क्यासानुर वन रोग (Kyasanur Forest Disease – Environment And Ecology)

Doorsteptutor material for competitive exams is prepared by world's top subject experts: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of your exam.

Download PDF of This Page (Size: 116K)

• इस रोग की सबसे पहले सूचना कर्नाटक के क्यानूसार वन से 1957 में प्राप्त हुयी थी। यह पहली बार बंदरों में पशु महामारी के रूप में प्रकट हुआ। इसलिए स्थानीय स्तर पर इसे बंदर रोग या बंदर बुखार के रूप में भी जाना जाता है।

• haemaphysalis हेमाफीसलिस spinigera स्पिनिगेरा , जो एक वन्य टिक है, इस रोग के संचरण में वाहक की भूमिका निभाता है। (हालांकि टिक आमतौर पर कीड़े माने जाते हैं परन्तु वास्तव में अरैकिन्ड (सरणी प्रकार) होते हैं जैसे कि बिच्छू, मकड़ियाँ और घुन। इस समूह के सभी वयस्क सदस्यों के चार जोड़े पैर होते हैं और एंटीना (तकनीकी रूप से) नहीं होता है, जबकि एक वयस्क कीड़ें को तीन जोड़ें पैर के साथ एक जोड़ी एंटीना भी होता है।)

• टिक के काटने या संक्रमित जानवर, जिसमें मुख्य रूप से बीमार या हाल ही में मरा हुआ बंदर शामिल है, के संपर्क में आने से इस रोग का संचरण मानव में भी हो सकता है।

• किसी संक्रमित टिक के काटने के बाद मुषक, छछूंदर और बंदर इस रोग के सामान्य पोषक (होस्ट) (मेजबान) बन जाते हैं।

• यह रोग ऐतिहासिक रूप से भारत के कर्नाटक राज्य के पश्चिमी और मध्य जिलों तक ही सीमित है। हालांकि, अभी हाल ही में (अप्रैल, 2015 में) इस रोग से उत्तरी गोवा में चार व्यक्तियों की मौत हो चुकी है।

Developed by: