एफटीआईएल के साथ एनएसईएल का विलय (Merger of NSEL With FTIL-Economy)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• कॉर्पोरेट (संयुक्त संस्था) मामलों के मंत्रालय ने कंपनी (संघ) अधिनियम 1956 की धारा 396 के तहत, फाइनेंशियल (वित्तीय संबंधी) टेक्रोलॉजी (तकनीकी विधियां) इंडिया (भारत) लिमिटेड (सीमित) (एफटीआईएल) और नेशनल (राष्ट्रीय) स्पॉट (स्थान) एक्सचेंज (विनिमय) लिमिटेड (सीमित) (एनएसईएल) के विलय का आदेश दिया है।

• भारत में यह पहली बार है कि अनुषंगी कपंनी का जबरन मूल कंपनी के साथ विलय किया जा रहा है।

विश्लेषण

• अगर इस तरह का विलय जनता के हित में आवश्यक है तो कंपनी अधिनियम, 1956 इस तरह के विलय के लिए सरकार को समर्थ बनाता है।

• सरकार ने ’जनहित’ का हवाला दिया और कहा कि एनएसईएल दव्ारा उगाहे गए अधिकांश पैसे का (एफटीआईएल) दव्ारा उपयोग किया गया है और इस प्रकार दोनों एक ही संस्था हैं।

• एक तरफ 13000 से अधिक निवेशकों का हित है तो दूसरी तरफ (एफटीआईएल) के शेयरधारक और कर्मचारियों के हित।

• इसके अलावा ”सीमित देयता” के सिद्धांत को यहां तोड़ा जा रहा है। इस आदेश को कॉरपोरेट (संयुक्त संस्था) जगत दव्ारा वोडाफोन -जीएएआर (जनरल (साधारण)-एंटी (प्रतिकूल या विरोधी) अवॉयडेंस (परिहार) रूल (राज्य करना/नियम) मुद्दे की तर्ज पर देखा जा रहा है।

• बहरहाल अवैध व्यापार के प्रकरण को इस प्रकार बगैर दंडित किये हुए अनदेखा नहीं किया जा सकता खासकर जब बड़ी संख्या में छोटे निवेशकों का हित इससे जुड़ा हुआ है, अन्यथा भारतीय बाज़ार में निवेशकों का विश्वास डगमगाना शुरू हो जाएगा।

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