श्रमिक के जीवन का पल

Doorsteptutor material for competitive exams is prepared by world's top subject experts: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of your exam.

श्रमिक के जीवन का पहला पल

असीम दुख, पीड़ा और वेदना का

निराशा, बेचैनी और चुभन का

वह सतत्‌ परिश्रम का महाकाल

आशा और निराशा का महाजाल

ढकेलता है उसे हर रोज नए पथ पर

दैनिक निजी कमाने का जीवन हल।

काम मिल जाने का जब आता पल

भूला देता है जीवन की व्यथा को

बढ़ा देता है श्रम पर उसके विश्वास को

खिला कर फूल सफलता के

महका देता पसीने से उसके तन को

और उजाला देता जीवन के अंधकार को

उत्साह से, उल्लास से हो जाता मन चंचल।

श्रम के बाद का वह अंतिम पल

पुलकित, प्रफुल्लित तन बदन

हर्षातिरके से भर जाता उसका मन

दूर हो जाती है सारी थकावट

मिट जाती है मन की कड़वाहट

मानो मिल गया उसे अपूर्व धन

भूल जाता है कि कल फिर होगा पहला पल

मौज मस्ती में भूल जाता है अगला कल।

Author: Manishika Jain