Regional Development and Planning, Rostow's Model and Devlopment

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Rostow’S Model and Devlopment

  • प्रथम चरण:-Traditional society (परंपरागत समाज) कृषि आधारित, कृषि अधिशेष का धार्मिक कार्यो में प्रयोग, आर्थिक वृद्धि, स्थैतिक निर्वहन कृषि प्रणाली राजतंत्र, वंशानुगत शासन व्यवस्था 1779 के पूर्व के काल को यूरोप में परंपरागत समाज माना गया है।

  • दव्तीय चरण:-उत्प्रस्थान की पूर्व शर्तें:-परंपरागत समाज में स्वस्फूर्त क्रिया से उत्प्रेरकता बढ़ती है। जिससे आर्थिक प्रगति प्रारंभ होती है।

जैसे-

  • राजतंत्र का अंश एवं नये प्रशासनिक तंत्र जैसे प्रजातंत्र एवं लोक जन आधारित व्यवस्थायें (साम्यवाद)

  • नये धर्म का उदय अथवा धर्म का परिवर्तन जो नवीन वैज्ञानिक सोच पर आधारित हो और जो रूढ़िवादिता का अंत करे।

  • औद्योगिक क्रांति जो किसी नवीन प्रौद्योगिकी पर आधारित हो।

  • पुर्नजागरण जो सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन उत्पन्न करे शिक्षा, ज्ञान, अधिकार, कर्तव्य, विज्ञान आदि को बढ़ाये।

    • कृषि उत्पादकता में वृद्धि होती है खाद्य संकट खत्म होता है आत्मनिर्भरता बढ़ती है। कृषि में अधिशेष की प्राप्ति अधिशेष का उद्योग में निवेश होता है।

  • तृतीय चरण:-Take off (उत्प्रस्थान):- अर्थ व्यवस्थाएं तीव्र दर से प्रगति करती है यदि-

    • वैज्ञानिक एवं औद्योगिक क्रांतियाँ सहगामी होती।

    • जीडीपी का 10-20प्रतिशत पूँजी निवेश में उपयुक्त होता।

    • प्रजातंत्र, उदारीकरण जैसे आधुनिक विचारधारा समाज को नियंत्रित करता है।

उत्प्रस्थान निम्नलिखित तथ्यों पर आधारित है-

  • प्रभावी उद्योगों का विकास जो आधारभूत एवं भारी उद्योग तथा भारी मात्रा में रोजगार सृजन करते है।

  • दव्तीयक अर्थव्यवस्थाओं का विकास जिसका अर्थ है railway network एवं road ways का विकास।

  • व्युत्पन्न sector का विकास जो तृतीयक अर्थव्यवस्थायें है जैसे-सेवा क्षेत्र का विकास, सामाजिक एवं आर्थिक अवसंरचना का निर्माण।

  • चतुर्थ चरण:-परिपक्वता की ओर:- इस अवस्था में प्रजातांत्रिक मूल्य, राजनैतिक संप्रभुता वैज्ञानिक प्रगति, प्रौद्योगिकी का प्रयोग स्थापित हो जाता है तथा वृहद उद्योगों के अग्रगामी-पश्चगामी उद्योगों का विकास, समूहन प्रभाव जीडीपी का 10-15 प्रतिशत पुर्ननिवेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ोत्तरी, अर्थव्यवस्था का व्यापक विकास, बहु आयामी विकास।

    • L-liberalization

    • P-privatisation

  • पंचम चरण:-mass consumption (सामूहिक उपभोग) अर्थव्यवस्थायें विशाल surplus का निर्माण करती है तथा समाज व्यक्तिपरक, उपभोग परक एवं मनोरंजन तथा विश्व के राजनीति में एवं अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की प्रवृत्तियाँ अपनी संप्रभुता का विस्तार विश्व में आर्थिक प्रभाव से फैलाने की प्रवृत्ति अंतरराष्ट्रीय trade में आधिपत्य जैसे दृश्य उभरते है।

  • समालोचना:-ऐसा प्रतीत होता है कि यह मॉडल वायु यात्रा नियमों पर आधारित है जैसे उत्प्रस्थान आदि जो निश्चित रूप से प्रत्येक अर्थव्यवस्था में लागू नहीं होता वहां के जनसंख्या एवं सांस्कृतिक तंत्र के दव्ारा प्रभावित होता है।

  • इन्होंनें पूँजी पुर्ननिवेश जीडीपी का 10-15 प्रतिशत माना जिसका कोई आधार नहीं है। यह मॉडल नियतिवादी एवं पूर्व घोषणा से युक्त है जो उचित नहीं है।

  • यह मॉडल यूरोप के आर्थिक सामाजिक परिपेक्ष्य में बना है अत: Afro-asia के देशों में लागू नहीं होता। इस मॉडल की अवस्थायें अनुक्रमित रूप से प्राप्त हो यह कई जैसे- में अनुचित जान परता है। ऑस्ट्रेलिया, New Zealand में Stage 1 के बाद प्राप्त हुआ क्योंकि ये श्वेत लोगों के प्रवसन से बने देश है जो आर्थिक वृद्धि को साथ लाये है।

  • कुछ देश जहाँ उपभोक्तावाद Stage v का है परन्तु धार्मिक राजनैतिक तंत्र Stage 1 का है। जैसे- पश्चिम एशिया के देश।

  • कुछ देश जैसे-भारत जनसंख्या वृद्धि से ग्रसित है जिसमें take off का Stage प्राप्त नहीं होता। क्योंकि आर्थिक प्रगति के लाभ जनसंख्या में ही विलीन हो जाते है।

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