Important of Modern Indian History (Adunik Bharat) for Hindi Notes Exam Part 1

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CHAPTER: Home Rule League

‘होम रूल लीग’ आंदोलन

  • 16 जून, 1914 तिलक 6 वर्ष की सजा काट जेल (मंडालय जेल (वर्मा) से छूटे।
  • उन्हें विश्वास हो गया था, कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का र्प्याय बन चुकी है, इसलिए तिलक ने कांग्रेस शामिल होना चाहा।
  • इसलिए तिलक ने अंग्रेजी हुकुमत में अपनी निष्ठा दोहराई और कहा-
  • तिलक- ″ मैं साफ-साफ कहता हूँ कि हम लोग हिन्दुस्तान में प्रशासन- व्यवस्था का सुधार चाहते है, जैसा कि आयरलैंड में यहाँ के आंदोलनकारी मांग कर रहे है। अंग्रेजी हुकुमत को उखाड़ फेंकने का हमारा कोई इरादा नहीं।
  • नरमपंथी कांग्रेस की अकर्मण्यता से क्षुब्ध थे, उन्हें तिलक की गरमपंथियों को कांग्रेस में शामिल करने की अपील आई।
  • एनी बेंसेट भी कांग्रेस पर गरपंथियों को शामिल करने कि लिए दबाव दिया।
  • एनी बेसेंट-राजनीतिक जीवन की शुरूआत इंग्लैंड में हुआ।
  • जहाँ उन्होंने स्वतंत्र चिंतन (फ्री थॉट) , उग्र-सुधारवाद (सैडिकलिज्म) , फेबियनवाद और ब्रह्य विद्या (थियोसॉफी) का प्रचार किया।
  • 1898 में भारत आकर थियो- सॉफिकल सोसाटी के लिए काम करने हेतु अडियार में दफ्तर खोल 1907 से ब्रह्यविद्या का प्रचार करने लगी।
  • 1914 में आयरलैंड की ‘होम रूल लीग’ की तरह भारत में आंदोलन के लिए कोग्रेस में शामिल हुई।
  • 1914 के कोंग्रेस अधिवेशन में फिरोजशाह मेहता ने गोखले को गरमपंथियों को ना शामिल करने को मना लिया।
  • तिलक व बेसेंट ने खुद आंदोलन चलाने का फैसला किया।
  • 1915 में बेसेंट ने “न्यू इंडिया” व “कामनवील” अखबार दव्ारा आंदोलन छेड़ा। मांग थी स्वशासन का अधिकार।
  • तिलक ने 1915 में पूना में बैठक में कोंग्रेस की प्रतिविधियों और उद्देश्यों को ग्रामीण जनता तक पहुंचाने के लिए संसथान का गठन किया।
  • फिरोजशाहबाद व गोखले की मृत्यु के बाद- दिसंबर 1915 कोंग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में गरमपंथियों को कांग्रेस में शामिल करने का फैसला लिया गया।
  • बेसेंट का “होम रूल लीग” के गठन पर अंग्रेज व मुस्लिम लीग की मंजूरी नही मिली।
  • स्थानीय स्तर पर कोंग्रेस समितियों को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव मंजूर हुआ।
  • बेसेंट ने शर्त रखी सितंबर, 1916 तक कोंग्रेस ने इन पर अमल नहीं किया तो वो खुद अपना संगठन (लीग) बना लेंगी।
  • वादा नहीं किया था-तिलक ने अप्रेल 1916 में बेलगाँव में “होम रूल लीग” के गठन की घोषणा की।
  • तिलक की लीग-कर्नाटक, महाराष्ट्र (बंबई छोड़कर) , मध्य प्रांत, बेरार
  • एनी बेसेंट-देश के बाकी हिस्से-कार्यक्षेत्र का बंटवारा विलय नहीं किया गया।
  • तिलक- “भारत उस बेटे की तरह है, जो अब जवान हो चुका है। समय का तकाजा है कि बाप या पालक इस बेटे को उसका वाजिव हक दे दें। भारतीय जनता को अब अपना हक लेना ही होगा। उन्हें इसका पूरा अधिकार है।”
  • तिलक ने भाषाई राज्यों की माँग को स्वराज से जोड़ा।
  • गोखले के निधन का शौक प्रस्ताव-बंबई के प्रांतीय सम्मेलन (1915) में तिलक ने बी. बी. कलुर को कन्नड़ में बोलने को कहा।
  • होमरूल की मांग पूर्णत: धर्मनिरपेक्षता पर आधारित थी।
  • तिलक- “यदि भगवान भी छुआछुत को बर्दाश्त करे, तो मैं भगवान को नहीं मानूँगा।”
  • तिलक अंग्रेजों का विरोध विधर्मी होने के कारण नहीं बल्कि भारतीय जनता के हित में काम नहीं करने के कारण करते थे।
  • तिलक ने मराठी में 6 एवं अंग्रेजीं में 2 परचे निकाले।
  • तिलक के लीग की 6 शाखाएँ-मध्य महाराष्ट्र, बंबई नगर, कर्नाटक व मध्य प्रांत में एक-एक तथा बेरार में दो।
  • 1 लाख की थैली भेंट दी गई (तिलक का 60 वां जन्मदिन) -23 जुलाई 1916, तिलक को कारण (प्रतिबंध क्यों न लगाया जाए) बताओं नोटिस दिया गया।
  • तिलक- “अब से होम रूल आंदोलन जंगल में आग की तरह फैलेगा। सरकारी दमन विद्रोह की आग को और भड़काएगा।”
  • मुहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में तिलक का मुकदमा वकीलो की टीम ने बड़ी मजिस्ट्रेट की अदालत में मुकदमा हारने के बाद नवंबर में एचसी ने निर्दोष करार दिया।
  • गांधी जी का अखबार-यंग इंडिया- “यह अभिव्यक्ति की आजादी की बहुत बड़ी जीत होम रूल आंदोलन के लिए यह एक बहुत बड़ी सफलता है।”
  • अप्रैल 1917 तक तिलक ने 14 हजार सदस्य बनाए।
  • एनी बेसेंट की लीग ने सितंबर 1916 से काम शुरू किया।
  • कोई भी 3 व्यक्ति मिलकर शाखा खोल सकता था।
  • एनी बेसेंट के लीग की 200 शाखाएँ थी।
  • सारा काम बेसेंट, अरूंडेल, सी. पी. रामास्वामी अय्यर व बी. पी. वाडिया देखते थे।
  • ‘न्यू इंडिया’ में अरूंडेल के लेख से सदस्यों को निर्देश दिए जाते थे।
  • मार्च, 1917 तक 7000 सदस्य बने।
  • जवाहरलाल नेहरू (इलाहाबाद) , बी. चक्रवर्ती और जे. बनर्जी (कलकता) भी शामिल हो गए।
  • बेसेंट की लीग की स्थापना तक-एकमात्र लक्ष्य था होम रूल की मांग पर बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ना।
  • सितंबर 1916 तक ‘प्रचार फंड’ (सरकार का कच्चा चिट्‌ठा) के 3 लाख परचे बांटे गए।
  • लीग की तमाम शाखाओं ने विरोध किया-नवंबर, 1916 में एनी बेसेंट पर बेरार व मध्य प्रांत जाने पर प्रतिबंध लगा।
  • 1917 में तिलक पर पंजाब और दिल्ली जाने पर प्रतिबंध लगा।
  • नरमपंथी कांग्रेसी भी लीग में शामिल हएु।
  • गोखले की ‘सर्वेंट-ऑफ इंडिया सोसाइटी’ (परचे बांट व भाषण दव्ारा समर्थन किया) के सदस्यों को सदस्य बनने की इजाजत नहीं थी।
  • नरमपंथियों ने लीग का समर्थन किया क्योंकि लीग उन्हीं का काम कर रही थी।
  • 1916 लखनऊ अधिवेशन में तिलक के समर्थकों ने ट्रेन आरक्षित कर ‘कांग्रेस स्पेशल’ या ‘होम रूल स्पेशल’ कहा-परंपरा बना दि गई।
  • लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में तिलक को कांग्रेस में शामिल किया गया।
  • अध्यक्ष-अंसिकाचरण मजूमदार-10 वर्षों के दुखद अलगाव तथा गलत-फ़हमी के कारण बेवजह के विवादो में भटकने के बाद भारतीय राष्ट्रीय दल के दोनों खेमों ने अब यह महसूस किया है कि अलगाव उनकी पराजय है और एकता उनकी जीत। अब भाई-भाई फिर मिल गए है।
  • लखनऊ पैक्ट-इस अधिवेश्न में कांगेस-लीग समझौता हुआ जो ‘लखनऊ पैक्ट’ कहलाया।
  • मदनमोहन मालवीय खिलाफ थे-लीग को बहुत तवज्जो देता है।
  • तिलक को रूढ़िवादी हिन्दू माना जाता था, पर उन्हें ‘लखनऊ पैक्ट’ से एतराज न था।
  • अधिवेशन में संवैधानिक सुधारों की मांग उठाई पर वो मांग शामिल नहीं (विवाद नहीं किया ताकि एकता बनी रहे) थे जो लीग चाहती थी।
  • तिलक ने एक कार्यकारिणी (1920 में गांधी जी ने माना (4 साल बाद) के गठन का प्रस्ताव रखा, जो मंजूर नहीं हुआ।
  • अधिवेशन के तुरंत बाद उसी पंडाल में दो लीग की बैठक हुई।
  • दोनों नेताओं ने उत्तर, मध्य व पूर्वी भारत का दौरा किया।
  • मद्रास सरकार ने जून 1917 में एनी बेसेंट, जार्ज अरूंडले तथा बी. पी. वाडिया को गिरफ्तार कर लिया।
  • एस. सुब्रह्यण्यम अय्यर ने ‘नाइटहुट’ की उपाधि अस्वीकार की दी।
  • मालवीय, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और जिन्ना लीग में शामिल हो गए।
  • तिलक ने कहा इन लोगों को रिहा न करने पर ‘असहयोग आंदोलन’ चलाया जाएगा।
  • मांटाग्यू- ″ शिव ने अपनी पत्नी को 52 टुकड़ों में काटा, भारत सरकार ने जब एनी बेसेंट को गिरफ्तार किया, तो उसके साथ ठीक ऐसा ही हुआ, सरकार ने नीतियाँ बदलकर समझौतावादी रूख अपनाया।
  • मांटाग्यू- (गृह सचिव) “ब्रिटिश शासन की नीति है कि भारत के प्रशासन में भारतीय जनता को भागीदार बनाया जाए और स्वशासन के लिए विभिन्न संस्थानों का क्रमिक विकास किया जाए जिससे भारत में ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़ी कोई उत्तरदायी सरकार स्थापित की जा सके।”
  • यह बात भी घोषणा में थी कि स्वशासन की स्थापना उचित समय आने पर होगा।
  • 1917 में बेसेंट को रिहा किया गया।
  • तिलक के प्रस्ताव पर-दिसंबर 1917 में कांग्रेस के अधिवेशन में बेसेंट को अध्यक्ष चुना गया।
  • 1918 में आंदोलन कमजोर पड़ गया।
  • 1918 में सुधार-योजनाओं (बेसेंट दुविधा में थी) की घोषणा से राष्ट्रवादी खेमें में दरार पड़ीं
  • साल के अंत में तिलक इंगलैंड चले गए।
  • तिलक ने ‘इंडियन अनरेस्ट’ के लेखक ‘चिराल’ पर मानहानि का मुकदमा किया था उसके लिए महीनों इंग्लैंड में रहे।

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