भाग-11 नागरिकता-नीति निदेशक तत्वों की कुछ टिप्पणी (Part-11 Citizenship: Comment on the policy indicator elements) for CAPF

Get unlimited access to the best preparation resource for competitive exams : get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of your exam.

Download PDF of This Page (Size: 163K)

नीति निदेशक तत्वों की कुछ टिप्पणी-

  • ग्रैन विल आस्टिन ने इसे ’सामाजिक क्रांति का दस्तावेज’ कहा है।

  • वी.एन राव ने इसे नैतिक उपदेश मात्र कहा है।

  • सर. आईवर जेनिग्स ने इसे पुन्य आत्माओ का महत्वाकांक्षा मात्र कहा है।

  • के.पी. शाह के अनुसार, ”यह एक ऐसा चेक (किश्त/बिल) है जिसका भुगतान बैंको (अधिकोषों) की इच्छा पर निर्भर करता है।”

  • अंबेडकर के अनुसार ”इसका उद्देश्य आर्थिक लोकतंत्र को स्थापित करना है जो राजनीतिक लोकतंत्र से भिन्न है।”

  • के.एम. पणिक्कर के अनुसार इसका ध्येय आर्थिक क्षेत्र में समाजवाद लाना है।

भाग 4 (क) मूल कर्तव्य (अनु. 51(ए) Part 4 (K) Main Responsibility (Article 51 (A))

पूर्व सोवियत संघ से प्रभावित होकर 1975 में स्वर्ण सिंह की अध्यक्षता में (स्वर्ण सिंह समिति) एक समिति का गठन किया गया जिसके सिफारिश के आधार पर संविधान में 42वां संविधान संशोधन अधिनियम 1976 के दव्ारा भाग 4 (क) तथा अनुच्छेद 51 (क) को जोड़ा गया जिसमें 10 मूल कर्तव्य शामिल किये गये जिसमें 86वां स.स.अ. 2002 के दव्ारा एक और मूल कर्तव्य को जोड़ा गया जिससे मूल कर्तव्यों की संख्या 11 हो गयी है। प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि-

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ संविधान का पालन करें और उनके आदर्शों, संस्थाओ, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें।

  • स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे एवं उनका पालन करें।

  • भारत की प्रभुता एकता अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्य रखे।

  • देश की रक्षा करें और आह्वाहन किये जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।

  • भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेद-भाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध है।

  • हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका परिक्षण करें।

  • प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अंतर्गत वन, झील नदी और वन्य जीव है, रक्षा करे और उनका संवर्धन करें तथा प्राणिमात्र के प्रति दयावान रहें।

  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।

  • सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहें।

  • व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करें जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊंचाइयों को छू लें।

  • माता-पिता तथा संरक्षक का यह कर्तव्य हैं कि वह 6 से 14 वर्ष तक के बालक को शिक्षा के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित करें।

Developed by: