रीजनल (क्षेत्रीय) सेंटर फॉर (केंद्र के लिए) बायोटेक्रोलॉजी बिल 2016 (Regional Center for Biotechnology Bill 2016 – Law)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• लोकसभा ने रीजनल सेंटर फॉर बायोटेक्रोलॉजी बिल, 2016 को पारित कर दिया है।

• विधेयक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के तत्वाधान में, जैव प्रौद्योगिकी से संबंधित शिक्षण, प्रशिक्षण और अनुसंधान आदि कार्यो के लिए एक क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने के प्रावधान को समाहित करता है।

प्रावधान

• विधेयक इस क्षेत्रीय केंद्र के लिए विधायी आधार प्रदान करता है।

• विधेयक इस संस्थान को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा प्रदान करता है।

• यह क्षेत्रीय केंद्र अनुसंधान और नवाचार को संपन्न करने के साथ ही जैव प्रौद्योगिकी के नवीन क्षेत्रों में शिक्षण और प्रशिक्षण प्रदान करेगा तथा विज्ञान की विभिन्न शाखाओं के पारस्परिक सहयोग दव्ारा प्रौद्योगिक उत्कृष्टता सुनिश्चित करेगा।

राष्ट्रीय महत्व के संस्थान

• भारत में राष्ट्रीय महत्व का संस्थान उसे कहा जाता है जिसके दव्ारा देश/राज्य के किसी विशिष्ट क्षेत्र में अत्यधिक कुशल विशेषज्ञों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जाती है।

• केवल कुछ चुनिंदा संस्थान इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल हैं और उन्हें भारत सरकार दव्ारा सहयोग प्रदान किया जाता है।

• भारत में आईआईटी, एनआईटी, एम्स, एनआईपीईआरएस, आईएसआई जैसे कुछ संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है।

पृष्ठभूमि

• भारत दव्ारा वर्ष 2006 में यूनेस्कों के साथ एक समझौता किया गया था, जिसके अनुसार यूनेस्कों के सदस्य देशों के उपयोग हेतु क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना की जानी थी।

• इस संबंध में केंद्र सरकार के कार्यकारी आदेश दव्ारा हरियाणा के फरीदाबाद में जैव प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण एवं शिक्षण संस्थान की वर्ष 2009 में स्थापना की गयी।

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