Science and Technology: Computer and Information Technology

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कम्प्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी (Computer and Information Technology)

सूचना प्रौद्योगिकी वह प्रौद्योगिकी है जो कि सूचना के व्यवस्थापन में सहायक होती है। इस प्रौद्योगिकी का उपयोग मुख्य रूप से सूचना की प्राप्ति, संग्रह, अर्जन और प्रसार में होता है। दूसरे शब्दों में, सूचना प्रौद्योगिकी आधुनिकीकरण या विकास का पर्याय है। रेडियो, कम्प्यूटर, सेल्युलर, उपग्रह संचार, प्रकाशीय तंतु, पेजिंग, लेजर, टेलीफोन इत्यादि ने सम्मिलित रूप से पूरे विश्व में सूचना-क्रांति का सूत्रपात किया है।

कम्प्यूटर (Computer)

स्वचालित रूप से विभिन्न तरह के आँकड़ों को संसाधित संचयित एवं पुर्नप्राप्त करने वाली इलेक्ट्रॉनिक संयंत्र संचालित युक्ति (Device) कम्प्यूटर कहलाती है। कम्प्यूटर एक ऐसा यंत्र है जो गणितीय तथा अगणितीय दोनों तरह की सूचनाओं का विश्लेषण या गणना करता है। चार्ल्स बेवेज को कम्प्यूटर का जनक माना जाता है। 1833 में उन्होंने एक मशीन का आविष्कार किया, जिसे एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine) नाम दिया। मार्क-1 (1937 में निर्मित) विश्व का पहला कम्प्यूटर था। भारत में कम्प्यूटर का विकास 1955 से किया जा रहा है। ‘सिद्धार्थ’ भारत का पहला कम्प्यूटर था। कम्प्यूटर का मुख्य कार्य आँकड़ों (डेटा) का संकलन संचयन, संसाधन तथा उनका निर्गमन-पुनर्निर्गमन करना है।

Parts of Computer

हार्डवेयर (Hardware)

कम्प्यूटर आगम युक्ति (Input Device) से प्रश्न लेता है, सी. पी. यू. (CPU- Central Processing Unit) में हल करता है और निर्गम युक्ति (Output Device) से परिणाम प्रस्तुत करता है।

फ्लॉपी डिस्क (F. D. Floppy Disk)

फ्लॉपी डिस्क डिजिटल सूचनाओं की एक ऐसी इकाई है, जिसका प्रयोग कम्प्यूटर को विभिन्न सूचनाएँ देने के लिए किया जाता है।

सी. डी. (C. D. -Compact Disk)

यह भी डिजिटल सूचनाओं का ही एक अंतिम रूप है। आमतौर पर कम्प्यूटर के लिए जिस सीडी का प्रयोग किया जाता है उसमें परिवर्तन करना संभव नहीं होता, जबकि फ्लॉपी डिस्क में परिवर्तन किया जा सकता है। इसकी क्षमता लगभग 700 मेगाबाइट होती है। इसमें 4000 पृष्ठों तक की सूचनाएँ अंकित की जा सकती हैं। यह एक मेटालिक डिस्क है जिसमें लेजर किरणों के दव्ारा आँकड़ों का संग्रहण किया जाता है।

डी. वी. डी (D. D. D. - Digital Versatile Disc)

यह सी. डी. का ही विकसित रूप है, जिसमें सूचनाओं का भंडारण दोनों तरफ तथा अति संकलित रूप में किया जाता है। इसकी क्षमता लगभग 10 सीडी के बराबर या 11800 फ्लॉपी डिस्क के बराबर आकी गयी है।

माउस (Mouse)

यह कम्प्यूटर की आगम युक्ति (Input Device) की एक व्यवस्था है जिसका प्रयोग निश्चित विकल्पों में से किसी एक के चयन के लिए किया जाता है। इसका विकास विगत 4 - 5 वर्षों में तेजी से हुआ है।

सी. पी. यू. (C. P. U. Central Processing Unit)

इसके निम्नलिखित महत्वपूर्ण भाग हैं-

  • माइक्रो प्रोसेसर (Micro Processer)
  • स्मृति (Memory)
  • चिप (Chip)

माइक्रो प्रोसेसर (Micro Processer) : यह कम्प्यूटर की ‘केन्द्रीय प्रसाधक इकाई’ (C. P. U. Central Processing Unit) का वह भाग है, जो मूल रूप से सभी विश्लेषणात्मक कार्यों के लिए प्रमुख भूमिका निभाता है। छोटे कम्प्यूटर में एक ही ‘माइक्रो प्रोसेसर’ का प्रयोग किया जाता है, किन्तु विकसित कम्प्यूटरों में कई माइक्रोप्रोसेसर एक साथ कार्य करते है। किसी भी माइक्रोप्रोससर में मूलत: तीन इकाइयाँ होती हैं।

  • A. L. U. (Arithmetic Logical Unit -इसका कार्य, सभी तार्किक तथा गणितीय प्रक्रियाओं को संपन्न करना है।
  • Control Unit-यह माइक्रोप्रोसेसर की सारी इकाइयों के बीच व्यवस्था बनाए रखती है।

माइक्रोप्रोसेसर का प्रयोग न केवल कम्प्यूटरों बल्कि अन्य बुद्धिमान मशीनों में भी किया जाता है। जैसे- फर्जी लॉजिक पर आधारित वांशिंग मशीन तथा माइक्रोवेव ओवन आदि।

स्मृति (Memory) : सी. पी. यू. का दूसरा विशेष महत्वपूर्ण अंग स्मृति (Memory) होता है, जिसे ‘स्मृति इकाई’ कहा जाता है। यह इकाई वही कार्य करती है, जो मस्तिष्क में स्मृति का होता है। यह दो तरह से कार्य करती है-

  • नई सूचनाओं को एकत्रित करना।
  • किसी भी विश्लेषण की प्रक्रिया में उन सूचनाओं को प्रस्तुत करना, जिनकी बार-बार जरूरत पड़ती है।

स्मृति के दो अन्य प्रकार भी होते हैं:

  • प्राथमिक स्मृति (Primary Memory) : प्राथमिक स्मृति का दूसरा नाम हार्ड डिस्क है। इसे ही विन्चेस्टर स्मृति (Vinechaster Memory) भी कहा जाता है। इसमें वे सूचनाएँ अंकित होती है जो कम्प्यूटर की मूलभूत कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक मानी जाती है।
  • दव्तीयक स्मृति (Secondary Memory) : दव्तीयक स्मृति वह स्मृति है जो किसी बाहरी पद्धति से कम्प्यूटर में प्रयुक्त की जाती है, जैसे फ्लॉपी डिस्क, सी. डी. डी. वी. डी इत्यादि।

चिप (Chip) : यह वह सरंचना है, जिस पर कम्प्यूटर के एकीकृत परिपथ (Integrated Circuit) का निर्माण किया जाता है। कोशिश यह की जाती है कि चिप का आकार कम से कम हो तथा परिपथ की प्रकृति जटिल से जटिल हो। वर्तमान समय में चिप के लिए सिलिकॉन का प्रयोग किया जाता है। इसके प्रयोग से कम्प्यूटर के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अब प्रयास यह किया जा रहा है कि प्रोटीन से बनने वाली ‘बायोचिप’ का विकास किया जाए। इन चिपों के प्रयोग से न केवल परिपथों (Circuits) की मात्रा बढ़ायी जा सकेगी, बल्कि यह भी संभावना है कि मानव तंत्रिका तंत्र के संकेत सीधे कम्प्यूटर के दव्ारा ग्रहण किये जा सकेंगे।

बिट्‌स एवं बाइट्‌स (Bits & Bytes)

कम्प्यूटर की क्षमता का आकलन (Bytes) में किया जाता है। Bytes कम्प्यूटर में प्रयुक्त होने वाले एक कैरेक्टर को कहते हैं और ऐसा प्रत्येक कैरेक्टर मूलत: 8 बाइट्‌स से मिलकर बना होता है। कुछ बड़े कम्प्यूटरों में 1 बाइट्‌स में 32 बिट्‌स तक होने लगे हैं।

Bits & Bytes
1 kilo Bytes =1024 Bytes-210
1 Mega bytes =1024 K. B. -220
1 Gega Bytes =1024 M. B. - 230
1 Terra Bytes =1024 G. B. -240

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