राष्ट्रीय जलमार्ग विधेयक 2015 (National Waterway Bill, 2015)

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सुर्ख़ियों में क्यों

• यह संशोधन 106 अतिरिक्त अंतर्देशीय जलमार्गो को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषिक करने का प्रस्ताव पेश करता है। वर्तमान में इनकी संख्या 5 है, इस संशोधन के बाद इनकी कुल संख्या बढ़कर 111 हो जाएगी।

विनियामक प्रावधान

• भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 1985 नौवहन और नौचालन के विकास की संभावनाओं वाले जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्गो के रूप में घोषित करने और कुशल नौवहन तथा नौचालन के लिए इस प्रकार के जलमार्गो का विकास करने हेतु सरकार को समर्थ बनाता है।

• देश में अंतर्देशीय जलमार्ग के विकास और नियमन के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की स्थापना अक्टूबर, 1986 में की गई थी।

अंतर्देशीय जल परिवहन के लाभ

• अंतर्देशीय जल परिवहन को ईंधन दक्षता तथा आर्थिक लागत की दृष्टि से परिवहन का सर्वाधिक उपयुक्त रूप माना जाता है।

• अध्ययनों से पता चला है कि जलमार्गों दव्ारा ढोये जाने के दौरान कंटेनर (डिब्बा) जहाजों से होने वाला उत्सर्जन 32 से लेकर 36 ग्राम सीओ2 प्रतिदिन टन/किमी है जबकि सड़क परिवहन वाले वाहनों (भारी वाहनों) से होने वाला उत्सर्जन 51 से लेकर 91 ग्राम सीओ2 प्रति टन/किमी है।

• भारत में 14,500 किलोमीटर नदी चैनल नौगम्य (नौवहन योग्य) हैं जिसमें से 3,700 किमी मशीनीकृत नाव प्रयोग करने योग्य हैं। लेकिन वास्तव में, केवल 2000 किमी का उपयोग हो रहा है। भारत में 4300 किमी की कुल नहर लंबाई में से 900 किमी नौगम्य है, लेकिन केवल 330 किलोमीटर का उपयोग किया जा रहा है।

अंतर्देशीय जल परिवहन समस्याएं

• नदियों के जल स्तर में मौसमी गिरावट होती है, विशेष रूप से प्रायदव्ीप की वर्षा पोषित नदियों में जोकि गर्मियों के दौरान लगभग सूख जाती हैं।

• सिंचाई के लिए नदी जल की दिशा परिवर्तित करने से प्रवाह में कमी आई है। उदाहरण के लिए, गंगा में, जहां स्टीमरों (भापपंक्ति) को चलाना भी कठिन हो जाता है।

• गाद के जमाव के कारण नौगम्यता कम हो जाती है जैसा कि भागीरथी-हुगली में और वर्किघम नहर के मामलें में है।

• झरनों और जलप्रपातों के कारण निर्वाध नौवहन में समस्याएं आती हैं, जैसा कि नर्मदा और ताप्ती के मामलें में हैं।

• विशेष रूप से तटीय भागों में लवणता के कारण नौवहन प्रभावित होता है।

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