चेत्तीनाड सूती साड़ीयां (Chettinad Cotton Sarees – Culture)

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चेराव (मिजोरम का बांस नृत्य)_चेत्तीनाड सूती साड़ीयां (Cheraw(Biz Dance of Mizoram)_ Chettinad Cotton Sarees – Culture)

यह माना जाता है कि इस नृत्य का अस्तित्व पहली शताब्दी ईस्वी से ही है, जब मिजो लों वर्तमान मिजोरम में अपने प्रवास के पूर्व चीन के यूनान प्रांत में निवास करते थे।

• दक्षिण पूर्व ऐशिया में निवास करने वाली कुछ जनजातियों में भी यह नृत्य एकाधिक रूपों में अलग-अलग नामों के साथ प्रचलित है।

• एक दूसरे की ओर मुख करके बैठे पुरुष क्षैतिज और तिरछे रूप् से लंबे बांस के डंडो हाथ से पकड़ते है। आकर्षक धुन पर ये बांस के उंडे लयबद्ध रूप् से समीप और दूर ले जाये जाते हैं।

• पुआनचेई काबरचेई वकिरिया तथा थिहना जैसी रंगीन मिजो वेशभूषांं में लड़कियां कर्णप्रिय धुन पर लयबद्ध रूप् में बांस के अंदर और बाहर नृत्य करती हैं।

• यह नृत्य अब लगभग सभी उत्सवों के दौरान किया जाता है। घंटा और ढोल इस नृत्य के प्रमुख वाद्ययंत्र है।

• तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के एक छोटे से शहर चेत्तीनाड से यह नाम इन साड़ियों को मिला है।

• चेत्तीनाड की पारंपरिक साड़ीयों को कानडंगी कहा जाता है जो सूत से बनी होती हैं।

• चेत्तीनाड साड़ियां को चटकीले रंगों जैसे मस्टर्ड रंग, ईंट जैसा लाल, नारंगी, बसन्ती और भूरे रंग के चेक (चारखाना) का प्रयोग करके तैयार किया जाता हैं।

• चेक (चारखाना) और टेंपल (देवालय) बॉर्डर (अंतेवासी) चेत्तीनाड साड़ियों में प्रयोग किए जाने वाले पारंपरिक पैटर्न (नमूना) हैं।