Science & Technology: TRAI՚S Recommendations and Ionospheric Research Satellite: First

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अद्यतन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Latest Development in Science & Technology)

इंटरनेट टेलीफोनी (Internet Telephony)

ट्राई की अनुसंशा (TRAI՚S Recommendations)

  • इंटरनेट टेलीफोन काल्स को PSTN PLMNपर विस्थापित करना तथा इसके विपरीत क्रम में विस्थापित करना।
  • राष्ट्रीय लंबी दूरी के आपरेटर (LND) को इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स से जुड़ने की अनुमति सार्वजनिक इंटरनेट के माध्यम से दी जानी चाहिए जिससे अप्रतिबंधित इंटरनेट टेलीफोन सेवा को बढ़ावा मिल सके।
  • ISPD और के पास पारस्परिक प्रतिबंधित इंटरनेट टेलीफोनिक सेवा की सहमति।
  • वर्तमान IUC नियमों में कोई परिवर्तन नहीं।
  • TEC इंटरनेट टेलीफोन कस्टमर के विभिन्न नंबर स्रोतों की पहचान करेगा।
  • टेलीफोन नंबर, इंटरनेट टेलीफोनिक सेवा के लिए ISPS, UASPS, BSOS और COMPS को निर्धारित खंड आबंटित किये जाएंगे।
  • ISPS को आयात नंबर डायलिंग की सुविधा नहीं।
  • सभी (ISPS) अप्रतिबंधित टेलीफोनिक सेवा को प्रदान करने में रूचि रखते हैं, जिससे उपर्युक्त मशीनरी को स्थापित करेंगे।

VOIP

वाइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकाल VOIP जो कम्यूनिकेशन को शासित करते हैं। यह इंटरनेट के माध्यम से वाइस ट्रांसमिशन र्किया करते हैं या दूसरे स्वीचिंग नेटवर्क से वास्तविक रूप से वाइस को भेजने की यह प्रक्रिया है। यह अवधारणा आई. पी. टेलीफोन, इंटरनेट टेलीफोन, वाइस ओवर ब्राडबैंड टेलीफोन और ब्राडबैंड फोन से भी संबंधित है।

आयनोस्फिरिक रिसर्च सेटेलाइट: प्रथम (Ionospheric Research Satellite: First)

प्रथम एक भारतीय आयनोस्फिरिक रिसर्च सेटेलाइट है जिसकी आईआईटी, मुंबई दव्ारा आपरेट किया जा रहा है। इसका वजन करीब 7 कि. ग्रा. है। इसे मुंबई विश्वविद्यालय के छात्रों के नेतृत्व में बनाया गया है। यह सेटेलाइट अभी निर्माण की अवस्था में है और उम्मीद की जा रही है कि इस माह में इसकी प्री-लॉच टेस्टिंग हो सकती है। लांच सहित प्रथम को बनाने की कुल कीमत 1.5 करोड़ है। प्रथम के दो पेपर प्राग में 27 सितंबर से 1 अक्टूबर, 2010 तक होने वाले इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉटिकल कांग्रेस के लिए चुने गए हैं। नासा के पूर्व एडमिनिस्ट्रेटर माइकन ग्रिफिन ने इस प्रोजेक्ट की जमकर सराहना की है।

अनुसैट (ANUSAT)

अन्ना यूनिवर्सिटी सेटेलाइट या अनुसैट अन्ना यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास के छात्रों दव्ारा बनाया गया माइक्रोसेटेलाइट है। अनुसैट का वजन 40 किग्रा है। यह अपने साथ एमेच्योर रेडियो स्टोर और फॉरवर्ड कम्युनिकेशन सिस्टम ले गया है और कई तरीके की तकनीक रिसर्च करेगा। इसरो ने छात्रों दव्ारा कुछ दिनों पहले निर्मित रोहिणी-200 सीरीज का रॉकेट लांच किया है। इसके पेलोड को वेल्लोर इंस्टीट्‌यूट ऑफ टेक्नॉलाजी के छात्रों ने बनाया है। इस रिसर्च व्यहीकल के मुख्य काम मापन और एटमास्फिरिक प्रयोग हैं। विक्रमसाराभाई स्पेस सेंटर की देखरेख में विकसित इस रॉकेट में छात्रों ने ही थ्री एक्सिस एक्सीनेरोमीटर भी लगाया है।

विकीलिंग्स (Wikillings)

  • हाल ही में पाकिस्तानी तालिबानों गठबंधन को बेनकाब करती अमरीकी सैन्य खुफिया दस्तावेजों के 90 हजार से अधिक पृष्ठों को विकीलींक्स पर प्रकाशित किया गया। यह विकिलींक्स आखिर है क्या? विकिलिंक्स ओ. आर. जी. में हर किस्म के बिना सेंसर किए, ऐसे गोपनीय दस्तावेज प्रकाशित किये जाते हैं जिन्हें सरकारें और संगठन अपने फायदे के लिए आम जन की पहुंच से दूर रखती हैं। विकिलींक्स तकनीक में तो भले ही विकिपीडिया के समान है पर विकि आधारित इस तंत्र पर कोई भी उपभोक्ता इसमें अपनी सामग्री डाल सकता है, परन्तु इसकी सामग्री पूरी तरह अलग किस्म की होती है और यहीं विकिंलक्स का मूल सिद्धांत है।
  • दरअसल, विकिलींक्स में कोई भी उपयोक्ता ऐसे दस्तावेजों को मुहैया करवा सकता है, जिन्हें प्रदान करने के लिए पहचान छुपाना भी उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। विकिपीडिया के विपरीत जहाँ उपयोक्ताओं के आई. पी. पते पर दर्ज किए जाते हैं, विकिलींक्स में क्रिप्टोग्रफिक तकनीक के जरिए उपयोक्ताओं के पूरी तरह अनाम व अचिन्हित बने रहने की पूरी गारंटी दी जाती है। जाहिर है, बहुत से दस्तावेज जिन्हें आम जनता तक पहुंचना चाहिए, परन्तु गोपनीयता कानूनों, दंड और कानूनी कार्रवाई के भय से दबे और छुपे रह जाते हैं, निश्चित रूप से इसकी वजह से वे आम पाठक तक प्रचुरता में पहुंच रहे हैं।

सकारात्मक एवं नकरात्मक पक्ष (Positive and Negative Side)

विकिलींक्स की भी विकीपीडिया की तरह लोकप्रियता बढ़ी है और साथ ही यह सरकारों की मुश्किलों को भी बढ़ाता जा रहा है। एक ओर जहां एमनेस्टी इंटनरनेशनल ने विकिलींक्स के कार्यों को सराहा है तो दूसरी और विकिलींक्स को नियंत्रित करने के प्रयास भी हो रहे हैं। चीन में विकिलींक्स पर प्रतिबंध पहले से ही है।

दुरूप्रयोग की संभावना (Possibility of Abuse)

ऐसी आशंका भी निर्मूल नहीं कि विकिलींक्स का इस्तेमाल गलत कार्यों के लिए भी हो सकता है। राजनीतिक दल, संगठन व व्यक्ति एक दूसरे की पोल खोलने व ब्लैकमेल करने के अस्त्र के रूप में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। गोपनीय दस्तावेजों के विकिलींक्स पर उपलब्ध होते ही इसकी सत्यता तथा इसकी आलोचना प्रत्यालोचना संगठनों व सरकारों दव्ारा तो की ही जा सकेगी, मतभिन्नता रखने वाले विभिन्न समूहों दव्ारा भी इनका विश्लेषण खुलेआम किया जा सकेगा। इस तरह के प्रयोग की बातें बेमानी ही होगी। ऐसा विकिलींक्स का मानना है।

‘क्वांटम मेमोरी’ (Quantum Memory)

  • वैज्ञानिकों ने ‘क्वांटम कम्यूनिकेशन सिस्टम’ यानी तीव्र संचार प्रणाली और सुपरफास्ट कम्प्यूटर विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है।
  • वैज्ञानिकों के मुताबिक, उन्होंने प्रकाश के लिए दुनिया की सबसे असरकारी ‘क्वांटम मेमोरी’ विकसित कर ली हैं उन्होंने बताया कि हमने ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया है, जिससे लेजर किरणों को रोका और काबू में किया जा सकता है। यहां तक कि इलेक्ट्रॉन का तापमान भी सामान्य से 270 डिग्री सेल्सियम कम किया जा सकता है। इस तकनीक का प्रयोग प्रकाश की बारी क्वांटम प्रकृति को सहेज कर रखने इसमें फेरबदल करने और फिर से इस्तेमाल में लाने की अनुमति देता है। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की टीम लीडर मॉर्गन हेजेज ने इस बारे में कहा कि क्रिस्टल में प्रवेश कर रहा प्रकाश एक जगह आकर रूकता है और जब तक हम इसे आगे नहीं बढ़ाते वह उसी अवस्था में रहता है। इसे आगे बढ़ने देने पर हम उन सभी चीजों को जाने देते हैं जो त्रिआयामी होलोग्राम की तरह होते हैं। उन्होंने कहा कि क्वांटम मैकेनिक्स में अनिश्चितता के कारण इस प्रकाश में कुछ सूचनाएं तब खो जाती हैं, जब इसे मापा जाता है और इस स्थिति में हम एकबार ही होलोग्राम को पढ़ सकते हैं।

सिम लाइट मिशन (SIM Light Mission)

सिम लाइट एक अंतरिक्ष प्रेक्षणशाला है जिसका विकास नासा (NASA) के अंतर्गत Jet Propulsion Laboratory दव्ारा किया जा रहा है। यह प्रेक्षणशाला विभिन्न ग्रहों एवं तारों का विस्तृत अध्ययन करेगा। जैसे - तारों के अध्ययन के क्रम में यह उनकी उत्पत्ति से लेकर उनकी मृत्यु तक की विभिन्न अवस्थाओं की सूक्ष्म अध्ययन करेगा जैसे Brown Dwarfs, Neutron stars, Black Holes इसके अतिरिक्त यह हमारी आकाश गंगा की आयु, उत्पत्ति का इतिहास, सूर्य की स्थिति, आकाश गंगा (Milky Way) में डार्क मैटर का वितरण का भी अध्ययन करेगा।

रोबोनॉट-2 (Robonot – 2)

  • ये अभी सिर्फ एक प्रोटोटाइप है। पहले इसे सिर्फ पृथ्वी पर ही कैरी करने के लिए बनाया गया था। लेकिन इसके डिजाइनर यह देखना चाहते हैं कि सूक्ष्म गुरूत्वाकर्षण की स्थिति में यह किस तरह करता है। अत: इसे स्पेस शटल डिस्कवरी के जरिए स्पेश में भेजने का फैसला किया गया है। यदि यह रोबोट अपने कार्य में सफल रहा तो इससे नासा के वैज्ञानिकों को भविष्य में अंतरिक्ष में ज्यादा एडवांस्ड रोबोड अंतरिक्ष यात्री भेजने और उनके संचालन का अच्छा आधार मिल जाएगा। इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी, जॉन ओलसन का कहना है कि रोबोनॉट-2 भविष्य के रोबोटस की ऐसी पीढ़ी का परिचायक हैं, जो पृथ्वी और अंतरिक्ष में कठिन और जटिल कार्यो का अंजाम देगा।
  • यह रोबोट मनुष्यों की तरह ही चतुर है और उन्हीं औजारों का इस्तेमाल कर सकता है, जो अंतरिक्ष यात्रियों दव्ारा प्रयोग में लाए जाते हैंं अत: इसके लिए स्पेस स्टेशन में सिस्टम की रीडियायनिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी। रोबोनॉट-2 की खास बात यह है कि वहाँ ट्‌िवटर के जरिए पृथ्वीवासियों के संपर्क में रहेगा। इसने अपने नए अकांउट से ट्‌िवटर अपडेट्‌स भेजने भी शुरू कर दिए हैं। यह रोबोट अभी लॉन्च से संबंधित तैयारियों को रिकॉर्ड कर रहा है। स्पेस में पहुंचने के बाद वह स्पेस स्टेशन में अपने कार्यो के बारे में अपने फॉलोवर्स को सूचित करता रहेगा। रोबोनॉट अपने संदेश खुद कंपोज नहीं कर रहा है। दरअसल ह्युस्टन स्थित नासा की जोनसन स्पेस सेंटर के वैज्ञानिक ये अपडेट तैयार कर रहे हैं।

ब्राउजर युद्ध (Browser War)

ब्राउजर युद्ध एक ऐसी शब्दावली है जिसका प्रयोग वेव ब्राउजिंग की सुविधा देने वाली संस्थाओं के बीच उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धा को अभिव्यक्त करने के लिए किया जाता है। इसी प्रकार एसिड-3 एक परीक्षण पेज है जो वेब ब्राउजर के कुछ चयनित अवयवों का अनुसरण करता है जो आब्जेक्ट मॉडल एवं जावा स्क्रिप्ट जैसे वेब मानकों से संबद्ध होते हैं। मानकों पर खरा उतरने हेतु 100 अंकों का निर्धारण किया जाता है। इस आधार पर विभिन्न श्रेणियों के तहत आई. ई. (Internet Explorer) को 20/100, फायर फाक्स को 93 तथा क्रोम एवं ओपेरा को 100 अंंक दिए गए हैं।

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