रूस का भूगोल (Geography of Russia) Part 5 for Bank Clerical

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कृषि:-

कृषि के दृष्टि से यह प्रमुख गेहूँ उत्पादक देश हैं। इसके बाद चुकन्दर, सन फ्लावर (सूरजमुखी), कॉटन (सूती), फ्लैक्स (लचीला तार) भी प्रमुख फसल हैं। यहाँ विश्व का सबसे अधिक चुकन्दर तथा फ्लैक्स का उत्पादन होता है। साम्यवादी दिनों में यहाँ दो प्रकार की कृषि विकसित हुई थी-

  • कोकज- यह सामूहिक कृषि था तथा यूरोपीय रूप से प्रचलित था इसमें कृषक परिवार को स्वामित्व का अधिकार रहता था।

  • सोवकोज-यह कृषि सरकारी हाथों में थी। इसका विकास पश्चिमी साइबेरिया में हुआ। यह आज भी प्रचलित हैं। यह मैकेनिज्ड कृषि है।

  • रुस में अधिकतर कृषि कार्य यूरोपीय रुस में होता है। लगभग 100 प्रतिशत सुगरबीट (मीठे चुकंदर) तथा फ्लैक्स की कृषि यूरोपीय रुस से होती है। लगभग 80 प्रतिशत सनफ्लावर की कृषि साइबेरिया में होती है। कपास की खेती काला सागर व कैस्पियन सागर के तटीय क्षेत्रों में तथा कजाख गणतंत्र के उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्रों में होती है।

  • हाल के वर्षों में यूराल भौगोलिक प्रदेश में कृषि का तेजी से विकास किया गया है। इसके अंतपर्वतीय घाटी क्षेत्रों में गेहूँ, जई, मोटे, अजास और सूर्यमुखी की कृषि प्रधानता से होती है। रुस विश्व का दूसरा सबसे बड़ा खाद्यान्न आयातक देश हैं।

वन संसाधन:-

पूरे रुस में विश्व का 42 प्रतिशत टैगा वन है। ये वन मूलत: साइबेरिया में पाए जाते है अत: इसका पर्याप्त विकास नहीं हुआ। यूरोपीय भाग की लकड़ी दीना, मेजेन और ओनेगा नदियों दव्ारा बहाकर उजला सागर के तट पर लाई जाती है, जहाँ आर्केन्जल लकड़ी चीरने का प्रसिद्ध केन्द्र है। पश्चिमी तट पर लेनिनग्राद नगर लकड़ी चिराई तथा लकड़ी आधारित उद्योगों के लिए प्रसद्धि है।

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