Indian Geography MCQs in Hindi Part 5 with Answers

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1 जब पेरू के तट पर एल -निनो का जन्म होता है उस वर्ष दक्षिणी दोलन सूचकांक -

अ) नकरात्मक होता है

ब) सकारात्मक होता है

स) अप्रभावित रहता है

द) अस्थिर होता है जाेे लगातार परिवर्तित होता रहता है।

उत्तर: (अ)

व्याख्या:

  • एल -निनो एक प्रति विषुवतीय गर्म सागरीय धारा है। जब पेरू के तट पर एल -निनो का जन्म होता है उस वर्ष दक्षिणी दोलन सूचकांक (एसओआई) नकरात्मक होता है। दक्षिणी दोलन सूचकांक एल -निनो और ला नीना का उपस्थिति के दौरान प्श्चिमी और पूर्वी उष्णकटीबंधीय प्रशांत महासागर के बीच बड़े पैमाने पर वायु दबाव में होने वाले उतार चढ़ाव (यानी दक्षिणी ओसीलेशन की अवसथा) की एक माप है। यह सूचकांक ऑस्ट्रेलिया के पोटर् (बंदरगाह) डार्विन व फ्रेंच पोलिनेशिया के ताहिती के मध्य बायूदाब के अंतर से संबंधित है। इस नकारात्मक दक्षिणी दोलन सूचकांक के कारण प्रशांत महासागरीय वाकर सेल कमजोर हाेात है जिससे हिंद महासागरीय वाकर सेल शक्तिशाली हो जाता है। इस प्रभाव के परिणाम स्वरूप हैडली सेल का भारतीय भूभाग से विथापन हो जाता है जिससे मानसून कमजोर पड़ जाता हैं।

2 मानसून विच्छेद मानसून के समय की वह स्थित है जब एक दो अथवा कई सप्ताह वर्षा न हो। इस मानसून विच्छेद की स्थिति के लिए निम्नलिखित में से कौनसा/सी कारक उत्तरदायी है/हैं।

  • तापक्रम का प्रतिलोमन

  • उष्णकटिबंधीय अवदाबों की आवृत्ति में कमी

  • आईटी सी जेड की स्थिति

नीचे दिये गए कुट का प्रयोग का सही उत्तर चुनिये।

अ) केवल 1

ब) केवल 2 और 3

स) केवल 3

द) 1, 2 और 3

उत्तर : (द)

व्याख्या: मानसून विच्छेद मानसून के समय की वह स्थित है जब एक दो अथवा कई सप्ताह वर्षा न हो। इस मानसून विच्छेद की स्थिति के लिए महत्वपूर्ण उत्तरदायी कारक निम्नलिखित हैं-

  • तापक्रम का प्रतिलोमन

  • उष्णकटिबंधीय अवदाबों की आवृत्ति में कमी

  • आईटी सी जेड की स्थिति

  • आर्द्र मानसूनी पवनों की दिशा का पश्चिमी घाट के समानांतर होना

अत: विकल्प (द) सही है।

3 निम्नलिखित में से कौन-सी सूर्य के दक्षिणायन होने के समय बनने वाली दशाएँ हैं?

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ पश्चिमोत्तर भागों में उच्च दाब का विकास

  • उपोष्ण पछुआ जेट पवनों की पुन: अपने स्थान पर वापसी

  • आई.टी.सी. जेड. का उत्तर की ओर स्थानांतरण

  • उत्तर पूर्वी व्यापारिक पवनों का अपने स्थान पर कायम होना

नीचे दिऐ गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये।

अ) केवल 1 और 2

ब) केवल 2 और 3

स) केवल 1, 2 और 4

द) 1, 2, 3 और 4

उत्तर : (स)

व्याख्या: सूर्य के दक्षिणायन होने के समय बनने वाली दशाएँ निम्नलिखित हैं-

  • पश्चिमोत्तर भागों में उच्च दाब का विकास

  • उपोष्ण पछुआ जेट पवनों की पुन: अपने स्थान पर वापसी

  • आई.टी.सी. जेड. का उत्तर की ओर स्थानांतरण

  • उत्तर पूर्वी व्यापारिक पवनों का अपने स्थान पर कायम होना

अत: विकल्प (स) सही है। सूर्य के दक्षिणायन होने से तथा इस कारण बनने वाली उपर्युक्त दशाओं का संबंध मानसून के निवर्तन (लौटने) से है।

4 निवर्तित (लौटते) मानसून के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ निवर्तित मानूसन अरब सागर से आर्द्रता ग्रहण करके भारत के पूर्वी तटीय भागों में वर्षा करता है।

  • यह अक्टूबर-नवंबर माह में उत्तरी सरकार क्षेत्र में वर्षा के लिये उत्तरदायी है।

  • इसके कारण नवंबर-दिसंबर माह में कोरोमंडल तट पर वर्षा होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

अ) केवल 1

ब) केवल 2 और 3

स) केवल 3

द) 1, 2 और 3

उत्तर : (ब)

व्याख्या:

  • सूर्य के दक्षिणायन होने से तथा इस कारण बनने वाली उपर्युक्त दशाओं का संबंध मानसून के निवर्तन (लौटने) से है। मानसून का निवर्तन भी चापाकार आकृति में ही होता है। यह बंगाल की खाड़ी से आर्द्रता ग्रहण करके भारत के पूर्वी तटीय भागों में वर्षा करता है। अत: कथन 1 गलत है।

  • इसके कारण अक्टूबर-नवंबर माह में उत्तरी सरकार क्षेत्र तथा नवंबर-दिसंबर माह में कोरोमंडल तट (तमिलनाडु तट) पर वर्षा होती है। अत: कथन 2 और 3 दोनों सही है।

5 निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही नहीं हैं?

अ) कार्बन डाई ऑक्साइड सौर विकरण के लिये अपारदर्शी है किन्तु पार्थिव विकिरण के लिये पारदर्शी है।

ब) ओजोन पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर उनको पृथ्वी की सतह पर पहुँचने से रोकती है।

स) जलवाष्प पृथ्वी को न तो अधिक गर्म और न ही अधिक ठंडा होने देती है।

द) वायुमंडल में धूल कण आर्द्रताग्राही केन्द्र की तरह कार्य करते हैं जिसके चारों ओर जलवाष्प संघनित होकर मेघों का निर्माण करती है।

उत्तर: (अ)

व्याख्या: कार्बन डाई आक्साइड मौसम विज्ञान की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण गैस है, क्योंकि यह सौर विकिरण के लिये पारदर्शी है, लेकिन पार्थिव विकिरण के लिये अपारदर्शी है।

6 भारत में उत्तर-पश्चिम मानसून के गठन के लिये उत्तरदायी कारकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ सर्दियों में तिब्बत के पठार एवं साबेरियाई पठार के ऊपर उच्च दाब सेल (कोशिका) का निर्माण।

  • दक्षिण हिंद महासागर में उच्च दाब क्षेत्र का पश्चिम की ओर स्थानांतरण और इसके बाद कमजोर होना।

  • भारत के दक्षिण में ऊष्ण कटिबंध अभिसरण क्षेत्र आई.टी.सी.जेड. का प्रवास।

उपर्युक्त कारकों में कौन-सा/से भारत में उत्तर-पश्चिम मानसून के लिये उत्तरदायी है/हैं?

अ) केवल 1 और 3

ब) केवल 2

स) केवल 2 और 3

द) 1, 2 और 3

उत्तर: (द)

व्याख्या: दक्षिण-पश्चिम मानसून से अलग उत्तर-पश्चिम मानसून पूरी तरह से स्पष्ट व विभेदित विशेषताओं से युक्त नहीं होता है। फिर भी, भारत में उत्तर-पश्चिम मानसून के गठन के लिये उत्तरदायी कारकों में निम्नलिखित को शामिल किया जा सकता है-

  • सर्दियों में तिब्बत के पठार एवं साबेरियाई पठार के ऊपर उच्च दाब सेल का निर्माण।

  • दक्षिण हिन्द महासागर में उच्च दाब क्षेत्र का पश्चिम की ओर स्थानांतरण और इसके बाद कमजोर होना।

  • भारत के दक्षिण में ऊष्ण कटिबंध अभिसरण क्षेत्र (आईटीसीजेड) का प्रवास।

  • मानसूनी गर्त कमजोर हो जाता है और धीरे-धीरे दक्षिण की ओर विस्थापित होने लगता है, जिसके परिणामस्वरूप दाब-प्रवणता कम हो जाती है।

  • देश के बड़े हिस्सों में वायु की दिशा स्थानीय दबाव की स्थिति से प्रभावित होने लगती है।

7 निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ 9 से 13 किलोमीटर की उंचाई पर मध्य और पश्चिम एशिया से पूर्व की ओर बहने वाली पवनों को जेठ प्रवाह कहा जाता हैं।

  • पश्चिमी विक्षोभ भारतीय महादव्ीप में पश्चिम और उत्तर पश्चिम से प्रवेश करते हैं और भूमध्य रेखा पर उत्पन्न होते हैं।

  • अंत: उष्ण कटीबंधीय अभिसरण क्षेत्र का उत्तर की ओर स्थापित होने से मानसून का आगमन का कारण बनता है।ंंंंंंंंंं

उपर्युक्त कथनों में कौन सा/ से सत्य है/हैं।

अ) 1 और 2

ब) केवल 2

स) केवल 1 और 3

द) 1, 2 और 3

उत्तर: (स)

व्याख्या:

  • जेट प्रवाह धरातल से 9 से 13 किलोमीटर की उंचाई पर समस्त मध्य एवं पश्चिमी एशिया से पूर्व की ओर बहने वाले पछुआ पवनों के प्रभावाधीन होता है। ये पवने तिब्बत के पठार के समानांतर हिमालय के उत्तर में एशिया महादव्ीप पर चलती है। जेट प्रवाह तिब्बत पठार उच्च भूमि के कारण दो भागों में बट जाती है इसकी एक शाखा तिब्बत के पठार के उत्तर में बहती है। अत: कथन 1 सत्य है।

  • पश्चिमी विक्षोभ भारतीय महादव्ीप में शीतकाल में पश्चिम और और उत्तर पश्चिम से प्रवेश करते है, भूमध्य सागर में उत्पन्न होते हैं और भारत में इनका प्रवेश पश्चिमी जेट प्रवाह दव्ारा होता है। अत: कथन 2 असत्य है।

  • ग्रीष्म काल में निम्न वायुदाब पेटी जिसे अंत: उष्ण कटीबंधीय अभिसरण क्षेत्र कहा जाता है, उत्तर की ओर खिसककर हिमालय के लगभग समानांतर 20 से 25 डिग्री (तापमान) उत्तरी आक्षांश पर स्थित हो जाती है। उष्ण -कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र निम्न वायुदाब का क्षेत्र होने के कारण विभिन्न दिशाओं से पवनों को अपनी ओर आकर्षित करता है। दक्षिणी गोलार्द्ध से उष्ण कटिबंधीय सामुद्रिक वायु संहति विषुवत वृत्त को पार करके दक्षिण पश्चिम मानसून कहलाती है। अत: कथन 3 सत्य है।

8 भारत के जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ देश की भौतिक स्थिति के कारण पश्चिम घाट ओर दक्षिणी पवन विमुखी पठार ढाल के कारण अधिक वर्षा होती हैं।

  • कर्क रेखा के दक्षिण में स्थित प्रदेश उच्च दैनिक और वार्षिक तापांतर के साथ सैम (वही/उसी प्रकार से) जलवायु पायी जाती है।

उपर्युक्त कथनों में कौन सा/से सत्य है/हैं।

अ) केवल 1

ब) केवल 2

स) 1 और 2 दोनों

द) न तो 1 और न तो 2

उत्तर: (द)

व्याख्या: उपर्युक्त दोनों कथन असत्य हैं। भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित है:

  • भारत के भौतिक स्वरूप के कारण उच्चावाच, तापमान, वायुदाब, पवनों की गति एवं दिशा तथा ढाल की मात्रा और वितरण को प्रभावित करता है। मानसून काल में पश्चिमी घाट और असम के पवनाभिमुखी ढाल अधिक वर्षा प्राप्त करते हैं, जबकि इसी समय पश्चिमी घाट के साथ लगा दक्षिणी पठार पवनविमुखी स्थिति के कारण कम वर्षा प्राप्त करते हैं।

  • देश के मध्य भाग से गुजरने वाली कारक रेखा के उत्तरी भाग शीतोष्ण कटिबंध में और दक्षिण भाग उष्ण कटिबंध में पड़ता है उष्ण कटिबंध भूमध्य रेखा के निकट होने के कारण पूरे वर्ष उच्च तापमान तथा कम दैनिक और वार्षिक तापांतर का अनुभव होता है।

  • उल्लेखनीय है कि हिमालय पर्वत मानसून पवनों को रोककर उपमहादव्ीप में वर्षा का कारण बनता है।

  • जल और स्थल के तापमान अंतर के कारण भारतीय महादव्ीप में विभिन्न वायुदाब के क्षेत्र विकसित हो जाते है। इस तरह वायुदाब की भिन्नता के कारण मानसून पवनों के उत्क्रमण का कारण बनती है।

9 एल-नीनो के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ यह पेरु तट के निकट भूमध्य रेखीय उष्ण समुद्री धारा का विस्तार है।

  • इसके परिणामस्वरूप प्लवक की मात्रा में वृद्धि होती है जिससे समुद्र में मछलियों की संख्या बढ़ जाती है।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?

अ) केवल 1

ब) केवल 2

स) 1 और 2 दोनों

द) न तो 1 और न तो 2

उत्तर: (अ)

व्याख्या:

  • एल-नीनो एक जटिल मौसम तंत्र है जो हर पाँच से दस साल में प्रकट होता है। इसमें महासागरीय और वायुमंडलीय परिघटनाएँ शामिल होती है यह पेरु तट के निकट भूमध्य रेखीय उष्ण समुद्री धारा का विस्तार मात्र है, जो अस्थायी रूप से ठंडी पेरुवियन अथवा हम्बोल्ट धारा पर प्रतिस्थापित हो जाती हे। यह धारा पेरू तट के जल का तापमान 10 डिग्री (तापमान) तक बढ़ा देती है। अत: कथन 1 सत्य है।

  • एल-नीनों के परिणामस्वरूप प्लवक की मात्रा में कमी होती है, जिससे समुद्र में मछलियों की संख्या कम हो जाती है। इसके अलावा समुद्री जल के वाष्पन में अनियमितता होती है और भूमध्यरेखीय वायुमंडलीय परिसंचरण में विकृति आती है। अत: कथन 2 असत्य है।

10 निम्नलिखित में से कौन-से-बल पवनों की दिशा तथा वेग को प्रभावित करने वाले बल हैं?

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ दाब-प्रवणता बल

  • घर्षण बल

  • कोरियालिस बल

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

अ) केवल 1

ब) केवल 2

स) केवल 2 और 3

द) 1, 2 और 3

उत्तर: (द)

व्याख्या: उपर्युक्त तीनों बल पवनों की दिशा तथा वेग को प्रभावित करते हैं।

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