकार से उन्होंने वित्तीय क्षेत्रक दव्ारा प्रदत्त उत्पादों और सेवाओं का विविधीकरण और विस्तार किया है। धीरेे-धीरे उनकी पहचान उनकी ग्राहकोन्मुखी सेवाओं, सरलीकृत प्रक्रियाओं, जमाओं पर प्रतिफल की आकर्षक दरों, लचीलापन और विशिष्ट क्षेत्रक की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने में समयनिष्ठा आदि के कारण बैंकिंग क्षेत्रक के पूरक के रूप में हो रही है।

  • एन बी एफ सी के कार्यचालन और संचालन का विनियमन भारतीय रिज़र्व बैंक (आर बी आई) दव्ारा भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (अध्याय III ख) के ढांचा और इसके दव्ारा अधिनियम के तहत जारी किए गए निर्देशनों के अधीन किया जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के अनुसार गैर बैंकिंग वित्त कंपनी को निम्न तरीके से परिभाषित किया गया है:-

    • एक वित्त संस्था जो कंपनी है।

    • एक गैर बैंकिंग संस्था जो कंपनी है और इसका मुख्य व्यापार के रूप में किसी योजना या व्यवस्था के अधीन अथवा किसी अन्य तरीके से जमा प्राप्त करना अथवा किसी तरीके से उधार देना हैं।

    • ऐसी अन्य गैर बैंकिंग संस्थान या ऐसी संस्थाओं का वर्ग जैसा केन्द्रीय सरकार के पूर्वानुमोदन और सरकारी राजपत्र में अधिसूचना दव्ारा बैंक विनिर्दिष्ट करता है।

  • अधिनियम के अधीन एन बी एफ सी के लिए जमा करने वाली कंपनी के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक में पंजीकरण करना अनिवार्य हैं। इस पंजीकरण से इसको एनबीएफसी के रूप में अपना व्यापार करने के लिए प्राधिकृत करता है। भारतीय रिजर्व बैंक में पंजीकरण के लिए कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत निगमित कंपनी और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्था के रूप में कार्य करने आरंभ करने के इच्छुक के पास कम से कम निवल स्वामित्व की 25 लाख रुपए की निधि होनी चाहिए (जिसे 21 अप्रैल, 1999 से बढ़ाकर 200 लाख रुपए कर दिया गया है) शब्द एनओएफ का अर्थ है स्वामित्व की निधि (चुकता पूंजी और मुक्त आरक्षित से संचयी हानि घटाएं, राजस्व व्यय में आय अंतर और अन्य अमूर्त परिसंपत्तियों को घटाएंँ-

    • अनुषंगी/कंपनियों के उसी समूह में/अन्य सभी एनबीएफसी के शेयरों में निवेश।

    • डिवेंचरों/बांडों/बकाया ऋणों और अग्रिमों का बही मूल्य, इसमें किराया खरीद और पट्टा वित्त जो उसी समूह की अनुषंगी/कंपनियों को दिया जाता है और उनमें जमा किया जाता है जो स्वामित्व की निधि से अधिक से अधिक 10 प्रतिशत होता है।

  • पंजीकरण प्रक्रिया में निर्धारित प्रपत्र में कंपनी दव्ारा आवेदन जमा करना जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक के विचार के लिए आवश्यक दस्तावेज साथ में देना पड़ता है। यदि बैंक इस बात से संतुष्ट होता है कि भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम में दी गई शर्तें पूरी होती हैं तो कंपनी को पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करता है। केवल वे ही एनबीएफसी जिनके पास वैध प्रमाणपत्र है, सार्वजनिक जमा स्वीकार रख सकते हैं। सार्वजनिक जमा स्वीकार करने वाला एनबीएफसी को गैर बैंकिंग वित्त कंपनी सार्वजनिक जमा स्वीकार करने के निदेशन 1998 जैसा कि बैंक दव्ारा जारी किया गया है, का अनुपालन करना चाहिए।

एन बी एफ सी दव्ारा जमा स्वीकार करने से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण विनियम निम्नलिखित हैं:-

  • उनके लिए कम से कम 12 माह की अवधि के लिए और अधिकतम 60 माह की अवधि के लिए सार्वजनिक जमाओं को स्वीकार/नवीकरण करने की अनुमति है।

  • वे मांग पर पुनर्भुगतान योग्य जमा स्वीकार नहीं कर सकते हैं।

  • वे समय-समय पर भारतीय रिजर्व बैंक दव्ारा निर्धारित अधिकतम सीमा से ब्याज दर नहीं दे सकते हैं।

  • वे जमाकर्ताओं को उपहार/प्रोत्साहन या अन्य अतिरिक्त लाभ नहीं दे सकते हैं।

  • उनका न्यूनतम निवेश ग्रेड क्रेडिट रेटिंग होनी चाहिए।

  • उनकी जमाओं का बीमा नहीं किया जाता है।

  • एन बी एफ सी दव्ारा जमाओं का पुनर्भुगतान की गारंटी भारतीय रिजर्व बैंक नहीं दी जाती है।

भारतीय रिजर्व बैंक में पंजीकृत एन बी एफसी निम्न प्रकार के हैं:-

  • उपकरण पट्टे पर देने वाली कंपनी-वह कोई भी वित्त संस्था हो सकती है जिसका मुख्य व्यापार उपकरण को पट्‌टे पर देना या ऐसे क्रियाकलापों का वित्त पोषण करना है।

  • किराया खरीद कंपनी-यह कोई भी वित्तीय मध्यस्थ हो सकती है जिसका मुख्य व्यापार किराया खरीद लेन देन से संबंधित है या ऐसे लेन देनों का वित्त पोषण करना है।

  • ऋण कंपनी-इसका अभिप्राय कोई भी वित्त संस्था, जिसका मुख्य व्यापार वित्त प्रदान करना हैं चाहे ऋण या अग्रिम देकर या अन्यथा किसी क्रियाकलाप के लिए अपने स्वयं के कार्यकलापों को छोड़कर (जिसमें उपकरण पट्‌टे पर देना या किराया खरीद कार्यकलाप शामिल नहीं हैं)

  • निवेश कंपनी-कोई भी वित्तीय मध्यस्थ जिसका मुख्य व्यापार प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री करना है। अब, इन एन बी एफ सी को तीन वर्गों में वर्गीकृत किया गया हैं:-

परिसपंत्ति वित्तपोषण कंपनी (ए एफ सी) निवेश कंपनी (आई सी)

इन वर्गीकरण के तहत ए एफ सी को वित्तीय संस्था जिसका मुख्य कारोबार भौतिक परिसंपत्तियों का वित्त पोषण करना है, जो देश में विभिन्न उत्पादक/आर्थिक क्रियाकलापों को सहायता प्रदान करती है; के रूप में परिभाषित किया गया है।

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