राष्ट्रीय पूंजीगत वस्तु नीति (National Capital Goods Policy-Economy)

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• पहली बार प्रारंभ की गई राष्ट्रीय पूंजीगत वस्तु नीति का उद्देश्य पूंजीगत वस्तु क्षेत्र को बढ़ावा देना तथा मेक (बनाना) इन (भीतर) इंडिया (भारत) पहल का समर्थन करना है।

• पूंजीगत वस्तुओं का क्षेत्र 14 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है तथा 1.1प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है।

• इस नीति में मौजूदा निर्यात को 27 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने और भारत की कुल मांग में घरेलू उत्पादन की हिस्सेदारी 60 फीसदी से 80 फीसदी करने की परिकल्पना की गई है। इस प्रकार भारत पूंजीगत वस्तुओं का निवल निर्यातक बन जाएगा।

• यह नीति वित्त की उपलब्धता, कच्चे माल, नवाचार और प्रौद्योगिकी, उत्पादकता, गुणवत्ता और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण गतिविधियाँ, निर्यात को बढ़ावा देना और घरेलू माग सृजन जैसे प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित है।

राष्ट्रीय पूंजीगत वस्तु नीति के प्रमुख बिंदु

• पूंजीगत वस्तु के उप-क्षेत्रों जैसे कपड़ा, अर्थ मूविंग (गतिमान) और प्लास्टिक मशीनरी (यंत्रों) को मेक (बनाना) इन (भीतर) इंडिया (भारत) पहल के तहत प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों के रूप में एकीकृत करना।

• उप-क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी पहुँच में सुधार, कौशल उपलब्धता में वृद्धि आदि।

• भारी उद्योग विभाग की पूंजीगत वस्तु क्षेत्र योजना की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए बजटीय बढ़ाना।

• भारत में बनी पूंजीगत वस्तुओं के निर्यात को ”भारी उद्योग निर्यात एवं बाजार विकास सहायता योजना” के माध्यम से बढ़ाना।

• प्रौद्योगिकी विकास कोष आरंभ करने का प्रावधान।

• नए परीक्षण और प्रमाणन सुविधा की स्थापना तथा मौजूदा सुविधा का उन्नयीकरण करने के साथ-साथ मानकों को अनिवार्य बनाना ताकि ख़राब गुणवत्ता की मशीनों का आयात हतोत्साहित किया जाए।

• संस्थापित क्षमता का उपयोग करके स्थानीय विनिर्माण इकाइयों को अवसर प्रदान करना।

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