Area, Quantitative Revolution, Locational Analysis, System Analysis Part 26

Glide to success with Doorsteptutor material for UGC : Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

Download PDF of This Page (Size: 236K)

क्षेत्रफल (Area)

  • भूगोल में यह दव्ैतवाद प्राचीन ग्रीक में भी पाया गया है जहाँ अरस्तु क्रमबद्ध भूगोल जबकि प्रादेशिक भूगोल के समर्थ है। अरब भूगोल वेत्ता प्रादेशिक भूगोल के समर्थक रहे है तथा विश्व को विभिन्न प्रदेशों में kishwar प्रदेशों में बांटा गया। kishwar सांस्कृतिक प्रदेश होते है।

  • Kant क्षेत्रीय भूगोल के समर्थक थे तथा विशिष्ट भूगोल का समर्थक किया अत: इन्हें snafer ने अपवादवाद का जनक कहा है।

  • Humbolt क्रमबद्ध भूगोल के समर्थक थे, परन्तु Ritter प्रादेशिक भूगोल के। hitner के प्रादेशिक भूगोल का समर्थन है। इन्होंने भूगोल को कहा पुन: vidal की संकल्पना भी प्रादेशिक भूगोल है जो एक river basin का सांस्कृतिक प्रदेश है।

  • Brunhs ने क्रमबद्ध भूगोल का समर्थन किया। Herbert son ने विश्व को प्राकृतिक प्रदेशों में बांटा जबकि hart snorne का क्षेत्रीय विभेदन पुन: प्रादेशिक भूगोल है। इनके समकालीन snafer क्षेत्रीय विभेदन के विरोधी है तथा क्रमबद्ध भूगोल के समर्थक। इन्होंने monothetic उपागम को श्रेष्ठ माना है तथा भूगोल में मात्रात्मक क्रांति को प्रेरित किया है।

  • क्षेत्रीय विभेदन एवं प्रादेशिक संश्लेषण:- 1939 में hart snorne ने क्षेत्रीय विभेदन की संकल्पना अपनी पुस्तक perspective in geography में रखी। क्षेत्रीय विभेदन का अर्थ है भूदृश्य को परिघटनाओं के सकेन्द्रण के आधार पर बांँटना एवं उनके विशिष्ट लक्षणों का अध्ययन करना तथा उन लक्षणों के कारको की व्याख्या करना एवं समीपवर्ती क्षेत्रों से पृथकत्व के कारणों को समझना।

  • Hart snorne ने भूगोल की परिभाषा पृथ्वी के परिवर्तनशील भूदृश्य के बौद्धिक एवं वर्णनात्मक समझ से की है। इसके आधार पर प्रदेश निर्माण एवं उनका अध्ययन संभव है।

  • क्षेत्रीय विभेदन प्रादेशिक भूगोल का ही उपागम है जिसे chorography शब्द के दव्ारा strato वेरेनियस एवं कान्ट जैसे वैज्ञानिकों ने चिन्हित किया। Ritter का land shaft kunde वास्तव में क्षेत्रीय विभेदन ही है। इसी प्रकार hattner का chorology भी प्रादेशिक विज्ञान है। hattner ने ही nomothratic एवं idiographic के द्धैतवाद को विकसित किया तथा ideography के समर्थक बने। ideography का अर्थ है प्रादेशिक संश्लेषण।

  • प्रादेशिक संश्लेषण में एक समान चरों के आधार पर प्रदेश का निर्माण किया जाता है। इसमें विभिन्न प्रतिमानों को एकीकृत कर एवं संश्लेषित कर एक पूर्ण चित्र की प्राप्ति की जाती है जो प्रदेश होता है। जैसे -सवाना प्रदेश के लिए मृदा वर्षा तापमान, vegetation जगत जैसे प्रतिमानों को संश्लेषित कर एक प्राकृतिक प्रदेश की कल्पना की जाती है। इसी प्रकार औद्योगिक प्रदेश भी बनते है।

  • अत: प्रादेशिक विश्लेषण क्षेत्रीय विभेदन का ही एक अंग है जिसके दव्ारा प्रदेश का स्वरूप निर्धारण होता है जबकि क्षेत्रीय विभेदन में इस प्रदेश की विशेषता एवं उसके कारकों की समीक्षा तथा समीपवर्ती प्रदेशों से तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है।

  • snafer के तुर्को के आगे क्षेत्रीय विभेदन 1950-76 तक अस्वीकृत रहा तथा मात्रात्मक क्रांत की परिणति हुई परन्तु 1976 के बाद मानवाद के उदय के साथ ही क्षेत्रीय विभेदन को बल मिला क्योंकि -

    • प्रादेशिक विकास एवं नियोजन तथा Back ward area dev. के लिए उपर्युक्त है।

    • नये सामाजिक प्रसंग का उदय जैसे-भारत में नक्सलवाद क्षेत्रीय विभेदन से ही समझा जा सकता है।

    • मानववादी विषयों को व्याख्याकृत करने का उपागम क्षेत्रीय विभेदन ही है।

Anivwd , veg, soil temp, rf

।दपअूक ए अमहए ेवपस जमउचए ति

पर्यावरणवाद मानव प्रकृति के अंर्तसंबंधों का अध्ययन है जिसके दो उपागम है

  • नियतिवादी दृष्टिकोण

  • संभववादी दृष्टिकोण

मात्रात्मक क्रांति (quantitative Revolution)

मात्रात्मक क्रांति का अर्थ है भौगोलिक विषयों में mathematical एवं सांख्यिकी प्रयोग के आधार पर मॉडल एवं विधि निर्माण। प्रमाणीकरण भूगोल में पुरातन परंपरा रही है परन्तु 1950 से 76 तक के काल को purton ने मात्रात्मक क्रांति की संज्ञा दी है क्योंकि सभी भूगोलवेत्ता अन्य उपागम को त्यागकर विधि निर्माण में कार्यरत रहे।

मात्रात्मक क्रांति के तीन मुख्य कारण थे-

  • भूगोल को उच्च शिक्षा के स्थान से पदच्युत यूएस एवं केनाडा में किया गया क्योंकि इसमें विशेषीकरण नहीं था, सामान्यीकरण शोध के विषय नहीं थे शोध का भाव था।

  • भूगोल वेत्ता विवरणात्मक उपागम से अब चुके थे नयी दिशा की तलाश में थे।

  • भूगोल में प्रत्यक्षवाद का प्रभाव एवं शेफर के homothetic उपागम का समर्थन।

  • QR मुख्य रूप से प्रत्यक्षवाद से प्रभावित रही है। प्रत्यक्षवाद में सर्वेक्षण, शोध, अन्वेषण, निरीक्षण जैसे क्रियाविधियाँ होती है जो विधि निर्माण को प्रेरित करता है।

  • QR में 3 उपागम प्रयुक्त हुये-

    • Spatial analysis (स्थानिक विश्लेषण) इसमें ज्यामितीय विश्लेषण सम्मिलित होता है। जैसे मध्यदूरी, तटीय दूरी आदि।

    • Location analysis:-इसमें भूदृश्य पर उस बिन्दु की खोज की जाती है जहां अधिकतम लाभ प्राप्ति हो अथवा भौगोलिक परिघटनाओं का संकेन्द्रण जैसे-केन्द्र स्थल की प्राप्ति, बेबर में औद्योगिक अवस्थिति की प्राप्ति।

    • System analysis :-इसमें भौगोलिक तंत्र के संघटक इकाइयों का अध्ययन किया जाता है तथा मॉडल निर्माण जैसे नगरीय आकारिकी

मात्रात्मक क्रांति के आधार निम्न है:-

  • गणितीय आधार:-इसमें ज्यामिति, त्रिकोणमिति का बहुधाा प्रयोग किया गया।

  • सांख्यिकी का प्रयोग:-इसमें mcan, median, mode, coefficient of variability, standard deviation, chi square, least square आदि का प्रयोग किया गया।

  • अर्थशास्त्र का प्रयोग:-इसमें Adam’s smith, kanes के principle वेबर का मॉडल, वान थ्यूनेन मॉडल।

  • physics का प्रयोग:-neuton का सार्वभौमिक गुरूत्व नियम का प्रयोग जैसे Stouffer, converse, reilly के दव्ारा।

  • Eybernalies इसका अर्थ है किसी तंत्र के स्वनियमित संघटक इकाइयों का अध्ययन के तीन चरण है

    • 1818-1920:-इसके अंतर्गत मात्रात्मक प्रयोग अर्थशास्त्रीय विधियों से प्रभावत रहे। Thune model, बेबर model, smith’s model

    • 1920 से 1955:- मुख्यत: बस्ती भूगोल में जैसे-primary नगर सिद्धांत कोटि आकार नियम, केन्द्र स्थल सिद्धांत

    • 1956-76 -भूगोल के सभी विषयों भौतिक भूगोल Neil Harvey climatology-thorvey & Perry कृषि-वीबर, बस्ती भूगोल-losch, isard अवस्थिति विश्लेषण पर भी hogget ने प्रयोग किये। Chorley & Perry ने तंत्र विश्लेषण को विकसित किया।

    • 1976-वर्तमान:-यह critical revolution कहलाता है जो QR के कब्र पर उत्पन्न हुआ तथा मानववादी एवं कल्याणवादी दृष्टिकोण से ओत-प्रोत है।

    • 1976 के पश्चात के समर्थन इसके विरोधी बन गये। Heil harrey ने कहा

QR ने अपनी अवधि पूरी कर ली ही तथा सीमांत उपयोगिता हास नियम लागू हो रही है।

गुण:-

  • भूगोल को पुन: शोध विषय के रूप में उच्च शिक्षा में स्थापित किया गया।

  • भूगोल में विवरणात्मकता के स्थान पर वस्तुनिष्टता का प्रवेश।

  • भूगोल के विषयों में संरचनात्मकता।

  • भौगोलिक विषयों में वैज्ञानिकता का प्रवेश।

  • ये मॉडल भूदृश्य के विश्लेषण के आधार बने।

  • भूगोल को विज्ञान के रूप में स्थापित किया गया।

दोष:-

  • इन models में मानव को आर्थिक एवं विवेकशील मानव माना गया जो अनुचित था क्योंकि मानव के भावनात्मक नैतिक मूल्य, सांस्कृतिक मूल्य की अवहेलना की गई।

  • मानव भूदृश्य पर एक बिन्दु मात्र रह गया तथा Robot की तरह व्यवहार करता है।

  • ये सभी model mechanistic model थे।

  • इन मॉडल की व्यवहारिकता सार्वभौमिक नहीं थी ये केवल आंशिक सत्य को प्रकट करते है।

  • इन model का समय के साथ प्रासंगिकता खत्म हो जाता है क्योंकि भौगोलिक भूदृश्य परिवर्तनशील है।

Locational analysis:-

  • अवस्थिति विश्लेषण QR की एक प्रमुख विद्या है इके अंतर्गत ज्यामितीय पद्धति के दव्ारा भूदृश्य पर उस बिन्दु की प्राप्ति की जाती है जहांँ-

    • अधिकतम लाभ प्राप्ति

    • न्यूनतम लागत

    • न्यूनतम दूरी प्राप्त हो।

  • अनुकूलतम अवस्थिति की खोज भूगोल वेत्ताओं की प्रभुत्व विधि है

    • कृषि अवस्थिति विश्लेषण

    • केन्द्र स्थल विश्लेषण

    • औद्येगिक अवस्थिति का विश्लेषण

  • अवस्थिति विश्लेषण के समर्थक p. Hagget ने जिन्होंने अपनी पुस्तक Locational analysis of geography में भूगोल का मुख्य उद्देश्य अवस्थिति विश्लेषण बतलाया परन्तु अवस्थिति विश्लेषण को पूंजीवाद को बढ़ावा मिलता है एवं आर्थिक विषमतायें बढ़ती है क्योंकि आर्थिक क्रियाओं को केन्द्रीकरण एवं लाभ प्राप्ति का बिन्दु प्राप्त होता है।

गुण एवं दोष:- QR के ही है।

System Analysis (तंत्र विश्लेषण)

  • त्त्रां विश्लेषण भूगोल में जैव विज्ञान से प्रविष्ट है जिसमें जैविक इकाई के संरचनात्मक संघटकों का एवं उनके अंर्तसंबंधों का अध्ययन किया जाता है। इसका प्रयोग Buterlanfy ने सर्वप्रथम किया इसे भूगोल में general system theory के रूप में Chorley एवं berry ने प्रयुक्त किया तथा यह मात्रात्मक क्रांति की प्रमुख विद्या है।

  • तंत्र विश्लेषण प्रत्यक्षवाद एवं functionalism जैसे चिंतन से प्रभावित है। प्रकार्यात्मकतावाद में किसी एक इकाई के विभिन्न संघटकों के क्रियात्मकता एवं उनके अंर्तसंबंधों को विश्लेषित किया जाता है। physics की शाखा का तंत्र विश्लेषण पर विशिष्ट प्रभाव है।

  • तंत्र से तात्पर्य उस एकीकृत समेकित पूर्ण से है जो विभिन्न क्रियात्मक संघटकों से निर्मित होता है जहाँ प्रत्येक संघटक अथवा तत्व एक दूसरे से जुड़े होते है अर्थात एक तंत्र के अंतर्गत तीन घटक होंगे-

    • Element (तत्व)-जो स्वयं क्रियात्मक होते है तथा प्रवाह एवं प्रकार्यात्मकता से एक दूसरे से संंबंद्ध होते है।

    • link- link वह प्रवाह है जो दो तत्वों को जोड़ती है।

    • पर्यावरण-जो तंत्र को Regulate करती है। एवं तंत्र के functioning में सहयोग करती है।

Developed by: