केले की खेती में पनामा रोग (panama Disease In Banana Cultivation-Environment And Ecology)

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• एक मृदाजनित फफूंद संपूर्ण केरल में केले की फसलों में पनामा रोग उत्पन्न कर रहा है।

• यह किसानों के लिए एक संभावित संकट बनता जा रहा है। इसे यदि नियंत्रित नहीं किया गया तो यह महामारी का रूप ले सकता है।

यह बड़ी चिंता का विषय क्यों हैं?

• केले की आधुनिक नस्लें लैंगिक प्रजनन में सक्षम नहीं हैं क्योंकि उनमें बीज नहीं होते। ये फल देने में सक्षम तने के रोपण दव्ारा अलैंगिक प्रजनन के माध्यम से विकसित होती हैं। परिणामस्वरूप केले के पौधे आनुवांशिक रूप से लगभग एक समान होते हैं और इस प्रकार रोगों के लिए उनमें एक ही प्रकार की सुग्राह्यता होती है।

• अत: एक बार रोगाणु यदि पौधे की प्रतिरक्षा प्रणाली पर नियंत्रण स्थापित कर ले तो यह संपूर्ण फसल क्षेत्र को शीघ्रता से संक्रमित कर सकता है।

• आम तौर पर ऐसे रोगों को नियंत्रित करने के लिए फफूंदनाशियों का उपयोग किया जाता है परन्तु विशेषज्ञों के अनुसार यह रोगाणु, फफूंदनाशियों के प्रति प्रतिरोधी है और इसे रासायनिक रूप से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।

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