संशोधित अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम के लिए नियम (Revised SC/ST Act Rules – Social Issues)

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सुर्खियों में क्यों?

• सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने हाल ही में संशोधित अनुसूचति जाति/जनजाति अधिनियम, 1989 के कार्यान्वयन के लिए नियमों को अधिसूचित किया।

पृष्ठभूमि

• केंद्र सरकार ने दिसम्बर, 2015 में अनुसूचति जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 में संशोधन किया था।

• संशोध का उद्देश्य अनुसूचति जाति/अनुसूचित जनजाति को न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया में तेजी लाना था।

• साथ ही अत्याचार के पीड़ितों को उदार और शीघ्र राहत प्रदान करने के लिए तथा महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में विशेष संवदेनशीलता सुनिश्चित करने के लिए संशोधन किया गया था।

महत्वपूर्ण प्रावधान

• संशोधन प्रावधानों ने राहत पैकज को 75000 से 7,50,000 तथा 85000 से 8,50,000 तक बढ़ा दिया है जो अपराध की प्रकृति पर निर्भर करेगा।

• इसके अलावा गंभीर प्रकृति के अपराधों के लिए अनुसूचति जाति/जनजाति की महिलाओं को राहत प्रदान की जाएगी चाहे अंत में उनके दव्ारा लगाये गए आरोप सत्यापित ना हों।

• इस कानून की न्याय प्रदान करने में सक्षमता की जाँच करने हेतु राज्य, जिला और उपसंभाग स्तरीय समितियों की बैठकों में नियमित समीक्षा करना।

• 60 दिनों के भीतर जाँच पूरी करना और आरोप-पत्र दाखिल करना।

• पीड़ितों, उनके परिवार के सदस्यों और आश्रितों को सात दिनों के भीतर राहत का प्रावधान।

• इसके अलावा बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के लिए पहली बार राहत के प्रावधान किये गए हैं।

• गैर-हमलावर अपराधों जैसे यौन उत्पीड़न, महिलाओं के शील का अपमान करने के उद्देश्य से किये गए इशारों या कार्य, के संबंध में राहत प्राप्त करने लिए किसी चिकित्सकीय जाँच की आवश्यकता नहीं होगी।

• अत्याचारों की सूची में नए अपराधों जैसे सिंचाई सुविधाओं का उपयोग न करने देना, वन अधिकार की प्राप्ति में बाधक बनना आदि को सम्मिलित किया गया है।

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