डोल्लू कुनिथा नृत्य (कर्नाटक) कोंडाणे गुफाओं में शैल चित्रों की खोज (Dollu Kunitha Dance Exploration of rock paintings in Kondane caves – Culture)

· डोल्लू कुनिथा वस्तुत: ढोल की धुन पर किया जाने वाला कर्नाटक का एक लोकप्रिय नृत्य है।

· इस नृत्य में प्रयुक्त गीत सामान्यत: धार्मिक, युद्ध और वीरता जैसे भावों पर आधारित होते हैं।

· इस नृत्य में रंगीन कपड़ों में सजे हुए बड़े ढोल का प्रयोग किया जाता है जिसे पुरुष गले में लटकाते हैं।

· इस नृत्य में मुख्य जोर पाँव एवं कदमों के सहज और त्वरित संचलन पर दिया जाता है।

· डोल्लू कुनिथा कर्नाटक के आदिवासियों के आनुष्ठानिक नृत्य का एक हिस्सा है।

कोंडाणे गुफाओं में शैल चित्रों की खोज (Exploration of rock paintings in Kondane caves - Culture)

· हाल ही में महाराष्ट्र के पश्चिमी क्षेत्र के रायगढ़ जिले की कोंडाणे गुफाओं में 40 शैल चित्रों की खोज की गई है।

· प्राकृतिक एवं मानव निर्मित दोनों तरह की गुफाओं में ये चित्र पाए गए हैं।

· यहाँ से दो मानव निर्मित गुफाओं में एक अधूरा बौद्ध चैत्य और एक विहार पाए गए हैं। विहार का अर्थ मठ (रहने का स्थान) होता है।

· ऐसा बौद्ध प्रार्थना सभागार जिसके एक छोर पर स्तूप हो, चैत्य कहलाता है।

· इन बौद्ध गुफाओं में चट्‌टानों को काटकर की गई वास्तुकला बौद्ध धर्म के हीनयान प्रावस्था से संबंधित है।

· यह एक महत्वपूर्ण खोज है क्योंकि इससे पहले हमें महाराष्ट्र के इस क्षेत्र में शैल-उत्कीर्ण चित्रकला के अस्तित्व के बारे में पता नहीं था।

· इन गुफाओं में एक विचित्र पौराणिक आकृति का चित्र पाया गया है, जो संभवत: एक दानव का है।

· अन्य चित्र रोजमर्रा की जिंदगी और आखेटों, जैसे कि, हिरण के शिकार को दर्शाते हैं।

इन चित्रों की शैली और अभिव्यक्ति यह प्रदर्शित करती है कि वे दूसरी शताब्दी ई. पू. व उसके उपरांत बनाए गए थे।