Vice President, Prime minister, The Office of the Prime Minister, Cabinet secretariat

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उपराष्ट्रपति (Vice President)

  • भारत में उपराष्ट्रपति का पद अमेरिका से लिया गया है।

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 में उपराष्ट्रपति के पद की व्यवस्था की गयी है।

  • उपराष्ट्रपति का निर्वाचित, संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक मंडल के दव्ारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से तथा गुप्त मतदान दव्ारा होता है।

  • उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित किसी विवाद का निर्णय उच्चतम न्यायालय दव्ारा किया जाएगा। उसका निर्णय अंतिम होगा। न्यायालय दव्ारा उसके निर्वाचन को अवैध घोषित किये जाने पर उसके पद की शक्तियाँ के प्रयोग में किये गये कार्य अमान्य नहीं होंगे, (अनुच्छेद-71)

  • इस पद के उम्मीदवार में निम्नलिखित योग्यताएँं होनी आवश्यक हैं-

  • वह भारत का नागरिक हो।

  • उसकी आयु कम से कम 35 वर्ष हो।

  • वह राज्यसभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता रखता हो।

  • वह कोई लाभ का पद धारण नहीं कर सकता।

  • वह संसद के किसी सदन या राज्य के विधान मंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं हो सकता और यदि ऐसा व्यक्ति उपराष्ट्रपति निर्वाचित हो जाता है तो यह समझा जाएगा कि उसने उस सदन का अपना स्थान अपने पद ग्रहण की तारीख से रिक्त कर दिया है।

  • उपराष्ट्रपति केवल अस्थायी रूप से ही राष्ट्रपति पद को धारण करता है। यह अवधि अधिकतम 6 माह है, जिसके अंतर्गत नये राष्ट्रपति का चुनाव हो जाना चाहिए।

  • उपराष्ट्रपति के पुननिर्वाचन पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एवं मोहम्मद हामिद अंसारी के अतिरिक्त अन्य कोई व्यक्ति उपराष्ट्रपति पद पर पुननिर्वाचित नहीं हुआ।

  • उपराष्ट्रपति को अपना पद ग्रहण करने से पूर्व राष्ट्रपति अथवा उसके दव्ारा नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ लेनी पड़ती है।

  • उपराष्ट्रपति चूंकि राज्यसभा का सदस्य नहीं होता है; अतएव उसे मतदान का अधिकार नहीं है, किन्तु सभापति के रूप में निर्णायक मत देने का अधिकार प्राप्त है।

  • उपराष्ट्रपति का वेतन राज्यसभा के सभापति के रूप में 25 लाख रूपये मासिक है।

  • जिस कालावधि में उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है उसे राष्ट्रपति की ही शक्तियाँ, उन्मुक्तियाँं और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं।

कार्य एवं शक्तियाँ

  • भारतीय संविधान में उपराष्ट्रपति दव्ारा संपादित किए जाने वाले कार्य को दो वर्गों में विभाजित किया गया है। राष्ट्रपति के त्यागपत्र अथवा अपदस्थता के कारण पद-रिक्ति की स्थिति में उपराष्ट्रपति, कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है तथा यदि अनुपस्थिति, अस्वस्थता अथवा किसी अन्य कारणवश राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थ हो तो उपराष्ट्रपति स्थानापन्न राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है।

  • उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। वह राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है तथा उसकी समस्त कार्यवाहियों का संचालन करता है।

  • उपराष्ट्रपति के रूप में सविधान में उन्हें कोई कार्य नहीं सौंपे गए हैं।

  • वह राज्यसभा में आचरण के नियमों का पानकरवाता है।

  • किसी प्रश्न पर राज्यसभा में मत विभाजन होने की स्थिति में वह मतों की गिनती करता है तथा परिणाम की घोषणा करता है।

  • राज्यसभा में यदि किसी भी प्रस्ताव अथवा प्रश्न पर विवाद उठ जाए कि उसे विचारार्थ स्वीकार किया जाए अथवा नहीं तो इसका निपटारा उपराष्ट्रपति अपने निर्णय से करता है।

  • सामान्यतया वह सदन के किसी प्रस्ताव अथवा विधेयक पर मतदान नहीं करता किन्तु दोनों पक्षों को बराबर मत प्राप्त होने की सिथति में वह निर्णायक मतदान करता है।

Vice President and President
Vice President and President

राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति : एक तुलना

राष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति

राष्ट्रपति के निर्वाचन हेतु निर्वाचक मंडल का निर्माण संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों तथा विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों दव्ारा होता है।

निर्वाचन हेतु निर्वाचक मंडल का निर्माण संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्यों (निर्वाचित+मनोनीत) दव्ारा होता है। (निर्वाचक मंडल में विधान सभाओं के सदस्य शामिल नहीं होते हैं)

लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता धारण करना चाहिए।

राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता धारण करना चाहिए

त्यागपत्र उपराष्ट्रपति के नाम संबोधित होता है।

त्यागपत्र राष्ट्रपति के नाम संबोधित होता है।

महाभियोग की प्रक्रिया दव्ारा पदच्युत किया जा सकता है।

राज्यसभा दव्ारा बहुमत से पारित ऐसे संकल्प दव्ारा पदच्युत किया जा सकता है, जिससे लोकसभा सहमत हो।

संघ की कार्यपालिका शक्ति उसमें निहित है तथा उसका प्रयोग वह केन्द्रीय मंत्रिपरिषद के परामर्श एवं सहायता से करता है।

उपराष्ट्रपति के रूप में संविधान में कोई कार्य वर्णित नहीं है। वह राज्य सभा के पदेन सभापित के रूप में कार्य करता है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति अथवा पद रिक्ति की स्थिति में वह राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है।

  • जब कभी किसी सदस्य दव्ारा सदन में कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश किया जाता है तो वह निर्णय देता है कि उसे विचारार्थ स्वीकार किया जाए अथवा नहीं।

  • उपराष्ट्रपति कभी-कभी केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के चांसलर के रूप में भी कार्य करता है।

  • जब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है अथवा राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन करता है, तब वह राष्ट्रपति की समस्त शक्तियों का प्रयोग करता है तथा उस समय वह राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य नहीं कर सकता।

17 प्रधानमंत्री (Prime minister)

  • अनुच्छेद 75 के तहत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति दव्ारा होगी तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री के परामर्श से राष्ट्रपति दव्ारा की जाएगी।

  • व्यवहार में राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत दल या सबसे बड़े दल या सबसे बड़े गठबंधन के नेता, जो उनकी नजर में बहुमत सिद्ध कर सकेगा, को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है।

  • पद ग्रहण करने से पूर्व प्रधानमंत्री सहित प्रत्येक मंत्री को राष्ट्रपति के सामने पद और गोपनीयता की शपथ लेनी होती है।

  • म्ांत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होता है। यदि लोकसभा अविश्वास व्यक्त कर देती है, तो मंत्रिपरिषद पद त्याग करने के लिए बाध्य होती है।

  • यदि लोकसभा किसी एक मंत्री के विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव पारित करे अथवा उस विभाग से संबंधित विधेयक को रद्द कर देती है तो समस्त मंत्रिमंडल को त्याग-पत्र देना होता है।

  • प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल का प्रधान होता है और उसकी मृत्यु या त्यागपत्र से मंत्रिमंडल का विघटन हो जाता है। (अनुचछेद 74) (1)।

  • अनुच्छेद 78 के अनुसार प्रधानमंत्री देश की वास्तविक स्थिति से राष्ट्रपति को अवगत कराता है।

  • प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता करता है।

  • देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू एवं प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी।

  • प्रथम गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई (1977) थे।

  • सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू (1947-64) थे।

  • सबसे कम कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (मात्र 13 दिन) थे।

  • चौधरी चरण सिंह एक मात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो कभी लोकसभा में उपस्थित नहीं हुए थे।

  • अविश्वास प्रस्ताव दव्ारा हटाये जाने वाले प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह (1990) एवं अटल बिहारी वाजपेयी (1999) थे।

  • लोकसभा चुनाव में एकमात्र पराजित प्रधानमंत्री उम्मीदवार श्रीमती इंदिरा गांधी (1977) थीं।

  • पी.वी. नरसिंहराव (1991) एवं एच. डी. देवगौड़ा (1996) प्रधानमंत्री का पदग्रहण करते समय किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे।

  • ऐसे प्रधानमंत्री जो पद ग्रहण के समय राज्यसभा के सदस्य थे-श्रीमती इंदिरा गांधी (1996) इन्द्रकुमार गुजराल (1997) एवं मनमोहन सिंह (2004 और 2009)।

  • जवाहरलाल नेहरू, लालबहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी तीनों ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनकी मृत्यु कार्यकाल में हुई थी।

  • जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी के बाद मनमोहन सिंह चौथे प्रधानमंत्री हैं, जो दूसरी बार इस पर आसीन हुए हैं।

प्रधानमंत्री के शक्तियाँ एवं कार्य

  • प्रधानमंत्री दव्ारा मंत्रियों की नियुक्ति एवं पदच्युति की अनुशंसा राष्ट्रपति को की जाती है।

  • लोकसभा में बहुमत दल के नेता होने के कारण वह लोकसभा में शासन की प्रमुख नीतियों एवं कार्यो की घोषणा करता है तथा लोकसभा के सदस्यों दव्ारा गंभीर विषयों से संबंधित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देता है।

  • देश की वित्त व्यवस्था एवं वार्षिक बजट निर्धारित करने में भी प्रधानमंत्री की भूमिका होती है।

  • शासकीय विधेयकों को प्रधानमंत्री की सलाह के अनुसार तैयार किया जाता है।

  • अपने दल में अनुशासन एवं एकता कायम रखने तथा दल की नीतियों को क्रियान्वित कराने हेतु प्रधानमंत्री दलीय सचेतक के माध्यम से आदेश जारी करता है।

  • वह किसी भी समय लोकसभा के विघटन की अनुशंसा राष्ट्रपति से कर सकता है।

  • उसके दव्ारा मंत्रियों के बीच मंत्रालयों का आवंटन तथा पुन: परिवर्तन किया जाता है।

  • प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है तथा उसके निर्णयों को प्रभावित करता है।

  • संविधान के अनुच्छेद 78 के अनुसार वह प्रशासन तथा विधान संबंधी सभी निर्णयों की सूचना राष्ट्रपति को देता है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (The Office of the Prime Minister)

  • प्रधानमंत्री को शासन कार्यों में स्टॉक कार्य प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय की स्थापना की गई जो आगे चलकर प्रधानमंत्री सचिवालय में परिणत हो गया। प्रधानमंत्री कार्यालय को संक्षिप्त एवं व्यावहारिक रूप में पीएमओ (Prime Minister Office) के नाम से अभिहित किया जाता है।

  • भारत में प्रधानमंत्री कार्यालय की स्थापना 15 अगस्त, 1947 को भारत के स्वतंत्रता के साथ ही की गई थी। केन्द्रीय सचिवालय संगठनों में प्रधानमंत्री कार्यालय (सचिवालय) सबसे छोटा है। PMO का शीर्षस्थ अधिकारी मुख्य सचिव कहलाता है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के कार्य

  • प्रधानमंत्री के मुख्य कार्यपालक के रूप में भी उत्तरदायित्वों के निर्वहन में सहायता करना।

  • प्रधानमंत्री के केन्द्रिय मंत्रालयों और राज्य सरकारों से संपर्क एवं विभिन्न उत्तरदायित्व संबंधी क्रियाकलापों को निभाने में सहायता करना।

  • प्रधानमंत्री की योजना आयोग के अध्यक्ष के रूप में उत्तरदायित्व के निर्वहन में सहायता करना।

  • प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से जनसंपर्क (प्रेस तथा जनता से) स्थापित करना।

  • उन सभी संदर्भों में, जिनका संबंध प्रधानमंत्री के साथ कार्य-व्यापार के नियमों के अंतर्गत आता है एवं प्रधानमंत्री के पास है, को देखना।

  • प्रधानमंत्री को भेजे गए मामलों के परीक्षण में सहायता देना।

  • उपर्युक्त कार्यों के अतिरिक्त भूकंप, बाढ़ आदि संकटों के समय प्रधानमंत्री कोष से राज्यों/व्यक्तियों को जो सहायता पहुँचाई जाती है तथा अन्य प्रकार के मदों का लेखा-जोखा रखना।

कैबिनेट सचिवालय (Cabinet secretariat)

  • कैबिनेट सचिवालय सीधे प्रधानमंत्री के अधीन होता है। यह केन्द्रीय प्रशासन की धुरी है।

  • मंत्रिमंडल सचिव कैबिनेट सचिवालय का प्रशासनिक प्रमुख होता है।

  • कैबिनेट सचिव सिविल बोर्ड का पदेन अध्यक्ष होता है। वह वरिष्ठतम लोक सेवक होने के नाते भारतीय प्रशासनिक सेवा का वरिष्ठतम सदस्य होता है।

  • भारत सरकार के (कार्य आवंटन) नियम, 1961 में कैबिनेट सचिवालय का स्थान नियमों की पहल सूची में है। इसके अंतर्गत कैबिनेट सचिवालय को आवंटित विषय हैं- मंत्रिमंडल और मंत्रिमंडल समितियों को सचिवालय सहायता तथा कार्यनियम।

  • म्ांत्रिमंडल सचिवालय के अधीन-

    • मंत्रिमंडलीय मामलों से संबंधित विभाग

    • संविवर्ग विभाग

    • सांख्यिकी विभाग

    • इलेक्ट्रॉनिक विभाग होते हैं।

  • कैबिनेट सचिवालय, भारत सरकार (कार्य निष्पादन) नियम, 1961 और भारत सरकार (कार्य आवंटन) नियम, 1961 के प्रशासन के लिए उत्तरादायी होता है।

  • उपरोक्त नियमों का पालन करते हुए कैबिनेट सचिवालय सरकार के मंत्रालय में सुचारू रूप से कार्य संचालन की सुविधा प्रदान करता है। विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए मंत्रालयों के बीच मतभेद दूर करते हुए यह सरकार को निर्णय लेने में मदद करता है।

  • सचिवालय मासिक सार लेखों तथा संक्षिप्त टिप्पणियों दव्ारा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं मंत्रियों को विभिन्न मंत्रालयों की गतिविधियों से परिचित करवाता है।

  • कैबिनेट सचिवालय संसद में व्यवस्थापन प्रस्ताव का प्रारूप, राष्ट्रपति के संसद में दिए जाने वाले अभिभाषण और संदेशों को तैयार करता है।

  • यह राज्य या संघीय स्तर पर प्रशासनिक विलंब या कठिनाइयों को दूर करने संबंधी सुझाव देता है एवं सार्वजनिक जाँच समितियों की नियुक्ति तथा ऐसी समितियों के प्रतिवेदनों पर विचार भी करता है।

  • उपप्रधानमंत्री-भारतीय संविधान में प्रधानमंत्री की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके बावजूद कई उप-प्रधानमंत्रियों की नियुक्ति हुई, ये हैं- सरदार पटेल, मोरारजी देसाई, जगजीवनराम, चौधरी चरण सिंह, वाई. वी. चव्हाण, चौधरी देवीलाल (दो बार) एवं लालकृष्ण आडवाणी।

  • संघीय मंत्रिपिरषद-मंत्रिपरिषद तीन स्तरीय होता है- कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री एवं उपमंत्री।

  • कैबिनेट मंत्री अपने विभाग का प्रमुख होता है तथा राज्यमंत्री एवं उपमंत्री उसके सहायक होते हैं। मंत्रिमंडल का गठन कैबिनेट स्तर के मंत्रियों से होता है।

  • मंत्रियों की संख्या-91वां संविधान संशोधन (2004) के अनुसार मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या लोकसभा के कुल सीटों के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती है।

  • संघ मंत्रालय में अनेक विभाग हैं। 15 अगस्त, 1947 को संघ में मंत्रालयों को संख्या 18 थी, जो वर्तमान में बढ़कर 57 हो गई है।

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