दक्षिण अफ्रीका का भूगोल (Geography of South Africa) Part 2 for CAPF Exam

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धरातल-

दक्षिणी अफ्रीका गणराज्य प्राचीन चटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टानों का बना पठारी भाग है। इसका पूर्वी भाग अपेक्षतया पश्चिमी भाग से अधिक जटिल रचना वाला, ऊँचा व कगारी ढाल वाला है। इसी कारण पश्चिमी भाग में तट पूर्वी भाग की अपेक्षा अधिक चौड़ा है। इसे निम्न तीन उपविभागों में बाँटते हैं-

  • मुख्य पठारी भाग- यह पठारी भाग अधिकांश गणराज्य को घेरे है। इसका सिर्फ पूरब एवं दक्षिणी पूर्वी भाग ऊँचा एवं पर्वतीय लक्षणों वाला है, जिसे ड्रेकेन्सबर्ग पर्वत कहते है। इसकी समुद्र तल से औसत ऊँचाई 1200 मीटर है। इस पठार का विस्तार नेटाल, लेसोथो व स्वाजीलैंड को छोड़कर संपूर्ण दक्षिणी अफ्रीका तथा बसूतोलैंड में है। इसका सर्वोच्च भाग दक्षिण की ओर 1800 मीटर ऊँचा है, यहाँ पर कांसीबर्ग एवं कोम्सबर्ग के ऊँचे पठारी भाग है। इस पठार के उ. पू. में लिम्पोपो नदी बहती है। केप प्रांत में यह सीढ़ीनुमा पठार की भांति है जहाँ इसे ‘कारू का पठार’ भी कहते है। यह लिटिल कारु एवं ग्रेट कारु दो उपभागों में विभाजित है। यह ऐलेघनी (यू. एस. ए.) पठारों की तरह है। यहाँ बोल्डर क्ले के भी प्रमाण है। इसी प्रदेश में प्रसिद्ध घास के मैदान (वेल्ड) स्थित है। दक्षिण -पूर्वी पर्वतीय भाग से आंतरिक प्रदेश को वेल्ड का पठार कहते है। यह अत्यधिक अपरदन एवं अपक्षय के प्रभाव से पेनीप्लेन या प्लेटफार्म की भाँति है। इसका अधिक ऊँचा भाग हाईवेल्ड कहलाता है।
  • ड्रेकेन्सबर्ग पर्वत- यह अफ्रीका महादव्ीप में एटलस के पश्चात दूसरी एवं दक्षिणी अफ्रीका की सबसे ऊँची पर्वतमाला कही जा सकती है। यह अवशिष्ट वलित पर्वत है तथा नेटाल तथा केप राज्य में तट के समानान्तर फैला है। यह कैलोडोनियन भूसंचलन से बना है। इसमें पैलियोजोड़क चटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टानाेें की प्रधानता है। यहाँ की सर्वोच्च चोटी यावाना लोयान्सा है जो 3484 मीटर ऊँची है। यह चोटी पर्वतीय भाग के दक्षिण पश्चिम में स्थित है। इसके उत्तरी-पूर्वी भाग की सर्वोच्च चोटी माउण्ट (पर्वत) सोर्सेज (माध्यम) है।
  • तटीय मैदान- यह तुलनात्मक दृष्टि से संकरा है। इसकी औसत ऊँचाई 200 मीटर से कम है। ये आर्कियन चटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टानों के सतह पर जलोढ़ निक्षेपित मैदान हैं। संकरा मैदान पूर्व और पश्चिम दोनों तरफ है। यहाँ मैदान की चौड़ाई 50 कि. मी. से कम है। पूर्वी मैदान के संकरे होने का प्रमुख कारण तटीय पर्वत श्रृंखला और भ्रंश प्रक्रिया से तट रेखा का निर्माण है। पश्चिमी तटीय मैदान के संकरे होने का प्रमुख कारण भ्रंश प्रक्रिया से तीव्र ढाल के तट का निर्माण है।

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