व्यक्तित्व एवं विचार (Personality and Thought) Part 10 for Bank Clerical

Get top class preparation for UGC right from your home: Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

Download PDF of This Page (Size: 142K)

आर्थिक विकास

एक समाजवादी होने के नाते नेहरू का गांधी के न्याय के सिद्धांत में विश्वास नहीं था। नेहरू को जमींदारी और पूंजीवाद के खात्में के लिए राज्य की शक्ति का प्रयोग करने में खेद नहीं था। उन्होंनेे यह विश्वास नहीं किया कि सभी जमींदार और पूंजीपति खुद-ब-खुद अपनी अधिशेष संपत्ति के न्यायी बन जाएंगे। यद्यपि गांधी ने संघर्ष समाप्ति के लिए बल प्रयोग के प्रति भी विश्वास व्यक्त किया है। उन्होंने जयप्रकाश नारायण तथा नेहरू के प्रभाव में आकर शोषणरहित समाज के निर्माण में राज्य की भूमिका पर भी विचार किया।

गांधी और नेहरू दोनों ने गरीबी समाप्त करने को ध्यान में रखकर कार्य किए। लेकिन गांधी ने गरीबी की समाप्ति कृषि तथा गांवों में कुटीर उद्योग के विकास दव्ारा करना चाहा जबकि नेहरू देश के औद्योगीकरण के माध्यम से इसे दूर करना चाहते थे।

भारी उद्योग तथा आधारभूत उद्योगों का विकास

प्रधानमंत्री बनने के बाद नेहरू ने देश की रक्षा और औद्योगीकरण के लिए कृषि के महत्व को स्वीकार किया। नेहरू चाहते थे कि योजनाबद्ध तरीके से भारी उद्योगों और ग्रामीण उद्योग तथा कुटीर उद्योग के संतुलित विकास का प्रयास किया जाए। उनका मानना था कि भारत में देश की संपूर्ण संगठित उद्योगों की अपेक्षा ग्रामीण एवं कुटीर उद्योगों में अधिक लोग काम करते हैं। कोई भी लोकतंत्रात्मक प्रणाली वाला देश इन लोगों की उपेक्षा नहीं कर सकता। अत: औद्योगीकरण के प्रश्न पर दोनों के बीच खाई कम हो गयी क्योंकि दोनों ही प्रकार के उद्योगों की आवश्यकता महसूस की गयी।

Developed by: