वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – Environment AndEcology)

Doorsteptutor material for Bank-PO is prepared by world's top subject experts: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of Bank-PO.

Download PDF of This Page (Size: 156K)

सुर्खियों में क्यों?

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसंधुरा राजे ने हाल ही में दो मोबाइल (चलनशील) ऐप्स का शुभारंभ किया। पहला मोबाइल एप्प ’राजवायु’ नाम से जयपुर, जोधपुर और उदयपुर की वायु गुणत्ता सूचकांक के बारे में जानकारी साझा करने के लिए है। दूसरा एप्प ’दृष्टि’ नाम से है, जो औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण के स्तर की निगरानी के लिए है।

शुभारंभ

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत नई दिल्ली में 17 सितंबर 2014 को राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का शुभारंभ किया था।

एक्यूआई क्या है?

• इसे आम आदमी दव्ारा अपने निकटवर्ती क्षेत्र के अंतर्गत वायु की गुणवत्ता का आंकलन करने के लिए ’एक संख्या-एक रंग-एक व्याख्या’ के रूप में उल्लिखित किया गया है।

• एक्यूआई की 6 श्रेणियाँ होती हैं।

• प्रस्तावित एक्यूआई आठ प्रदूषकों (PM10, PM 2.5, NO2, SO2, CO2, O3, NH3 और Pb) पर विचार करेगा जिसके लिए लघु अवधि (24-घंटे तक की अवधि के औसत मान) वाले राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों का निर्धारण किया गया है।

• यह पहले 10 शहरों को कवर करता था जबकि अब इन शहरों की संख्या बढ़कर 23 हो गयी है।

• एक विशेषज्ञ के कथन के अनुसार, एक्यूआई का महत्व इस संदर्भ में है कि वह स्वास्थ पर पड़ने वाले प्रभावों के आधार पर विभिन्न शहरों और विभिन्न प्रदूषकों के बीच तुलना का आधार प्रदान करता है।

परिणाम

• जन जागरूकता और जनता तक सूचना की सरल उपलब्ध्ता में वृद्धि हुई है।

• छ: महीनों के दौरान 11 भारतीय शहरों के एक्यूआई मान यह परदर्शित करते हैं कि औसतन कानपुर, वाराणसी और चेन्नई की वायु गुणवत्ता दिल्ली की तुलना में खराब हैं।

• दिल्ली और शेष उत्तरी भारत में कणिकीय पदार्थ (पर्टिकुलेट मैटर) स्तर अधिक उच्च हैं और चैन्नई जैसे शहरों में सल्फर (गंधक) डाइऑक्साइड (दो भाग ओषजन तथा एक भाग धातु का मेल) और नाइट्रोजन (नाईट्रोजन नामक का वायुरूप तत्व विशेष) डाइऑक्साइड (दो भाग ओषजन तथा एक भाग धातु का मेल) इत्यादि जैसे विषैले प्रदूषकों की उच्च सांद्रता है।

• शहरों में कणिकीय पदार्थ का उच्च स्तर निर्माण और विध्वंस गतिविधियों (23 प्रतिशत), तापीय ऊर्जा संयंत्रों में कोयले और साथ ही बायोमास के दहन, एवं बड़े पैमाने पर डीजल (ईंधन) वाहनों के उपयोग (20 प्रतिशत) आदि के कारण होता है।

Developed by: