ऑस्ट्रेलिया का भूगोल (Geography of Australia) Part 10 for Bank Clerical

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  • खनिज तेल- यह देश अपनी आवश्यकता का 40 प्रतिशत तेल ही निकाल पाता है, शेष आयात करता है। अधिकांश उत्पादन क्वींसलैंड, न्यू साउथ वेल्स एवं पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से प्राप्त होता है। यहां के तेल उत्पादक क्षेत्र निम्न बेसिनों में फैले हैं-

  • सूरत बेसिन- यह बेसिन क्वींसलैंड एवं न्यू साउथ वेल्स की सीमा पर विस्तृत देश का सबसे महत्वपूर्ण उत्पादक देश है। मुख्य क्षेत्र ब्रिसबेन के चारो ओर एवं उसका दक्षिण-पश्चिम में विस्तार मुम्बत तक है।

  • बॉस जलडमरुमध्य क्षेत्र- यहां पर तटीय एवं अपतटीय दोनों क्षेत्रों में खनिज तेल निकाला जाता है।

  • कूपर बेसिन-इसका विस्तार दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया के उत्तर एवं उत्तर-पूरब में हे।

  • बैरा दव्ीप व अपतटीय क्षेत्र- यह पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में हैं।

  • विद्युत विकास- ऑस्ट्रेलिया का अधिकांश भाग शुष्क या अदव्र्शुष्क है। यहां का क्षेत्रफल स्थल मंडल का 15 प्रतिशत होते हुए भी यहां की संभावित जल विद्युत क्षमता विश्व की 3 प्रतिशत से भी कम है। देश के कुल विद्युत उत्पादन का 86 प्रतिशत ताप विद्युत गृहों एवं 14 प्रतिशत जल विद्युत गृहों से प्राप्त होता है। ताप विद्युत गृह अधिकतर कोयला व कहीं-कहीं प्राकृतिक गैस पर भी आधारित हैं। यहां के सभी जलविद्युत गृह पूर्वी राज्यों में स्थित है। इसका विकास ग्रेट डिवाइडिंग श्रेणी के दोनों ओर एवं मर्रे डार्लिंग बेसिन में मुख्यत: किया गया है।

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