उपकर (Cess – Economy)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• हाल ही में सरकार के वित्त पर जारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की एक रिपोर्ट (विवरण) से पता चला है कि विभिन्न उपकरों के तहत सरकार दव्ारा विभिन्न प्रयोजनों जैसे उच्च शिक्षा, सड़क विकास और निर्माण श्रमिकों के कल्याण आदि के लिए एकत्र किये गए फंड (धन) का 1.4 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक धन अप्रयुक्त पड़ा है अर्थात्‌ इस धन का किसी भी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं हुआ है।

• हाल ही में सरकार ने दो नए उपकरों (स्वच्छ भारत अभियान के लिए सभी सेवाओं पर 0.5 प्रतिशत उपकर तथा रीजनल (क्षेत्रीय) कनेक्टिविटी (संयोजकता) फंड (धन) (आरसीएफ) के निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राओं तथा मेट्रो या बड़े शहरों के बीच होने वाली उड़ानों पर 2 प्रतिशत उपकर) की घोषणा की। ये दो नए उपकर उच्च शिक्षा उपकर, स्वच्छ ऊर्जा उपकर जैसे अनगिनत उपकरों की संख्या में और वृद्धि करते हैं।

उदाहरण: प्राथमिक शिक्षा उपकर, राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष, अनुसंधान एवं विकास उपकर कोष, केन्द्रीय सड़क निधि, आयकर कल्याण कोष, सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क कल्याण कोष और कई निष्क्रिय निधियों में 14,500 करोड़ रुपये अप्रयुक्त पड़े हैं।

उपकर

• यह कर पर कर है, जोकि एक विशेष उद्देश्य के लिए सरकार दव्ारा लगाया जाता है आमतौर पर, उपकर उस समय तक लगाये जाने की उम्मीद होती है, जब तक सरकार को उस उद्देश्य के लिए पर्याप्त पैसा प्राप्त हो जाये।

• पिछले कुछ वर्षो में, सरकार ने शिक्षा के प्रसार, श्रमिकों के कल्याण, सड़क विकास तथा अनुसंधान एवं विकास के लिए अनेक उपकर लगायें हैं।

• एक उपकर की प्रकृति ऐसी होती है कि यदि पैसे का निर्दिष्ट उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता है, तो यह निष्क्रिय पड़ा रहता है।

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