Major amendments in legislation, Promotion act 151 article 19, article 31 A or 31 B

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ंविधान में प्रमुख संशोधन

  • 1 संशोधन अधिनियम, 1951-अनुच्छेद 19 में दिए गए वाक्‌-स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति स्वतंत्रता आदि पर प्रतिबंध लगाने के लिए, अधिकारों की व्यवस्था दो नए अनुच्छेद 31 (क) और 31 (ख) एवं 9वीं अनुसूची को शामिल कर किया गया, ताकि भूमि सुधार कानूनों को न्यायालय में चुनौती न दी जा सके।

  • 2 संशोधन अधिनियम, 1952- लोकसभा के लिए प्रतिनिधित्व के अनुपात को 1951 की जनगणना के आधार पर समायोजित किया गया।

  • 7 वाँ संशोधन अधिनियम, 1956- इसके दव्ारा राज्यों का अ, ब, स, और द वर्गों में विभाजन समाप्त कर उन्हें मोटे तौर पर राज्यों और केन्द्रशासित क्षेत्रों में बांटा गया। लोकसभा का समायोजन।

  • 11वाँ संशोधन अधिनियम, 1961- इसका उद्देश्य था कि उपयुक्त मंडल में किसी खाली पद के आधार पर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन को चुनौती न दी जा सके।

  • 13 वाँ संशोधन अधिनियम, 1962- नागालैंड राज्य के संबंध में विशेष उपबंध करने के लिए एक नया अनुच्छेद 371 (क) जोड़ा गया।

  • 14 वाँ संशोधन अधिनियम, 1962- पांडिचेरी केन्द्रशासित प्रदेश के रूप में शामिल किया गया। हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, गोवा, दमन और दीव तथा पांडिचेरी के केन्द्रशासित प्रदेशों के लिए संसदीय विधि दव्ारा विधानमंडलों का गठन किया जा सके।

  • 15 वाँ संशोधन अधिनियम, 1963-न्यायाधीशों की सेवानृिवृत्ति की आयु बढ़ाने आदि से संबंधित।

  • 16 वाँ संशोधन अधिनियम, 1963- भारत की एकता और अखंडता के हित में मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित।

  • 17 वाँ संशोधन अधिनियम, 1964-इसके अनुसार निजी खेती के अधीन भूमि का अधिग्रहण तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कि प्रतिपूर्ति के रूप में इसका बाजार मूल्य न दिया जाय।

  • 24 वाँ संशोधन अधिनियम, 1971- इसमें कहा गया कि संसद को मूल अधिकारों सहित संविधान के किसी भी भाग में संशोधन करने की शक्ति है।

  • 26 वाँ संशोधन अधिनियम, 1971-भारतीय रियासतों के शासकों के प्रिवीयर्स और विशेषाधिकारों को समाप्त किया गया।

  • 42 वाँ संशोधन अधिनियम, 1976- यह संशोधन अब तक पारित सभी संशोधनों में बड़ा है, इसलिए इसे ’लघु संविधान’ भी कहा जाता है।

    • प्रस्तावना में समाजवादी, अखंडता एवं धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़े गए।

    • भाग (4) तथा अनुच्छेद 51 (क) को जोड़कर मूल कर्तव्यों को शामिल किया गया।

    • चार नए नीति निदेशक तत्व शामिल किये गये।

    • राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य किया गया।

  • 44 वाँ संशोधन अधिनियम, 1978

    • संपत्ति के मूल अधिकार को समाप्त कर विधिक अधिकार बना दिया गया।

    • व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार को आपातकाल में भी स्थगित या सीमित नहीं किया जाएगा।

    • अनुच्छेद 352 में संशोधन कर सशस्त्र विद्रोह शब्द जोड़ा गया।

    • निवारक नजरबंदी कानून में सुधार किया गया।

    • संसद और विधान मंडलों दव्ारा किये गए संशोधनों को न्यायालयों में चुनौती दी जा सकेगी।

  • 56 वाँ संशोधन अधिनियम, 1987- गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा तथा ’दमन और दीव’ को नया केन्द्रशासित प्रदेश बनाया गया।

  • 58 वाँ संशोधन अधिनियम, 1987- संविधान के अधिकृत हिन्दी पाठ को मान्यता प्रदान की गयी।

  • 61 वाँ संशोधन अधिनियम, 1981- मताधिकार की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दी गयी (अनुच्छेद 326 में संशोधन)।

  • 69 वाँ संशोधन अधिनियम, 1991- दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बनाया गया और इसके लिए विधानसभा तथा एक मंत्रिपरिषद् की व्यवस्था की गई।

  • 73 वाँ संशोधन अधिनियम, 1993- पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा किया गया और 11वीं अनुसूची को शामिल किया गया। संविधान में एक नया भाग 9 जोड़ा गया।

  • 74 वाँ संशोधन अधिनियम, 1993- संविधान में एक नया भाग 9 (क) तथा 12वीं अनुसूची को शामिल किया गया। शहरी क्षेत्र की स्थानीय स्वशासन संस्थाओं (नगरपालिकाओं आदि) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।

  • 84 वाँ संशोधन अधिनियम, 2001- 1991 की जनगणना के आधार पर प्रत्येक राज्य के लिए आवंटित लोकसभा तथा विधानसभा के सीटों की संख्या में परिवर्तन किये बगैर परिसीमन किया जा सके। अनुसूचित जाति/जनजाति की सीटों की संख्या फिर से निर्धारित की जा सकती है।

  • 86 वाँ संशोधन अधिनियम, 2002- एक नया अनुच्छेद 21 (ए) जोड़कर 6-14 वर्ष तक के सभी बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया। अनुच्छेद 45 में 6 साल से कम उम्र के बच्चों की देखभाल और शिक्षा से संबंधित राज्य का निर्देश जोड़े गये। 51 (क) में संशोधन कर 11वाँ मौलिक कर्तव्य 6-14 साल के बच्चों में शिक्षा उपलब्ध करवाने का माता-पिता तथा अभिभावकों का कर्तव्य जोड़ा गया।

  • 87 वाँ संशोधन अधिनियम, 2003- लोकसभा तथा विधानसभाओं के सीटों की संख्या परिवर्तित किये बगैर 2001 की जनगणना के आधार पर प्राप्त जनसंख्या को समायोजित करना।

  • 88 वाँ संशोधन अधिनियम, 2003- संविधान के अनुच्छेद 268 (क) जोड़कर सेवाकर को लगाने तथा वसूलने के बारे में केन्द्र तथा राज्य सरकारों की भूमिकाओं को परिभाषित किया गया।

  • 89 वाँ संशोधन अधिनियम, 2003- अनुच्छेद 338 (क) जोड़कर अनुसूचित जनजातियों के लिए एक राष्ट्रीय आयोग अनुसूचित जनजाति गठित करने का प्रावधान।

  • 91 वाँ संशोधन अधिनियम, 2003- दल-बदल कानून के 1/3 सदस्यों का अलग होने वाला प्रावधान समाप्त किया गया। दल-बदल करने वाले विधायक या संसद में तब तक अयोग्य माने जाएंगे, जब तक वे दोबारा चुनाव जीतकर न आ जायें।

  • मंत्रिपरिषद का आकार (प्रधानमंत्री/मुख्यमत्री सहित) निचले सदन के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। राज्यों में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या 12 से कम नहीं होगी।

  • 92 वाँ संशोधन अधिनियम, 2003- 8वीं अनुसूची में बोडो, डोगरी, मैथली तथा संथाली भाषाओं को शामिल किया गया। अब 8वीं अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ हो गयीं।

  • 93 वाँ संशोधन अधिनियम, 2006-शिक्षा संस्थानों आरक्षण (15) (4)/ अनुच्छेद 30 (1) के तहत आने वाले अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को छोड़कर बाकी गैर सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में दाखिला देने के मामले में अनुच्छेद 15 के प्रावधानों का विस्तार किया गया। अनुच्छेद 15 में नयी धारा 15 (5) जोड़ी गयी

  • 94 वाँ संशोधन अधिनियम, 2006- इस अधिनियम दव्ारा बिहार राज्य में जनजाति कल्याण मंत्रालय को समाप्त कर दिया गया और झारखंड एवं छत्तीसगढ़ में इस मंत्रालय की गठन की मंजूरी दी गई।

  • 95 वाँ संशोधन अधिनियम, 2009- अनुच्छेद 334 के तहत लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा आंग्ल भारतीयों के लिए आरक्षण की अवधि 60 को 70 वर्ष किया गया।

  • 96 वाँ संशोधन अधिनियम, 2001-आठवीं अनुसूची में उड़िया के स्थान पर ओडिया शब्द जोड़ा गया।

  • 97 वाँ संशोधन अधिनियम, 2011- अनुच्छेद 19 में या संघ के बाद या कॉपरेटिव सोसाइटी शब्द जोड़ा गया। इस अनुच्छेद के अनुसार राज्य ऑपरेटिव सोसाइटी के स्वैच्छिक संगठन, स्वायत संचालन, लोकतांत्रिक नियंत्रण एवं पेशेवर संवर्द्धन हेतु यत्न करेगा।

  • 98 वाँ संशोधन अधिनियम, 2013- इस संशोधन के दव्ारा अनुच्छेद 37 (जे) को जोड़कर कर्नाटक के राज्यपाल की शक्तियों में विस्तार कर कर्नाटक आंध्र प्रदेश के विकास का उत्तरदायित्व सौंपा गया है।

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