हुमायूँ का मकबरा (Humayun's Tomb – Culture)

सुर्ख़ियों में क्यों?

· विशेषज्ञों के एक दल ने औद्योगिक परिशुद्धता के साथ पारंपरिक शिल्प कौशल का इस्तेमाल करते हुए 2 वर्ष पहले एक तूफान में क्षतिग्रस्त हुए 16वीं सदी के हुमायूँ का मकबरे पर स्वर्ग स्तूपिका को फिर से स्थापित किया।

· 18 फुट के सजावटी भाग को अपने मूल वैभव में लाने के लिए 22-कैरेट सोने की एक परत चढ़ाई गयी।

· भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने आगा खान संस्कृति ट्रस्ट (एकेटीसी) की स्थापना की थी।

· पिछली बार इस स्तूपिका की सन 1912 में अंग्रेजों दव्ारा तोड़ कर मरम्मत की गयी थी। उन्होंने इसका दस्तावेजीकरण भी किया था।

मकबरे के बारे में

· यह मकबरा उसकी विधवा बेघा बेगम दव्ारा दिल्ली में बनवाया गया था।

· यह ईमारत लाल बलुआ पत्थर दव्ारा बनाई गयी थी जिसके किनारों पर संगमरमर का प्रयोग किया गया था।

· यह भव्य समाधि स्थल फारसी स्थापत्य कला और भारतीय परंपराआंे का संश्लिष्ट रूप है। यह सीरियन और पूर्ववर्ती इस्लामी आर्दश से प्रेरित है।

· इसने शाहदरा लाहौर में स्थित जहांगीर की समाधि एवं साथ ही आगरा के ताजमहल के लिए एक वास्तुशिल्प प्रेरणा के रूप में कार्य किया।

· यह मकबरा एक वर्गाकार बाग के केंद्र में अवस्थित है जो पक्की सड़कों (चार बाग) दव्ारा चार भागों में विभाजित है, जिसके केंद्र में उथली जल धारा बहती है।

· धुनषाकार मेहराबदार ताखा, गलियारें और उच्च दोहरे गुंबद के साथ ही कियोस्क (छतरियां) दूर से इसे एक पिरामिड का आकार देते हैं।