भाग-7 नागरिकता-संवैधानिक उपचारों का अधिकार (32 − 35) (Part-7 Citizenship: Right of Constitutional remedies 32 − 35) for Bank Clerical

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संवैधानिक उपचारों का अधिकार:- (32-35) - Right of Constitutional Remedies (32-35)

  • अनु. 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) को ”संविधान की आत्मा” डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने कहा था।

  • यदि राज्य दव्ारा मूल अधिकारों का उल्लंघन किया जाए तो उसके विरुद्ध उपचार प्राप्त करने के लिए संविधान के अनु. 32 के अधीन उच्चतम न्यायालय में तथा अनु. 226 के अधीन उच्च न्यायालय में रित याचिका दाखिल करने के अधिकार नागरिकों को प्रदान किये गये हैं।

  • संवैधानिक उपचारों की संख्या-

  • प्रत्यक्षीकरण-प्रशासन निजी व्यक्ति- अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ

  • बन्दी परमादेश-सबसे व्यापक

  • प्रतिषेध

  • उत्प्रेषण

  • अधिकार प्रच्छा

प्रश्न-किस हैसियत से लोक पद को धारण किये है इससे संबंधित रित कौन सा है?

उत्तर- अधिकार पृच्छा

अनु. 39:- यदि किसी क्षेत्र में सशस्त्र सैनिकों को या अर्थ सैनिको बलो को नियोजित किया जाता है जिससे मूल अधिकार प्रभावित हो तो ऐसी स्थिति में उस मूल अधिकार को लेकर सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय में कोई रिट दायर किया जा सकता है।

अनु. 34-यदि किसी क्षेत्र में सैन्य कानून की घोषणा की जाती है जिससे मूल अधिकार प्रभावित होता है तो ऐसी स्थिति में मूल अधिकारों को कोई वरीयता नहीं दी जाएगी।

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