Determinism V/S Possibilism, Other Dualism in Geography, Anthropo Geography Part 25

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नियतिवाद v/s संभववाद (Determinism v/s Possibilism)

  • नियतिवाद का अर्थ है मानव प्रकृति संबंध में प्रकृति की सत्ता को सर्वोपरि मानना जो मानव के संस्कृति आर्थिक क्रियाकलाप, व्यवहारवाद एवं सामाजिक तत्वों को निर्धारित करता है। यह एक प्रकार का भौतिक प्रकृतिवाद है जो प्राचीन ग्रीक और रोमन परंपराओं में स्पष्ट दिखता है।

  • नियतिवाद की प्राचीनतम धारायें प्रकृतिवाद ही है जिसमें मानव के सभी आर्थिक, सामाजिक व्यवहारिक पक्ष का निर्धारक एवं निर्णायक प्रकृति के तत्व होते है। प्राकृतिक दशाओं में आर्थिक एवं सांस्कृतिक मानव के विभिन्न रूप बनायें क्योंकि प्राकृतिक दशाओं में ही अंतर थे।

  • अरस्तु ने लिखा कि भारतीय प्रभुत्व राजनैतिक रूप से संगठित परन्तु आलसी है। यूरोपीय प्रभुत्व इनके विपरीत राजनीतिक रूप से विखंडित परन्तु चपल है जो कि क्रमश: उष्ण एवं आर्द्र जलवायु तथा शीत जलवायु के प्रभाव है।

  • भौतिक नियतिवाद की परंपरा मध्य युग में अरब विदव्ानों में देखी गयी। Ibnkhaldun को प्रथम पर्यावरणीय नियतिवादी कहा गया, परन्तु भौतिक नियतिवाद का स्वरूप kant के शास्त्रीय युग में परिवर्तित हुआ। मानव प्रकृति का महत्वपूर्ण अंग माना गया। प्रकृति का दास नहीं।

  • Humbott प्रकृति एवं मानव को एक ही पारिस्थितिक तंत्र के रूप में देखते है जहाँ दोनों के मध्य अन्योन्याश्रय संबंध है। इसे Zusammenhang principle कहा गया। जिसका अर्थ है hanging together.

  • Ritter एवं Darwin को वैज्ञानिक नियतिवादी कहा गया क्योंकि इन्होंने प्रत्यक्ष निरीक्षण के आधार पर एवं वैज्ञानिक अन्वेषण के आधार पर मानव प्रकृति संबंध को समझने का प्रयास किया। इसके पश्चात Ratzel ने नवीन नियतिवाद को स्थापित किया जिसका अर्थ है मनुष्य के जीवन शैली तथा आर्थिक क्रियाओं को नियंत्रित करने वाली दो सत्ता होती है-

    • भौतिक पर्यावरण

    • राज्य

  • इनकी पुस्तक anthrogeography part में भौतिक नियतिवाद चरम पर है परन्तु vol. II मेें मानव वाद एवं संभववाद की नींव रखते है अर्थात Ratzel ने ही नियतिवाद एवं संभववाद का, भौतिक भूगोल एवं मानववाद का दव्ैतवाद उत्पन्न होता है।

  • अमेरिका में Ratzel की शिष्या semple ने भौतिक नियतिवाद को पर्यावरणवाद के रूप में प्रतिष्ठित किया। यह अत्यंत दृढ़ एवं कठोर नियतिवाद है जिसमें मानव को पृथ्वी के ’धूल का धूल’ बतलाया गया। इनके समर्थक Huntington ने climate and civilization नामक पुस्तक में इतिहास को भूगोल का उत्पाद माना है। जलवायु परिवर्तन इतिहास में pulsation उत्पन्न करती है।

  • नियतिवाद Ist ww के बाद संभववाद के उदय से एक अंत: धारा के रूप में व्याप्त रहा। मानव के तकनीकी ज्ञान एवं प्रकृति के रहस्याद्घाटन से नियतिवाद ने संभववाद को जन्म दिया।

  • संभववाद का उदय फ्रांस में Vidal के निर्देशन में माना जाता है। संभववाद की प्रेरणा Ratzel के Anthropogeography vol. 2 से प्राप्त होती है तथा Ritter के साहित्य में मानवाद व्यापक रूप से प्राप्त होता है।

  • संभववाद शब्द की रचना Lucian febbre ने की। संभववाद को परिभाषित करते हुए लिखा कि प्रकृति में सर्वत्र संभावनायें है। यह तो मानव के ऊपर निर्भर करता है कि वह इन त्रिभावनाओं का कैसे उपयोग करे। मानव प्रकृति का दास नही बल्कि स्वतंत्रकर्ता है तथा अपने प्रौद्योगिकी से एवं जीवन स्तर के आधार पर प्रकृति का दोहन करता है। प्रकृति तो उदासीन है अवरोधक नहीं।

There are no necessities but everywhere possibilities.

अर्थात प्रकृति में नियत कुछ भी नहीं सर्वत्र संभावनायें व्याप्त है।

Brunhes संभववाद के अन्य समर्थक है जिन्होंने क्रमबद्ध उपागम के दव्ारा मानव भूगोल को विकसित किया।

Manmnature relationship

Manmnature Relationship

  • Kant:- शास्त्रीय नियतिवाद विषयों को अलग -अलग किया

  • आगमनात्मक-प्रत्येक सिद्धांत को बनाने से पहले उसे प्रत्यक्ष रूाप् से सिद्ध किया।

  • संभववाद 1920 के दशक के बाद अधिक प्रचलित हुआ। corl sour ने सांस्कृतिक नियतिवाद में सांस्कृतिक पर्यावरण को विशिष्ट महत्व दिया एवं संस्कृति के तत्वों को मानव जीवन को प्रभावित करने वाला कारक बताया। Janes ने इसके सामाजिक नियतिवाद कहा।

Our Thought determines our act. & our act determines the previous nature of the earth अर्थात मनुष्य के चिंतन से उसकी क्रियाएँ निर्धारित होती है एवं कियाओं से प्रकृति का स्वरूप।

  • आर्थिक नियतिवाद में मनुष्य के निर्णय लेने की क्षमता को आर्थिक क्रियाओं से प्रभावित माना है जो प्रकृति मानव संबंध को निर्धारित करती है।

  • संभवाद वर्तमान में मानववाद एवं कल्याण वाद के रूप में फलित है।

  • नव नियतिवाद:-नव नियतिवाद के जनक Griffith Taylor है जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के प्राकृतिक दशाओं के अध्ययन के आधार पर यह सिद्धांत प्रतिपादित किया।

  • इसे stop & Go determination भी कहते है। यह दृढ नियतिवाद एवं संभववाद का मध्यम मार्ग है जिसमें प्रकृति को सर्वादेशायी अथवा निर्देशक न मानकर पथ प्रदर्शक माना गया है जबकि मानव को दास न मानकर अनुसरणकर्ता माना है। मानव प्रकृति के शाश्वत नियमों को परिवर्तित नहीं कर सकता। ये नियम सनातन है तथा ये नियम प्रत्येक काल एवं स्थान पर लागू होते है। मानव प्रकृति के प्रवाह को कुछ समय के लिए रोककर उसका उपयोग कर सकता है। इसी प्रकार जैसे यातायात नियंत्रक, यातायात के प्रवाह को कुछ समय के लिए रोक सकता है परन्तु यातायात अपने ही दिशा एवं मार्ग पर संचरित होती है। मनुष्य नदी के मार्ग में जलाशय निर्माण कर विद्युत उत्पादन कर सकता है परन्तु नदी के मार्ग को समुद्र से पूर्वत: पर नहीं मोड़ सकता। अत: प्रकृति मानव संबंध में प्राकृतिक के निर्देशित नियमों के आधार पर ही मानव प्रगति करता है। विरूद्ध होने पर आपदा एवं संकट के रूप में प्रकट होता है।

  • संभात्यवाद:- spate ने 1965 में संभात्यवाद चिंतन प्रतिपादित किये जिसमें प्रकृति मानव संबंध में नियतिवाद एवं संभववाद का माध्यम मार्ग है तथा दोनों के मध्य सामजस्यता स्थापित की गई है।

Environment without men is a meaningless phrase

अर्थात पर्यावरण बिना मानव अर्थहीन है परन्तु मानव प्रकृति के प्रत्येक अंश से संभावना प्राप्त नहीं कर सकता अर्थात प्रकृति सर्वत्र संभावना से युक्त नहीं है बल्कि संभात्यता है।

प्रकृति में संभाव्यता का अर्थ है मनुष्य के वांछित क्रियायें फल प्राप्ति तक जा सकती है अथवा नहीं भी जा सकती।

भूगोल में अन्य दव्ैतवाद (Other dualism in geography)

  • भौतिक भूगोल v/s मानव भूगोल:-इस दव्ैतवाद का उदय के चिंतन में है जिसने भूगोल के मुख्य विषय निर्धारित करने में इस दव्ैतवाद को जन्म दियां चूँकि ये स्वयं नियतिवादी है अत: भौतिक भूगोल पर अधिक बल देते है। प्राचीन ग्रीक Plato एवं strata को छोड़कर शेष सभी भौतिक भूगोल के समर्थक है। classical युग में kant एवं hums bolt ने दोनों पर बराबर बल दिया है जबकि Ritter मानववादी है।

  • संभववाद के समर्थक सभी मानववादी विषयों के चिंतक बने दूसरी ओर नियतिवाद के समर्थक भौतिक भूगोल के चिंतक रहे।

  • यह दव्ैतवाद Ratzel के चिंतन में सर्वोत्कृष्ट रूप से उभरकर सामने आया है।

Anthropogeography I में physical तथा vol. 2 में मानववादी भूगोल की अजस्व धारा है।

  • वास्तव में भौतिक भूगोल एवं मानव भूगोल एक दूसरे विरोधाभास नहीं है बल्कि पूरक है। मानव के बिना प्रकृति अर्थहीन है तथा मानव प्रकृति से अभिन्न है। 1950 से 76 तक मात्रात्मक क्रांति में यह दव्ैतवाद पुन: उठकर के आया, परन्तु 1976 के पश्चात मानववाद की प्रधानता स्थापित हो चुकी है।

  • सामान्य भूगोल Nomothetic/क्रमबद्ध भूगोल v/s विशिष्ट/ प्रादेशिक/ideographic क्षेत्रीय विभेदन इस दव्ैतवाद के जनक बेरेनियस है जिन्हांने सामान्य एवं विशिष्ट भूगोल की रचना की सामान्य भूगोल ही क्रमबद्ध भूगोल है। प्रत्यक्षवाद पर आधारित क्रमबद्ध भूगोल कहलाता है जिसका अर्थ है विधि निर्माण अर्थात क्रमबद्ध भूगोल भौगोलिक विषयों पर नियम/विधि/निर्माण को प्रेरित करता है जो सामान्यीकरण की विधियों पर आधारित होता है। क्रमबद्ध भूगोल में किसी एक ही चर का अध्ययन संपूर्ण भूक्षेत्र में किया जाता है इसलिए इसे एकल चरीय अध्ययन कहते है। जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्रमबद्ध भूगोल में किसी एक विषय वस्तु को ही इसके विभिन्न आयामों में पढ़ा जाता है।

  • जबकि विशिष्ट भूगोल में किसी प्रदेश इकाई पर सभी भौगोलिक तटों का एकीकृत अध्ययन किया जाता है। अत: प्रादेशिक भूगोल समेकित, एकीकृत एवं समग्र अध्ययन है।

Anthropo geography

।दजीतवचव हमवहतंचील

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