ब्राजील का भूगोल (Brazilian Geography) Part 5 for CAPF

Get top class preparation for UGC right from your home: Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

Download PDF of This Page (Size: 150K)

वन संसाधन-

ब्राजील के जलवायु वनस्पति में मरुस्थल नहीं है। यहाँ वृहद क्षेत्र में वन मिलते है। अभी यहाँ पर 42 प्रतिशत भूमि पर सघन वन है। 1997 में 37 प्रतिशत भूमि मृदा वनीयकरण की समस्या से ग्रसित है, मात्र 6 प्रतिशत भूमि पर कृषि कार्य हुआ था। ब्राजील के कुल लकड़ी निर्यात का 70 प्रतिशत भाग पराना पाइन लकड़ी का ही होता है। दक्षिणी अमेरिका में ब्राजील ही व्यापारिक स्तर पर प्राकृतिक रबर का उत्पादन करता है। आमेजन बेसिन में रबर प्राप्ति हेतु तीन वृक्ष महत्वपूर्ण है- बलाटा, कैस्टीलोआ और हीनिया। केस्टीलोआ वृक्ष से प्राप्त होने वाले रबर के लेटेक्स को काउचो कहते हैं। कुल वनों का क्षेत्रफल रुसी गणराज्य के बाद विश्व में सर्वाधिक।

शक्ति संसाधन-

ब्राजील में शक्ति संसाधनों की अत्यधिक न्यूनता है। यहाँ कोयले का सर्वाधिक सुरक्षित भंडार माटोग्रासों राज्य में हैं। बाहिया के तटवर्ती क्षेत्र, मदीरा नदी के तट तथा पराना बेसिल में पेट्रोलियम का पता चला है।

पशुपालन -

पशुओं की आकार की दृष्टि से यह दुनिया का भारत के बाद दूसरा बड़ा देश है। यह विकास के आंरभिक दौर में है। दूध उत्पादन में इसका साँतवाँ स्थान है। poultry (मुर्गी पालन) उत्पाद में यह विश्व में तीसरे स्थान पर हैं। यह विश्व का चौथा बड़ा मांस निर्यातक देश है। पशुपालन व्यवसाय का विकास मुख्यत: प्रेयरी प्रदेश और सवाना प्रदेश में हुआ है। प्रेयरी प्रदेश में मुख्यत: दुधारु जानवरों का विकास हुआ है तथा कुछ भेड़ पालन भी होता है लेकिन सवाना क्षेत्र में मुख्यत: मांस प्रदान करने वाले पशुओं का पालन होता है।

जल विद्युत

यह देश रुस व संयुक्त राज्य को छोड़ संभावित जल-विद्युत क्षमता में सबसे धनी है। वर्तमान में कुल विद्युत उत्पादन का 60 प्रतिशत जल विद्युत से प्राप्त होता है। यहाँ पर विश्वविख्यात बड़े-बड़े बाँध इस हेतु बनाए है जो महत्वपूर्ण हैं-

  • रियोग्राण्डो नदी पर फरनाल एवं मिकसोटो बाँध

  • सावो फ्रांसिस्को नदी पर ’पालो’ एफौसो’ प्रपात एवं विद्युत गृह

  • कुवाताओ जल विद्युत गृह

  • इटाइसु में श्रृंखलाबद्ध अनेक जलविद्युत गृह

  • झिंगू लदी पर विशाल बाँध एवं श्रृंखलाबद्ध जलविद्युत गृह

Developed by: