स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (Health Care Plan – Social Issues)

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स्वास्थ्य सुरक्षा योजना या राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का नया नाम है।

• बजट 2015-16 में इसकी घोषणा की गयी थी और इसकी विस्तृत जानकारी अभी तक घोषित नहीं की गयी हैं।

• गरीब परिवारों को प्रति परिवार एक लाख रुपये का वर्षाना स्वास्थ्य कवर (आवरण) मिलेगा (राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत यह सीमा 30000 रुपये थी) इसमें वरिष्ठ नागरिका को 30000 रुपये का अतिरिक्त कवर मिलेगा।

• स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का लाभ सार्वजनिक और निजी दोनों स्वास्थ्य सुविधा केन्द्रों में उठाया जा सकता है।

• यह पूरे परिवार को एक इकाई के रूप मानती है और यदि एक सदस्य बीमा राशि का इस्तेमाल करता है, उस परिवार की कुल बीमित राशि से उतनी राशि कम हो जाएगी।

महत्व

• चिकित्सा लागत फुटकर खर्च में सबसे बड़ा व्यय है और लोगों को गरीबी के दुष्चक्र में वापस ढकेलने का मुख्य कारण है।

• राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (विषयवृत्तांत) प्रदान करने की दिशा में एक कदम है।

• उपभोक्ता के हाथों में अधिक क्रय शक्ति प्रदान करने से निजी क्षेत्र ऐसे स्थानों में और अधिक शाखाएं खोलने के लिए प्रेरित होगा।

• जिन स्थानों पर अभी स्वास्थ्य सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है।

चिकित्सा बीमा योजनाओं के समक्ष चुनौतियां

प्रतिस्पर्धी बाजार, यानी जिनमें कुल लागत कम होती है जिससे कीमतें कम हो जाती हैं, स्वास्थ्य बीमा के लिए निष्पादन (परफॉर्म) नहीं करते।

”प्रतिकूल चयन”: लोगों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति की बेंहतर जानकारी है, इस वजह से केवल अस्वस्थ लोग बीमा योजना चुनते हैं।

”नैतिक बाधा”: चिकित्सक को मरीज के उपचार के बारे में बेहतर जानकारी होती है और वे वित्तीय हितों की वजह से महँगा उपचार उपलब्ध कराते हैं।

उपाय

• इन चुनौतियों को ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना दव्ारा सफलतापूर्वक संबोधित किया गया है, जिसे दुनिया की सबसे अच्छी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में से एक माना जाता है।

• इसने ”प्रतिकूल चयन” की चुनौती को खत्म करने के लिए, स्वास्थ्य बीमा के लिए सभी को पंजीकृत कर लिया है (लोगों की स्वास्थ्य या आर्थिक स्थिति की परवाह किए बगैर)।

• इसने सुनिश्चित किया सेवा प्रदाता का राजस्व केवल मानक उपचार प्रोटोकॉल (किसी संधि का पहला या मूल रूप) और कवर की गयी बीमारियों के उस क्षेत्र में होने के आंकड़ों के संदर्भ में निर्धारित किया जाएगा। इस प्रकार इसने ”नैतिक बाधा” की चुनौती को भी संबंधोति किया है।

• अतिरिक्त परीक्षण या उपचार का भुगतान राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना दव्ारा नहीं किया जाता।

• यह सुनिश्चित करती है कि केवल उन्हीं स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को मान्यता दी जाए जो प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवा की पूरी रेंज (एक ही प्रकार की विभिन्न वस्तुएँ) प्रदान करने की क्षमता रखते हों।

• यह सुनिश्चित करती है कि सेवा प्रदाता निवारक स्वास्थ्य उपायों पर ध्यान केंद्रित करे, क्योंकि इनकी लागत कम होती है, और दिए गए वाउचर (ख़र्च का प्रमाण-पत्र) की अवधि के भीतर उस स्वास्थ्य स्थिति के होने की संभावना को कम करती है।

• सेवा प्रदाता को वाउचर के मूल्य के अनुसार भुगतान किया जाता है, भले ही कवर की गयी स्वास्थ्य स्थिति वास्तव में न हुई हो।

• निवारक स्वास्थ्य उपाय प्रदान करने के लिए प्रोत्साहन देने से, क्षेत्र में रुग्णता की समस्या धीरे-धीरे खत्म हो जाती है, जिससे इलाज की कुल लागत में भी कमी आती है।

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