दक्षिण-एशिया में शहरीकरण पर विश्व बैंक रिपोर्ट (अधिकोष विवरण) (World Bank Report on Urbanization In South Asia – Committee And – Report And Committee)

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• दक्षिण-एशिया का शहरीकरण ”अस्तव्यस्त और अघोषित” है। इनमें अनुमानित रूप से 130 मिलियन (दस लाख) दक्षिण एशियाई लोग अस्थायी बस्तियों जैसे कि मलिन बस्तियों और अव्यवस्थित रूप से फैले क्षेत्रों sprawl (बेढंगा होना) में निवास करते हैं।

• अघोषित शहरीकरण भारत की आबादी के बड़े हिस्से में देखा जाता है जिसमें शहरी विशेषताएं तो हैं परन्तु ये आधिकारिक रूप से शहरी क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किए जाने के मानदंडो को पूरा नहीं करते हैं।

शहरीकरण का महत्व

विश्व की 54 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या अब शहरी क्षेत्रों में निवास करती है, जो विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 80 प्रतिशत निर्मित करती है, दो तिहाई वैश्विक ऊर्जा का उपभोग करती है। और 70 प्रतिशत ग्रीनहाउस (कोमल वनस्पति को हरि रखने का घर) गैसों के उत्सर्जन के लिए उत्तरदायी है। शहरीकरण आर्थिक गतिविधियों का संकेन्द्रण करता है, उत्पादकता को बढ़ाता है और विशिष्ट रूप से विनिर्माण और सेवाओं में रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करता है।

• शहरी जनसंख्या की वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर होने वाले पलायन से प्रेरित नहीं है, जैसा कि सामान्य रूप से समझा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में वर्ष 2001 और 2011 के बीच 44 प्रतिशत शहरी जनसंख्या की वृद्धि प्राकृतिक वृद्धि के कारण थी और 29.5 प्रतिशत वृद्धि ग्रामीण बस्तियों के जनगणना नगर के रूप में पुनर्वर्गीकरण के कारण थी।

• रिपोर्ट ने शहरीकरण की प्रक्रिया में निहित आर्थिक संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए नीतिगत और संस्थागत स्तर पर पहल किये जाने का आह्वान किया गया है।

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