जापान का भूगोल (Geography of Japan) Part 9 for Bank Clerical

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कृषि

जापान एक औद्योगिक देश है और आज जापान की आधी से अधिक जनसंख्या विविध उद्योग धंधों में लगी हुई है। अत: यहां कृषि का महत्व कम है। सनवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू 1995 में इस देश की सकल राष्ट्रीय आय में कृषि का योगदान मात्र 2 प्रतिशत था जबकि उद्योगों (38 प्रतिशत) और सेवाओं (60 प्रतिशत) का 98 प्रतिशत अंश था। उसी वर्ष यहाँ कुल क्रियाशील जनसंख्या का केवल 6.7 प्रतिशत भाग कृषिकार्य में संलग्न था, जो 1996 में घटकर 4.9 प्रतिशत हो गया। जापान की कुल भूमि का 16 प्रतिशत भाग ही कृषि योग्य है।

जापान में जनसंख्या का गणितीय घनत्व 2.32 p (पर)/ कि.मी.2 हैं, परन्तु कृषिगत जन घनत्व 2818 पर कि.मी2 है। यह विश्व में कृषि भूमि पर जनसंख्या का सर्वाधिक भार है। (सेकेण्ड (दव्तीय)-बांग्लादेश- 140 पर /कि.मी.) सघन जनसंख्या एवं प्रति व्यक्ति अत्यल्प कृषि योग्य भूमि उपलब्धता (0.04 हेक्टेयर) (खेत का नाप 10000 व. मी) के कारण जापान खाद्यान्न में आत्मनिर्भर नहीं हैं। जापान में खेतों का क्षेत्रफल बहुत कम है, अत: यहाँ पर अत्यंत सघन कृषि की जाती है।

प्रमुख फसलें

  • धान- यह जापान की सबसे महत्वपूर्ण फसल है। जापान, चीन तथा भारत के बाद विश्व में सबसे अधिक चावल उत्पन्न करता हैं। जापान में धान की कृषि कुल कृषि योग्य भूमि के लगभग 43 प्रतिशत भाग पर की जाती है। चावल का उत्पादन सर्वत्र, निचले समतल मैदानों, नदी घाटियों, डेल्टाई प्रदेशों, समुद्रतटीय मैदानों तथा पर्वतीय ढालों पर किया जाता है। जापान में पके हुए चावल अर्थात भात को गोहन कहते हैं। तटीय मैदानों में उत्पन्न किया जाने वाला चावल हाटा, पहाड़ी भागों में उत्पन्न किया जाने वाला चावल कोटा तथा दलदली भागों में उत्पन्न किया जाने वाला चावल टा कहलाता है। अपनी मांग का 80 प्रतिशत उत्पन्न करता है।।

  • गेहूँ- यह खाद्यान्नों में चावल के पश्चात दूसरे स्थान पर आता है। जापान की कुल कृषि भूमि के 6 प्रतिशत भाग में इसकी खेती होती है। जापान अपनी मांग का 22 प्रतिशत गेहूँ उत्पन्न कर पाता है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्र आंतरिक सागर के तटवर्ती भाग, क्वाण्टो मैदान तथा पश्चिमी क्यूशू प्रदेश है।

  • जौ- यहाँ गेहूं के साथ-साथ जौ की भी कृषि की जाती है। यह यहाँ की बसंत ऋतु में बोए जाने वाली महत्वपूर्ण फसल है। जापान में दो प्रकार के जौ- छिलका वाला (40 प्रतिशत) तथा बिना छिलका वाला (60 प्रतिशत) यह गरीबो का प्रमुख भोजन हैं।

  • अन्य प्रमुख खाद्यान्नों में सोयाबीन, आलू, शकरकंद, मोटे अनाज तथा फल (नारंगी, सेब, अंगूर, नाशपती, आडू) हैं।

व्यापारिक फसलें

देश के केवल 18 प्रतिशत भूमि पर व्यापारिक फसल का उत्पादन किया जाता है।

  • शहतूत- यह जापान की सर्वाधिक मूलवान और महत्वपूर्ण औद्योगिक फसल है। यह जापान में विकसित रेशम उद्योग का आधारी तत्व है। जापान विश्व का सर्वाधिक रेशम (27 प्रतिशत) उत्पन्न करता है। जापान के लगभग 85 प्रतिशत खेतों के पेड़ों पर शहतूत के वृक्ष मिलते है। सबसे अधिक वृक्ष नगोया तथा टोकियो क्षेत्र में मिलते हैं।

  • चाय- यह मुख्यत: घरेलू मांग की पूर्ति के लिए उत्पन्न किया जाता है। जापान चाय उत्पादन में आठवां बड़ा देश है। टोकियो के पश्चिम का क्षेत्र तथा शिजुओका प्रांत चाय उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र है।

  • अन्य व्यावसायिक फसलों में चुकन्दर, तंबाकू , कपास प्रमुख है।

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