कांग्रेस की नीतियांँ (Congress Policies) Part 6 for CAPF Exam

Get top class preparation for CTET-Hindi/Paper-1 right from your home: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of CTET-Hindi/Paper-1.

कांग्रेस की धार्मिक नीति

कांग्रेस आरंभ से ही एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी थी। उसमें सभी धर्म एवं संप्रदाय के लोग शामिल थे-क्या हिन्दू, क्या मुसलमान, क्या सिक्ख, क्या ईसाई एवं क्या पारसी। कांग्रेस के तीसरे अधिवेशन की अध्यक्षता एक मुस्लिम नेता बदरूद्दीन तैयबजी ने की थी। ए. ओ. हयूम इसके पहले सचिव एवं जार्ज यूल पहले ईसाई अध्यक्ष थे। कांग्रेस के नेता इसे एक राष्ट्रीय पार्टी बनाने के उद्देश्य से सभी धर्म के लोगों को साथ लेकर चलना चाहते थे। कांग्रेस की नीति से सरकार का चिंतित होना स्वाभाविक था। अत: राष्ट्रीय आंदोलन को कमजोर करने के लिए सरकार ने एक चाल चली। यह चाल थी-सांप्रदायिक आधार पर एक दल मुस्लिम लीग का गठन। कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के गठन का विरोध किया। 1909 के अधिनियम में सरकार ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की व्यवस्था की। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय जनमत को विभाजित कर राष्ट्रीय आंदोलन को कमजोर करना था। कांग्रेस के नेता सरकार की इस नीति को भलीभांति समझते थे। फलत: उन्होंने पृथक निर्वाचन मंडल का विरोध किया।

मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार में सरकार ने एक बार फिर धर्म के आधार पर राष्ट्रीय जनमत को विभाजित करने का प्रयास किया। इस बार सिक्खों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था की गई। कांग्रेस ने मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार का विरोध किया और कहा कि सिक्खों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था भारतीयों को बांटने का प्रयास है।

धार्मिक एकजुटता को बनाए रखने के लिए गांधी जी ने खिलाफत आंदोलन में कांग्रेस एवं गैर-मुस्लिम जनता को भी भाग लेने को कहा। 1928 में जब जिन्ना ने 14 सूत्री मांग प्रस्तुत की तो कांग्रेस ने इसे नकार दिया। कांग्रेस की धर्म निरपेक्ष छवि का ही परिणाम था कि 1937 के चुनाव में कांग्रेस को मुस्लिम बहुल सींटों पर भी विजय मिली। धार्मिक सुधार पर पृथक मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान की मांग को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करने वाले क्रिप्स एवं मंत्रिमंडल मिशन को भी कांग्रेस ने नकार दिया।

पर कांग्रेस के धर्म निरपेक्ष छवि को तब बड़ा धक्का लगा, जब 1946 के चुनाव में कांग्रेस मुस्लिम बहुल प्रांतों में पराजित हो गई। मुस्लिम लीग ने अब अधिक हिंसक और आक्रमक रणनीति अपनाई, जिसके कारण 1947 में देश का विभाजन करना पड़ा। पर कांग्रेस के नेताओं ने इस विभाजन को मन से स्वीकार नहीं किया।

Developed by: