सार्वजनिक वितरण प्रणाली का डिजिटलीकरण (Digitization of Public Distribution System – Economy)

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सार्वजनिक वितरण प्रणाली का डिजिटलीकरण क्यों?

• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए केंद्र सरकार इस प्रणाली में शुरू से अंत तक कंप्यूटरीकरण करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और खाद्यान्न का रिसाव कम होगा।

• भारतीय खाद्य निगम के पुनर्गठन हेतु गठित शांता कुमार सिन्हा समिति ने जनवरी में सौंपी अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि सरकार को खाद्य सब्सिडी का प्रत्यक्ष नकदी अंतरण शुरू कर देना चाहिए क्योंकि मौजूदा वितरण प्रणाली में लगभग 47 प्रतिशत तक का रिसाव होता है।

• अनुमान है कि केवल नकद अंतरण से सरकारी खजाने का लगभग 30000 करोड़ रुपया प्रत्येक वर्ष बचाया जा सकता है।

• स्वचालन सुनिश्चित करता है कि राशन की दुकानों से खाद्यान्न प्वाइंट-ऑफ-सेल (पीओएस) उपकरणों के माध्यम से ही वितरित किया जाये, यह उपकरण लाभार्थियों को प्रमाणित करने के साथ ही प्रत्येक परिवार को दिए जाने वाले अनाज की मात्रा का रिकॉर्ड (प्रमाण) भी रखता है।

प्रभाव

• इन प्रयासों से पिछले दो वर्षो में करीब 61.4 लाख फर्जी राशन कार्डो को रद्द कर दिया गया है, जिससे 4200 करोड़ रुपये के खाद्यान्न के रिसाव और दुरुपयोग को रोका गया है।

• अभी तक 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लाभार्थियों की जानकारी का डिजिटलीकरण किया जा चुका है और 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑनलाइन खाद्यान्न आवंटित किया जा रहा है।

• लाभार्थियों के आधार कार्ड की विशिष्ट पहचान संख्या से जुड़े होने वाले प्वाइंट-ऑफ-सेल उपकरणों को राशन की दुकानों में स्थापित करने के लिए राज्य केंद्रीय सहायता का लाभ ले रहे हैं।

• नौ राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में पूरी आपूर्ति श्रृंखला को कंप्यूटरीकृत कर दिया गया है।

• अप्रैल से दिसंबर के बीच राशन कार्ड के साथ आधार नंबर जोड़ने की प्रक्रिया 8 प्रतिशत से बढ़कर 39 प्रतिशत तक पूर्ण हो चुकी है।

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